Categories
उगता भारत न्यूज़

राजग को सत्ता से बाहर ( ?) करता तेजस्वी यादव का जादू

देवेंद्र सिंह आर्य ( चेयरमैन ‘उगता भारत’ )

लगता है बिहार में एनडीए के दिन लद चुके हैं। नीतीश कुमार ने अपने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में जब यह कहा कि यह उनके जीवन का अंतिम चुनाव है तो उस समय ही कुछ आभास हो गया था कि वह पराजय का आभास कर चुके हैं ।अब उसके बाद जो चुनावी एग्जिट पोल आए हैं उसके अनुसार तेजस्वी यादव का जादू चलता हुआ दिखाई दे रहा है। यदि ऐसा होता है तो निश्चय ही लालू प्रसाद यादव के दिन फिरने वाले हैं । परंतु इस सबके उपरांत यह भी मानना होगा कि तेजस्वी यादव ने अपनी जुबान फिसलने नहीं दी। उन पर प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार ने चाहे जो आरोप लगाए हैं या उनका चाहे जैसे मजाक उड़ाया हो पर तेजस्वी यादव यादव ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए सम्मानित शब्दों का प्रयोग करने का प्रयास किया। जिससे उनकी छवि एक गम्भीर राजनीतिज्ञ के रूप में बनी। उन्होंने अपनी कार्यशैली से यह आभास कराया कि वह अपने पिता और मां के पदचिन्हों पर नहीं चल रहे हैं बल्कि एक नई इबारत लिख रहे हैं।

 


लगता है उनकी गंभीरता का जनता पर सीधा प्रभाव पड़ा और अब इस बार वह राजग के लिए एक मजबूत चुनौती के रूप में उभर कर सामने आ रहे हैं। यदि एग्जिट पोल सही निकलते हैं तो यह भी मानना पड़ेगा कि राजग को सत्ता से बाहर करने में जहां तेजस्वी यादव का जादू काम कर रहा है वही चिराग पासवान की अल्हड़ राजनीति भी इसके लिए जिम्मेदार होगी। जिन्होंने सचमुच ‘राम’ के पास रहकर ही ‘अयोध्या’ में आग लगाने का काम किया।
तीसरे और आखिरी चरण में 15 जिलों की 78 सीटों पर शनिवार को मतदान के साथ ही बिहार विधान सभा चुनाव संपन्न हो गए. अब 10 नवंबर को आने वाले नतीजों का इंतजार है. एग्जिट पोल में तेजस्वी नीत महागठबंधन सबसे बड़े गठबंधन के तौर पर उभरता दिख रहा है लेकिन असली खेल 10 नवंबर को पता चलेगा, तब तक राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भविष्य ईवीएम में कैद हो गया कि वो चौथी पारी खेल पाएंगे या  नहीं? महागठबंधन की अगुवाई कर रहे और राजद नेता तेजस्वी यादव के भविष्य की दिशा और दशा भी ईवीएम में कैद है. चिराग पासवान के एकला चलो दांव के बाद उनकी सियासी पकड़ कमजोर होती है या मजबूत, इस पर से भी 10 नवंबर को तब पर्दा उठेगा, जब चुनाव के नतीजे आएंगे.

इस बीच, महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और राज्य के बड़े नेता लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने चुनावों में न केवल युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाई और पूरे चुनाव आकर्षण का केंद्र बने रहे बल्कि उन्होंने विपक्षी स्टार प्रचारकों- आकर्षक और दमदार छवि वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विकासपुरुष की छवि गढ़ने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार- को विकास के मुद्दों से हटाकर व्यक्तिगत आरोपों का तीर चलाने और कीड़ उछालने पर मजबूर कर दिया.

तेजस्वी की चुनावी रैलियों में उमड़ती भीड़ और राज्य के युवाओं में बेरोजगारी पर उपजा नीतीश सरकार के खिलाफ असंतोष देखकर ही चुनाव के पहले चरण के दिन अपनी चुनावी सभा में पीएम मोदी ने तेजस्वी को ‘जंगलराज का युवराज’ कह डाला. पीएम मोदी ने लालू-राबड़ी शासनकाल को जंगलराज कहकर मतदाताओं को एक तरह से तेजस्वी के खिलाफ भड़काने की कोशिश की. एक तरह से कहें तो पीएम ने तेजस्वी के सामने अपने विकास रूपी हथियार का समर्पण कर दिया.

सीएम नीतीश कुमार ने भी तेजस्वी के 10 लाख नौकरियों के वादे को उलूल-जुलूल करार दिया लेकिन उनके गठबंधन की सहयोगी पार्टी बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में तेजस्वी की काट के तौर पर 19 लाख रोजगार की बात कही. उससे पहले राज्य के डिप्टी सीएम सुशील मोदी नीतीश के सुर में सुर मिलाकर पूछ रहे थे कि पैसा कहां से आएगा? लेकिन बीजेपी ने जल्द ही इस पर अपना स्टैंड बदल लिया और रोजगार का वादा करने वाले घोषणा पत्र की लॉन्चिंग के लिए सीधे देश की खजाना मंत्री को उतार दिया।

चुनाव की सुगबुगाहट होने से लेकर पहले चरण के मतदान के एक-दो दिन पहले तक भाजपा के नेतागण और खुद नीतीश कुमार तेजस्वी को 31 साल का नौसिखिया और अनुभवहीन नेता करार दे रहे थे लेकिन जैसे ही ईवीएम का बटन दबाने की तारीख नजदीक आई, सभी विपक्षी नेताओं को अपनी राजनीतिक रणनीति में परिवर्तन करना पड़ा. जब तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली तब पीएम मोदी ने व्यंग्य कसा कि जैसे यूपी में दो युवराजों का बुरा हाल हुआ, वैसा ही बिहार में होगा. शायद पीएम की बात का रंग मतदाताओं पर न चढ़ा हो, इसलिए पीएम मोदी को अंतिम चुनावी रैलियों में हिन्दूवादी एजेंडे को आत्मसाथ करना पड़ा और सहरसा की रैली में जयश्री राम और भारत माता की जयकारे लगवाए.

बीजेपी ने आखिरी दौर में ध्रुवीकरण के लिए योगी आदित्यनाथ को भी उतारा, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण का श्रेय पीएम मोदी को देकर हिन्दू अस्मिता को जगाने की कोशिश की. साथ ही नागरिकता संशोधन कानून पर बयान देकर हिन्दू वोटरों को लुभाने की कोशिश की.  सीएम नीतीश कुमार को भी पूर्णिया के धमदाहा में अपनी अंतिम चुनावी सभा में इमोशनल कार्ड फेंकना पड़ा और उन्होंने इसे अपने जीवन का अंतिम चुनाव करार दिया।

अगर तेजस्वी की रैलियों में उमड़ी भीड़, युवाओं का समर्थन, 10 लाख नौकरियों का वादा और चुनावी जातीय कार्ड ने रंग दिखाया तो उनके लिए एक अन्ने मार्ग (सीएम हाउस) का रास्ता प्रशस्त हो सकता है लेकिन अगर चिराग और पप्पू यादव या उपेंद्र कुशवाहा के गठबंधन ने चुनाव त्रिकोणात्मक किया और उसके नतीजे त्रिशंकु हुए तब तेजस्वी को असल अग्निपरीक्षा देनी होगी.

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betparibu giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
betmarino giriş
betmarino giriş
betmarino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş