Categories
धर्म-अध्यात्म

महात्मा बुद्ध से पहले सनातन धर्म का कैसा था स्वरूप?

आजकल कुछ वामपंथी ईर्ष्यालु लोगों ने भाषा विज्ञान का आडंबर रचकर संस्कृत को बहुत नवीन भाषा कहना शुरु किया है। वे लोग बौद्ध साहित्य में भी आये वेदादिशास्त्रों के नाम को ऊटपटांग अर्थ करके जान बचाना चाहते हैं। इनके सिपहसालार राजेंद्र प्रसाद ने तो “त्रैविद्यासुत्त” को प्रक्षेप ही घोषित कर रखा है। इनके एक चेले ने विनयपिटक, क्षुद्रकस्कंधक में आये “छांदस् यानी वैदिक संस्कृत” का भी कपोलकल्पित अर्थ किया है, जो न पालि से सिद्ध हो सकता है, न बौद्ध साहित्य में है न कोई बौद्ध विद्वान उसको मानता है।

जब-जब बुद्ध का अपमान हुआ तब-तब इन्होंने रत्ती भर भी विरोध भी नहीं किया चाहे मुसलमानों द्वारा लखनऊ में बुद्ध की मूर्तियाँ तोड़ी जाए या बामियान में 2000 साल पुरानी बुद्ध की मूर्ति तोड़ी जाय या इंडियन मुजाहिदीन द्वारा बोध गया में हमला हो।
ये तथाकथित बौद्ध एक ऐसी विचारधारा के लोग हैं जो बुद्ध धर्म को एक छद्मावरण के तौर इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि हिन्दू धर्म पर हमला करतें रहें। एक समय काँचा इलैया अपने को बौद्ध विद्वान कहता था, बुद्ध के बहाने हिन्दू धर्म पर हमला करता था। आज वह बेनकाब है, उसका असली नाम काँचा इलैया शेफर्ड है, यानी क्रिप्टो-क्रिस्चियन।

अगर आप इंडोनेशिया की सैकड़ों साल पुरानी बुद्ध की मूर्तियां देखें तो पाएंगे कि बुद्ध मूर्ति में जनेऊ पहने हैं और माथे पर तिलक लगाएं हैं।
यदि हम बारीकी से देखें तो त्रिपिटक में सैकड़ो जगह वेदादिशास्त्रों के नाम आ जायेंगे। हम पूछते हैं कि वादी कितने प्रमाणों को मिलावट कहकर अपनी जान छुड़ायेंगे?
हम केवल सुत्तनिपात से ही कई प्रमाण देते हैं जहां स्पष्ट रूप से वेदादिशास्त्रों का वर्णन है।

(१):- गौतम बुद्ध कहते हैं कि वो गायत्री मंत्र जानते थे!:-

तं सावित्तिं पुच्छामि , तिपदं चतुवीसतक्खरं।।३३।।
” तुम अपने को ब्राह्मण कहते हो और मुझे अब्राह्मण कहते हो, तो तुमसे त्रिपद और चौबीस अक्षरों वाले सावित्री मंत्र को पूछता हूं।।३३।।
( सुंदरिकभारद्वाज सुत्त ३,४, पेज ११५)

(२):- प्राचीन ब्राह्मणों के धर्म के विषय में सुत्तनिपात में एक “ब्राह्मणधम्मिक सुत्त” है। इसमें गौतम बुद्ध प्राचीन ब्राह्मणों के धर्म को कहते हुये बताते हैं;-

ब्राह्मणों के पास न पशु होते थे न हिरण्य तथा धान्य
स्वाध्याय = वेदों का पाठ करना ही उनका धन धान्य था।।२।।
( ब्राह्मणधम्मिक सुत्त,२,७ पेज ७३)
बुद्ध के अनुसार पहले यज्ञ में ब्राह्मण गौ आदि पशु नहीं हवन करते थे। पर बाद में कुछ स्वार्थी लोग राजा इक्ष्वाकु के पास मंत्र रचकर गये व वेदविरुद्ध यज्ञ वेद के नाम पर किये।इसी सुत्त की २० वीं गाथा में अश्वमेध,पुरुषमेध आदि यज्ञ का वर्णन है। क्या ये यज्ञ भी बिना संस्कृत के मंत्र के होते थे?

(३):- वासेट्ठ सुत्त में बुद्ध जी एक वसिष्ठ नामक ब्राह्मण से, जोकि जन्मना जातिव्यवस्था मानता था, का खंडन किया है।
वसिष्ठ कहता है:-

हे! हम अनुज्ञात प्रविज्ञात त्रैविद्य हैं।।१।।
पद, व्याकरण और जल्प(वाद) में हम अपने आचार्य के समान हैं।।२।।
यहां त्रैविद्य का अर्थ वेदत्रयी को जानने वाला किया है।
( वासेट्ठ सुत्त, ३,९ पेज १६१)
इससे सिद्ध है कि वसिष्ठ वेदादिशास्त्र जानता था।

(४):- सेलसुत्त में शैल नामक ब्राह्मण का वर्णन है जो तीन सौ विद्यार्थियों को वेद पढ़ाता था:-

“उस समय निघंटु,कल्प,अक्षर प्रभेद सहित तीनों वेदों तथा पांचवे इतिहास में पारंगत,पदक= कवि, वैयाकरण, लोकायत शास्त्र तथा महापुरुष लक्षण में निपुण शैल नाम ब्राह्मण आपण में वास करता था….और तीन सौ विद्यार्थियों को वेद पढ़ाता था।”
( सुत्तनिपात, सेलसुत्त ३,७- पेज १४४)

(५):- वत्थुगाथा में बावरी नामक ब्राह्मण का वर्णन है। इस प्रकरण में भी तीन चार बार वेद का नाम है व संस्कृत ग्रंथों का भी:-

“तब वेदों में पारंगत ब्राह्मण शिष्यों को उसने संबोधित किया।
।।२२।।
वेदों में महापुरुष लक्षण आये हैं।।२५।।”

( वत्थुगाथा ५,१ सुत्तनिपात, पेज २५९)

भगवाव बुद्ध कहते हैं-
“तिणिस्स लक्खणा गत्ते, तिण्णं वेदान पारगू।।४४।।”

” उसकी (बावरी ब्राह्मण की) आयु सौ वर्ष है, वह गोत्र ले बावरी है… वह तीनों वेदों में पारंगत है।।४४।।
वह लक्षण शास्त्र, इतिहास, तथा निघंटु सहित कैटुभ( यानी कल्पसूत्र) को पांच सौ को पढ़ाता है।।४५।।”

( वत्थुगाथा, ५,१ पेज २६३)

निष्कर्ष- इतने सारे स्पष्ट प्रमाणों से सिद्ध है कि वेदादिक का अस्तित्व बौद्ध मत के बहुत पहले से था। यहां तक की बुद्ध जी ही वेदों को जानते थे। सभी प्रमाणों को प्रक्षेप कहना ही हास्यास्पद और दुराग्रह है।
लेखक – कार्तिक अय्यर

धन्यवाद ।
संदर्भ ग्रंथ एवं पुस्तकें;-
सुत्तनिपात- अनुवादक भिक्षु धर्मरक्षित

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betnano giriş
vdcasino
Vdcasino giriş
vdcasino giriş
ngsbahis
ngsbahis
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
kolaybet giriş
kolaybet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
casibom giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş