दांतों से कम देखभाल की जरूरत नहीं मसूढ़ों को

वर्षा शर्मा

दांत हमारे शरीर का वह हिस्सा हैं जिनके बिना हम भोजन की कल्पना नहीं कर सकते। हम सभी हमेशा यह चाहते हैं कि हमारे दांत स्वस्थ व मजबूत रहें। दांतों की देखभाल की जितनी जरूरत होती है उतनी ही जरूरत मसूढों की देखभाल की भी होती है क्योंकि मसूढ़े जितने मजबूत होते हैं दांत भी उतने ही मजबूत रहते हैं। दांत कितने भी स्वस्थ हों लेकिन यदि मसूढ़े रोग से ग्रसित हैं तो दांतों के खराब होने का खतरा हमेशा बना रहता है। प्रारंभ में मसूढों में सूजन होती है और फिर कुछ समय बाद दांतों का हिलना भी शुरू हो जाता है। यदि इस स्थिति में दांतों की उचित देखभाल न की जाए तो दांत गिरने शुरू हो जाते हैं। यदि दांत न भी हिलने लगें तो भी कुछ परेशानी का सामना करना ही पड़ता है, जैसे, मुंह से बदबू आना, मसूढ़ों से खून आना या मसूढ़ों में दर्द होना आदि।

मसूढ़ों में सूजन आना ही पायरिया को जन्म देता है। यह एक बहुत आम बीमारी है। यह दुनिया के हर भाग में होती है। यदि कोई अपने स्वास्थ्य के लिए जागरूक हो तो वह इस बीमारी से परेशान हुए बिना रह सकता है वरना 75 फीसदी लोग जीवन में कभी न कभी जिंजिंवाइटिस अर्थात मसूढ़ों के सूजने से जरूर पीडि़त होते हैं।

पायरिया का रोग अक्सर उसी स्थिति में होता है जब कोई अपने दांतों व मसूढ़ों की साफ सफाई की ओर ध्यान नहीं देता। इससे दांतों और मसूढ़ों के बीच भोजन के टुकड़े, लार और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। इसे दंत चिकित्सक प्लाक कहते हैं। प्लाक ब्रश करने के 4 से 12 घंटों के भीतर बनना शुरू होता है और अगर इसको रोकने के लिए जरूरी उपाय न किये जाएं तो यह सख्त होकर दांतों पर मैल की परत के रूप में जमा हो जाता है जिससे मसूढ़ों में सूजन आती है। मसूढ़ों के सूजने की वजह से उनका रंग सुर्ख हो जाता है। उनमें जलन भी होने लगती है। कभी-कभी उनमें से खून भी निकलता है। इस स्थिति में भी उपचार न किया जाए तो मसूढ़ों के नीचे की हड्डी और दूसरे ऊतकों में भी सूजने और सडऩे का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसे पेरीओडोंटाइटिस कहते हैं।

इस स्थिति में पहुंचने के बाद मसूढ़ों की दातों पर पकड़ ढीली हो जाती है और मंसूढ़े दांतों का साथ छोडऩे लगते हैं। नीचे से जबड़े की हड्डी गल जाती है और उनमें पस बननी शुरू हो जाती है और फिर पहले तो दांत हिलते हैं और बाद में उनका गिरना प्रारंभ हो जाता है। हमें अपने दांतों और मसूढ़ों की अच्छी तरह से देखभाल करनी चाहिए ताकि सारी उम्र तक ये हमारे साथ रहें। इसके लिए कुछ आवश्यक सुझाव हैं जिन्हें पालन करना हम सभी के लिए आवश्यक है आइए इन पर एक नजर डालें-दांतों और मसूढ़ों को सुबह शाम एक निश्चित समय देना चाहिए। हमें ब्रश करने की क्रिया को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। इसे मात्र एक दैनिक क्रिया नहीं समझना चाहिए। सुबह उठने के बाद या नाश्ते के पश्चात और रात में सोने से पहले पांच मिनट समय निकालकर ठीस से ब्रश करें। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें। चाहे कुछ भी हो पर आप हर हाल में ब्रश करने के बाद ही आप बिस्तर पर सोने के लिए जाएं। ब्रश करने का सही तरीका यह है कि ब्रश को मसूढ़ों व दांतों के ऊपर 45 डिग्री कोण से धीरे-धीरे हल्के हाथ से घुमाएं। पहले गोल-गोल, फिर ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर। ब्रश को गोलाकार घुमाने से मसूढ़ों की मालिश होती है और ऊपर नीचे चलाने से दांतों में फंसे अन्न कणों के बाहर निकलने से दांतों की सफाई हो जाती है। ब्रश करते समय हमें दांतों की बाहरी सतह के साथ-साथ अन्दरूनी सतह की भी सफाई करनी चाहिए। हमेशा नरम रेशों वाले ब्रश का ही इस्तेमाल करना चाहिए। यह दांतों और मसूढ़ों के लिए कोमल रहता है। सख्त रेशों वाला ब्रश चाहे ज्यादा दिन तक चलता है मगर उससे दांतों को इनेमल जल्दी घिसता है जो कि दांतों के लिए अच्छा नहीं होता।

