प्रधानमंत्री मोदी के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ के चेहरे मुरझा सकते हैं तो कुछ के खिल सकते हैं कमल

कई मंत्रियों के विभाग बदलने और बीजेपी संगठन में भी बड़े बदलाव की तैयारी

निरंजन परिहार

नई दिल्ली। अब वह वक्त आ गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार की टीम में फेरबदल और विस्तार हो जाना चाहिए। वैसे, लोग जो सोचते हैं, प्रधानमंत्री मोदी उसके अनुरूप कम ही करते हैं। फिर भी हालात भी बता रहे हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार का यह महत्वपूर्ण काम अब वे किसी भी वक्त कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए की दूसरी बार सरकार को बने सवा साल से ज्यादा वक्त बीत गया है। जैसा कि माना जा रहा है कि देश में नीतिगत रूप से कई सारे बदलाव किए जाने है, व्यापक पैमाने पर स्वीकृतियां लेनी हैं, जिनके लिए मंत्रिमंडल में कुछ खास जगहों पर खास लोगों की तैनाती जरूरी है। सो, लग रहा है कि मंत्रिमंडल में विस्तार व फेरबदल इसी महीने या अगले महीने की शुरूआत में हो सकता है। सुन रहे हैं कि नीतिन गडकरी को वित्त मंत्रालय दिया जा सकता है और अर्जुन मेघवाल, अनुराग ठाकुर व श्रीपद नाइक जैसे कुछ राज्यमंत्रियों को केबिनेट मंत्री भी बनाया जा सकता है। बीजेपी संगठन से भी कुछ लोगों को सरकार में शामिल किए जाने की खबर है। वहां पर भी खाली पदों को भरे जाने की तैयारी करने को कह दिया गया है।

दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में सवा साल से भी ज्यादा वक्त के बाद यह पहला फेरबदल और विस्तार होना है। यह काम इसी महीने या अगले महीने की शुरूआत में होने की ज्यादा संभावना लग रही है। क्योंकि प्रधानमंत्री ने अपने स्तर पर कुछ विभागों के कामकाज की समीक्षा रिपोर्ट मंगवाई थी, जिसका उनके स्तर पर आंकलन होने की सूचना है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े अधिकारियों ने भी विभिन्न मंत्रालयों में हुए कामकाज की एक प्रशासनिक समीक्षा रिपोर्ट अलग से तैयार की थी। इन अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को उससे भी अवगत करा दिया है। इसीलिए माना जा रहा है कि फेरबदल शीघ्र हो सकता है। वैसे बी बिहार और बंगाल का चुनाव सर पर है। बीजेपी की राजनीति के जानकार बताते हैं कि मंत्रिमंडल के साथ साथ बीजेपी संगठन में भी फेरबदल होगा। लेकिन जब भी होगा, तो दो चार दिनों के अंतराल में ही दोनों में होगा। सूत्र बताते हैं कि या तो मंत्रिमंडल पहले में बदलाव होगा, या बीजेपी की कार्यकारिणी का गठन पहले होगा। दोनों जगहों से लोगों को इधर उधर करना है, उसी के हिसाब से समायोजन किया जाएगा। कुछ नए पदाधिकारी बनेंगे, तो कुछ नए मंत्री। कुछ पदाधिकारी मंत्री बनेंगे, तो कुछ मंत्री पदाधिकारी बनकर अपने अनुभवों से पार्टी को मजबूत करेंगे।

राजस्थान से बीजेपी संगठन के पदाधिकारियों में भूपेंद्र यादव के मंत्री बनने की संभावना बन रही है। अगर यादव मंत्री बने, तो केबिनेट मंत्री ही होंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि राजस्थान से किसी एक मंत्री को घर बिठाया जाएगा, क्योंकि फिलहाल राजस्थान में ऐसी कोई बहुत बड़ी राजनीतिक जरूरत नहीं है। तो, जिसकी विदाई होगी, उसमें जोधपुर के गजेंद्र सिंह शेखावत या बाड़मेर को कैलाथ चौधरी हो सकते हैं। कैलाथ चौधरी के बारे में खबर है कि विभागों के कामकाज की प्रशासनिक रिपोर्ट और प्रधानमंत्री की समीक्षा, दोनों में कैलाश चौधरी के कामकाज को प्रभावी नहीं माना गया है। उधर, गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान में हाल ही फेल हो चुके ऑपरेशन कमल से जोड़कर देखा जा रहा है। सचिन पायलट की कांग्रेस में बगावत के दौर में शेखावत की टेप में सुनाई दी, संजीवनी क्रेडिट कॉपरेटिव में 900 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप भी लगे और वसुंधरा राजे भी उनके खिलाफ बहुत मुखर होकर पार्टी में खड़ी दिखीं। फिर अर्जुन मेघवाल को राज्यमंत्री से केबिनेट बनाकर बीजेपी अनुसूचित जातियों में उनकी पैरोकार साबित होना चाहती है। इसलिए भी किसी एक को हटाया जाएगा, ऐसा माना जा रहा है।

बीजेपी के जानकार बताते हैं कि वित्त मंत्रालय में भी फेरबदल की चर्चा है। खबर है कि वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। मोदी सरकार में जो वरिष्ठ मंत्री हैं, उनमें गडकरी ही ऐसे हैं, जो मंत्रिमंडल के सुरक्षा मामलों की कमेटी के सदस्य नहीं हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया, बीजेपी महासचिव अनिल जैन, पश्चिम बंगाल से सांसद एसएस अहलूवालिया या अर्जुनसिंह में से किन्ही दो को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। लेकिन इनमें से किसी को भी केबिनेट मंत्री बनाए जाने की संभावना कम है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास, रेल, शहरी विकास आदि मंत्रालयों में फेरबदल की संभावना है। एक से अधिक महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे पीयूष गोयल, प्रकाश जावड़ेकर जैसे कुछ मंत्रियों का कार्यभार हल्का करने के लिए करीब 10 से ज्यादा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं और कम से कम पांच वर्तमान राज्यमंत्रियों को स्वतंत्र प्रभार या केबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोशन दिया जा सकता है। इसी तरह चुनावी राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारतीय राज्यों से करीब चार या पांच नए मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा हैं।

मंत्रिमंडल के साथ साथ बीजेपी में बदलाव की बयार बहती दिखेगी। बीजेपी के जानकार कहते हैं कि कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को अध्यक्ष बने साल भरह होने जा रहा है। लेकिन उनकी टीम नहीं बनी है। वे अमित शाह वाली टीम से ही काम चला रहे हैं। इसलिए बीजेपी की टीम में बड़ा फेरबदल होना है। माना जा रहा है कि सरकार के जिन मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी होगी, उन में से कईयों को संगठन में जगह मिल सकती है। पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक और निर्णय करने वाली बॉड़ी संसदीय बोर्ड में एक महिला सहित चार लोगों को शामिल किया जाना है। जिसमें देवेंद्र फडणवीस का नाम हो सकता हैं।

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