कश्मीर में शाह की हुंकार एवं सुरक्षा की समीक्षा

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ललित गर्ग

केन्द्रीय गृहमन्त्री श्री अमित शाह ने एक बार फिर जटिल एवं अशांत होते जम्मू-कश्मीर राज्य के हालातों के बीच तीन दिवसीय दौरा करके अशांति पैदा करने वालों को न केवल चेताया है, बल्कि वहां के हिन्दुओं एवं सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया है। उनकी यह कश्मीर यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वे स्वयं अनुच्छेद 370 को हटाने के रचनाकार एवं साहसिक निर्णय लेने वाले मुख्य स्तंभ है, उन्होंने ही 5 अगस्त, 2019 को संसद के दोनों सदनों में घोषणा की थी कि भारतीय संविधान में कश्मीर पर लागू किये गये अनुच्छेद 370 को अन्तहीन समय तक लागू नहीं रखा जा सकता क्योंकि यह ‘अस्थायी’ प्रावधान था। कश्मीर पहुंचकर उन्होंने हुंकार भरते हुए जहां शांति मंें खलल पैदा करने वालों को ललकारा है, वहीं विकास योजनाओं के साथ सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की है, निश्चित ही हाल की खौफनाक आतंकी घटनाओं और उसके बाद प्रवासी मजदूरों के पलायन के सिलसिले को देखते हुए उनकी इस यात्रा से अनेक सकारात्मक संदेश जाने वाले है। यह यात्रा एक नये अध्याय की शुरूआत भी है।
शाह की यह यात्रा लोकतांत्रिक मूल्यों को भी सशक्त बनाने का माध्यम है। यह सही समय पर सही दिशा में कश्मीर में शांति, विकास एवं सुरक्षा को नये आयाम देने का सराहनीय उपक्रम है। लोकतंत्र एक पवित्र प्रणाली है। पवित्रता ही इसकी ताकत है। इसे पवित्रता से चलाने के लिये आम कश्मीरियों का इसमें विश्वास, जागरूक एवं सक्रिय होना जरूरी है, इसी विश्वास को बल देना इस यात्रा का उद्देश्य है। आतंकवादी एवं अलगाववादी लोगों की अपवित्रता से यह कमजोर हो जाती है। ठीक इसी प्रकार अपराध के पैर कमजोर होते हैं। पर अच्छे आदमी की चुप्पी उसके पैर बन जाती है। आतंकवाद एवं अलगाववाद अंधेरे में दौड़ते हैं। रोशनी में लड़खड़ाकर गिर जाते हैं। आम कश्मीरियों को रोशनी बनना होगा। और रोशनी आतंक एवं अराष्ट्रीयता से प्राप्त नहीं होती।
श्री शाह भारतीय राजनीति के ऐसे कद्दावर एवं साहसिक निर्णय लेने वाले, देश की एकता को मजबूती देने वाले नेता है, जिन्होंने अपनी रणनीति से हिंसक, आतंकवादी एवं अराष्ट्रीय शक्तियों को उनकी जमीन दिखाई है, बल्कि यह भी जताया है कि शांति एवं राष्ट्रीय एकता की बाधक शक्तियों से कैसे निपटा जाता है। सख्त एवं कठोर निर्णयों से इन शक्तियों को सुधरने का अवसर भी दिया है। शाह के प्रयासों का ही परिणाम है कि पिछले सात वर्षों एवं अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद कश्मीर में लगभग शांति बनी रही। अब पाकिस्तान कश्मीर को पुनः अशांत करने में जुटा है, ऐसे समय में शाह का कश्मीर दौरा करना और पाकिस्तान और उसकी आतंकवादी शक्तियों को यह संदेश देना है कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, जम्मू-कश्मीर में हर भारतवासी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा चाहे हिन्दु हो या सिख, बिहारी हो या पंजाबी अथवा बंगाली।
जम्मू-कश्मीर राज्य में पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों बेअसर होती रही है। अब उसने नयी रणनीति उन गैर कश्मीरियों को निशाना बनाने की बनाई जो इस राज्य के विकास और इसकी अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे। कश्मीर में विकास की जो गंगा प्रवहमान हुई है, वह अनवरत गतिमान रहेगी। सच्चाई है कि पिछले दो साल में इस राज्य में नागरिकों के विकास की कई केन्द्रीय परियोजनाएं चालू की गई हैं और उनके अच्छे परिणाम भी आने शुरू हुए हैं। पर्यटन गतिविधियां तेज हो रही हैं और भारत के विभिन्न राज्यों से इस खूबसूरत राज्य की सैर करने लोग भारी तादाद में आने लगे हैं। कश्मीरी जिस गर्मजोशी के साथ अपने भारतीय नागरिकों का स्वागत करते हैं और उनकी मेजबानी करते हुए अपनी सहृदयता, आत्मीयता और ईमानदारी की छाप छोड़ते हैं उससे पूरे भारत में जम्मू-कश्मीर की छवि में चार चांद लग रहे हैं और दूसरे राज्यों के लोगों से कश्मीरियों की आत्मीयता एवं सौहार्द बढ़ रहा है। आम कश्मीरी जनता एक नया संतोष महसूस कर रही है। यह स्थिति कई दृष्टियों से अनूठी है, प्रेरक है।
