नए कृषि कानूनों से आगे का एजेंडा

20210217_091625

भरत झुनझुनवाला

विकासशील देशों केन्या, कैमरून, पाकिस्तान और घाना में कृषि पर लागू करों का अध्ययन किया। इसमें सामने आया कि पहले केन्या में कृषि से होने वाली छह लाख रुपये सालाना की आमदनी पर आयकर देना पड़ता था। वर्ष 2018 में इस सीमा को घटाकर एक लाख रुपये वार्षिक कर दिया गया। कैमरून में भी कृषि पर आयकर का प्रस्ताव है। यद्यपि अभी इसे लागू नहीं किया गया है। पाकिस्तान में 1997 में कृषि आयकर कानून पारित किया गया, जिसे वसूलने का अधिकार राज्यों को दिया गया। पाकिस्तानी पंजाब में 12.5 एकड़ से अधिक भूमि पर आयकर देना होता है। उपरोक्त चार देशों में केवल घाना में भारत के समान कृषि आयकर लागू नहीं है। अपने देश में इस छूट का दुरुपयोग हो रहा है। 2013-14 में कावेरी सीड्स नामक कंपनी ने 186 करोड़ रुपये की कृषि से अॢजत आय पर, मोनसेंटो इंडिया ने 94 करोड़ रुपये आय पर, मैक्लिओड रसेल ने 73 करोड़ आय पर, मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम ने 62 करोड़ रुपये आय पर आयकर नहीं दिया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के अनुसार कृषि आयकर से सरकार को लगभग 3 लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष मिल सकते हैं, जो वर्तमान राजस्व का लगभग 10 प्रतिशत बैठता है। कृषि को आयकर से मुक्त रखने का कोई आधार नहीं है।
कृषि को आयकर के दायरे में लाने सेे सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है, क्योंकि अमीर से राजस्व वसूल करके आम आदमी के लिए खर्च किया जाता है। कृषि पर आयकर से खाद्य सुरक्षा भी बाधित नहीं होती, क्योंकि फसल के उत्पादन के बाद आयकर वसूला जाता है। कृषि पर आयकर से देश के आॢथक विकास में भी गति आएगी, क्योंकि सरकार के राजस्व का उपयोग आॢथक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार घाना में कोको, जिससे चाकलेट बनती है, पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दाम के बीच के अंतर के अनुसार निर्यात कर वसूला जाता है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है और निर्यात भी प्रभावित नहीं होता, क्योंकि घरेलू दाम कम होते हैं और वैश्विक दाम अधिक। उनके अंतर का एक हिस्सा ही निर्यात कर के रूप में वसूल किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो सभी विकासशील देश कृषि उत्पादों के निर्यात पर निर्यात टैक्स वसूल करने की तरफ बढ़ रहे हैं। निर्यात टैक्स हर प्रकार से लाभप्रद दिखता है। इससे सामजिक न्याय हासिल होता है। निर्यात टैक्स के कारण निर्यात कम होते हैं और उतनी फसल देश के नागरिकों को कम दाम पर मिलती है। अपने देश में बासमती चावल का दाम 60 रुपये प्रति किलो है और विश्व बाजार में 100 रुपये प्रति किलो। इस स्थिति में यदि सरकार 50 रुपये प्रति किलो का निर्यात टैक्स लगा दे तो निर्यातित बासमती चावल का विश्व बाजार में दाम 110 रुपये प्रति किलो हो जाएगा। बासमती चावल का निर्यात कम होगा और देश के नागरिकों को बासमती चावल उपलब्ध हो जाएगा। इस प्रकार निर्यात टैक्स से सामाजिक न्याय स्थापित होगा। इससे देश की खाद्य सुरक्षा भी स्थापित होगी, क्योंकि हम बासमती चावल का निर्यात कम करेंगे तो घरेलू खपत के लिए चावल की उपलब्धता बढ़ जाएगी।

