विद्यार्थियों को लेकर शिक्षा मंत्री की चिंताऐं

download (21)

सर्वमित्रा सुरजन

शिक्षा मंत्री विद्यार्थियों को महान इंसान के रूप में विकसित करना चाहते हैं। उनके विचार बड़े नेक हैं। लेकिन शिक्षा का पहला उद्देश्य तो इंसान के नैसर्गिक गुणों का विकास कर उन्हें संवेदनशील बनाना होता है। इसके लिए महाभारत और रामचरित मानस ही क्यों सारे धर्मग्रंथ मददगार साबित हो सकते हैं, क्योंकि सभी धर्म इंसान को सद्गुण ही सिखाते हैं। जहां तक भारत जैसे विविधता वाले देश का सवाल है तो यहां संविधान का पूरा पाठ ही किसी भी विद्यार्थी को एक बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित कर सकता है। क्या भाजपा सरकार इस बारे में विचार करेगी।

अंग्रेजी में एक कहावत है कैच दैम यंग। यानी युवाशक्ति को साथ ले लिया जाए, तो फिर भविष्य में अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होती है। तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसी सिद्धांत पर काम करती हैं ताकि उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ती रहे। इसकी शुरुआत आजकल नर्सरी, केजी जैसी कक्षाओं से ही कर दी जाती है, जिनमें निजी स्कूल अक्सर अपने छात्रों पर सहशिक्षण गतिविधियों और विद्यार्थी के चहुंमुखी विकास के नाम पर तरह-तरह की परियोजनाएं यानी प्रोजेक्ट वर्क थोपते हैं। अबोध बच्चे तो इनमें से अधिकतर का मतलब भी नहीं समझते, और उनका काम अक्सर उनके मां-बाप खुद करते हैं या फिर पैसे देकर करवाते हैं। बच्चों का चहुंमुखी विकास हो न हो, बाजार जरूर चारों ओर अपने पैर फैला लेता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा भी इसी कैच दैम यंग के सिद्धांत को अपनाकर हिंदुत्व की मार्केटिंग में लगी हुई हैं। अब तक सरस्वती शिशु मंदिर और संघ की शाखाओं में राष्ट्रवाद का नाम लेकर कट्टर हिंदुत्व की शिक्षा बच्चों को दी जाती थी, अब उसका दायरा बढ़ाकर स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं तक फैलाने में भाजपा लग गई है।

पिछले दिनों मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने फैसला लिया है कि अब महाविद्यालयों में रामायण और महाभारत पढ़ाई जाएगी। इस शैक्षणिक सत्र से श्री रामचरितमानस के अनुप्रयुक्त दर्शन को वैकल्पिक विषय के रूप में रखा गया है। राज्य के महाविद्यालयों में प्रथम वर्ष के स्नातक के पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के पास महाभारत, रामचरितमानस के अतिरिक्त योग और ध्यान जैसे विषय भी होंगे। इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए भी रामसेतु को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है। मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री मोहन यादव का तर्क है कि, हम महाभारत और रामचरितमानस से बहुत कुछ सीखते हैं। हम विद्यार्थियों को विकसित ही नहीं बल्कि महान इंसान के रूप में विकसित करना चाहते हैं।

सरकार का यह भी कहना है कि नए पाठ्यक्रम में यह भी पढ़ाया जाएगा कि राम अपने पिता के कितने आज्ञाकारी थे। उनका इंजीनियरिंग ज्ञान कितना था। इस वजह से ही रामसेतु को इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है। जब धर्म की पट्टी जनता की आंख पर बांधना हो, तो इसी तरह की बोगस दलीलें ही पेश की जाती हैं। क्या रामायण का पाठ किए बगैर बच्चों को आज्ञाकारी नहीं बनाया जा सकता।