हर तीन महीने में ब्रश को बदलना चाहिए ताकि ब्रश के रेशों की कोमलता कायम रह सके। मुलायम ब्रश मसूढ़ों और दांतों के लिए बहुत अच्छे होते हैं। कुल्ला करने की आदत भी मसूढ़ों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होती है। इससे मुंह में बचे अन्नकणों की काफी हद तक सफाई हो जाती है और बैक्टीरिया को पैदा होने का मौका भी नहीं मिलता।

आज के आधुनिक युग में हम कुल्ला करने जैसी छोटी सी आदत को भूलते जा रहे हैं पर हमें इस छोटी सी आदत के फायदों को ध्यान में रखकर इसे अपना लेना चाहिए। कुछ भी खाने के बाद हमें कुल्ला अवश्य करना चाहिए।

फ्लौसिंग (धागे से दांतों की सफाई) दांतों में फंसे भोजन के कण व प्लाक निकालने के लिए काफी लाभदायक क्रिया है। दांतों के बीच फ्लास से उनकी निरंतर सफाई करनी चाहिए। इसके लिए 45 सेंटीमीटर का फ्लास इस्तेमाल करते हुए उसे दांतों के बीच डालकर धीरे-धीरे आगे-पीछे करते हुए दांत की जड़ तक सफाई करनी चाहिए। दांतों की सफाई रखने के लिए हमें माउथवाश का भी इस्तेमाल करना चाहिए। लिस्ट्रीन जैसा माउथवाश बैक्टीरियारोधक होता है और मसूढ़ों और दांतों को प्लाक से बचाकर रखता है। मसूढ़ों में हल्की सी भी परेशानी महसूस होने पर दिन में दो-तीन बार इससे कुल्ला कर लेने से तकलीफ में काफी हद तक राहत मिल सकती है।

यदि मसूढ़ों और दांतों पर मैल (टार्टर) जम जाए तो इसकी तुरंत ही किसी दंत चिकित्सक से सफाई करवानी चाहिए। इसके लिए आजकल कई तकनीकें हैं। जैसे साधारण स्केलिंग, अल्ट्रासाउंड स्केलिंग आदि। इन तकनीकों से मैल से छुटकारा पाकर दांतों और मसूढ़ों की मजबूती बढ़ जाती है। अक्सर यह सोचा गया है कि इससे दांत कमजोर हो जाते हैं। यह धारणा सरासर गलत है इससे उल्टे दांतों व मसूढ़ों की उम्र बढ़ जाती है। टैनिक एसिड युक्त गम पैंट से मालिश करने से मसूढ़े मजबूत होते हैं। पायरिया के प्रारंभिक चरण में यह लाभदायक होता है। यदि मसूढ़ों की अच्छी तरह से देखभाल के बाद भी मसूढ़ों में बार-बार सूजन आती है तो अपने ब्लड शुगर का चेक करा लेना चाहिए। ब्लड शुगर बढऩे पर भी यह तकलीफ हो सकती है। डायबिटीज के रोगियों को इस ओर खासतौर पर सावधान रहना चाहिए।

मसूढ़ों में सूजन आने पर और उनमें खून या पस आने पर किसी भी प्रकार की असावधानी नहीं बरतनी चाहिए। ऐसा होने पर दंत चिकित्सक से इलाज कराने में बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए क्योंकि प्रारंभिक अवस्था में एंटिबायोटिक, सूजन और दर्द दूर करने वाली दवा तथा गम पैंट के इस्तेमाल और स्केलिंग से स्थिति काबू में आ सकती है। रोग के बढऩे पर रूट प्लेनिंग भी करनी पड़ सकती है। इसमें इंजेक्शन देकर जगह को सुन्न करने के बाद दांतों की जड़ों की खुरदरी सतह को समतल बनाया जाता है और जरूरत पडऩे पर मसूढ़ों और दांतों के बीच जीवाणुरोधक दवा से साफ किया जाता है ताकि रोगाणुओं को खत्म किया जा सके और नीचे से स्वस्थ ऊतक उग कर मसूढ़ों के स्वास्थ्य को मजबूती प्रदान कर सकें।

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