मानव जाति के अस्तित्व के सामने मौजूद किसी भी खतरे का सामना करने के लिए सिर्फ मानवता ही सबसे बड़ा हथियार

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मनन खुरमा, फाउंडर व सीईओ, क्यूमैथ

कोरोना की इस महामारी ने हमें भले ही घुटने टेकने को मजबूर कर दिया हो लेकिन कोई भी मुश्किल सबसे प्रभावी, कभी नहीं टूटने वाली, परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने वाली, कभी नहीं थकने वाली ताकत- मानवता को हरा नहीं सकती है।

महामारी की दूसरी लहर ने भारत को बुरी तरह प्रभावित किया है। हमारा हेल्थकेयर सिस्टम कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बोझ तले लड़खड़ा रहा है। वहीं, अंतिम संस्कार के इंतज़ार में कतार में रखे हुए शवों की तस्वीरें दिल दुखाने वाली हैं। चारों तरफ खौफ और डिप्रेशन का माहौल बना हुआ है।

इसके बावजूद, हमें उम्मीद है। उम्मीद है आम जनता से जो इस महामारी के खिलाफ योद्धा बनकर उभरे हैं। इस दौरान आम लोगों की दयालुता की अनगिनत कहानियां सामने आई हैं। इनमें से कई कहानियां ऐसी हैं जिसमें एक शख्स ने मदद की शुरुआत की और फिर इस पहल ने पूरे अभियान का रूप धारण कर लिया।

जब भी कोई विपदा आई है या व्यापक स्तर पर कोई खतरा मंडराया है तो मानवता ने हमेशा ही डटकर उसका मुकाबला किया है। दया और संवेदना के इन कदमों ने आमतौर पर खबरों में दिखने वाली निराशा को कम करने में मदद की है। कोविड-19 मनुष्य के मौलिक अधिकार- जीने के अधिकार के लिए खतरा बन गया है। इस खतरे को देखते हुए पूरी मानवता अब एकजुट हो गई है। धार्मिक स्थलों ने अपने सामुदायिक कमरों को अस्थाई अस्पतालों में बदलकर सभी के लिए अपने दरवाज़े खोल दिए। ऑटो ऐम्बुलेंस की बात हो या सोशल मीडिया पर प्लाज़्मा और दवाओं के लिए अपील, अस्पतालों में बेड्स की उपलब्धता की जानकारी हो या अचानक खोली गई सामुदायिक रसोइयों की बात की जाए… यह लिस्ट बहुत लंबी है।

अस्तित्व बचाए रखने की इस लड़ाई में लोगों को जागरूक बनाने और उन्हें साथ लाने में कोडिंग ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। व्यक्तिगत पहलों ने ऐसी वेबसाइट्स व ऑनलाइन रिर्सोस विकसित किए जिनसे लोगों को इस ज़िंदगी और मौत की महत्वपूर्ण लड़ाई में छोटी से छोटी जानकारी हासिल करने में मदद मिली।

लोकल हीरो
सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही और मुख्यधारा मीडिया में सामने आ रही खबरों में दिखा है कि ओला व उबर ड्राइवरों से लेकर कॉर्पोरेट अधिकारियों तक सभी आमजन इस लड़ाई में अपना योगदान दे रहे हैं। वैश्विक खतरा बन चुकी इस महामारी से लड़ने के लिए देश साथ आ रहे हैं। दुनिया भर से ऑक्सिजन कंटेनर्स, बाई-पैप वेंटिलेटर, दवाएं भारत में भेजी जा रही हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस महामारी ने सीमाओं का महत्व समाप्त कर दिया है।

यह वायरस किसी राष्ट्रीयता या धर्म या विचारधारा को नहीं पहचानता है। यह वायरस सभी पर एक समान हमला करता है और इसी वजह से हम सभी को मिलकर काम करना है। ज़िंदगी और आजीविका के नुकसान को कम करने के लिए हमें सभी को इसी भावना से काम करना है और आरओ के मुकाबले अधिक तेज़ी से आगे बढ़ना है।

चलिए मैं इस विचार के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं कि हम सभी को दूसरों के लिए कुछ करने की ज़रूरत महसूस होती है। हमें लगता है कि हम सभी मिलकर ही एक बेहतर दुनिया बना सकते हैं। यह अहसास हम सभी को जोड़ता है। डोमिनो इफेक्ट की तरह इस विचार में भी सभी को छूने और कभी हार नहीं मानने वाली ताकत मानवता बनाने का दमखम रखता है जो मानव जाति की जीत व उसका अस्तित्व बचाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है। मानव जाति के अस्तित्व के सामने मौजूद किसी भी खतरे का सामना करने के लिए सिर्फ मानवता ही सबसे बड़ा हथियार है, यह बात समझने के लिए क्या हमें किसी विध्वंसक महामारी या इसी स्तर12 के खतरे की आवश्यकता है?.

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