आइए जाने – सभ्यता-संस्कृति की अग्रदूत माँ गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के उपाय

images (13)

सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार

गंगा नदी में प्रदूषण को कम करने के लिए 1985 में गंगा कार्य योजना (जीएपी) का शुभारंभ किया गया था। किंतु 15 वर्ष की अवधि में 901.77 करोड़ रुपए व्यय करने के बाद भी नदी में प्रदूषण कम करने में यह योजना विफल साबित हुई।

भारत वर्ष में गंगा नदी की महिमा का अद्भुत वर्णन मिलता है। देश-विदेश में संतगण सदैव इसका बखान करते हैं। जनमानस में भगवान श्रीराम के समतुल्य इस पतित पावन नदी को भी लोकप्रियता हासिल है। गंगा एक जीवन दर्शन है। यहां की सभ्यता-संस्कृति में वह रची बसी है। इसके जल के बिना सनातन धर्म के किसी अनुष्ठान की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। गंगा नदी उत्तर भारत से पूर्वी भारत को जोड़ती है। यह नदी भारत में 2,071 किलोमीटर तक बहते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करके अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से उर्वर यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। लगभग 3 किलोमीटर चौड़ी और 100 फीट यानी 31 मीटर की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारत में बेहद पवित्र मानी जाती है तथा इसकी उपासना माँ और देवी के रूप में की जाती है।

भारतीय पुराण और साहित्य के अपने सौंदर्य और महत्व हैं, जिसके कारण बार-बार आदर पूर्वक वंदित गंगा नदी के प्रति विदेशी साहित्य में भी प्रशंसात्मक और भावुकता पूर्ण वर्णन किए गए हैं। हिंदू धर्म में कहा जाता है कि यह नदी श्रीविष्णु भगवान के चरणकमलों से (वैष्णवों की मान्यता के अनुसार) अथवा श्रीशिव की जटा से (शैवों की मान्यता के मुताबिक) बहती है। गंगा नदी की प्रधान शाखा भागीरथी है, जो उत्तराखंड स्थित कुमायूं में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनदी से निकलती है। इस नदी की तुलना मिस्र की नील नदी के महत्व से की जाती है।

इस पवित्र पावन नदी में मछलियों तथा सर्पों की अनेक प्रजातियां पाई ही जाती हैं। मीठे पानी वाले दुर्लभ डॉल्फिन भी यहां पाए जाते हैं। यह कृषि, पर्यटन, खेल तथा उद्योगों-कारोबारों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। भले ही गंगा को पवित्र नदी माना जाता है। लेकिन मौजूदा पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित रासायनिक कचरे, नाली के पानी और मानव-पशुओं की लाशों के अवशेषों से यह भरी हुई है। बहरहाल, इस गंदे पानी में सीधे नहाने से अथवा इसका जल पीने से स्वास्थ्य संबंधी बड़े खतरे हैं। क्योंकि इसकी पहचान दुनिया की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में से एक के रूप में की गई है। उदाहरणतया, हरिद्वार में गंगा जल में 55 सौ से अधिक कोलिफॉर्म है, जबकि कृषि के लिए अर्थात् डी श्रेणी के लिए मानक 5000 से कम कोलिफॉर्म हैं। एक अध्ययन के अनुसार, गंगा में कोलीफॉर्म के उच्च स्तर का मुख्य कारण इसके गौमुख में शुरुआती बिंदु से ऋषिकेश के माध्यम से हरिद्वार में पहुंचने तक मानव मल-मूत्र और मल-जल का सीधा निपटान नदी में ही किया जाता है।