आजादी के अमृत महोत्सव मनाते हुए सम्पूर्ण राष्ट्र कश्मीर के साथ अंतरंगता एवं एकात्मता महसूस करने लगा है, इन सुखद स्थितियों को खंडित करने की पाकिस्तान की नयी रणनीति को असफल बनाने में भारतीय सेना के जवान अनूठे उपक्रम करते हुए आतंकियों को चुन-चुन कर मारने का जो अभियान पिछले दस दिनों से चला रही है उससे राष्ट्रविरोधी तत्वों के हौसले पस्त होने जाहिर हैं। शाह ने इसके लिये न केवल सेना के अधिकारियों एवं जवानों को अधिक सतर्कता एवं सावधानी से अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिये जागरूक किया बल्कि इसमें किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के लिये भी चेताया है। शाह ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का काम न केवल समग्रता से किया है बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को अधिक दुरस्त एवं चैकस बनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने सुरक्षा की गंभीर समीक्षा करते हुए उन कारणों को पहचानकर उनका निवारण किये जाने की आवश्यकता व्यक्त की, जिनके कारण आतंकियों और उनके समर्थकों ने फिर से सिर उठाने का दुस्साहस किया। कश्मीर में जितनी जरूरत आतंकियों पर दबाव बनाने और उन्हें बचकर निकलने के अवसर न देने की है, उतनी ही उनके समर्थकों पर शिकंजा कसने की है। आतंकियों के समर्थक केवल वे ही नहीं हैं, जो उन्हें शरण, सहायता एवं संरक्षण देते हैं, बल्कि वे भी हैं जो उनके पक्ष में माहौल बनाते हैं, जिनमें राजनेता, नौकरशाह एवं सरकारी कर्मचारी भी है। जो घर का भेदी लंका ढाहवे वाली स्थिति वाले होते हैं, इन खतरनाक एवं राष्ट्र-विरोधी तत्वों से कैसे निपटा जाये, यही इस सुरक्षा समीक्षा का मुख्य हार्द है, गहनता एवं समग्रता है।
श्री शाह की यह तीन दिन की यात्रा न केवल कश्मीर के लोगों को सुरक्षा की दृष्टि से आश्वस्त करने का सक्षम वातावरण निर्मित करेंगी बल्कि कश्मीर में राष्ट्रीयता को भी मजबूत बनायेगी। इसके लिये शाह को सबसे पहले यही श्रेय जाता है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर पूरी तरीके से संविधान लागू करके इसे भारत में समावेशी रूप में अन्तरंगता प्रदान की। क्योंकि आम कश्मीरी प्रारम्भ से ही भारतीयता के रंग में रंगा रहा है और उसने पाकिस्तान की मजहबी संकीर्ण मानसिकता एवं स्थानीय स्वार्थी राजनेताओं को कभी तवज्जो नहीं दी। यह भी ऐतिहासिक सच है कि 1947 में जब भारत को बांट कर पाकिस्तान बनाया जा रहा था तो कश्मीर की आम जनता इसके खिलाफ थी। इसकी खास वजह यही थी कि कश्मीरी संस्कृति किसी भी जेहादी या कट्टरपंथी विचारधारा का विरोध करती रही है। यही कारण है कि श्री शाह के 370 समाप्त करने के फैसले का राज्य की जनता ने विरोध नहीं किया। भले आतंकवादी एवं अलगाववादी मानसिकता से जुड़े तथाकथित राजनेताओं को यह निर्णय खटका।
श्री शाह ने अपनी इस यात्रा में कश्मीर की जनता के दिलों में शांति, अमन एवं विकास की राष्ट्रीय धारा को बलशाली बनाया है। अपनी यात्रा के पहले दिन ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद इंस्पैक्टर परवेज अहमद डार के निवास पर जाकर विनम्रता एवं आत्मीयता से पीड़ित परिवार के लोगों से भेंट की और शहीद की पत्नी को सरकारी नौकरी दी। यह संकेत इस बात का है कि राष्ट्र के अस्तित्व एवं अस्मिता की सुरक्षा पर जान लुटाने वाले हर कश्मीरी का ध्यान सरकार रखेगी। इसके साथ ही उन्होंने श्रीनगर से शारजाह की हवाई यात्रा खोलने का भी ऐलान किया जिससे पूरी दुनिया को लगे कि कश्मीर नये माहौल, राष्ट्र की मूल धारा में पूरी तरह ढल चुका है और इसके लोग सामान्य भारतीयों की तरह ही मुल्क द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का फायदा उठा रहे हैं। कश्मीरियो में इस विश्वास एवं आशा के प्रस्फुटित एवं पल्लवित होते अंकुर बताते है कि पाकिस्तान कभी भी अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सकता क्योंकि हर कश्मीरी भारत का अभिन्न अंग है, हिस्सा है, भारतीयता ही उसकी आत्मा है, संस्कृति है। शाह की यात्रा पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देने का एक प्रभावी उपक्रम हैं कि वह हिन्दू-मुसलमान या मजहब को आगे लाकर कश्मीरियों के उस विश्वास को नहीं डिगा सकता जो उनका भारत में है।

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