हिन्दू विरोध का गढ़ बन चुका है बॉलीवुड

 

डॉ विवेक आर्य

सैफ अली खान ने आदिपुरुष के नाम से नई फ़िल्म की घोषणा की है। इस फ़िल्म की घोषणा के साथ सैफ ने यह कहा कि वो रावण के उस प्रारूप के से परिचित करवाएंगे जिससे लोग परिचित नहीं है अर्थात रावण द्वारा माता सीता के अपहरण को उचित ठहराएंगे। बॉलीवुड जिहाद से तो अब तक आप सभी लोग परिचित हो ही चुकें हैं। 1970 के दशक से पुरे 50 साल में हिन्दू विरोधी, हिन्दुओं को नकारात्मक रूप में दिखाना, हिन्दुओं के महान पूर्वजों पर कटाक्ष करना, हिन्दुओं की पूजा पद्यति का परिहास करना, हिन्दुओं की युवा पीढ़ी को नास्तिक और श्रद्धाहीन बनाना इस जिहाद का एजेंडा हैं। इस फ़िल्म का और इस कलाकार की आने वाली फिल्मों का और इस गैंग की अन्य फिल्मों का क्या हश्र करना हैं। यह आप लोग बखूबी जानते हैं।

रावण क्या था और राम जी क्या थे यह हम हिन्दुओं को बॉलीवुड नहीं सिखायेगा? यह जानने के लिए हमारे पास वाल्मीकि रामायण हैं।

रावण एक विलासी था। अनेक देश – विदेश की सुन्दरियां उसके महल में थीं। हनुमान अर्धरात्रि के समय माता सीता को खोजने के लिए महल के उन कमरों में घूमें जहाँ रावण की अनेक स्त्रियां सोई हुई थी। नशा कर सोई हुई स्त्रियों के उथले वस्त्र देखकर हनुमान जी कहते हैं।

कामं दृष्टा मया सर्वा विवस्त्रा रावणस्त्रियः ।
न तु मे मनसा किञ्चद् वैकृत्यमुपपद्यते ।।

अर्थात – मैंने रावण की प्रसुप्तावस्था में शिथिलावस्त्रा स्त्रियों को देखा है, किन्तु इससे मेरे मन में किञ्चन्मात्र भी विकार उत्पन्न नहीं हुआ। जब सब कमरों में घूमकर विशेष-विशेष लक्षणों से उन्होंने यह निश्चय किया कि इनमें से सीता माता कोई नहीं हो सकती।

श्री राम जी के बारे में वाल्मीकि रामायण कहती है-

रक्षितास्वस्य धर्मस्य स्वजनस्य च रक्षिता।
वेद वेदांग तत्वज्ञो धनुर्वेद च निष्ठित:।। -वाल्मीकि रामायण सर्ग १/१४

अपने धर्म की रक्षा करने और प्रजा पालने में तत्पर, वेद वेदांग तत्व ज्ञाता, धनुर्वेद में निष्णात थे।

बालकाण्ड में लिखा है-

धर्मज्ञ: सत्यसंधश्च प्रजानां च हितेरत:।
यशस्वी ज्ञान संपन्न: शुचिर्वश्य: समाधिमान्।।१२।।
प्रजापति सम: श्रीमान्धाता रिपुनिषूदन:।
रक्षिता जीवलोकस्य धर्मस्य परिरक्षिता।।१३।।
सर्व शास्त्रार्थ तत्वज्ञ: स्मृतिमान् प्रतिभावान्।
सर्वलोक प्रियः साधुरदोनात्मा विचक्षण:।।१५।।
सर्वदाभिगत: सद्भि: समुद्रइव सिन्धुभि:।
आर्य: सर्वसमश्चैव सदैव प्रिय दर्शन:।।१६।। -बालकाण्ड १/१२,१३,१५,१६

धर्मज्ञ, सत्य प्रतिज्ञा, प्रजा हितरत, यशस्वी, ज्ञान सम्पन्न, शुचि तथा भक्ति तत्पर हैं। शरणागत रक्षक, प्रजापति समान प्रजा पालक, तेजस्वी, सर्वश्रेष्ठ गुणधारक, रिपु विनाशक, सर्व जीवों की रक्षा करने वाले, धर्म के रक्षक, सर्व शास्त्रार्थ के तत्ववेत्ता, स्मृतिमान्, प्रतिभावान् तेजस्वी, सब लोगों के प्रिय, परम साधु, प्रसन्न चित्त, महा पंडित, विद्वानों, विज्ञान वेत्ताओं तथा निर्धनों के रक्षक, विद्वानों की आदर करने वाले जैसे समुद्र में सब नदियों की पहुंच होती है वैसे ही सज्जनों की वहां पहुंच होती है। परम श्रेष्ठ, हंस मुख, दुःख सुख के सहन कर्ता, प्रिय दर्शन, सर्व गुण युक्त और सच्चे आर्य पुरुष थे।

आनुशंस्यतनु कोश: श्रुतंशीलं दम: शम:।
राघव शोभयन्त्येते षङ्गुणा: पुरूषर्षभम्।। -अयोध्याकाण्ड ३३/१२

अहिंसा, दया, वेदादि सकल शास्त्रों में अभ्यास, सत्य स्वभाव, इन्द्रिय दमन करना, शान्त चित्त रहना, यह छ: गुण राघव (रामचन्द्र) को शोभा देते हैं।

जब भरत जी रामचन्द्र जी से चित्रकूट में मिलने आए तब उस समय रामचन्द्र जी ने उनको अथर्व काण्ड ६ मन्त्र १ तथा मनु ७/५० आदि के अनुसार आखेट, द्यूत, मद्यपान, दुराचारादि बातों का निषेध का अनमोल उपदेश दिया हैं, यह बड़े ही मार्मिक एवं प्रशंसा के योग्य हैं।

एक ओर वात्सलय के सागर, सदाचारी, आज्ञाकारी, पत्नीव्रता, शूरवीर, मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम है।
दूसरी ओर शराबी, व्यभिचारी, भोग-विलासी, अपहरणकर्ता, कामी, चरित्रहीन, अत्याचारी रावण है।

हिन्दुओं अपने धर्म ग्रंथों को पढ़ना शुरू कर दो। अन्यथा हिन्दुओं की अज्ञानता का लाभ उठाने वाले हमारे ही महान पूर्वजों के तिरस्कार से पीछे नहीं हटेंगे।

 

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