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ऊंची इमारतों का ऊंचा ख्वाब

संजय तिवारी
शुक्रवार को देश के नागरिक उड्डयन मंत्री अजीत सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने मुंबई छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट पर नये एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) टॉवर का उद्घाटन किया तो इस एटीसी टॉवर के साथ एक और खूबी यह जुड़ गई कि यह देश का सबसे ऊंचा एटीसी टॉवर है। भवनों के लिहाज से उचाईं उतनी खास नहीं है लेकिन अंदाज लगाना हो तो इससे लगा सकते हैं कि देश में आठ दशक तक भारत की सबसे ऊंची ईमारत का दर्जा पाये कुतुब मीनार के 72.5 मीटर से भी 11 मीटर ऊंचा है। अगर हम इक्कीसवीं सदी में न होते तो यह शायद मुंबई के ही राजाबाई क्लाक टॉवर के 85 मीटर की ऊंचाई के बाद दूसरा सबसे ऊंचा निर्माण होता। लेकिन अब इक्कीसवीं सदी है और जल्द ही मुंबई के एटीसी की इस ऊंचाई को दिल्ली का ही 100 मीटर वाला एटीसी टॉवर पछाड़ देगा। आज भले ही हम दुनिया के मुकाबले में ऊंची ईमारतों का निर्माण न कर रहे हों लेकिन ऊंचे उठने की तमन्ना अब भारत में भी दिखाई देने लगी है।
अगर भारत में टूजी घोटाला सामने न आया होता तो अगले तीन साल में भारत के नाम एक ऐसा रिकार्ड दर्ज हो जाता जो बदनामी नहीं बल्कि दुनिया में भारत का नाम करता। डीबी रियलिटी नाम की जिस कंपनी का नाम टूजी घोटाले में सामने आया और उसके प्रमोटर शाहिद बलवा की गिरफ्तारी की गई उस गिरफ्तारी से पहले शाहिद बलवा की कंपनी डीबी रियलिटी इंडिया सेन्टर के रूप में एक ऐसे ड्रीम को रियलिटी में तब्दील करने की कोशिश कर रही थी जिसके पूरा हो जाने के बाद 2016 तक भारत सबसे ऊंची ईमारतों के पायदान पर दूसरे नंबर पर होता। लेकिन टूजी घोटाले में शाहिद का नाम सामने आने के बाद उनकी कंपनियों की जो जांच पड़ताल शुरू की गई उसमें इंडिया सेन्टर नींव में ही दफन हो गया। दक्षिण मुंबई के गिरगांव चौपाटी के करीब साकार होनेवाला यह सपना अब कब पूरा होगा, पता नहीं। पूरा होगा भी या नहीं, यह भी पता नहीं लेकिन दुनियाभर में ऊंचे उठती इमारतों की लिस्ट में दूसरे पायदान पर पहुंचते पहुंचते भारत एकदम से नीचे लुढ़क गया। इंडिया सेन्टर का काम पूरा होता तो उसकी ऊंचाई 718 मीटर होती। दुनिया में सबसे ऊंची इमारत इस वक्त बुर्ज खलीफा है जो कि दुबई में है। दुबई की इस इमारत की कुल ऊंचाई 828 मीटर है। दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची ईमारत शंघाई टावर, शंघाई, चीन में है। शंघाई टॉवर की ऊंचाई 632 मीटर है। यानी तैयार होने के बाद इंडिया सेन्टर दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची ईमारत होती। हालांकि इस बीच दुनिया में ऊंची ईमारतों के जो नये प्रोजेक्ट आये हैं उसके हिसाब से इंडिया सेन्टर बनते बनते दूसरे नंबर पर होने की बजाय शायद चौथे नंबर पर होता क्योंकि इस बीच सऊदी अरब का किंगडम टॉवर प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है जिसके 2019 या 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है। बनने के बाद किंगडम टॉवर दुबई के बुर्ज खलीफा को पीछे छोड़ देगा। लेकिन एक बार फिर ऊंची ईमारतों की दौड़ में नये सिरे से शामिल हो गया है। चीन ने इसी साल जुलाई 2013 से एक नई ईमारत स्काई सिटी के निर्माण का काम शुरू कर दिया है जिसकी ऊंचाई 838 मीटर होगी। यानी बुर्ज खलीफा से भी 10 मीटर अधिक।
अपनी कार्यशैली के अनुसार चीन एक साल के भीतर इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का दावा कर रहा है। प्रोजेक्ट में दी गई जानकारी के अनुसार रिकार्ड 11 महीने के भीतर अगले साल जून 2014 में इस इमारत का काम पूरा कर लिया जाएगा। यानी ग्यारह महीने के भीतर चीन दुनिया की सबसे ऊंची ईमारत का निर्माण पूरा कर लेगा जो कि बुर्ज खलीफा को पीछे छोड़ते हुए तब तक दुनिया की सबसे ऊंची ईमारत हो जाएगी जब तक अरब के किंगडम टॉवर का काम पूरा नहीं हो जाता। इस लिहाज से अगर देखें तो अगले चार से पांच साल में भारत भी दुनिया के शीर्ष पांच इमारतों वाले देश में शामिल होता। और किंगडम टॉवर, स्काई सिटी, बुर्ज खलीफा के बाद इंडिया सेन्टर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इमारत होती, तब तक जब तक कोई ऊंची इमारत उसे पछाड़ न देती।
वर्तमान समय में भारत के अतीत से जो सबसे ऊंचा निर्माण मौजूद है वह है तंजावुर का बृहदारेश्वर मंदिर। दसवी सदी में बने इस मंदिर की ऊचाईं 65.9 मीटर है। इसके बाद ग्यारहवीं सदी में दिल्ली में बना कुतुब मीनार कमोबेश आठ दशक तक भारत का सबसे ऊंचा निर्माण बना रहा। 72.5 मीटर ऊंची इस मीनार की चुनौती को भंग किया 1878 में राजाबाई क्लाक टॉवर ने जो कि मुंबई में है। लंदन के बिग बेन की तर्ज पर बनाये गये इस घड़ी मीनार ने तब से अब तक मुंबई को ही ऊंचे महलों का ऊंचा ख्वाब रखनेवाला शहर बना रखा है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इंडिया सेन्टर का प्रोजेक्ट रूक जाने के कारण भारत में ऊंची इमारतों की होड़ रूक गई है। भारत में इस वक्त देश की जिस सबसे ऊंची ईमारत पर काम हो रहा है वह लोढ़ा बिल्डर्स का वर्ल्ड वन। मुंबई के वर्ली इलाके में बनाई जा रही इस इमारत का काम पूरा हो जाने के बाद यह दुनिया का सबसे ऊंचा आवासीय भवन होगा। 2 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अगले साल 2014 तक पूरा होने की उम्मीद है और पूरा होने के बाद इस भवन को सबसे ऊंचे आवासीय भवन का दर्जा मिल जाएगा।
पूरा होने के बाद इस भवन की ऊंचाई 442 मीटर होगी जबकि इस वक्त दुनिया में सबसे ऊंचे आवासीय भवन की ऊंचाई प्रिंसेस टॉवर की है जो कि यूएई में है। प्रिंसेस टॉवर की ऊंचाई 414 मीटर है और उसमें 101 फ्लोर हैं, जबकि 442 मीटर वर्ल्ड वन बिल्डिंग में पूरा होने के बाद 117 फ्लोर होंगे। वर्ल्ड वन के अलावा भारत में इतनी ऊंची ईमारत बनाने का ख्वाब फिलहाल तो भारत में कोई नहीं देख रहा है लेकिन मुंबई के लोअर परेल इलाके में ही बन रहे पैलेस रॉयल के भी अगले साल तक पूरा हो जाने की उम्मीद है जिसकी ऊंचाई 320 मीटर होगी। ताड़देव की द इम्पिरियल-3 बिल्डिग का काम 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया गया है और बनने के बाद यह देश की ही दूसरी सबसे ऊंची इमारत होगी। लोअर परेल में ही बन रही नमस्ते इंडिया संभवत: अपने बनने के बाद देश की तीसरी सबसे ऊंची बिल्डिंग होगी जिसकी ऊंचाई 300 मीटर होगी। नमस्ते इंडिया और लोढ़ा वर्ल्ड वन 2014 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है।
जाहिर है, भारत के परंपरागत भवन निर्माण में ऊंची ईमारतों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसमें कोई शक नहीं देश की सबसे ऊंची ईमारतों का शहर कल भी मुंबई ही था और आनेवाले समय में भी मुंबई ही रहनेवाला है। दक्षिण मुंबई ऊंची इमारतों का सबसे बड़ा गढ़ आज भी है और आगे भी रहनेवाला है। देश की सबसे ऊंची इमारत द इम्पिरियल ट्विन टॉवर बिल्डिंग दक्षिण मुंबई के ताड़देव इलाके में है। द इंपीरियल ट्विन टॉवर की ऊचाईं 254 मीटर है और दुनिया की सबसे ऊंची ईमारतों में यह 222वें नंबर पर है। आनेवाले दिनों में भी दक्षिण मुंबई का यही इलाका ऊंची इमारतों का सबसे बड़ा इलाका बन जाएगा। इस वक्त अकेले दक्षिण मुंबई में पुरानी मिलों की जमीन पर ज्यादातर पर ऊंची ईमारतों के निर्माण का काम चल रहा है। वर्तमान में भी अगर देश की सबसे ऊंची तीस इमारतों की लिस्ट बनाएं तो सारी की सारी तीस इमारतें मुंबई में ही हैं। भविष्य में देश के दूसरे हिस्सों में भी ऊंची ईमारतों पर काम चल रहा है लेकिन ये सारी परियोजनाएं पूरी हो जाने के बाद भी देश की सबसे ऊंची ईमारतों की लिस्ट मुंबई के नाम ही रहनेवाला है।
देश में ऊंची ईमारतों की वे परियोजनाएं जो 2016 तक पूरी होंगी उसमें टॉप टेन ऊंची इमारतें दक्षिण मुंबई के नाम ही रहनेवाली हैं। जिसमें वर्ल्ड वन, द इम्पिरियल-3, ओएसिस टॉवर, आर्चिड टर्फ व्यू, आर्चिड क्राउन, पैलेस रॉयल, नमस्ते टॉवर और लोखण्डवाला मिनर्वा शामिल हैं। लेकिन मुंबई के बाहर खासकर उत्तर भारत में भी ऊंची ईमारतों का चलन शुरू हो चुका है। दिल्ली के आस पास गुड़गांव और नोएडा में भी ऊंची इमारतों के ऊंचे प्रोजेक्ट सामने आ चुके हैं। उत्तर भारत की सबसे ऊंची ईमारत का दावा करनेवाली सुपरटेक कंपनी नोएडा में दो ऊंची ईमारतें बना रही है जिसमें सुपरटेक सुरनोवा की ऊंचाई 300 मीटर होगी और उसके नार्थ आई प्रोजेक्ट की ऊंचाई 255 मीटर होगी और इसमें कुल 60 फ्लोर होंगे। सुपरटेक के अलावा मुंबई का रहेजा बिल्डर दिल्ली से सटे गुड़गांव में रहेजा रेवान्ता प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जिसकी ऊंचाई 196 मीटर होगी। कुतुब मीनार के शहर दिल्ली में फिलहाल शीला दीक्षित की चिंताओं के कारण ऊंची ईमारतों के प्रोजेक्ट कोई खास तवज्जो नहीं दी गई है इसलिए दिल्ली नगर निगम का सिविक सेन्टर ही दिल्ली की सबसे ऊंची ईमारत है जिसकी ऊंचाई 102 मीटर है।

उत्तर भारत और खासकर दिल्ली एनसीआर में ऊंची ईमारत का मतलब अगर आज भी दस-बारह मंजिला इमारत ही होता है तो इसका कारण दिल्ली की भौगोलिक दशा और रहन सहन है। एनसीआर के विस्तार के साथ ही शहर हॉरिजन्टल दिशा में पसरने की बजाय वर्टिकल तो हुए हैं लेकिन आज भी उत्तर में ऊंची ईमारतों में रहने का चलन वैसा नहीं है जैसा मुंबई में। तो क्या ऊंची ईमारतें सिर्फ क्रेज हैं या वास्तव में ये हमारे शहर की जरूरत बन चुकी हैं? मुंबई जैसे शहरों के लिए क्रेज से ज्यादा जरूरत हैं और ऊंचाई की ऊंचाई से जो जंग चल रही है उसमें ऊंचे घर ही एकमात्र वह जरिया हैं जो ज्यादा से ज्यादा लोगों को कम जगह में रहने की सुविधा दे सकते हैं। बिल्कुल दुनिया के उन देशों की तर्ज पर जहां शहर के विस्तार का मतलब नये इलाकों में जाने की बजाय नये आसमान में की ओर जाना होता है। भारत के सघन आबादी वाले शहर बहुत दिनों तक इस सोच से बच नहीं पायेंगे।

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