Categories
प्रमुख समाचार/संपादकीय

यदि आज महामति चाणक्य होते तो..भाग-2

धर्म से निरपेक्ष अर्थात धर्महीन व्यक्तियों से अमर्यादित और असंयमित आचरण की ही अपेक्षा की जा सकती है। महामति महामानव चाणक्य इन अधर्मियों पर धर्म की नकेल डालने के लिए धर्म  सभा की स्थापना कर भारत की प्राचीन परंपरा का पुन: प्रचलन कराते। इनके मानसिक पापों का प्रक्षालन कराने के लिए इन पर मानवीय मूल्यों और राष्ट्रप्रेम की उत्तुंग भावना का प्रत्यारोपण कराने के लिए धर्म की नकेल डालते। क्योंकि मानवीय मूल्य और  राष्ट्रप्रेम की उत्तुंग भावना  ये दोनों ही भारत के नेताओं के दिलो दिमाग से निकल चुकी है।

सारे राजनीतिज्ञ दंगों, लफंगों और नंगों की तिक्कड़ी को ही भारत के लिए सर्वोत्तम करार देते दीख रहे हैं। दंगों की  राजनीति, लफंगों को प्रथम नंगों के साथ गलबहियां होकर नग्न  नृत्य करना ही इनकी जीवनशैली बन गयी है। चाणक्य निश्चित रूप से इस प्रवृत्ति को राष्ट्रघाती करार देकर इसके समूल नाश के लिए आज पुन: चोटी खोल लेते। उनकी महा-मनीषा उन्हें आंदोलित कर डालती, इन  राष्ट्रद्रोहियों के आचरण को देखकर उद्घेलित कर डालती जिससे किसी शांत और एकांत स्थान में अपनी कुटिया में बैठे उस मनस्वी, तपस्वी, तप: पूत और राष्ट्रभक्त का चिंतन क्रोध की भयंकर ज्वाला के रूप में फूट पड़ता। जिसके तीव्र प्रभाव से दंगों, लफंगों और नंगों को प्रोत्साहन देने वाली सारी राजनीतिक व्यवस्था धू-धूकर जल उठती। यह भारत का परम सौभाग्य होता। तब दंगे कराकर गौरवयात्रा निकालने  वालों को गौरव यात्रा का वास्तविक अर्थ भी ज्ञात हो जाता।

आज भारत की प्रजा भयभीत है। वह लुट रही है, पिट रही है। फिर भी न तो शोर मचा रही है और न ही लूट-पीट में लगे दरिंदों के विरूद्घ चेतनित स्वर गुंजा रही है। लूटपाट में लगे ‘माननीय कर्णधार’ कह रहे हैं कि सहिष्णुता भारत की आत्मा है, पहचान है। चुपचाप लुटते पिटते रहो यही भारतीयता है। लुटने पिटने और चुप रहने का हमारा हजार वर्ष का इतिहास है उसके उदाहरण दिये जाते हैं। इन उदाहरणों से जनता को इन्होंने अपनी लूटपाट के प्रति भी सर्वथा मौन साधने के लिए विवश कर दिया है। वह कौन सी सहिष्णुता है जो भारत की आत्मा है, उसकी पहचान है? दुष्ट और पापाचारी व्यक्ति का वध करना मनु शुक्राचार्य और चाणक्य सभी ने स्वीकार किया है। कहीं भी दुष्ट के अत्याचार के प्रति चुप रहने का निर्देश हमें हमारे साहित्य में नही मिलता। स्वयं गांधीजी ने भी कहा था-’पाप से डरो पापी से नहीं’। अहिंसा के परमपुजारी गांधीजी कह रहे हैं कि पापी का तो प्रतिकार होना ही चाहिए। भारतीय मनीषा में तीन ‘अ’ से लडऩे की बात मानी गयी है। अर्थात अज्ञान, अभाव और अन्याय। अज्ञान से लडऩा ब्राह्मण का अभाव से लडऩा वैश्य का और अन्याय से लडऩा क्षत्रिय का कर्तव्य धर्म है। भारत के समाज में आज यह सारी बातें विद्यमान हैं और इनके प्रति चुप रहने, सहिष्णु रहने की बातें हमारी जनता को पढ़ायी और बतायी जा रही हैं। नहीं, हमें चुप नही रहना है। इन तीनों प्रकार के अत्याचारों के विरूद्घ हमें आवाज उठानी चाहिए। नही तो आचार्य चाणक्य के शब्दों में राष्ट्र पड़ोसी राष्ट्र का आहार बन सकता है।

‘समर शेष है नही पाप का भागी केवल व्याध,

जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।’

इन सब बातों के प्रति चुप रहना अपनी संस्कृति और प्राचीन सामाजिक व्यवस्था को लात मारना है। कोई भी जीवंत राष्ट्र ऐसा नही कर सकता। सचमुच जनता का यह तटस्थ भाव राष्ट्र को अध: पतन की ओर ले जाता रहा है।

आचार्य चाणक्य हमारे प्रधानमंत्री होते तो वह प्रत्येक वर्ण को उसके स्वाभाविक कर्म के प्रति सचेत कर उपरोक्त तीनों प्रकार की ‘अ’ के विरूद्घ आवाज उठाने के लिए ललकारते। उसके मृतप्राय शरीर में नव प्राणों को संचार करते कि उठ, जाग और लक्ष्य के प्रति समर्पित हो जा। चुप मत रह व चुप मत सह। सहिष्णुता तो नादानों के प्रति दिखायी जाती है जो स्वयं मर्यादित है, संयमित और संतुलित है। राष्ट्र घातियों, देशद्रोहियों, कत्र्तव्य विमुख जनसेवकों के प्रति कैसी सहिष्णुता? आचार्य श्री चाणक्य के यह विचार निश्चय ही भारतीय समाज को आंदोलित कर डालते। उसके आज के तटस्थता के भाव को समाप्त कराकर राष्ट्र के प्रति सजग नागरिक बनाने में जादू का सा प्रभाव दिखाते। जो स्वयं खरा होता है वही तो दूसरों को खरा बनाने का प्रयास किया करता है। शब्दजाल में वही फंसता है जो स्वयं स्पष्टवादी नही है। आज का हमारा नकारा नेतृत्व इनर सब बातों पर खरा नही उतर पा रहा है। कुछ लोगों की गौरवपूर्ण उपस्थिति आशा का संचार अवश्य करती है किंतु इसके उपरांत भी व्यवस्था अव्यवस्था में ही परिवर्तित होती जा रही है। संसद का गिरता स्तर, रोज रोज के नये नये घोटालों की गूंज सचमुच चिंता का विषय है। संसद का शाब्दिक अर्थ ध्यानशाला है। ध्यान के लिए शांत और एकांत स्थान की आवश्यकता होती है। संसद में होने वाले रोज-रोज के अभूतपूर्ण हंगामे इस शब्द की पवित्रता को ही दूषित कर रहे हैं। चाणक्य की आत्मा चीत्कार कर रही है। उसके करूण क्रंदन और चीत्कार को सुनने वाला कोई नही है। पोषक ही शोषक बन गया है। आचार्य चाणक्य जनता के तटस्थ भाव को समाप्त कराने का बीड़ा अवश्य ही उठाते।

अब बात आती है संशययुक्त निर्णयों की। राष्ट्र के समक्ष खड़ी बहुत सी समस्यायें इन संशययुक्त निर्णयों की उपज है। वोटों के खिसकने और चुनावों में पराजय का मुंह देखने का संशय सर्वोपरि है। इंदिरा गांधी के काल में राज्यों में मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों को ताश के पत्तों की भांति बदल दिया जाता था। संवैधानिक संस्थानों की गरिमा के साथ खुला खिलवाड़ किया जाता था। इंदिरा गांधी का परिवार  नियोजन कार्यक्रम एक साहसपूर्ण निर्णय था। जिसे उस समय आपातकाल में गलत ढंग से लागू किया गया। कालांतर में हमारे जेल में बंद उस समय के नेताओं ने इस निर्णय को जनता के लिए बहुत ही आततायी निर्णय सिद्घ किया और इसके विरोध को वोटों के रूप में कैश किया।

इसके पश्चात से राष्ट्र में आज तक कोई नेता इस विषय में कानून बनाने की हिम्मत जुटाने का प्रदर्शन नही कर पाया। मुस्लिम वर्ग गलत ढंग से और विकृत सोच के कारण अपनी जनसंख्या बढ़ाने पर लगा है। परिणामत: राष्ट्र में भुखमरी, अशिक्षा, बेरोजगारी, निर्धनता जैसे महारोग अपना शिकंजा कसते जा रहे हैं। इन सब व्याधियों के मूल पर प्रहार करने का साहस किसी राजनेता में नही है। जो ऐसा करेगा उसे संशय है कि विपक्ष इसके विरोध को कैश कर सत्ता पर काबिज हो जाएगा। इसलिए जनसंख्या का विषधर दूध पी-पीकर बड़ा होता जा  रहा है। यह हमें अवश्य एक दिन डसेगा।

-यहां तो मंदिर मस्जिद कैश होते हैं। उनके विषय में निर्णय नही हो पाते।

-हिंदी दिवस पर हिंदी को राष्ट्रभाषा होने का गौरव याद दिलाता जाता है।

-दो राज्य नदी जल बंटवारे को लेकर दो शत्रु राष्ट्रों की भांति लड़ते हैं।

-सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सभी सरकारें चुप रह जाती हैं। अथवा मानने तक से इन कार कर डालती हैं। संशय फिर भी कायम रहता है।

-पड़ोसी राष्ट्र घुसपैठ जारी रखता है। प्रशिक्षित आतंकवादी देश में भेजकर साम्प्रदायिक दंगे कराता है। अपनी सेना देश की सीमाओं पर लाकर खड़ी कर देता है। परमाणु बम की धमकी देता है। संशय फिर भी कायम रहता है।

अपराधियों का राजनीतिकरण हो रहा है। राजनीतिज्ञों का स्वयं का भविष्य भी संकट में है-किंतु निर्णयों के प्रति संशय यथावत है।

सचमुच यह स्थिति राष्ट्र के लिए घोर विडंबना का परिदृश्य प्रस्तुत करती है। आचार्य चाणक्य की नीतियां निश्चय ही वर्तमान नेतृत्व की नीतियों के विरूद्घ होतीं। उसकी राज्यसभा के सभासद निश्चय ही सभ्य होते। न्यायसभा और धर्मसभा के सदस्य निश्चय ही गूढ़ विषयों के परम ज्ञाता और सच्चे विद्वान होते। जो राजा को न्यायपूर्ण और धर्मसंगत निर्णय लेने के लिए प्रेरित ही नही अपितु बाध्य भी कर डालते। न्यायपूर्ण और धर्मसंगत हो। चाणक्य का राजा तो न्यायपूर्ण और धर्मसंगत ही होता। उससे धर्मनिरपेक्ष होने की बात तो सोची भी नही जा सकती थी। अपने समय के विश्व राजनेता सेल्यूकस के भारत राष्ट्र में आगमन प्रवेश और कहां कहां वह रूका इस सबकी जानकारी चाणक्य ने अपने गुप्तचरों से रखी। यद्यपि सेल्यूकस का भारत के सम्राट से वैवाहिक संबंध स्थापित था किंतु इसके उपरांत भी उसकी गुप्तचरी हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री ने की।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
betgaranti
betgaranti giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
Betgaranti Giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
bettilt giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betorder giriş
betorder giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet
kolaybet
betgaranti international
betgaranti giriş
betgaranti giriş