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मारे शर्म के कांग्रेस के कार्यकर्ता नहीं निकल पा रहे घर से : कपिल सिब्बल

आज कांग्रेस में मच रहे कोहराम का कारण है कि पार्टी को देखने वाला कोई पूर्णकालीन अध्यक्ष का नदारत होना। इस समय कांग्रेस की वही स्थिति है जो बेलगाम घोड़े की होती है। कल तक परिवार के इशारे पर ही बोलने वाले अप्रत्यक्ष रूप से परिवार के ही विरुद्ध उठ खड़े हुए हैं। जो अच्छे संकेत नहीं हैं। जैसाकि अनुमान लगाया जा रहा था कि 2024 चुनावों तक कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो सकती है। इतनी पुरानी पार्टी का इतने लम्बे समय तक कोई अध्यक्ष नहीं। परिवार किसी अन्य के हाथ पार्टी सौंपना नहीं चाहती। अगर चाह भी रही हो, रिमोट अपने ही हाथ में रखना चाहती है, जो किसी को पसंद नहीं। यदि समय रहते नहीं सूध नहीं, कांग्रेस की रही सही पहचान भी नहीं रहेगी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी में अपनी आवाज़ उठाने के लिए कोई मंच ही नहीं है, क्योंकि वो कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने अपने उस बयान से सहमति जताई, जिसमें उनका कहना था कि देश में कांग्रेस अब भाजपा के सामने एक प्रभावशाली विपक्ष नहीं है।

‘इंडिया टुडे’ के राजदीप सरदेसाई के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आप एक प्रभावशाली विकल्प कैसे बन सकते हैं, जब आपके पास पिछले 18 महीनों से कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष तक नहीं है और पार्टी में इसे लेकर कोई विचार-विमर्श ही नहीं हुआ है कि चुनाव में हार क्यों हो रही है। उन्होंने साफ़ किया कि वो गाँधी परिवार के खिलाफ बगावत नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी की भी आलोचना की, जिन्होंने उन्हें नसीहत दी थी।

उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को सलाह दी कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आ रहे हैं और उन्हें ये साबित करने के लिए मेहनत करना चाहिए कि राज्य में कांग्रेस एक ताकत है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टार प्रचारकों की सूची में भी उन्हें शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस कार्यकर्ता घर से भी नहीं निकल सकते, क्योंकि उनसे पूछा जाता है कि आपकी पार्टी को क्या हो रहा है?

उन्होंने पूछा कि आम कार्यकर्ताओं की भावनाओं का क्या? उन्होंने कहा कि उनकी भावनाओं को तो ठेस पहुँची ही है, साथ में कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं के साथ भी यही हुआ है। उन्होंने कहा कि वो जानते हैं कि एक दिन में बदलाव नहीं हो सकता, लेकिन हम 2014 हारे और 2019 भी हारे। उन्होंने दावा किया कि वो किसी को चुनौती नहीं दे रहे, लेकिन हमें बाहर निकल कर जनता को कांग्रेस की विचारधारा के बारे में बताना होगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वो कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव की माँग कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि जब राहुल गाँधी ही कह रहे हैं कि वो पार्टी का अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते, तो फिर नेतृत्व में बदलाव की माँग करने के आरोप उन पर कैसे लगाए जा सकते हैं? उन्होंने कहा कि लोग अभी भी राहुल गाँधी की ओर देख रहे हैं, क्योंकि ये सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि देश को भी ‘चंद लोगों से’ बचाना है, लोकतंत्र को बचाना है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी वफादारी किसी खास व्यक्ति के प्रति नहीं, बल्कि देश के लिए है। उन्होंने ऐलान किया कि वो तब तक सवाल उठाना बंद नहीं करेंगे, जब तक विचार-विमर्श और संवाद शुरू नहीं हो जाता। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी को सलाह दी कि वो उनकी चिंता छोड़ कर पश्चिम बंगाल की चिंता करें। उन्होंने अशोक गहलोत को भी सलाह दी कि वो कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं की चिंता करें।