भारत की सबसे पावन नगरी वाराणसी में कोलिफॉर्म जीवाणु गणना, संयुक्त राष्ट्र संघ नियंत्रित विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्थापित सुरक्षित मानक से, कम से कम 3000 गुना अधिक है। पर्यावरण जीव विज्ञान प्रयोगशाला, प्राणी विज्ञान विभाग, पटना विश्वविद्यालय द्वारा किये गए एक अध्ययन में वाराणसी शहर में गंगा नदी में पारे की उपस्थिति पाई गई है। यहां नदी के पानी में पारे की वार्षिक सघनता 0.00023 पीपीएम थी। इन सबका असर यह है कि भारत के सबसे मूल्यवान संसाधनों में से एक गंगा नदी की क्रमिक हत्या हो रही है। बता दें कि गंगा की मुख्य सहायक नदी यमुना का एक खंड कम से कम एक दशक तक जलीय जीव विहीन रहा है।

गंगा नदी में प्रदूषण को कम करने के लिए 1985 में गंगा कार्य योजना (जीएपी) का शुभारंभ किया गया था। किंतु 15 वर्ष की अवधि में 901.77 करोड़ रुपए व्यय करने के बाद भी नदी में प्रदूषण कम करने में यह योजना विफल साबित हुई। भले ही 1985 में शुरू किए गए गैप-चरण-1 की गतिविधियों को 31 मार्च 2000 को बंद घोषित कर दिया गया। लेकिन बाद में गठित राष्ट्रीय नदी संरक्षण प्राधिकरण की परिचालन समिति ने गैप की प्रगति और गैप-चरण-1 से सीखे गए सबक तथा प्राप्त अनुभवों के आधार पर कतिपय आवश्यक सुधारों की समीक्षा की। जिससे पता चला कि इस योजना के अंतर्गत 200 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। फिर भी प्रदूषण स्तर कम करने में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2019 में गंगा नदी की सफाई के लिए विश्व बैंक एक अरब डॉलर उधार देने पर सहमत हुआ। यह धन भारत सरकार की 2020 तक गंगा में उपस्थित अवशिष्ट का अंत करने की पहल का हिस्सा है। दरअसल, समस्या की जानकारी हो जाने पर उसका समाधान निकालना आसान हो जाता है। यही वजह है कि उपर्युक्त विवेचना के आधार पर कतिपय प्रयासों के माध्यम से पतित पावनी गंगा को प्रदूषण मुक्त और निर्मल बनाया जा सकता है। ऐसा करना जन उपयोगी भी होगा।

सर्वप्रथम, हमें यह तय करना होगा कि किसी भी कीमत पर मलजल और उद्योगों का गंदा पानी गंगा में नहीं जा पाए। इसके लिए कानपुर, इलाहाबाद, बनारस, पटना, भागलपुर इत्यादि बड़े शहरों में बड़ा ड्रेन बनाया जाए, जिसमें वाहित मल और औद्योगिक कचरा युक्त जल का ट्रीटमेंट व रिसाइकिल कर उस जल को कृषि कार्य के उपयोग में लाया जाए। दूसरा, पूजा-पाठ की जो सामग्री धार्मिक आस्था के कारण गंगा में विसर्जित की जाती है, उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही धार्मिक आस्था के मद्देनजर छोटे-छोटे स्ट्रेच बनाये जाएं, जिसमें धार्मिक सामग्री को विसर्जित किया जा सके। इस स्ट्रेच का उपयोग थोड़ा आगे बढ़कर अंत्येष्टि यानी शव जलाने के लिए भी किया जा सकता है।

तीसरा, प्रत्येक स्नान घाट के किनारे शौचालय और चेंजिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए और उसकी साफ-सफाई का पूर्ण ध्यान रखा जाना चाहिए। चतुर्थ, हरिद्वार से लेकर हल्दिया तक गंगा की चौड़ाई कहीं भी 3 किलोमीटर से कम नहीं रहे, इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस 3 किलोमीटर की चौड़ाई में बीच का 1 किलोमीटर जहाज आदि के आवागमन के लिए शिपिंग कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया को सौंपा जाए, जिससे कानपुर से हल्दिया तक वाटर ट्रांसपोर्टेशन का मार्ग प्रशस्त हो सके। पांचवां, गंगा की चौड़ाई के दोनों ओर कम से कम फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाए, जिससे हरिद्वार से हल्दिया तक एक नया कॉरिडोर, जो काफी उपयोगी होगा और आवागमन को आसान करेगा।

