बारिश में भी हो सकता है भूगर्भीय जल का संरक्षण

download (8) (25)

आलोक शुक्ला

बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए कृत्रिम झीलों का निर्माण कर वर्षा जल का बचाया जा सकता है मगर इस बात की सख्ती बरतनी होगी कि इन साफ पानी वाली कृत्रिम झीलों में किसी भी तरह के गंदे नाले व औद्योगिक कचरे को बिल्कुल न बहाएं। गांवों, कस्बों के पुराने तालाबों को साफ करने के लिए व्यापक मुहिम चलाने की आवश्यकता है। छोटे-बड़े शहरों में तालाबों का क्षेत्रफल अवैध कब्जों के कारण कम हो रहा है। इसे सख्ती से रोकना चाहिए।

बढ़ती जनसंख्या के कारण भारत सहित पूरे विश्व में भूगर्भ जल की मांग बढ़ रही है और धरती की छाती छेद कर लगातार दोहन के कारण धरती का खजाना खाली हो रहा है। हमारी जरूरत मीठे पानी की है और मुश्किल यह है कि मीठे जल की उपलब्धता बहुत कम है। प्रकृति ने ही यह व्यवस्था कर रखी है। पृथ्वी का दो तिहाई भाग जल और एक तिहाई भाग थल है। एक बहुत बड़ा भाग जल का है परंतु इसका लगभग 97.5 प्रतिशत हिस्सा खारा है और सिर्फ 2.5 फीसदी मीठा जल है। इस मीठे पानी का 75 प्रतिशत हिमखंडों के रूप में, 24.5 प्रश भूजल के रूप में, 0.03 प्रश नदियों, 0.34 प्रश झीलों एवं 0.6 फीसदी भाग वायुमंडल में विद्यमान है। इसमें भी पृथ्वी पर उपलब्ध 0.3 प्रश पानी ही साफ एवं शुद्ध है। भारतीय शास्त्रों में मानव शरीर को पंचतत्वों- पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल एव आकाश से निर्मित कहा गया है। हमारे शरीर में 60 प्रश जल है। वनस्पति में 95 फीसदी तक जल पाया जाता है।

दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताएं नदी के किनारे ही विकसित हुईं हैं। अर्थात ‘जल ही जीवन है’ की कहावत चरितार्थ कर रही है। मिस्र की सभ्यता संसार की सबसे बड़ी नदी नील के किनारे विकसित हुई थी। हड़प्पा सभ्यता सिंधु नदी के तट पर एवं चीनी सभ्यता ह्यांगहो नदी के तट पर विकसित हुई थी।

पानी संकट पर विश्व समुदाय काफी समय से चिंतित है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के अनुसार विश्व के 20 फीसदी लोगों को पानी ही उपलब्ध नहीं है वहीं 50 प्रश लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिलता। इसके बावजूद पानी की बरबादी पर आम इन्सान चिंतित नहीं है। एक अनुमान के अनुसार गांव की खेती-किसानी करने वाले परिवार की अपेक्षा शहर में आधुनिक जीवनयापन करने वाला परिवार 5 से 6 गुना तक पानी खर्च करते हैं। महानगरों व शहरों में जगह-जगह नलकूप,बोर के माध्यम से कुदरती भूगर्भ जल का दोहन हो रहा है। भूगर्भ जल भंडारण के लिए सबसे तेजी से कार्य करने की आवश्यकता है, जबकि हो इसका उल्टा रहा है, इसका दोहन तो कर रहे हैं किंतु इसके संरक्षण यानी भूगर्भ जल रिचार्ज के लिए प्रयास न के बराबर हैं या बेहद कम हैं।

भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गंगा, यमुना, गोदावरी समेत कई नदियों का जल 70 फीसदी तक प्रदूषित हो चुका है। दिल्ली, कानपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहरों में भूगर्भ जल से भी दुर्गंध आती है। इसका मुख्य कारण है शहरों व औद्योगिक इकाइयों का पूरा कचरा नदियों में गिरा दिया जाना। कानपुर के जाजमऊ चमड़े के उद्योग के कारण गंगा नदी का जल पूरा काला हो चुका है। चमड़े को उपयोग में लाने से पहले जिन रसायनों से साफ किया जाता है वे काफी विषैले होते हैं। अन्य उद्योगों में भी हानिकारक रसायनों का उपयोग होता है। इन विषैले तत्वों में युक्त रासायनिक जल को बिना उपचार किए सीधे नदी-नालों में प्रवाहित कर दिया जाता है। भारत के संविधान के भाग चार (क) के अंतर्गत अनुच्छेद -51 (क) में उल्लेखित मौलिक कर्तव्यों में यह प्रावधान है कि नागरिकों का कर्तव्य है कि ‘प्राकृतिक पर्यावरण की जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें।’ अत: किसी भी नदी, झील या जल स्रोतों को प्रदूषित करना संवैधानिक प्रावधानों का हनन करना है। हालात ये हैं कि हर राज्य की अधिकांश औद्योगिक इकाइयां इन प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं।

