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🙏🌹 देश प्रदेश की आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण पोस्ट.पंचायत चुनाव के संदर्भ में –

जागो !गणराज्य जागो !! 💥💥🇮🇳

प्रिय आत्मीय ,
उत्तर प्रदेश में पंचायती राज के चुनाव होने जा रहे हैं ।गाँवों में हर व्यक्ति एक दूसरे को जानता है,अतः प्रचार की , या उसके लिए किसी खर्च की आवश्यकता नहीं है ।इसलिए लोग यदि सबसे अच्छे व्यक्ति को आपस में तय करके चुन लें तो गाँव ख़ुशहाल हो जाएंगे क्योंकि तब पैसे का बोलबाला ख़त्म हो जाएगा।


गाँव वालों को यह भी जानना होगा कि ग्राम प्रधान या पंचायत कोई भी फ़ैसला अपने आप नहीं ले सकती ; साल में दो बार सारे गाँव के लोगों की मीटिंग होनी चाहिए और सारे फ़ैसले उन्हीं मीटिंग्स में होना चाहिए ।73 वें संविधान संशोधन के बाद अब 29 विषय पर गाँव पंचायतों का पूरा अधिकार है।
दूसरी और उतनी ही महत्वपूर्ण बात ये है की जो राइट टू रिकॉल यानी चुने हुए ग़लत प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार जय प्रकाश नारायण अपने 70 के दशक के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में माँग रहे थे वह पंचायत के चुनावों में दे दिया गया है ।अगर कोई प्रधान मनमानी करता है या गाँव के लोगों से फ़ैसले नहीं करवाता या ग़लत काम करता है या जिला अथवा तहसील के अधिकारियों का मोहरा बन जाता है तो गाँव के लोग 2 साल तक उसका काम देखने के बाद असंतुष्ट होने पर बड़ी आसानी से उसको निकाल सकते हैं ।इसकी पूरी प्रक्रिया पंचायती राज अधिनियम में , 73 वे संविधान संशोधन के बाद हुए परिवर्तनों के अनुसार, दिया हुआ है जिसे मैंने अपनी किताब संविधान कथा ‘जागो !गणराज्य जागो !! में दिया भी है आप उसे वहाँ से पढ़ सकते हैं

मात्र ये तीन चीज़ें जान लेने से कि १. जनता यानि हम गाँव के लोग मालिक हैं हमें अपना सेवक चुनना है २. जिसे सारे फ़ैसले गाँव के लोगों की मीटिंग में करना है और ३. अगर प्रधान काम ठीक से नहीं कर सकता या कर रहा है तो गाँव के लोग ,दो साल के बाद कभी भी , निकाल सकते हैं ; इन जादुई प्रावधानों को जान लेने से ,अभूतपूर्व परिवर्तन होने लगते हैं ।

2015 के चुनावों में जिन गांवों ने ये बातें समझ कर वोट दिया वहाँ जादुई संवैधानिक परिवर्तन की लहर शुरू हो भी गई है।