यह ध्यान रहे कि कृषि उत्पादों का निर्यात करने में हम अपने बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों को भी वस्तु रूप में पैक करके विदेश भेज देते हैं। बासमती चावल के निर्यात में हम अपने जल को चावल के रूप में पैक करके विदेश भेज देते हैं। अत: निर्यात कर लगाकर कृषि उत्पादों का निर्यात कम करने से हम अपनी भूमि और पानी का दोहन कम करेंगे और हमारा पर्यावरण सुरक्षित होगा, जो अंतत: हमारी खाद्य सुरक्षा को भी स्थापित करेगा। आॢथक विकास की दृष्टि से भी निर्यात कर लगाने में नुकसान नहीं है। इससे सरकार को राजस्व मिलेगा। यद्यपि विदेशी मुद्रा कम अॢजत होने से नुकसान भी होगा। इन दोनों प्रभावों के सम्मिलित परिणाम को हम शून्यप्राय: मान सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि केन्या में कृषि सब्सिडी खत्म की जा रही है। कई अन्य देश भी इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। अपने देश में जीडीपी का लगभग दो प्रतिशत यानी करीब छह लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम हम उर्वरक, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं के रूप में कृषि सब्सिडी पर खर्च करते हैं। इसे खत्म करने से किसान की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। खाद्यान्नों का बाजार मूल्य भी बढ़ जाता है। जैसे यदि किसान को बाजार मूल्य पर पानी, उर्वरक और बिजली का मूल्य अदा करना पड़े तो गेहूं की अनुमानित उत्पादन लागत मौजूदा 20 रुपये से बढ़कर 24 रुपये प्रति किलो हो सकती है। ऐसे में देश के 80 प्रतिशत लोगों को, जो बाजार से खरीदकर अनाज का उपभोग करते हैं, अधिक रकम खर्च करनी पड़ेगी। सब्सिडी हटाने से देश की खाद्य सुरक्षा भी बाधित होती है, क्योंकि किसान के लिए खाद्यान्न का उत्पादन करना नुकसानदेह हो जाएगा। इसके उलट सब्सिडी हटाने के पक्ष में तर्क यह है कि उसके कारण किसान हमारे प्राकृतिक संसाधनों का भारी दुरुपयोग करते हैं। बिजली मुफ्त होने से ट्यूबवेल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। प्रकृति प्रदत्त भूमि और जल जैसे बहुमूल्य संसाधनों का अति दोहन भविष्य में हमारे हितों पर आघात करेगा। सब्सिडी आर्थिक बोझ भी है। इससे बचाई रकम को संभावनाशील क्षेत्रों में निवेश करने से समग्र्र उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।

कुल मिलाकर सरकार को कृषि सुधारों के साथ ही कृषि पर टैक्स को लेकर भी विचार करना चाहिए। सर्वप्रथम कृषि उत्पादों पर निर्यात कर लगाना चाहिए, जिससे सामाजिक न्याय और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो और आॢथक विकास पर कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं पड़े। भूमि अथवा आय की निर्धारित सीमा के तहत आयकर वसूल करना चाहिए, जिससे सामजिक न्याय और आॢथक विकास हासिल हो और खाद्य सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पडे। सब्सिडी को निरस्त करने के साथ-साथ आम आदमी की क्रय शक्ति को बढ़ाना चाहिए, जिससे सब्सिडी हटाने से सामाजिक न्याय पर पडऩे वाले दुष्प्रभाव को निष्प्रभावी कर दिया जाए। इस प्रकार सब्सिडी को निरस्त करने से देश को खाद्य सुरक्षा और आॢथक विकास, दोनों हासिल होंगे। वर्तमान में किसानों के साथ गतिरोध को हल करने के लिए सरकार को स्पष्ट रूप से इन तीन बातों को किसानों को बताना चाहिए और इन्हें लागू करना चाहिए।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betsat giriş
betsat giriş
betgaranti giriş
betgaranti yeni giriş
betsat giriş
betsat giriş
superbetin giriş
betgaranti giriş
superbetin giriş
vdcasino giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
betsat giriş
betsat giriş
betpark giriş
betpark giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
cratosroyalbet giriş
cratosroyalbet giriş
betgaranti giriş
jojobet giriş
betgaranti mobil giriş
klasbahis
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vdcasino giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş