29 से 31 अगस्त तक चली अखिल भारत हिंदू महासभा की बैठक पटना में हुई संपन्न : उत्तर प्रदेश के जेवर में निर्माणाधीन हवाई अड्डे का नाम गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज के नाम पर रखने की की गई मांग , मोदी सरकार की विदेश नीति की सराहना करते हुए बलूचिस्तान को अलग कराने की भी उठी मांग

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पटना । अखिल भारत हिंदू महासभा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक यहां विगत 29 से 31 अगस्त तक चली । इस बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों ने कुल 8 प्रस्ताव पारित कर देश की केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों से कुछ विशेष मांगें उठाई । सबसे महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए पार्टी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के जेवर में निर्माणाधीन नए हवाई अड्डे का नाम गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज के नाम पर रखा जाए ।
इस संबंध में पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि भारतीय स्वाधीनता के दीर्घकालिक संग्राम में गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक सम्राट मिहिर भोज का गौरवमयी कालखंड भारतीय इतिहास की अनुपम और अद्वितीय धरोहर है । जिन्होंने 836 से लेकर 885 ईसवी तक भारतीय धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए महान कार्य किए और जिनका इतिहास भारत के शानदार गौरवमयी इतिहास से एक षड्यन्त्र के अंतर्गत विलुप्त कर दिया गया है । आज हमने उनके विलुप्त इतिहास को स्थापित कर अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से देश को यह संदेश देने का प्रयास किया है कि हम अपने महान पूर्वजों का सम्मान करना जानते हैं ।
श्री आर्य ने कहा कि सम्राट मिहिर भोज के बारे में यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने और उनके पूर्वजों सम्राट नागभट्ट प्रथम और नागभट्ट द्वितीय ने अपने अपने शासनकाल में शुद्धि अभियान चलाकर हिंदू से मुसलमान बन गए लोगों के घर वापसी का कार्य संपन्न कराया था । सम्राट मिहिर भोज के इसी शुद्धि आंदोलन से प्रेरित होकर हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और आर्य समाज के महान नेता स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज ने शुद्धि आंदोलन को अब से लगभग 100 वर्ष पूर्व आरंभ किया था । आज अखिल भारत हिंदू महासभा अपने महान नेता स्वामी श्रद्धानंद जी के प्रयास को नमन करते हुए सम्राट मिहिर भोज के महान कार्य का भी अभिनंदन करती है । जिसके लिए पार्टी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और केंद्र सरकार से मांग करती है कि जेवर में बन रहे हवाई अड्डे का नाम सम्राट मिहिर भोज हवाई अड्डा रखा जाए।
पार्टी के दूसरे राजनीतिक प्रस्ताव को रखते हुए संगठन सचिव श्रीनिवास आर्य ने कहा कि हिंदू समाज के महान पूर्वजों , संस्कृतिनायकों और राष्ट्रनायकों का अपमान किया जाना स्वतंत्र भारत में भी उसी प्रकार जारी है जिस प्रकार मुगल और ब्रिटिश काल में बना रहा था । यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि हिंदू समाज में देवी-देवताओं के रूप में सम्मानित स्थान प्राप्त किए हुए शिवजी महाराज और दुर्गा जैसी देवियों को भी लोग ‘शिव पान भंडार या दुर्गा सूज सेंटर’ आदि के नाम से प्रयोग कर रहे हैं । लोगों की ऐसी मानसिकता से हमारे देवी देवताओं का अपमान होता है और अपने इतिहासनायकों के प्रति हमारी राष्ट्रीय श्रद्धा और निष्ठा को चोट पहुंचती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में अखिल भारत हिंदू महासभा का मानना है कि केंद्र सरकार तत्संबंधी कानून लाकर राष्ट्रीय नेताओं , महानायकों, संस्कृति नायकों ,धर्म रक्षकों और हिंदू देवी देवताओं के रूप में मान्यता प्राप्त महापुरुषों के नाम पर हो रहे ऐसे अपमानजनक कार्यों पर तुरंत प्रतिबंध लगाए । इस संबंध में पार्टी उचित और आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने के लिए अपने राष्ट्रीय विधिक महासभा के अध्यक्ष श्री इक्रांत शर्मा को भी अधिकृत करती है । यदि श्री शर्मा उचित समझते हैं तो वह इस संबंध में न्यायिक कार्यवाही के लिए भी स्वतंत्र होंगे और न्यायालयों के माध्यम से इस संबंध में उचित आदेश ले सकते हैं।
पार्टी के संगठन मंत्री योगी जय नाथ जी महाराज ने तीसरा प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार की सफल विदेश नीति की अखिल भारत हिंदू महासभा सराहना करती है । विशेष रुप से पाकिस्तान और चीन के प्रति अपनाए गए कठोर दृष्टिकोण को पार्टी अपने आदर्श और महान नेता वीर सावरकर जी के चिंतन की दिशा में उठाया गया एक ठोस और सकारात्मक कार्य मानती है । पार्टी ‘राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं का सैनीकीकरण’ करने की मांग पहले दिन से करती आई है । इस संबंध में वर्तमान केंद्र सरकार जो भी कदम उठाएगी पार्टी उसका समर्थन करेगी ।
अखिल भारत हिंदू महासभा इस संबंध में केंद्र सरकार से मांग करती है कि वह पाक अधिकृत कश्मीर को यथाशीघ्र भारत के नक्शे में स्थाई रूप से सम्मिलित करने के लिए उचित निर्णय ले । इसके अतिरिक्त बलूचिस्तान के लोगों के साथ होते चले आ रहे अन्याय को भी पार्टी मानवता के विरुद्ध किए जा रहे अपराध मानती है । जिसके लिए पाकिस्तान सरकार दोषी है । भारत की सरकार को चाहिए कि बलूचिस्तान के लोगों का समर्थन कर एक स्वतंत्र बलोच देश विश्व के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जाए । जिससे बलूच लोगों को न्याय मिल सके और मानवता की हो रही हत्या पर प्रतिबंध लग सके।

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