उधर पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भी कहा कि कांग्रेस के नीतिगत ढाँचे की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी के प्रदर्शन में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट ही आई है। उन्होंने सलाह दी कि कांग्रेस को इतना साहसी बनना होगा कि गिरावट के उन कारणों को पहचाने और उन पर काम करे।चिदंबरम ने कहा कि उपचुनाव इस बात प्रमाण हैं कि कांग्रेस की संगठनात्मक दृष्टिकोण से कोई पकड़ नहीं रह गई है। इतना ही नहीं जिन राज्यों में उपचुनाव हुए हैं, उनमें कांग्रेस कमज़ोर ही हुई है।

सिबल, आज़ाद, चिदंबरम मुद्दे की बात करो -कांग्रेस जमीनी स्तर पर ख़त्म क्यों हुई
सिबल, आज़ाद और चिदंबरम ने कि कांग्रेस की गिरती हुई साख के लिए पार्टी में परिवर्तन होने चाहिए। मगर जब गाँधी परिवार के खिलाफ बोलने की बात हो तो जुबान हकला जाती है। उस पर कहते हैं कि उन्हें सोनिया और राहुल गाँधी से कोई शिकायत नहीं है। सलमान खुर्शीद की “देश की माँ” के खिलाफ नहीं बोल सकते।
ये लोग पार्टी में इतने ताकतवर नहीं हैं जो गाँधी परिवार के खिलाफ सीधी आवाज़ उठा सकें। अभी तक ये लोग किसी ऐसे मुद्दे की बात नहीं कर रहे जो इनकी नज़र में कांग्रेस के ऐसे पतन का कारण हो जिसकी वजह से कांग्रेस जमीन से कट गई है।
इसलिए कट रही है कांग्रेस जमीन से —
ये लोग पहले खुद आत्ममंथन कर बताएं कि कांग्रेस के 10 साल के शासन में भाजपा शासित 19 राज्यों में कितने ऐसे थे जिन्होंने CBI के लिए अपने दरवाजे बंद किये थे। हो सकता है, इक्का दुक्का राज्य रहे हों मगर आज तो कांग्रेस और विपक्ष के सभी राज्य फैशन की तरह CBI पर रोक लगा रहे हैं। कांग्रेस इस तरह देश में क्या करना चाहती है। कुछ सोंचा, इसलिए कट रही है पार्टी जमीन से क्योंकि छवि धूमिल हो रही है।
भाजपा के कितने राज्यों ने केंद्रीय कानूनों को मानने से मना किया और अपने ही कानून बनाये थे। जबकि केंद्र में भाजपा के रहते आपकी और आपने जोड़ीदार दलों की सरकारें केंद्रीय कानूनों को मानने से साफ़ इंकार ही नहीं कर रही बल्कि अपने खुद के राज्यों के कानून बना रहे है।
9 राज्यों ने CAA / NRC को क्रियान्वित करने से मना कर दिया जबकि NRC के बारे में अभी कानून बना ही नहीं। संसद द्वारा पास किये गए कानून को ना मानना किस तरह संविधान के संघीय चरित्र के अनुरूप है, जरा अपनी पार्टी को ज्ञान दीजिए।
इतना ही नहीं, सोनिया गाँधी ने खुद कांग्रेस राज्यों से कहा कि केंद्र के कृषि कानूनों को नकारने के लिए अपने ही कानून बनाएं।
इनके अलावा भी अनेक कुकर्म हैं कांग्रेस के जिनकी वजह से कांग्रेस जमीन से ही लुप्त होती जा रही है। CBI के लिए अपने दरवाजे बंद करने वाले राज्यों की आबादी 30% है जिसका मतलब कांग्रेस ने देश के 30% लोगों को देश की मुख्यधारा से अलग कर दिया है।
कांग्रेस कुछ समय पहले तक राज्यसभा में ऐसी स्थिति में थी कि मोदी सरकार के हर विधेयक पर अपनी धौंस दिखाती रही। आज कांग्रेस ऐसी स्थिति में है कि वो बस हर विधेयक को पास होते देखती रहेगी। कितने विधेयकों को संसद से पास होने के बाद आपके राज्य रोकेंगे -रोकिये, जिस हाल में आज पहुंचे हो, उससे भी बदतर हाल में पहुँच जाएगी पार्टी।
अभी 370 लाने के लिए पाकिस्तान का एजेंडा पूरा करने वालों के साथ खड़े रहो,और नगरोटा में पाकिस्तानी आतंकी हमले पर चुप बैठे रहो। और खड़े हो जाओ “लव जिहाद” करने वालों के साथ -फिर देखो क्या दुर्दशा होती है अभी कांग्रेस की।

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