अगर किसी के पास कोई प्रॉपर्टी है जिसका उसके पास न तो दस्तावेज़ है, न ही क़ब्ज़ा है और न ही उसे पता है कि यह प्रॉपर्टी उसकी है,तो क्या होगा ?जिसे उस प्रॉपर्टी की जानकारी होगी और जिसका क़ब्ज़ा होगा वही उसका उपभोग करेगा ।यही हाल आज आम जनता का है।सत्ता जनता के पास है लेकिन जनता ने उस दस्तावेज़ का नाम नहीं सुना जिसके द्वारा जनता को सत्ता मिली है ,वह जानती है भी नहीं कि सत्ता उसके पास है और न ही जनता का सत्ता पर क़ब्ज़ा है।इसीलिए सत्ता कुछ चालाक लोगों ने हथिया लिया है और जनता अपने को आज भी प्रजा समझे हुई है ।संविधान ही वह दस्तावेज़ है जो सत्ता जनता को सौंपती है लेकिन दुर्भाग्य ये है के अधिकांश जनता ने तो संविधान का नाम ही नहीं सुना है , पढ़ना – जानना तो दूर की बात है।और आप गाँव में जाकर हज़ारों लोगों से पूछ डालिए कि सत्ता किसके पास है तो DM CM और PM के अलावा और कोई उत्तर नहीं मिलेगा ।और यह जनता की ग़ैर जानकारी का परिणाम है कि हिंदुस्तान दुनिया के उन 200 से अधिक देशों में अकेला देश है जहाँ जनता का रास्ता रोक कर उसके सेवकों को गुज़ारा जाता है।आज़ादी के बाद उसी छलावे की मानसिकता की वजह से देश को प्रजातंत्र कहा गया और आज भी जब किसी पी एम सी एक का शपथ ग्रहण होता है तो मीडिया कहती है फ़लाँ फ़लाँ का राजतिलक ? ये निहित स्वार्थ के सत्ता लोलुप लोग नहीं चाहते कि जनता को अपनी शक्ति का एहसास हो ।
मेरी ग़ज़ल का एक शेर है-
खर पतवार फ़सलों से भी बड़े हो गए हैं,
व्यवस्था में हुई ठीक से निराई नहीं है ।
खर पतवार क्यों चाहेंगे कि देश की जनता में संविधान और लोकतंत्र की जानकारी के उजाले से निराई हो जाए ? क्योंकि तब व्यवस्था में नयी फ़सल आ जाएगी । खर पतवार ख़त्म हो जाएँगे

