देश का क्रांतिकारी आंदोलन आर्य समाज का आंदोलन था: स्वामी श्रद्धानंद

ग्रेटर नोएडा ।आर्य सागर खारी) आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान और वेदों के प्रकांड पंडित स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज ने कहा है कि देश का क्रांतिकारी आंदोलन आर्य समाज का आंदोलन था। स्वामी जी महाराज आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर द्वारा गुरुकुल मुरसद पुर में चलाए जा रहे 21 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ में स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार रख रहे थे।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि देश के क्रांतिकारियों ने आर्य समाज से प्रेरणा लेकर अपने अप्रतिम बलिदान देश के स्वाधीनता के लिए दिए । उन्होंने कहा कि गेंदालाल दीक्षित, राम प्रसाद बिस्मिल, शहीद भगत सिंह और उन जैसे अन्य अनेकों क्रांतिकारियों ने सत्यार्थ प्रकाश पढ़कर देश के स्वराज्य वादी क्रांतिकारी आंदोलन में अपना सहयोग प्रदान किया। भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी को जिन लोगों ने साम्यवादी या कम्युनिस्ट विचारधारा के साथ जोड़कर देखने का प्रयास किया है उन्होंने उनके सच को लोगों के सामने आने नहीं दिया है । क्रांतिकारियों के साथ अन्याय करते हुए जिन लोगों ने उन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया है निश्चित रूप से उन्होंने उन क्रांतिकारियों के साथ अन्याय किया है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि वेद की ज्योति और यज्ञ की ज्योति देश में तभी जलती रहनी संभव है जब क्रांतिकारी लोग राक्षसवृत्तियों का विरोध और विनाश करने के लिए सचेष्ट और सजग रहेंगे ।आर्य समाज ने इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए यज्ञ वेदी के साथ-साथ राष्ट्रवेदी को भी प्रज्ज्वलित किया। स्वामी जी ने कहा कि आज भी हमें देश विरोधी शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। जिसके लिए आर्य समाज को आगे आने के लिए अपने आपको प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि आर्य समाज की विचारधारा से ही संसार में शांति कायम की जा सकती है और उग्रवाद आतंकवाद या जेहाद जैसी मानसिकता से संसार को मुक्ति दिलाई जा सकती है । क्योंकि मानवतावादी सोच और दृष्टिकोण यदि किसी संस्था या संगठन के पास में है तो वह केवल आर्य समाज के पास में है । आर्य समाज को यह वेदों की देन है। इसलिए वेद संसार का न केवल आदि संविधान है बल्कि वर्त्तमान संसार में सुव्यवस्था कायम रखने के लिए सबसे उत्तम वैश्विक संविधान भी है।

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