कोरोना की काली छाया और मांगलिक कार्यक्रम

 

_-राजेश बैरागी-_

कल एक लग्न-सगाई कार्यक्रम में गया। मेजबान ने शहर के सबसे अच्छे बैंक्वेट हॉल में आयोजन किया था।सौ लोगों की सीमित संख्या का आदेश भी नहीं आया था परंतु समारोह से हर्ष उल्लास लापता था। थोड़ा सहज अनुभव कर रहे शासन प्रशासन की पेशानी पर फिर बल पड़ने लगे हैं। दिल्ली में 87 प्रतिशत आइसीयू व 92 प्रतिशत वेंटिलेटर बिस्तरों पर कोरोना पीड़ितों का कब्जा है। वैक्सीन आने की उम्मीदों के बीच कोरोना एक बार फिर से विकराल हो चला है। एक ओर अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने की विवशता है तो दूसरी ओर महानगरों में रात्रि कालीन कर्फ्यू लगाये जा रहे हैं और फिर से लॉकडाउन लगने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

चिकित्सकों का दावा है कि कोरोना की यह लहर पहले की अपेक्षा अधिक खतरनाक है। इस समय कोरोनावायरस तेजी से फेफड़ों को नुक्सान पहुंचा रहा है। मेरीलैंड यूनिवर्सिटी में सेवा दे रहे पाकिस्तानी डॉ फहीम युनुस कोरोना के खतरे को बड़ा तो नहीं मानते परंतु उनके अनुसार कोरोना से जल्द छुटकारा पाने की छटपटाहट से हालात बिगड़ रहे हैं।कोरोना के साथ जीना है-वह कहते हैं। इस बीच सपा सांसद रामगोपाल यादव के नेतृत्व वाली संसदीय समिति ने कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पतालों द्वारा लूट मचाने के आरोपों की पुष्टि की है। क्या कोरोना आपदा को कुछ लोग अपनी जेबें भरने के अवसर में बदल रहे हैं? निश्चित ही कोरोना से मौत का भय उतना नहीं है जितना निजी अस्पताल में भर्ती होने का भय है। इसलिए नाक मुंह ढंक कर रहना और शारीरिक दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी है अन्यथा निजी अस्पताल तो आपकी प्रतीक्षा कर ही रहे हैं।

 

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