Categories
राजनीति

नीतीश तो हार कर भी ‘जीत’ गए पर सोनिया का तो ‘चिराग’ ही बुझ गया

बिहार चुनाव परिणाम मेरी दृष्टि में हारे तो सिर्फ नीतीश और सोनिया हैं। लगभग सभी राजनीतिक विश्लेषकों ,पंडितों, महाघाघ पंडितों, ‘प्री पोल’ और ‘पोस्ट पोल’ के हवा-हवाई वैज्ञानिकों एवं मोदी विरोध के लिए ही जीवित रह रहे स्वनामधन्य महानुभावों के अनुमान, भविष्वाणी तथा मनगढ़ंत सारे कयासों पर अस्वीकृति का ठप्पा लगते हुए बिहार की जनता ने हाल में संपन्न हुए बिहार विधानसभा के चुनावों में एनडीए गठबंधन (मोदी-नीतीश) को ही निरंतरता देने का जनादेश दिया। 

7 नवम्बर को तीसरे चरण का मतदान होने के साथ ही ‘इडियट बॉक्स’ में प्रसारित सभी चुनावी सर्वेक्षणों में बिहार में लालटेन युग आने की पुरजोर दलीलें दी गई थीं। अधिकांश चुनावी सर्वेक्षणों और हवाई दलीलों में इस बार सत्ता की चाबी महागठबंधन (लालू सुपुत्र एवं इनके सहयोगी दल) के पास होने की पुष्टि की गई। पटना में तेजस्वी यादव के राज्यारोहण की भविष्वाणी ही नहीं वरन ‘वर्चुअल’ बिसात ही बिछा दी गई।

एक-दो अथवा तीन-चार ही नहीं अपितु सभी मीडिया हाउस और सारे सर्वेक्षण (पोस्ट पोल) महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने की ढींगे हाँक रहे थे। 243 सदस्यीय बिहार विधान सभा में बहुमत की लक्ष्मण रेखा छूने के लिए आवश्यक संख्या 122 ही पर्याप्त थी या कहिए है लेकिन कुछेक ‘पोस्ट पोल’ तो महागठबंधन को 170 स्थानों में जीत मिलने की संभावना व्यक्त कर रहे थे। दस नवंबर को मत गणना प्रारम्भ होती है।

प्रारंभिक काउंटिंग में महागठबंधन लीड करता है। ‘पोस्ट पोल’ वालों की पता नहीं क्या फूलकर क्या हो जाती है! फिर 2-3 घंटों में तस्वीर बदल जाती है। एनडीए ‘लीड’ करने लगता है लेकिन शाम होते-होते भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है। एनडीए 123-125 में चल रहा होता है तो महागठबंधन 107-110 की ताकत से पीछा कर रहा होता है। शाम 7 बजे तक यही रसाकस्सी चलती है। ऐसी परिस्थिति में कुछ भी अनुमान लगाना आसान नहीं था।

ऊँट किसी भी करवट बैठ सकता था। अब ऊँट किस करवट बैठेगा कौन कहे? असमंजस का प्रमुख कारण मतगणना हो रही 26 सीटों से बनी हुई थी। इन सीटों पर अग्र स्थान में चल रहे प्रत्याशी अपने निकटतम प्रतिस्पर्धी से हज़ार से भी कम वोटों से ही आगे चल रहे थे। फासला अधिक नहीं था। यह 26 सीट किसी भी गठबंधन के पार्टी कार्यालय में चल रही तैयारियों में ग्रहण लगाने के लिए पर्याप्त थी। टेलीविजन में बैठे नाना विश्लेषक और ‘ऐंकर’ बार-बार दोहरा रहे थे ‘पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त’! हाँ, यह सही भी था।

हज़ार से भी कम मत अंतर से मत गणना हो रही इन 26 सीटों के अंतिम परिणाम से ही स्पष्ट होना था कि नीतीश का तीर लक्ष्य भेदन करेगा या कि वर्षों से किसी कोने में पड़ी लालटेन फिर रौशन हो उठेगी। दोनों ही संभावनाओं के द्वार चरमराए नहीं थे। देर रात गए ही पिक्चर पूरी हो पाई। सभी परिणाम घोषित हुए। बिहार की जनता ने नीतीश की अगुवाई वाले एनडीए को स्पष्ट बहुमत का आँकड़ा पार कराते हुए 125 स्थानों में विजय का अनिवर्चनीय स्वाद चखने का अवसर दिया था।

जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया है। उनके अतिरिक्त बिहार की जनता ने सौ वर्ष पुरानी कॉन्ग्रेस को भी ‘अब न हम मिलेंगे दुबारा’ बोल दिया। कल की ही तो बात है। 2015 के चुनाव में 71 तीर लक्ष्य भेदन में सफल हुए थे नीतीश बाबू। पिछली विधान सभा में नीतीश का संख्या बल 71 हुआ करता था। लेकिन इस बार उन्हें और उनके दल को 28 सीटों का नुकसान हुआ। विधान सभा में उनकी सदस्य संख्या सिर्फ 43 रह गई। दल गत आधार के अनुसार जेडीयु विधान सभा का तीसरे नंबर के दल में खिसक गया। अब यह दूसरी बात है कि गठबंधन राजनीति के चलते भले ही जनता द्वारा अवमानित नीतीश फिर मुख्यमंत्री बन जाएँ।

इसी प्रकार सोनिया-राहुल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस के पास पिछली विधान सभा में 27 सीट हुआ करती थी। इस बार के चुनाव में माँ-बेटे का दल 27 में से 8 गवाँ 19 में सिमट गया। वास्तव में बिहार के नए जनादेश ने नीतीश और सोनिया को पराजय का दर्पण दिखाया है। रही बात इस चुनाव में जीत किसकी हुई?

तमाम प्रगतिशील, धर्म निरपेक्ष, वामपंथी, हिन्दू विरोधी, धर्म धुंधकारी, मौका परास्त, बुद्धिहीन, अविवेकी एवं सभी प्रकार की निम्न मानसिकता, कुंठा एवं क्षुद्रताग्रस्त मित्रवर्गों की कुशल क्षेम चाहते हुए स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मित्रों इस बार बिहार की जनता ने आपके साथ छल करते हुए आपके ‘परमानेंट’ रिपु मोदी के गले में 74 कमल पुष्पों की माला डाल दी। हरजाई जनता ने पिछली बार के 53 कमल पुष्पों में देखिए तो ‘आपकी विचारधारा के प्रतिकूल सनातन परम्परा अपनाते हुए’ 21 शुभ संख्या की वृद्धि कर नवीन कमल पुष्प खिला दिए।

सीट बढ़ानी थी तो 22 बढ़ाते 19 बढ़ाते, किसी अन्य संख्या में बढ़ाते 21 ही क्यों बढ़ाई? व्यक्तिगत रूप से देखा जाए तो बिहार के इस चुनाव ने लालू के सुपुत्र तेजस्वी यादव को परिपक्व राजनीतिज्ञ बना दिया। तेजस्वी बिहार के राजनैतिक पटल में सशक्त रूप से स्थापित हो गए।

तेजस्वी के नेतृत्व में महागठबंधन के सबसे बड़े दल राजद ने 75 स्थानों में लालटेन जला दी। वैसे तो इस संख्या में पहले की अपेक्षा 5 सीटों की कमी हुई है। लेकिन याद रखना होगा 2015 के चुनाव में तेजस्वी यादव नीतीश के नेतृत्व में महागठबंधन का हिस्सा थे। इस बार तेजस्वी ने अपने ही बलबूते 75 सीट जीत राजद को बिहार का सबसे बड़ा दल बना दिया। आने वाले वर्षों में तेजस्वी बिहार की राजनीति के महत्वपूर्ण और मजबूत केंद्र बनेंगे, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

