शरीर को मुक्त रखें फालतू चीजों से

भारीपन और
तनाव लाते हैं ये

– डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

शरीर के आभामण्डल को साफ-सुथरा, ओजस्वी और पारदर्शी बनाए रखने के लिए हमें सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए। अपना आभामण्डल जितना शुभ्र होता है उसी अनुपात में ब्रह्माण्ड की शक्तियों, प्राकृतिक प्रवाह और नैसर्गिक ताजगी के साथ ही व्योम में आवागमन करने वाले दिव्य विचारों और भावी संकेतों का प्रवाह अपनी ओर आकर्षित होता है तथा शरीर की ग्राह्यता शक्ति उनका लाभ लेकर निरन्तर ऊर्जा, ताजगी और सामथ्र्य को प्राप्त करती रहती है।

इसके लिए हमारे वैचारिक धरातल और दिमागी शुचिता का सर्वाधिक योगदान होता है। दूसरी ओर वैचारिक धुंध, प्रदूषण हो या न हो, मगर शरीर के साथ यदि फिजूल की चीजें लगी हुई हों, तब भी आभामण्डल दूषित होता है और इसका कुप्रभाव हमें हमेशा भुगतने को विवश होना पड़ता है। जो व्यक्ति शरीर को पदार्थों से जितना अधिक मुक्त रखता है वह उतना ही अधिक प्रसन्न और स्वस्थ रहता है जबकि शरीर पर फालतू की सामग्री का बोझ हमेशा बनाए रखने वाले लोग क्रोध और तनावों के साथ ही बीमारियों को आमंत्रण देते हैं और इससे उनकी जिन्दगी भी किसी न किसी रूप में समस्याग्रस्त रहती ही है।

हम ऎसे खूब सारे लोगोें को देखते हैं जो अपनी जेबों और पर्स को कागजों और दूसरी सामग्री से ठूँसे रहते हैं। हकीकत में ऎसी सामग्री की कोई जरूरत नहीं होती है लेकिन आदत के मारे लाचार होते हैं। ऎसे लोगों की सबसे बड़ी विशेषता हर काम के केन्द्रीकरण की होती है और ये अपने से संबंधित कामों में दूसरों का दखल बर्दाश्त नहीं करते हैं।

इन लोगों के जेबों में जाने कितने पुराने से पुराने कागजों का जखीरा हमेशा बना रहता है। इसी प्रकार आदमियों की एक किस्म और होती है जिनकी आदत होती है हमेशा बैग अपने साथ रखना। ये लोग जहाँ भी जाएंगे, बैग को साथ रखेंगे। बिना बैग के चलना इनके लिए मुश्किल ही होता है। महिलाओें में भी इस प्रकार की मनोवृत्ति खूब हुआ करती हैं जो हमेशा पर्स को अपने साथ रखती हैं भले ही पर्स की जरूरत न हो।

अनावश्यक रूप से अपने साथ किसी भी सामग्री को रखकर चलना या रहना हमारे आभामण्डल को दूषित करता है और इससे हमारी दिव्यता, प्रभाव और संकल्पों की तीव्रता खण्डित होती है। यह अभ्यास डालना चाहिए कि शरीर पर या शरीर के साथ अनावश्यक किसी भी प्रकार का बोझ न हो।

कई लोगों के लिए बैल्ट, घड़ियों आदि का अपने लिए कोई उपयोग नहीं होता लेकिन इन्हें शौक से धारण करते हैं। शरीर द्वारा धारण की गई हर प्रकार की सामग्री किसी न किसी ग्रह-नक्षत्र विशेष से संबंधित भी होती है और इसका सकारात्मक अथवा नकारात्मक प्रभाव हम पर पड़ता ही है। कई बार इस प्रकार की सामग्री का साहचर्य ही हमें आपत्ति में डालने वाला हो सकता है।

ईश्वरीय संकेतों और ब्रह्माण्ड में होने वाले भावी परिवर्तनों के संकेत पाने से लेकर अपने सूक्ष्म और स्थूल शरीर को शुभ्र, स्वस्थ और मस्त बनाए रखने के लिए शरीर के लिए आवश्यक परिधानों और नितान्त जरूरी सामग्री को ही साथ रखनी चाहिए ताकि हमारे आभामण्डल की किरणों और तेज के आवागमन एवं पुनर्भरण का कार्य निर्बाध और सहज-स्वाभाविक प्राकृतिक रूप से अपने आप होता रहे।

हममें से अधिकांश लोगों की जिन्दगी में अनावश्यक भारीपन और तनावों का अहसास सिर्फ इसी वजह से होता है कि हम फालतू की चीजों को अपने साथ हमेशा बनाए रखने के आदी हो गए हैं। शरीर सांसारिक पदार्थों से जितना अधिक मुक्त रहेगा, उतना अधिक आनंद और आरोग्य हमें प्राप्त होता, इस सत्य को स्वीकार करने की आवश्यकता है।

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