गाँव पंचायतों का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि यह लोकतंत्र की सबसे ज़मीनी इकाई है जहाँ लोकतंत्र अपने सच्चे स्वरूप में प्रस्फुटित, पल्लवित और विकसित हो सकता है ।जैसा कि स्पष्ट है कि हमारी व्यवस्था के 3 स्तर हैं ।केंद्रीय व्यवस्था ,राज्य व्यवस्था और पंचायती व्यवस्था .पहले दोनों व्यवस्थाओं में यह संभव नहीं है कि देश का हर नागरिक भाग ले सके इसलिए उसमें वह अपने प्रतिनिधि / सेवक भेजता है चाहे वह सांसद हो या विधायक ।
लेकिन गाँव पंचायतों की ख़ूबसूरती यही है कि सारे गाँव के लोग मिलकर एक साथ बैठकर विचार विमर्श कर सकते हैं और सभी मुद्दों पर फ़ैसले कर सकते हैं।इसके लिए 73 वें संविधान संशोधन के बाद पंचायती राज अधिनियमों में यह व्यवस्था है कि सभी मुद्दों पर फ़ैसले गाँव के सभी लोगों की सभा में ही होना है ; और कम से कम दो बार यह सभा ये मीटिंग होनी ज़रूरी है ।गाँव का प्रधान केवल व्यवस्थापक है , फ़ेसिलिटेटर है ,जो भी फ़ैसले गाँव के लोग करते हैं उसको उसे इम्प्लीमेंट करना , कार्यरूप देना होता है।
जब अधिकांश गाँव सभाओं में अच्छे गाँव प्रधान चुने जाने लगेंगे तो यह पूरे देश के लिए एक नई परंपरा की शुरुआत भी हो सकती है और विश्वास है कि होगी भी; इन्ही गाँव प्रधानों में जो सबसे अच्छा हो,वह जिसकी और जिसके कामों की ख्याति पूरे विधानसभा क्षेत्र में फैल जाए ,वह विधायक बन कर विधानसभा में जाए और इन्हीं अच्छे काम करने वाले प्रधानों में जिसकी कामों की ख्याति और महक पूरे संसदीय क्षेत्र में फैल जाए वह संसद में जाए । इस तरह भारत माता ग्राम वासिनी सच्चे अर्थों में चरितार्थ हो जाएगा क्योंकि ग्राम वासिनी भारत माता का समुचित प्रतिनिधित्व विधानसभाओं और लोक सभा में होने लगेगा धीरे धीरे।
2015 के पंचायत चुनावों में उत्तर प्रदेश के जिन दो सौ से अधिक गाँव में लोगों ने संविधान और पंचायती राज अधिनियम के अनुसार वोट दिया वहाँ चमत्कारिक परिणाम हो गये .सारे फ़ैसले गाँव के लोगों ने लिए थे और प्रधान ने अपना चुनाव जीतने के लिए कोई पैसा नहीं ख़र्च किया था इसलिए उसका कोई निहित स्वार्थ नहीं था । गाँव के सारे लोग उस प्रधान के साथ खड़े रहे , जितने फंड्स गाँव सभा के लिए आए उसका सही इस्तेमाल हुआ ।बल्कि गाँव वालों ने श्रमदान भी किया क्योंकि फ़ैसला उनका था, उनके फैसलों के अनुसार ही काम हो रहा था ।उन गांवों की तरफ़ आँख उठाने की हिम्मत किसी डिस्ट्रिक्ट या ब्लॉक अधिकारी की नहीं हुई जबकि शुरू में लोग डर रहे थे कि अगर ब्लॉक और डिस्ट्रिक्ट के अधिकारी जो फंड आएगा उसका हिस्सा माँगेंगे तो कैसे निपटा जाएगा ? लेकिन जब पूरा गाँव एक जुट था ,एक साथ खड़ा था तो फिर ज़िले के किसी अधिकारी या ब्लॉक के किसी अधिकारी की हिम्मत ही नहीं पड़ी कि उस गाँव की तरफ़ देखें । बल्कि आश्चर्यजनक रूप से उल्टा असर हुआ , चमत्कार हुआ क्योंकि जिले और तहसील के अधिकारियों को भी दिखाना होता है कि हमारी कुछ गाँव सभाएँ अच्छा काम कर रही हैं, मॉडल के रूप में हैं ।
तो अधिकांश तो इन्हें गाँव सभाओं को मॉडल के रूप में जिलाधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया जाने लगा ।मैंने अपने ‘हम भारत के लोग’ की यूटूब और फ़ेस्बुक वेब शृंखला में इनमें से अधिकांश , बहुत से प्रधानों के बारे में चर्चा की है उनके कार्यों के बारे में चर्चा की है और उनके फ़ोन नंबर भी दिए हैं ; ताकि आप उनसे बात कर सके उन गांवों में जाकर ख़ुद देख सकें , समझ सकें अपनी आँखों के सामने वे चमत्कार होते हुए । मैं आपसे आग्रह करूँगा कि मेरी वेब ऋंखला देखे और उन लोगों से संपर्क करें अगर आप वेरिफाई करना चाहते हैं , संतुष्ट होना चाहते हैं ।गूगल या यूट्यूब पर ‘हम भारत के लोग – गिरीश पाण्डे ,लिखने बात पर वे सभी प्रोग्राम एक तरफ़ से आने शुरू हो जाते हैं ।
हमारा आपसे आग्रह है कि उत्तर प्रदेश के सभी (क़रीब 58 से अधिक हज़ार ) गाँव सभाओं तक यह मैसेज चुनाव के पहले तक ज़रूर पहुँचा दीजिए ताकि अगर 2015 के चुनाव में 200 से अधिक अच्छे ग्राम प्रधान चुने गए तो इस बार लगभग सभी गांवों में अच्छे प्रधान चुने जायें।

जागो !गणराज्य जागो !! 💥💥🇮🇳
पंचायत के चुनावों पर मेरा डेढ़ घंटे का एक वीडियो यू ट्यूब और फ़ेसबुक पर लाइव प्रसारित हुआ था जनवरी में ।वह आपके रेडी रिफरेन्स के लिए साथ में दे रहा हूँ जो बहुत ही ज़रूरी है .मुझे पूरा विश्वास है कि आप इस पोस्ट और साथ के वीडियों को उत्तर प्रदेश और देश के कोने-कोने तक पहुंचाएंगे ताकि वह वायरल होकर उत्तर प्रदेश के हर गाँव पंचायत में चुनाव शुरू होने के पहले पहुँच जाए और साथ ही जिन अन्य कई प्रदेशों का चुनाव इसी वर्ष होने वाले पंचायत तक अवश्य पहुँच जाए ।
पंचायती राज चुनाव के लिए फ़ेस्बुक के विडीओ का लिंक –

पंचायती राज चुनाव पर आधारित यूटूब के विडीओ का लिंक –

जैसा कि ऊपर भी लिखा है ,मात्र ये तीन चीज़ें जान लेने से ही कि १. जनता यानि हम गाँव के लोग अपने गाँव के मालिक हैं और हमें अपना सेवक चुनना है ।२. जिसे सारे फ़ैसले गाँव के लोगों की मीटिंग में करना है और ३. अगर प्रधान काम ठीक से नहीं कर सकता कर रहा है तो गाँव के लोग दो साल के बाद कभी भी निकाल सकते हैं लोकतंत्र और परिवर्तन की गंगा शुरू हो जाती है।
यही वे जादुई प्रावधान हैं ।जिसकी वजह से अभूतपूर्व परिवर्तन होता है ।इलाहाबाद ज़िले के कई गाँव में जहाँ इन बातों को २०१५ के पंचायत चुनाव के पहले लोगों ने जान लिया ,वहाँ पर परिवर्तन की लहर सी आ गई और ये अफ़वाह फैल गई ,ये ख़बर सी फैल गई की एक जादुई किताब आती है और गाँव को बदल के चली जाती है।हमारा संविधान वही जादुई किताब है जिसे हर भारत के लोगों तक पहुँचाना हमारा आपका सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है ।
गाँव वालों को यह भी जानना होगा कि ग्राम प्रधान या पंचायत कोई भी फ़ैसला अपने आप नहीं ले सकती ; साल में दो बार सारे गाँव के लोगों की मीटिंग होनी चाहिए और सारे फ़ैसले उन्हीं मीटिंग्स में होना चाहिए ।
73 वें संविधान संशोधन के बाद अब 29 विषय पर गाँव पंचायतों का पूरा अधिकार है।2015 के चुनावों में जिन गांवों ने ये बातें समझ कर वोट दिया वहाँ जादुई संवैधानिक परिवर्तन की लहर शुरू हो भी गई है जैसा कि मैंने ऊपर स्पष्ट किया है ।
जागो !गणराज्य जागो !! 💥💥🇮🇳
मेरे मित्र एस पी सिंह ने जागो !गणराज्य जागो !! पुस्तक की सॉफ़्ट कापी तैयार करके नेट पर उपलब्ध कर दिया है । संविधान जानना संविधान में पहला मूल कर्तव्य है ,देश का पहला क़ानून है । जो संविधान नहीं जानता वह अभी सच्चे अर्थों में देश का नागरिक ही नहीं हुआ ,महज़ भीड़ का एक हिस्सा बन कर रह गया है ।आप पुस्तक को स्वयं पढ़ें और हर देशवासी तक पहुँचाएँ ।
इस पुस्तक में 73 वें संवैधानिक संसोधन के बाद के प्राविधान , गाँव पंचायतों को सौंपे गए २९ विषय और प्रधान के निष्कासन की पूरी प्रक्रिया ( पंचायती राज अधिनियम की धाराओं सहित), सभी दिया हुआ है ।
jjss.co.in/pro/Jago.pdf
आप इस साइट पर भी पढ़ / डाउनलोड कर सकते हैं।
jjss.co.in/gp

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