इस चुनाव की सबसे रोचक बात तो यह रही कि सत्तापक्षीय गठबंधन और प्रमुख प्रतिपक्षीय गठबंधन की विधान सभा में उपस्थिति ज्यो की त्यों रही। चुनाव पूर्व भी सत्ताधारी के पास विधान सभा में 125 का संख्या बल था और विपक्ष के पास 110 का। नए जनादेश ने भी यही मंजर बनाया। नई विधान सभा में भी दोनों की उपस्थिति इतने ही नम्बरों के साथ होगी। अब आप इसे सहज पचाएँ या पचाने के लिए कोई बाहरी सहायता लें, बात तो ‘क्लियर’ है, बिहार चुनाव में मोदी का जादू चला है अन्यथा तेजस्वी के आगे नीतीश का तरकश खाली हो चुका था।

इसमें कोई शक अथवा किन्तु-परन्तु की गुंजाईश नहीं कि नीतीश बाबू को बिहार की जनता ने बोल दिया – हाथ कंगन को आरसी क्या, नीतीश बाबू पढ़े-लिखे को फारसी क्या? (आरसी को यहाँ आइना के सन्दर्भ में ले)। अभी से समझ लें तो बेहतर होगा नीतीश बाबू! अब आपका राजनीतिक भविष्य बिहार की प्रांतीय राजनीति में समाप्ति की ओर कूच कर चुका है।

अपना राजनीतिक भविष्य अब पटना छोड़ दिल्ली में तलाशना ही एक मात्र विकल्प बचा है आपके पास। इतना तो तय है, शिव सेना और अकाली दल के जाने के बाद भाजपा नीतीश के साथ किसी प्रकार की गुस्ताखी अथवा बेदिली दिखाने का साहस नहीं करेगी। भाजपा नीतीश को उनका मन चाहा पद देने के लिए बाध्य है और रहेगी।

नीतीश चाहे बिहार का सिंहासन माँगें, भाजपा देगी। अथवा वह पटना छोड़ दिल्ली का रुख करें तो भी उन्हें उच्च सम्मान सहित बड़ी जिम्मेदारी मिल जाएगी। नवंबर महीने में बिहार विधान सभा के साथ ही भारत के अन्य कई राज्यों में रिक्त हुई विधान सभा के लिए भी चुनाव हुए। सभी के परिणाम आ चुके हैं। इन परिणामों ने निःसंदेह भाजपा समर्थकों में दिवाली धूमधाम से मनाने की हौसला अफजाई की है। ‘मोदी है तो मुमकिन है’ एक बार फिर प्रमाणित हुआ है।

छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखण्ड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड, उड़ीसा, तेलांगाना और उत्तर प्रदेश की 59 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 40 स्थानों पर अपना परचम फहराया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 7 में से 6 सीटें, तेलंगाना की 1 में 1, मणिपुर की 5 में 4, मध्य प्रदेश की 27 में 19, कर्नाटक की 2 में 2 और गुजरात की 8 में आठों सीटों पर जीत हासिल की है।

बिहार ही नहीं, इन राज्यों के चुनाव परिणाम ने भारतीय जनमानस में मोदी का ‘मैजिक’ यथावत रहने की पुष्टि की है। अरबों जनसंख्या वाले विशाल भारत देश में कोरोना कहर के चलते करोड़ों लोगों ने जीवन में कभी न देखे, न सुने, न भोगे असहनीय पीड़ा, दुःख, संताप, अभाव के साथ सभी किस्म की तकलीफें और बाधा व्यवधान झेले। अमेरिका में कोरोना के चलते राजनीतिक दृश्यावली बदल गई। भारत में हाल में संपन्न हुए चुनाव के परिणामों ने कोरोना कहर के दौरान मोदी सरकार के द्वारा किया गया आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को जनता ने हृदय से स्वीकार किया, ऐसा समझना क्या गलत होगा?

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino
vdcasino
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
meritbet
meritbet
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş