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35 साल पहले निकाह में शामिल होने कराची से आई थी यहां आकर फर्जी आधार वोटर कार्ड बनवाया और फिर बनी ग्राम प्रधान

                                  पाकिस्तानी नागरिक बानो बेग़म (साभार: hindustantimes)
नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में जगह-जगह बने शाहीन बाग़ों की सच्चाई सामने आने लगी है। चुटकी भर पैसों, बिरयानी और नाश्ते के लालच में दूध पीते बच्चों को कड़क ठंठ में बैठने वाली महिलाएं एवं इनको ये सब मुहैय्या करवाने वालों की गंभीरता से जाँच जरुरी हो गयी है। उत्तर प्रदेश के एटा के एक गांव ने शाहीन बाग़ के नाटक का भांडा फोड़ दिया है। शाहीन बाग़ का ड्रामा पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्यों को बचाने के लिए किया गया था। 

कागज निकाल कर रख लो 

न्यायालय, केंद्र एवं राज्य सरकारों को चाहिए कि शाहीन बाग़ों के आयोजन करवाने वालों और इकट्ठे हुए लोगों के बैंक खातों के साथ-साथ चल और अचल संपत्ति की गंभीरता से जाँच करनी चाहिए। बहुत हुआ गरीब, मजलूम और नासमझ का ड्रामा। इतना ही नहीं, बानो बेगम का फर्जी आधार कार्ड आदि बनाने वाले नेता एवं अधिकारियों पर भी सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। केस पुराना है, इस स्थिति में यदि वह नेता और अधिकारी जीवित हैं तो कार्यवाही में लेशमात्र भी संकोच नहीं करना चाहिए। ताकि भविष्य में होने वाले शाहीन बाग़ जैसे ड्रामों से जनता को होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिल सके। 

पाकिस्तानी महिला बानो बेग़म 35 साल पहले एक शादी में शामिल होने के लिए भारत आई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश स्थित एटा के एक गाँव की ग्राम प्रधान बन गई। वह कराची से यहाँ आई थी और फिर अख्तर अली से निकाह कर लिया। तब से वह अपने दीर्घकालिक वीज़ा की अवधि कई बार बढ़वा चुकी है।

बेगम बानो ने लड़ा था पंचायत चुनाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बानो बेग़म ने 2015 में ग्राम पंचायत चुनाव लड़ा था और उसमें जीत दर्ज की थी। उसे एटा स्थित जलेसर तहसील के गुदऊ गाँव की ग्राम पंचायत का सदस्य चुना गया था। 9 जनवरी 2020 को पूर्व ग्राम प्रधान शहनाज़ बेग़म का निधन हो गया। नतीजतन सियासी समीकरणों की वजह से बानो बेग़म को ग्राम प्रधान चुन लिया गया। इसके बाद गाँव के निवासी कुवैदान खान ने 10 दिसंबर 2019 को डिस्ट्रिक्ट पंचायत राज ऑफिसर (डीपीआरओ) आलोक प्रियदर्शी से शिकायत की।

शिकायत में उन्होंने कहा था कि बानो बेग़म पाकिस्तान की नागरिक है। इस बात के सामने आते ही पूरे गाँव में हडकंप मच गया। फिर बानो बेग़म ने ग्राम प्रधान पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने पूरे प्रकरण के बारे में ग्राम पंचायत सचिव और एटा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट सुखलाल भारती को सूचित किया। मजिस्ट्रेट सुखलाल भारती ने बानो बेग़म पर मामला दर्ज करने और जाँच शुरू करने का आदेश दिया है।

फर्जी बनवाए दस्तावेज 

जाँच के कुछ ही समय बाद यह पता चला कि बानो बेग़म भारत की नागरिक नहीं है। उसने नकली वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवाए थे। आरोपों के मुताबिक़ गुदऊ ग्राम पंचायत सचिव ध्यान सिंह ने प्रधान पद के लिए बेग़म बानो के नाम का सुझाव दिया था। उन लोगों के खिलाफ़ भी जाँच की जा रही है जिन्होंने बेग़म को नकली दस्तावेज़ उपलब्ध कराने में मदद की।

इंडिया फर्स्ट से साभार

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