इस देश के बहुसंख्यक लोगों ने बचपन से मानस का पाठ सुना होगा, अखंड रामायण होते देखी होगी, रामजी को आदर्श पुरुष क्यों कहा जाता है, इस बारे में अपने बुजुर्गों से सुना होगा, तो क्या देश में अनाचार थम गए, या स्त्रियां पूरी तरह सुरक्षित हो गईं, भेदभाव खत्म हो गए या वृद्धाश्रम बंद हो गए। और भाजपा सरकार का उन तथाकथित संतों और पुजारियों के बारे में क्या कहना है जो रामनामी चादर ओढ़कर पतित व्यवहार करते हैं। मुंह में राम, बगल में छुरी, जैसे मुहावरे इन्हीं ढोंगी साधुओं की उपज है।

शिक्षा मंत्री विद्यार्थियों को महान इंसान के रूप में विकसित करना चाहते हैं। उनके विचार बड़े नेक हैं। लेकिन शिक्षा का पहला उद्देश्य तो इंसान के नैसर्गिक गुणों का विकास कर उन्हें संवेदनशील बनाना होता है। इसके लिए महाभारत और रामचरित मानस ही क्यों सारे धर्मग्रंथ मददगार साबित हो सकते हैं, क्योंकि सभी धर्म इंसान को सद्गुण ही सिखाते हैं। जहां तक भारत जैसे विविधता वाले देश का सवाल है तो यहां संविधान का पूरा पाठ ही किसी भी विद्यार्थी को एक बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित कर सकता है। क्या भाजपा सरकार इस बारे में विचार करेगी। गौरतलब है कि भाजपा ने इससे पहले भी गीता को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश की थी। अब रामायण और महाभारत का सहारा लिया जा रहा है।

इधर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भी छात्रों को हिन्दू धर्म की शिक्षा देने के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसमें हिन्दू धर्म से जुड़े शास्त्रों और ग्रंथों के बारे में जानकारी दी जाएगी। पाठ्यक्रम के संचालन में मुख्य भूमिका दर्शन विभाग की होगी जो हिंदू धर्म की आत्मा, महत्वाकांक्षाओं और हिंदू धर्म की रूपरेखा के बारे में बताएगा, जबकि प्राचीन इतिहास और संस्कृति विभाग प्राचीन व्यापारिक गतिविधियों, वास्तुकला, हथियारों, महान भारतीय सम्राटों और उनके उपकरणों आदि के बारे में जानकारी देंगे। संस्कृत विभाग प्राचीन शास्त्रों, वेदों और प्राचीन अभिलेखों के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी देगा। पाठ्यक्रम में एक पत्र भारतीय सैन्य, विज्ञान और रणनीति पर आधारित होगा, जिसमें मित्र और शत्रुओं की परिभाषा, शत्रुओं के दमन और मित्रों से संबंध प्रगाढ़ करने के तरीके, सेना में महिलाएं, शिविरों तथा किलों का निर्माण, युद्ध के लिए सही समय और स्थान और जीत और हार के बाद रणनीति का निर्माण जैसे पाठ शामिल होंगे।

आगामी अक्टूबर में एनटीए स्क्रीनिंग के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। दो साल के इस पाठ्यक्रम में चालीस सीटें निर्धारित की गई हैं। विवि के कुछ शिक्षकों का कहना है कि हमारे शास्त्रों की सही तरीके से व्याख्या नहीं हो पाती है, जिसका दुष्परिणाम यह होता है कि हमारी पीढ़ियां उनका जवाब नहीं दे पातीं और जब जवाब नहीं दे पातीं तो हमें शर्मिंदा होना पड़ता है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए इसे शुरू किया जा रहा है कि यदि विश्व स्तर पर कोई $गलत व्याख्या हो रही हो तो उसका तार्किक समाधान प्रस्तुत किया जा सके। इस पाठ्यक्रम के पैरोकारों का यह भी कहना है कि इसके जरिए भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म को वैज्ञानिक नजरिए से समझने में मदद मिलेगी। कुछ शिक्षक इसे रोजगार से भी जोड़कर देख रहे हैं। वहीं हिंदू धर्म की शिक्षा में सैन्य शिक्षण की उपयोगिता बताते हुए एक शिक्षक का कहना है कि वैदिक साहित्य में सैन्य विज्ञान और रणनीतियों का जिक्र है, लेकिन उसके बारे में लोगों को पता नहीं है और न ही उसका उपयोग हो रहा है। जबकि आज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इनकी काफी उपयोगिता है। इनमें न केवल बाहरी शत्रुओं बल्कि उन आंतरिक तत्वों से निपटने के सूत्र दिए गए हैं जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए घातक हैं।

