ऑपरेशन ब्लूस्टार : जब सेना को स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाने पड़े टैंक जिसके कारण मारी गई थीं इंदिरा गांधी

images (51)

प्रस्तुति : आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक

[वर्तमान में पंजाब में अलगाववादी ताकतें 1984 में भारतीय सेना हुई स्वर्ण मंदिर में कार्यवाही को सिखों के धार्मिक अधिकारों का अतिक्रमण के रूप में बखान कर रही हैं। जबकि भारतीय सेना के द्वारा की गई कार्यवाही में पाकिस्तान की संलिप्तता और खालिस्तान के नाम से अलग देश बनने की सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता। इस लेख में इस विषय पर प्रकाश डाला गया है।]

आशीष नौटियाल

आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 36वीं बरसी है, 3 से 6 जून 1984 तक भारतीय सेना द्वारा चलाए गए इस सैन्य ऑपरेशन का मकसद अमृतसर (पंजाब) में हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरांवाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराना था और इसमें अहम भूमिका निभाई थी अजीत डोभाल ने, जो कि आज देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं।

भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद करवाया था और इसी बात का बदला लेने के लिए पाकिस्तान ने भारत से पंजाब को अलग करवाने की योजना बनाई। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने इस काम के लिए पंजाब में सिख आतंकवाद और कट्टरपंथ को हवा दी और भिंडरांवाले को अपना हथियार बनाया जिसके नेतृत्व में अलगाववादी ताकतों को पाकिस्तान से लगातार समर्थन मिल रहा था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के पीछे जो बातें सबसे अहम रहीं, उनमें खालिस्तानी अलगाववादियों के पंजाब की स्वायत्तता की माँग का उग्र रूप में सामने आना प्रमुख वजह रहा।

नतीजा यह हुआ कि पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान बनाने की माँग तेजी से जोर पकड़ने लगीं थीं। गलियों में आवाजें सुनाई पड़ रही थीं- ‘पंजाब को भारत से अलग करने के लिए सशस्त्र संघर्ष के लिए तैयार रहें।’ इसकी एक तरह से आधिकारिक घोषणा तब हुई जब मार्च, 1981 को एक नए स्वायत्त खालिस्तान का झंडा पंजाब स्थित आनंदपुर साहिब पर फहराया गया।

पंजाब में बिगड़ते हालातों के बीच 1982 में इंदिरा गाँधी ने एक बड़ा राजनैतिक फैसला लिया और गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह को राष्ट्रपति बना दिया। वही जेल सिंह जिन्होंने गृह मंत्री रहते 1981 में भिंडरांवाले की रिहाई की घोषणा करते हुए कहा था कि भिंडरांवाले के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं है। जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय उन पर मूक दर्शक बनने का आरोप भी लगे थे।

आखिर एक दिन जनरैल सिंह भिंडरवाले ने हथियारों से लैस आतंकवादियों के साथ स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया। सभी हालातों को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने समझौते के प्रयास किए, लेकिन जब कोई समझौता नहीं हो पाया तो उन्होंने फैसला किया कि अब कार्रवाई की जाए और स्वर्ण मंदिर को भिंडरांवाले के हाथ से निकाला जाए।

ऑपरेशन ब्लू स्टार

01 जून को खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने तत्कालीन सरकार के साथ किसी भी समझौते में विफल होने के बाद आखिर में 3 जून को भारतीय सुरक्षा बलों को स्वर्ण मंदिर घेरना पड़ा। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी थी कि जून 03, 1984 को हजारों भक्त गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस मनाने के लिए अमृतसर में इकट्ठे होने वाले थे।

हरिमंदिर साहब परिसर में भिंडरांवाले और उसके साथियों की मोर्चाबंदी और परिसर के बाहर सुरक्षाबलों की मोर्चाबंदी ने अमृतसर के उस इलाके को छावनी की शक्ल दे दी।

4 जून को सेना ने मंदिर में छुपे आतंकियों की स्थिति जानने के लिए गोलीबारी शुरू कर दी थी, जिसके बाद 5 जून को आतंकियों और सेना में जमकर टकराव हुआ, भारी गोलीबारी और संघर्ष में 83 भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गँवाई और 249 घायल हुए थे।

ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना का नेतृत्व तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने किया था। जनरल बरार ने इस बारे में कहा था –

“मुझे बताया गया था कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि अगले दो-चार दिन में खालिस्तान की घोषणा हो जाएगी। जिसके बाद पंजाब पुलिस खालिस्तान में मिल जाएगी। फिर दिल्ली और हरियाणा में जो सिख हैं वो फौरन पंजाब की ओर बढ़ेंगे और हिंदू पंजाब से बाहर निकलेंगे। 1947 की तरह दंगे हो सकता है। पाकिस्तान भी सीमा पार कर सकता है, यानी पाकिस्तान से बांग्लादेश के अलग होने की घटना भारत में दोहराई जा सकती है।”

जनरल बरार ने आपने अपनी किताब में भी इस बात का जिक्र किया कि इस ऑपरेशन के बारे में उन्हें पता नहीं था। तब वो मेरठ में थे और 90 इनफैंट्री डिविजन को कमांड कर रहे थे। उन्होंने लिखा है कि मई 30 की शाम उन्हें फोन आया कि जून 01 को चंडीमंदिर एक मीटिंग के लिए पहुँचना है, जबकि उसी शाम उनका प्रोग्राम मनीला जाने का था, टिकटें बुक हो चुकी थीं लेकिन इस कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा।

इस ऑपरेशन के दौरान बरार को महसूस हुआ था कि स्वर्ण मंदिर में छुपे अलगाववादियों के पास राकेट लॉन्चर जैसे हथियार थे और तमाम प्रयासों के विफल होने और भीतर मौजूद खालिस्तानी आतंकियों की तैयारी को देखकर साफ था कि वो आत्मसमर्पण के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं। तब तक भारतीय सुर्ख बल भी अपने कई जवानों को खो चुकी थी। ऐसे में मेजर जनरल केएस बरार के एक कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे टैंक बुलाने की माँग की।

बरार ने भी यह बात मानी की अब इसके अलावा कोई अन्य उपाय फिलहाल उनके पास नहीं था। वो चाहते थे कि सुबह होते ही यदि इस ऑपरेशन की खबर फ़ैल गई तो पंजाब उबल पड़ेगा, इसलिए वो इन्तजार भी नहीं करना चाहते थे।
आख़िरकार बरार ने सरकार से टैंक इस्तेमाल करने की इजाजत माँगी। परमिशन मिलते ही मौके पर टैंक बुलाए गए और सुबह 5 बजकर 21 मिनट पर टैंक ने पहला गोला दागा।

आखिरकार जून 06, 1984 को जरनैल सिंह भिंडरांवाले की मौत की खबर आई, जिसने अप्रैल 1983 से ही स्वर्ण मंदिर को अपना हेडक्वार्टर बना लिया था, और सेना इस मंदिर को अलगावादियों के चंगुल से मुक्त करने में सफल रही। हालाँकि सिखों के इस पवित्र मंदिर में सेना के ऑपरेशन ने दुनियाभर के सिखों को नाराज कर दिया था।

इसी सैन्य ऑपरेशन का परिणाम यह हुआ कि अक्टूबर 31, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के दो सिख अंगरक्षकों, सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। इंदिरा गाँधी की हत्या के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के उठे। इन दंगों में हज़ारों लोगों की जान गई।

ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुल 493 आतंकी मारे गए थे और 86 घायल हुए थे, जबकि गिरफ्तार किए गए आतंकियों की संख्या 1592 थी। जून 06, 1984 का वह दिन था, जब अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में की गई भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का नाम दिया गया।

ऑपरेशन ब्लैक थंडर
ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ समय बाद ऑपरेशन ब्लैक थंडर (Operation Black Thunder) को अंजाम दिया गया, जिसका मकसद स्वर्ण मंदिर से बाकी आतंकवादियों को बाहर निकालना था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के करीब 4 साल बाद एक बार फिर खालिस्तान समर्थक आतंकवादी स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त के पास पहुँच गए।

यही वो समय था, जिसमें भारत के वर्तमान NSA अजित डोभाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वर्ण मंदिर में छुपे हुए आतंकवादियों के बारे में पता लगाने के लिए ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान अजीत डोभाल रिक्शे वाले की भेष में स्वर्ण मंदिर के अंदर गए। इस ‘रिक्शावाले’ को खालिस्तानियों को ये विश्वास दिलाने में दस दिन लग गए कि उसे आईएसआई ने उनकी मदद के लिए भेजा है।

यही रिक्शावाला ऑपरेशन ब्लैक थंडर से ठीक दो दिन पहले स्वर्ण मंदिर के अहाते में घुसा और जब 2 दिन बाद स्वर्ण मंदिर से बाहर निकला तो उनके पास आतंकियों के हथियारों से लेकर, उनकी योजना, लड़ाकों की छिपे होने की सटीक जानकारी अजीत डोभाल के पास थीं। अजित डोभाल के इस कारनामे से ही ऑपरेशन सफल रहा और पंजाब सिख आतंकवादियों के प्रभाव से मुक्त हो पाया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार के चार साल बाद स्वर्ण मंदिर से आतंकियों को बाहर निकालने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ चलाया गया था। यह ऑपरेशन ब्लू स्टार से कहीं ज्यादा कुशलतापूर्वक बिना किसी रक्तपात और मंदिर को नुकसान पहुँचाए ही सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अंततः सिख लोगों के बीच बढ़ रहे उग्रवादी खालिस्तानी आंदोलन की विश्वसनीयता और लोकप्रियता को समाप्त कर पंजाब से आतंकवाद के संकट को समाप्त किया। इन सभी कारकों के कारण ब्लैक थंडर को 1984 में भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए ब्लू स्टार की तुलना में अधिक सक्षम और क्लीनर ऑपरेशन के रूप में देखा गया, जिसने सिख समुदाय पर विशेष प्रभाव छोड़ा।

सोर्स-https://hindi.opindia.com/miscellaneous/indology/operation-blue-star-operation-black-thunder-ajit-doval-khalistan-indira-gandhi/?fbclid=IwAR1UUP9_OLzbjDSDx4TEnGulsMX79En11_brsNoUphBDue1_tkyPUfNLjWE

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hititbet
hititbet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino
vdcasino
hititbet
hititbet
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
betmarino
betmarino
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
celtabet giriş
celtabet giriş