कोरोना हारेगा और भारत जीतेगा

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‘चेतन’ नितिन खरे

वर्ष २०२१ की शुरुआत से ही ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा था कि ये वर्ष भी बीस की तुलना में हर जगह इक्कीस ही साबित होगा। अब चाहे सकारात्मकता हो या कुछ और; हमें हर स्थिति की परीक्षा देनी ही होगी। कोरोना को ही यदि के लिया जाए तो देश में कोरोना रोगियों की संख्या वर्ष २०२० की तुलना में इक्कीस हो रही है। किंतु इसका सकारात्मक बिंदु ये भी है कि इस समय वर्ष २०२० की तुलना में हमारे पास इक्कीस सकारात्मक बिंदु हैं। जैसे कि आज भारत के पास कोरोना के विरुद्ध कारगर अपनी वैक्सीन है। आज हमारे पास कोरोना से लड़ने हेतु लाखों की संख्या में जागरूक इक्षा शक्ति वाले लोग हैं। आज देश भर में कोरोना के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने का अभियान चल रहा है। घर घर, गांव गांव, कस्बे कस्बे, शहर शहर में लोग सकारात्मक विचारों के साथ एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। कुछ एक नकारात्मक बिंदुओं को छोड़ दें तो पूरा पैरामेडिकल स्टाफ, चिकित्सकीय क्षेत्र और दवा निर्माता कंपनियां भी एकजुट होकर इस राष्ट्रव्यापी युद्ध में सरकार और देश के नागरिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं । पिछले सप्ताह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्य भारतीय दवा निर्माता कंपनियों के प्रमुखों के साथ जो बैठक हुई; उसमें कई सकारात्मक बातें हुई। जिसका परिणाम भी धीरे धीरे दिखने लगा है। उद्योग जगत के छोटे से लेकर बड़े बड़े उद्योगपतियों ने तक अपने व्यापारिक कारोबार बंद करते हुए; औद्योगिक उपयोग की ऑक्सीजन को चिकित्सकीय उपयोग हेतु निःशुल्क देने की शुरुआत भी कर दी है। टाटा समूह, जिंदल समूह, अडानी और अंबानी समूह के साथ साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित अन्य कई राज्यों के छोटे बड़े कस्बों तक उद्योगोतियों ने औद्योगिक उपयोग की ऑक्सीजन को चिकित्सकीय उपयोग में देने का फैसला स्वेच्छा से लिया है। ये सब भारत देश के लिए बहुत सकारात्मक बिंदु है।

इस विषम परिस्थिति में देश के अंदर कुछ ऐसे नर पिशाच भी हैं जो कि रेमेडिसिवर इंजेक्शन, ऑक्सीजन, ऑक्सीजन सिलेंडर की ऐससरीज, विटामिंस की गोलियां, मास्क, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मोमीटर और अन्य जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी में सक्रिय हो गए हैं। कई बड़े शहरों में ऐसे कुछ केस पकड़े भी गए हैं। हेल्थ इमरजेंसी के इस दौर में इतनी घटिया सोच के साथ ऐसी हरकतें न केवल अमानवीय हैं अपितु घोर दंडनीय भी हैं। इसमें एक बात और हमें ध्यान रखना है कि किसी एक दवा को सब कुछ मानकर पूरा ध्यान उसपर केंद्रित न करें। क्योंकि विकल्प हर चीज का है। किंतु टूटे मन और टूटी इक्षाशक्ति का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। आज पूरा सरकारी तंत्र दिन रात एक करके इस हेल्थ इमरजेंसी से देश के नागरिकों को बचाने के लिए प्रयासरत है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य बनता है कि वो हर तरह से सहयोग करे ।
स्थिति की गंभीरता इस बात से लगाई जा सकती है कि जिस तरह बाढ़ इत्यादि आपदाओं में राशन की किट तैयार करवाके प्रभावित क्षेत्रों में वितरित की जाती हैं; ठीक उसी तरह जीवन रक्षक दवाओं की किट कई जिलों के जिलाधिकारियों ने चिकित्साधिकारियों के सहयोग से तैयार करवाके आशा और अन्य अन्य स्वस्थ कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर घर तक पहुंचाने की योजना तैयार है।

ये सब चिकित्सकीय सहयोग कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं । विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के लोग, कई स्वयंसेवक अपनी और अपने परिवार का ध्यान न देते हुए; संकट की घड़ी में इस समय देश को बचाने में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश सरकारों द्वारा अलग अलग जगहों पर नाइट कर्फ्यू और लॉक डाउन भी लगाया जा रहा है। किंतु ये सब भी एक एक व्यक्ति की जिम्मेदारी और स्वयं जिम्मेदारी समझने के अभियान से बड़ा नही है। इसलिए आज एकजुट होकर कोरोना को हराने के लिए हमें प्रतिबद्ध होना पड़ेगा।
दूसरी ओर महत्वपूर्ण बात जो कि बीते दिनों के आंकड़ों पर गौर करने पर पता चली है वो ये है कि कोविड केसेज में इक्षाशक्ति की बहुत अहम भूमिका है। यदि एक तिहाई काम दवाइयों का है तो दो तिहाई कार्य स्वयं की इक्षाशक्ति एवं दैनिक दिनचर्या व खान पान का है। इसलिए मन में किसी भी तरह की चिंता, परेशानी, निराशा या घबराहट के भाव बिल्कुल भी न आने चाहिए। आज आंकड़े बताते हैं कि बाकी जगहों की तुलना में हमारे देश के नागरिकों का प्रतिरक्षा तंत्र भी मजबूत है, रिकवरी रेट भी बहुत अच्छा है । कोविड से ज्यादा मृत्यु दूसरी बीमारियों से जूझ रहे रोगियों की हो रही है। उसमें में कहीं न कहीं नकारात्मकता के हावी होने की अहम भूमिका रही है। इसलिए आइए एकजुट होकर सकारात्मक दृष्टिकोण से इस युद्ध को विजय श्री की तरफ ले चलते हैं । एकजुट होकर आह्वाहन करते हैं कि कोरोना हारेगा; भारत जीतेगा।
तभी हम लोग हिमालय के शिखर पर खड़े होकर भी नाद कर पाएंगे कि कोरोना हारा और हम जीते।
अंत में चार पंक्तियों से आज का लेख पूर्ण करता हूं । अगले में कोई अन्य लेख के साथ मिलते हैं । तब तक जुड़े रहिए । सकारात्मक रहिए !

हम आर्यभूमि के वीर युद्ध हित जो हमको ललकारेगा,
हर बच्चा इक वीर सिपाही; कितने सैनिक संहारेगा ?
अरे चिकित्सा की दुनिया के जनक हमारे पुरखे ही हैं,
तब कहता हूं कि देश रहेगा दुष्ट कोरोना हारेगा,

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