1947 से पूर्व भारत जब अपना स्वतंत्रता संग्राम लड़ रहा था, तब चीन की जनता का नैतिक समर्थन भारत के साथ था। उसे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के साथ सहानुभूति थी। 1949 में जब चीन में कम्युनिस्ट क्रांति हुई तो भारत ने भी उस क्रांति का स्वागत किया था। सोवियत रूस और उसके सहयोगी देशों को छोडक़र भारत पहला देश था जिसने चीन की कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता प्रदान की थी। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत और चीन ने दो घनिष्ठ मित्रों के रूप में अपनी यात्रा प्रारंभ की। परंतु दो बातें एक साथ नही चल सकती थीं एक तो चीन कम्युनिस्ट शासन प्रणाली के अंतर्गत सारे विश्व को लाना चाहता था इसलिए उसकी सोच साम्राज्यवादी थी दूसरे भारत एक लोकतांत्रिक देश था इसलिए साम्राज्यवाद से उसे मन से घृणा थी।

8 मई 1959 को लोकसभा में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था-‘‘भारत के नौजवान तिब्बत का मूल्य समझते हैं।..साम्राज्यवाद के दिन लद गये हैं। किंतु यह नया (साम्यवाद) साम्राज्यवाद है। इसका खतरा यह है कि यह एक क्रांति के आवरण में आता है, यह इंकलाब की पोशाक पहनकर आता है, यह नई व्यवस्था का नारा लगाता हुआ आता है, मगर यह है उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद।’’

इससे पूर्व चीन ने 1949 में जब अपने आपको एक कम्युनिस्ट देश घोषित किया था तो उसने उसी समय तिब्बत पर भी अपना अधिकार जमा लिया था। तिब्बत भारत और चीन के मध्य एक ‘बफर स्टेट’ था और उसका यह स्वरूप सदियों से चला आ रहा था। पर चीन की कुदृष्टि उसे हड़पने की रही थी। तिब्बत बौद्घ धर्मावलंबियों का देश रहा है, जो कि अहिंसावादी होते हैं, इसलिए हिंसक प्रतिरोध उन्होंने कभी नही किया और अपने देश की प्रभुसत्ता पर सहजता से ही ‘डै्रगन’ का नियंत्रण हो जाने दिया। जबकि तिब्बत का कुल क्षेत्रफल भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग तीन चौथाई रहा है अर्थात 25 लाख वर्ग किमी.। इतने बड़े भूभाग पर भारत ने चीन का आधिपत्य स्वीकार कर लिया। जिससे चीन की शक्ति बढ़ी। जबकि उस समय तिब्बत भारत के साथ आ सकता था।

भारत की पराधीनता के काल में 1913-14 ई. में ब्रिटिश सरकार ने शिमला में एक सम्मेलन आयोजित किया था। जिसमें तिब्बत, चीन और ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि उपस्थित रहे थे। उस समय भारत चूंकि ब्रिटिश लोगों का गुलाम था इसलिए ब्रिटिश सरकार ने तिब्बत को भारत के साथ लाने के गंभीर प्रयास नही किये। क्योंकि वह अनावश्यक ही भारत की शक्ति को बढ़ाने का अर्थ समझते थे कि अपने लिए ही समस्याएं क्यों खड़ी की जाएं? इसलिए ब्रिटिश सरकार ने तिब्बत की पूर्ण आजादी का दावा स्वीकार न करते हुए इतना मान लिया कि तिब्बत की स्वायत्तता बनी रहेगी। इस सम्मेलन में यह भी स्पष्ट हो गया था कि तिब्बत पर चीन का आधिपत्य बना रहेगा। पर यह नियंत्रण साधारण ही हो गया। चीन की सरकार तिब्बत को अपना एक प्रांत घोषित नही कर सकेगी। यह इसलिए किया गया था कि इस प्रकार कर देने से चीन की शक्ति भी नियंत्रित की सकेगी। उसी समय (1914 ई.) में चीन के मंचू साम्राज्य का विघटन हो गया। जिसका लाभ चीन ने उठाया और उसने अपनी पूर्ण स्वाधीनता की घोषणा कर दी। इसके पश्चात तिब्बत एक विवादास्पद क्षेत्र बन गया।