छठा, उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा का पानी की गहराई इतनी अवश्य होनी चाहिए कि युद्ध आदि विशेष परिस्थितियों में बोइंग विमान आदि इस पर उतारा जा सके। वहीं, गंगा के स्ट्रेच की चौड़ाई ज्यादा होने से टाल क्षेत्र की समस्या भी अपने आप दूर हो जाएगी।

सातवां, बिहार में बक्सर के टेल पॉइंट से सोन, गंडक आदि नदियों को जोड़कर दक्षिण-उत्तर बिहार अर्थात् भभुआ, सासाराम, औरंगाबाद, गया, नवादा की ओर एक अलग चैनल बना दिया जाए तो इन जिलों में पटवन का एक बड़ा साधन विकसित किया जा सकता है। इस चैनल को कोसी, कमला, बागमती और बूढ़ी गंडक नदी से जोड़ देने पर खगड़िया और दक्षिण-पूर्व बिहार के कई हिस्सों को पटवन आदि का साधन सहज ही मुहैया कराया जा सकता है।

आठवां, गंगा के तट पर विकसित धार्मिक स्थल और तीर्थ भारतीय सामाजिक व्यवस्था के विशेष अंग हैं। गंगा आरती भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। अतः उन सभी प्राचीन नगरों और शहरों यथा वाराणसी, बक्सर, पटना, सुल्तानगंज, भागलपुर आदि में नियमित रूप से गंगा आरती का कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए। इससे क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

नवम, गंगा की घाटी में एक ऐसी सभ्यता का उद्भव और विकास हुआ, जिसका प्राचीन इतिहास अत्यंत गौरवमयी और वैभवशाली है। जहां ज्ञान, धर्म, अध्यात्म एवं सभ्यता- संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई, जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त संसार आलोकित हुआ। इसी घाटी में रामायण और महाभारत कालीन युग का उद्भव और विकास हुआ। प्राचीन मगध महाजनपद का उद्भव गंगा घाटी में ही हुआ, जहां से गणराज्यों की परंपरा विश्व में पहली बार प्रारंभ हुई। यहीं भारत का स्वर्ण युग विकसित हुआ, जब मौर्य और गुप्त वंश के राजाओं ने यहां पर शासन किया। ऐसे में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाली पतित पावनी गंगा नदी, जो भारत माता के हृदय स्थल में बसी हुई है, के ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा के बीचों बीच में भारत माता की विशाल मूर्ति स्थापित की जाए, जहां पर हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सदैव लहराता रहे और वहां प्रतिदिन आरती पूजन होती रहे। यह भारत की अखंडता और अक्षुण्णता का स्थाई प्रमाण होगा।

दशम, और सबसे अंतिम प्रयास के रूप में गंगा सफाई अभियान को न केवल सरकारी योजना के रूप में प्रचारित किया जाए बल्कि इसे जन-आंदोलन का व्यापक रूप दिया जाए। इसमें जनता के साथ-साथ राजनेताओं और अधिकारियों को आवश्यक रूप से जोड़ा जाए। मुझे उम्मीद है कि समन्वित प्रयास से ही गंगा को भागीरथी के पुरातन रूप में पाया जा सकता है।

Comment:

betnano giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betnano giriş
betnano giriş
betamiral giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betkare giriş
noktabet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
galabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
betplay giriş
betplay giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betasus giriş
betkare giriş
betkare giriş
noktabet giriş
restbet güncel
imajbet giriş
imajbet güncel giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betnano giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
fikstürbet giriş
fiksturbet giriş
fiksturbet
betplay giriş
betplay
betplay giriş
betasus giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betplay giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betkare giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş