नेताजी की तथाकथित मृत्यु तिथि 18 अगस्त पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कोई संदेश न दिया जाना क्या संकेत करता है ?

netaji_subhash_chandra_bose_1579692884_650x366 (1)

आशीष नौटियाल

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि 18 अगस्त ही है, यह भ्रम कॉन्ग्रेस के दौरान विकसित किया गया

904

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के नायक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु को ‘मनाने’ की जितनी दिलचस्पी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू में थी उतनी ही आज की कॉन्ग्रेस में भी मौजूद नजर आती है। इस वर्ष भी 18 अगस्त की तारीख आई लेकिन इस बात पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तथाकथित पुण्यतिथि पर किसी भी प्रकार का कोई संदेश जारी नहीं किया।

यह भी सम्भव है कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की कॉन्ग्रेस द्वारा घोषित पुण्यतिथि 18 अगस्त पर पीएम नरेंद्र मोदी का मौन कुछ संदेश देना चाहता हो। नेताजी की देहांत को लेकर अभी तक यही प्रचलित मत रहा है कि अगस्त 18, 1945 को विमान हादसे के शिकार हो गए थे।

नेताजी की पुण्यतिथि: अफवाह या सच?

आज जब केजरीवाल व कुछ अन्य नेता, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की पुण्यतिथि बता रहे हैं। कॉन्ग्रेस, जो एक दौर में INA के अस्तित्व तक को समर्थन नहीं दे सकी थी, वह अब नेताजी की पुण्यतिथि को लेकर हमेशा से ही कौतुहल में नजर आती है। लेकिन क्या नेताजी सच में आज की तारीख को दिवंगत हुए थे?

क्या नेताजी सुभाषचंद्र बोस का विमान फोरमोसा (अब ताइवान) में दुर्घटना का शिकार हो गया था और इसमें नेताजी मारे गए थे? या फिर वह बच गए थे और सर्बिया चले गए थे? या फिर ‘विमान हादसा’ महज एक जरिया था, उन्हें सुरक्षित निकल जाने देने के लिए? आइए जानते हैं इस कथित पुण्यतिथि के आसपास घूमती कहानियाँ, वे कहानियाँ, जो दंतकथा न होकर सम्बन्धित विषय पर इतिहासकारों एवं शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोध व साक्ष्य पर आधारित हैं।

– विज्ञापन –

प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते कुछ मोर्चों पर असफल होने के कारण चालीस हज़ार से भी अधिक पराक्रमी सैनिकों वाली आज़ाद हिन्द फ़ौज को नेताजी विखंडित कर ही चुके थे और कुछ समय बाद हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमरीका ने ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाली आज़ाद हिन्द फौज के सहयोगी मित्र जापान के दो शहरों में सन 1945 दिनांक 6 व 9 को परमाणु बम गिरा दिए।

हफ्ते भर के भीतर जापान आत्मसर्पण कर चुका था, इसलिए नेताजी के सामने दुविधा आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों का ध्यान रखते हुए आत्मसमर्पण कराने को लेकर थी कि उनका समर्पण जापान के साथ सामूहिक होगा या व्यक्तिगत!

इसी से संबंधित वार्ता करने हेतु सुभाष सिंगापुर से बैंकाक और वहाँ से टोक्यो में जापान के उच्च अधिकारीयों से भेंट कार्यक्रम निर्धारित कर 15 अगस्त को निकल पड़े। 16 को बैंकाक, फिर 17 अगस्त को आज़ाद हिन्द फ़ौज के अपने कुछ साथियों समेत वियतनाम के शहर साइगोन पहुँचे।

17 अगस्त की शाम को फिर उनके जहाज ने उड़ान भरी और अगले दिन तायपेई पहुँचकर रुके, जिसके बाद ये माना जाता है कि उड़ान भरते ही उनका जहाज क्रैश कर गया और उनके थर्ड डिग्री तक जल जाने के कारण उनकी मौत हो गयी।

उनके साथ मौजूद उनके करीबी हबीब उर रहमान ने कथित तौर पर उनका क्रियाकर्म करवाया और अस्थियाँ जापानी प्रशासन को सौंप दी, जिन्हें आज भी जापान के रैंकोजी मंदिर में रखा गया है और अस्थियों पर भी विवाद जारी है, शाह नवाज जाँच कमिटी के अनुसार यह भी जिक्र आता है कि वह अस्थियाँ जापानी सिपाही इचिरो ओकरा के नाम से रखी गईं।

इसके अलावा, मुखर्जी आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से इस बात को नकार दिया गया था कि नेताजी की मृत्यु विमान हादसे में हुई थी। हालाँकि, तब सरकार ने मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की थी।

मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट का हिस्सा

अगर प्लेन क्रैश नहीं हुआ तो नेताजी गए कहाँ ?

स्वभाविक सा प्रश्न है कि यदि प्लेन क्रैश में नेताजी कि मृत्यु नहीं हुई तो वे गए कहाँ? नेताजी की प्लेन क्रैश घटना के ग्यारह दिन बाद 29 अगस्त को नेताजी पर कॉंग्रेस द्वारा जारी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अमरीकी सेना को कवर करने वाले शिकागो ट्रिब्यून के पत्रकार अल्फ्रेड वैग ने जवाहर लाल नेहरू को प्रेस ब्रीफिंग के बीच में टोका और बताया कि उनके साथियों ने चार दिन पहले अर्थात 25 अगस्त को नेताजी को सागौन शहर में देखा (अख़बार कि कतरन संलग्न है)।

इस क्षण से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोस की मृत्यु को लेकर संदेह उभरने शुरू हो गए और स्वंत्रता के बाद भी भारत की सत्ता पर आसीन सत्ताधारियों व अंग्रेज़ों के बीच यह तय हुआ कि बोस के पाए जाने पर उन्हें जीवित या मृत, अलाइड शक्तियों के हवाले कर दिया जाना चाहिए क्योंकि जापानियों के सहयोग से अंग्रेज़ों के खिलाफ भारत की स्वतन्त्रता के लिए लड़ने वाले बोस ‘वॉर क्रिमिनल’ (युद्ध के अपराधी) थे।

इस तथ्य को पत्थर को वालेट साबित करने की क्षमता रखने वाले ऑल्टन्यूज़ जैसे ही तमाम कॉन्ग्रेस पोषित संस्थान सदियों से प्रयास करते आए हैं और इसे विवादित साबित करने के अनेकों प्रयास भी किए और इस तथ्य को विवादित या फिर संदेहास्पद बनाने का कारनामा किया है।

हारकर भी अपने संघर्ष का लोहा मनवाने वाली आज़ाद हिन्द फौज और नैवेल म्यूटिनी के बारे में इस श्रृंखला की अगली कड़ी में।

Comment:

Latest Posts

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betnano
betnano
betgaranti giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betnano
betnano
betnano
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt
Hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betnano
marsbahis
imajbet
betnano
marsbahis giriş
marsbahis giriş
marsbahis güncel
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet güncel
casinolevant giriş
casinolevant giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet güncel giriş
hititbet giriş
casinolevant
grandpashabet
grandpashabet
Betgaranti Giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
casinolevant giriş
levantcasino giriş