1954 में 40 वर्ष पश्चात भारत और चीन तिब्बत को लेकर फिर बैठे। अब भारत स्वतंत्र हो चुका था। इसलिए उसके पास तिब्बत के विषय में नया दृष्टिकोण और नई सोच होनी चाहिए थी। क्योंकि उसके राष्ट्रीय हितों का तकाजा यही था। हमें अपनी सीमाओं की रक्षा के दृष्टिगत तिब्बत पर अधिक भरोसा करना चाहिए था, ना कि एक साम्राज्यवादी चीन पर। वैसे भी भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने संबंध रहे हैं। वह सांस्कृतिक रूप से भी भारत के साथ अपना जुड़ाव मानता रहा है। 1913-14 ई. में भारत की ब्रिटिश सरकार ने तिब्बत के विषय में जितना व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया था-दुख की बात यह रही कि 1954 ई. में भारत की स्वतंत्र सरकार उतना व्यावहारिक दृष्टिकोण नही अपना सकी।

तब पं. नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। उनकी अचकन पर गुलाब का फूल बड़ा सुंदर लगता था। उसी गुलाब के फूल की खुशबू में आनंदित रहने वाले नेहरूजी ने राष्ट्रहितों की पूर्णत: उपेक्षा करते हुए तिब्बत पर चीन का अधिकार मान लिया। इस वर्ष चीन के पी.एम. चाऊ एन लाई के साथ नेहरू ने ‘पंचशील’ का समझौता किया। चाऊ इन लाई ने ‘हिंदी चीनी भाई-भाई’ का नारा दिया और हमारा प्रधानमंत्री एक बहुत बड़ी बाजी हार गया। भारत ने इतने बड़े भू-भाग पर एक साम्राज्यवादी शक्ति का अधिकार स्वीकार कर लिया। जिससे चीन की सेनाएं सीधे-सीधे नेपाल की सीमाओं पर आ खड़ी हुईं। जिसकी सुरक्षा का भार हमारे ऊपर था। इस सारे घटनाक्रम से और हवाई नारेबाजियों से सरदार पटेल अत्यंत दुखी थे। पर ‘ख्वाबों की दुनिया के बादशाह नेहरू’ को दिन में सपने लेने की आदत थी।

यदि नेहरू तिब्बत को चीन के मुंह में जाने से रोके रखते और उसे अपने साथ आने देते तो आज चीन नेपाल से दूर रहता। हमारी अपनी गलतियों के कारण नेपाल में चीन की दस्तक हो चुकी है और हम नेपाल को उसी प्रकार चीन के मुंह में जाने दे रहे हैं जिस प्रकार 1954 में नेहरू ने तिब्बत को जाने दिया था। उस समय लोकप्रियता में नेहरू भी मोदी की ही भांति थे। लोकप्रियता का नशा ऐसा होता है कि जिसमें व्यक्ति या नेता यह अनुभव करता रहता है कि अब सारा देश वैसे ही करेगा जैसा तू चाहेगा, और यही वह क्षण होते हैं जब व्यक्ति से भूल हो जाती हैं। ऐसी भूलों को जब लोग कुछ अंतराल से देखते हैं तो ज्ञात होता है कि कहां-कहां और कैसी-कैसी भूलें हम कर चुके हैं? समय अवसर को पहचानने का है, 60 वर्ष पश्चात इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है या हमारा नेता किसी विशेष अवसर की प्रतीक्षा में है-देखने वाली बात यही है।

Comment:

meritking giriş
betpark güncel giriş
betgaranti güncel giriş
kolaybet güncel giriş
betnano giriş
betpark
betpark
betpark
betpark
betpark
betpark
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
supertotobet
supertotobet
betpark
betpark
supertotobet
bettilt giriş
supertotobet
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino
vaycasino
hititbet giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
supertotobet
supertotobet
vaycasino
vaycasino
bettilt giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
supertotobet
supertotobet
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
vaycasino
vaycasino
supertotobet
supertotobet
celtabet giriş
celtabet giriş
prensbet giriş
prensbet giriş
prensbet giriş
vipslot giriş
vipslot giriş
cashwin giriş
betnano giriş
hiltonbet giriş
wbahis giriş
gobahis giriş
casinoroyal giriş
betpark giriş
roketbet giriş
betasus
betbox giriş
bettilt giriş
bettilt
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
realbahis
realbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kavbet giriş
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betasus
betasus
roketbet
roketbet
hititbet giriş
hititbet giriş