काशी हिंदू विवि के इस नए पाठ्यक्रम के लिए जो तर्क दिए जा रहे हैं, उनका खोखलापन इसी से जाहिर होता है कि इसे शास्त्रों की सही व्याख्या से जोड़ा जा रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो सही व्याख्या का मतलब एक विचारधारा को सब पर थोपने की कोशिश की जा रही है। भारत के प्राचीन धर्मग्रंथ हों या साहित्य हो, उन सबमें असहमति और शास्त्रार्थ की भरपूर गुंजाइश रखी गई है। भारतीय दर्शन इस गुंजाइश के बूते ही इतना विकसित हुआ है। लेकिन अभी हिंदुत्व पर कट्टरता का आवरण चढ़ाने वालों को अपने अलावा किसी अन्य की मान्यता से सख्त परहेज है, इसलिए कई विश्वविद्यालयों में गीता या रामायण या स्त्री या दलित विमर्श पर आधारित किताबों को हटा दिया गया। हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय में महाश्वेता देवी की लघु कथा ‘द्रौपदी’ और दो तमिल महिलावादी दलित लेखक बामा और सुकरिथरणी की रचनाओं को बीए (ऑनर्स) पाठ्यक्रम से हटा दिया गया, इससे पहले ए के रामानुजन के रामायण लेखन को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विवाद उठा था। जहां तक सवाल सैन्य शिक्षण, रणनीतियों और सैन्य विज्ञान का है, तो इस काम के लिए देश में नेशनल डिफेंस एकेडमी और डीआरडीओ जैसे संस्थान पहले से मौजूद हैं।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समावेश से सैन्य मजबूती का काम यहां बेहतर तरीके से हो सकता है, उसके लिए अलग से पाठ्यक्रम की क्या जरूरत। हम उन देशों में तो शामिल नहीं हैं, जहां युवाओं को अनिवार्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण लेना पड़ता है और सेना में सेवाएं देनी पड़ती हैं। वैसे भी आजादी के बाद जिस भारत को बनाने की कोशिश उस दौर के नेताओं ने की, उनमें युद्ध की जगह शांति को चुना। लेकिन इस वक्त धर्म के बहाने युद्धोन्मादी पीढ़ी तैयार करने का मकसद क्या है और किन आंतरिक शत्रुओं पर निशाना साधा जा रहा है, इस पर नागरिक समाज को विचार कर लेना चाहिए।

वैसे विचार करने वाली बात ये भी है कि इस नए पाठ्यक्रम में जो अध्याय पढ़ाए जाएंगे, उनमें से कई पहले से संस्कृत, दर्शनशास्त्र, इतिहास, आदि विषयों में भी पढ़ाए जाते रहे हैं। फिर भी इस पाठ्यक्रम को पेश करने की जरूरत शायद इसलिए पड़ रही है, ताकि प्राचीन धर्मग्रंथों और ऐतिहासिक तथ्यों की अपनी सुविधा से व्याख्या हो सके। धार्मिक मान्यताएं भावनाओं से संचालित होती हैं, उनमें विज्ञान के तर्क लागू नहीं होते, इसलिए उसे पाठ्यक्रम से जोड़कर अकादमिक वैधानिकता देने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के पाठ्यक्रम को आगे दूसरे सरकारी विवि में भी लाया जा सकता है, हालांकि इससे नए रोजगार सृजित नहीं होंगे। अधिक से अधिक अध्यापन का क्षेत्र ही इस विषय के विद्यार्थियों के लिए खुलेगा। अतीतगामी होने की जगह अगर भविष्य को देखते हुए रोजगारपरक नए पाठ्यक्रम लाए जाएं, तो इस देश के नौजवानों का भला हो। मगर भाजपा गणेशजी में प्लास्टिक सर्जरी और महाभारत काल में इंटरनेट की खोज का ज्ञान अभी युवाओं को देने में लगी है।

Comment:

betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis
vaycasino
vaycasino