जल संकट की गंभीरता को समझते हुए बारिश के मौसम में ही जल संचय पर ध्यान केंद्रित करना होगा क्योंकि किसी और समय में इतना अधिक पानी नहीं मिल सकता। पर्याप्त नियोजन न होने के कारण यह पानी समुद्र में चला जाता है। उल्लेखनीय है कि जल संरक्षण की महत्ता और उपयोगिता बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में जल संरक्षण को देश सेवा का एक रूप बताते हुए देशवासियों से पानी बचाने की अपील कर चुके हैं। इसी वर्ष जून में मानसून के आगमन पर जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे लोगों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि ‘देश में अब मानसून का मौसम आ गया है और मानसून के इस महत्वपूर्ण समय को न गंवाते हुए हमें जल संरक्षण के कार्य में लगे लोगों से प्रेरणा लेते हुए अपने आसपास जिस भी तरह से पानी बचा सकते हैं, हमें बचाना चाहिए।’ इसके पहले फरवरी में भी उन्होंने कहा था कि जल शक्ति मंत्रालय ने बारिश का पानी बचाने के लिए 100 दिन का कैम्पेन शुरू किया है और उसमें खास तौर पर बड़े आवासीय परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर देने की बात कही गई है।

अच्छी बारिश के लिए वन क्षेत्रों का होना जरूरी है लेकिन लकड़ी माफिया जंगलों को उजाड़ते चले जा रहे हैं। आज से दो दशक पहले तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश का मौसम 65 से 70 दिन तक रहता था। जंगलों की बेतहाशा कटाई के बाद अब यह बामुश्किल 45 दिन तक पहुंच पाता है। भूगर्भ जल संरक्षण और संवर्धन पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ के भूगर्भ शास्त्री आशीष पांडेय जल संरक्षण की जरूरत पर जोर देते हुए कहते हैं कि भूगर्भ जल के संरक्षण के लिए छोटे-बड़े चेक डैम बनाकर इसमें भी गांव-गांव की बारिश का पानी एकत्र किया जा सकता है, लेकिन बिना टोपोलाजी समझे, जमीन की जांच किए बिना ये कहीं भी बना दिए जा रहे हैं। यही विसंगति इसमें जल संचय नहीं होने देती। चेक डैम बनाने के लिए पहले किसी योग्य भूगर्भ शास्त्री से जमीन की संरचना, स्थल, वहां पाए जाने वाले पत्थरों व रेत या भूमि के प्रकार का सर्वे करा कर उसकी राय लेना चाहिए। कहां किस तरह का वाटर रीचार्ज काम करेगा, कितनी गहराई में बनेगा- ये सब तथ्य कार्य से पहले ही भूगर्भ शास्त्री आसानी से बता सकते हैं। दुर्भाग्यवश ये नहीं हो रहा है। इनके निर्माण से पहले पूरी जांच की जानी चाहिए।

बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए कृत्रिम झीलों का निर्माण कर वर्षा जल का बचाया जा सकता है मगर इस बात की सख्ती बरतनी होगी कि इन साफ पानी वाली कृत्रिम झीलों में किसी भी तरह के गंदे नाले व औद्योगिक कचरे को बिल्कुल न बहाएं। गांवों, कस्बों के पुराने तालाबों को साफ करने के लिए व्यापक मुहिम चलाने की आवश्यकता है। छोटे-बड़े शहरों में तालाबों का क्षेत्रफल अवैध कब्जों के कारण कम हो रहा है। इसे सख्ती से रोकना चाहिए। सरकारों को जल संरक्षण के लिए व्यापक रूप में कुएं, तालाबों के निर्माण पर जोर देना चाहिए।

भूगर्भ जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन पूरे विश्व के लिए एक चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरा महायुद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा। यदि हम लापरवाही के साथ जो भी पानी हमारे पास है उसे बरबाद करते रहे तो वह दिन भी बहुत जल्द आ जायेगा। फिलहाल बारिश के जल को संचित कर हम पानी की कमी दूर करने की कोशिश कर इस खतरे को कुछ समय तक टालने की कोशिश तो कर ही सकते हैं।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hititbet
hititbet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino
vdcasino
hititbet
hititbet
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
betmarino
betmarino
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş