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बहुत ही कठिन परिस्थितियों से निकल रहे देश का बजट

नवीन कुमार पांडे

सरकार ने वित्त घाटे की भरपाई के लिए विशेष कोरोना टैक्स लगाने जैसे कदमों से भी परहेज किया है, जिसका अच्छा असर शेयर बाजारों की पॉजिटिव प्रतिक्रिया में देखा जा सकता है।

जैसी अपेक्षा थी, कोरोना महामारी से संघर्ष के इस दौर में वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य क्षेत्र को खास तवज्जो दी। हेल्थकेयर बजट 94,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.46 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। हालांकि यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस विशाल बजट राशि का इस्तेमाल किस तरह से और किन मदों में किया जाएगा। लेकिन यह बढ़ोतरी असाधारण है और इससे अंदाजा मिलता है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को प्राथमिकता से ले रही है।
जिस तरह की असामान्य चुनौतियों के बीच यह बजट आया है, उसमें स्वाभाविक है कि सरकार ने बजट संबंधी पारंपरिक मानदंडों और कसौटियों को कुछ समय के लिए दरकिनार कर दिया है। इसी का परिणाम है कि साल 2021 में वित्त घाटा 9.5 फीसदी रहने का अनुमान होने के बावजूद जल्द से जल्द इसको नीचे लाने से ज्यादा जरूरी यह माना गया कि सरकारी खर्च बढ़ाकर विकास की गति को तेज किया जाए। वित्तीय घाटे को कम करने का काम चरणबद्ध ढंग से करते हुए इसे साल 2025-26 तक चार फीसदी से नीचे लाने का लक्ष्य तय किया गया है और फिलहाल पूरा जोर इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के जरिए असेट क्रिएट करने तथा रोजगार पैदा करने पर रखा गया है।
सरकार ने वित्त घाटे की भरपाई के लिए विशेष कोरोना टैक्स लगाने जैसे कदमों से भी परहेज किया है, जिसका अच्छा असर शेयर बाजारों की पॉजिटिव प्रतिक्रिया में देखा जा सकता है। बजट भाषण समाप्त होने तक बीएसई सेंसेक्स 3.13 फीसदी और निफ्टी 3 फीसदी चढ़ चुके थे। अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए सरकार ने विनिवेश को बढ़ावा देने का इरादा जताया है। शेयरों का ऊपर की तरफ जाने का रुझान इसमें भी मददगार हो सकता है। जहां तक भारतीय बाजार के निचले हिस्से की गतिशीलता का सवाल है तो उस पर उतना जोर अभी भी नहीं दिख रहा है जितना होना चाहिए।
हालांकि बजट में छोटे उद्यमों का दायरा बढ़ाते हुए कहा गया है कि अब 50 लाख के बजाय 2 करोड़ रुपये तक की पेड कैपिटल तथा 20 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाली इकाइयों को इसमें शामिल माना जाएगा। चूंकि महामारी और लॉकडाउन का सबसे मारक असर छोटे-मंझोले उद्योगों और दुकानों पर ही पड़ा है और बाजार में दोबारा सकारात्मकता पैदा करने के लिए इनका मजबूत होना जरूरी है, इसलिए इनके पक्ष में और ज्यादा उपाय किए जाने की जरूरत है।
एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि सेक्टर का है जिस पर वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में शब्द तो बहुत खर्च किए, लेकिन जरूरी कृषि उपजों की खरीदारी के लिए जिम्मेदार फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को निवेश के एक बड़े स्रोत लघु बचत योजनाओं से दूर करके उसकी खरीद क्षमता घटा दी। तीनों कृषि कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने तात्कालिक रोक लगा रखी है, लेकिन इस कदम के जरिए सरकार ने नए कृषि कानूनों पर अमल की धमाकेदार शुरुआत कर दी है। देखें, किसान और कृषि क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले निवेशक इसे किस रूप में लेते हैं।

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