नये भारत और ‘आत्म-निर्भर भारत’ का सार्थक अर्थ

images (19)

ललित गर्ग

भारत एक ऐसे राष्ट्र बनने की ओर डग भर रहा है जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। सबके लिए शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा और उन्नति के समान और सही अवसर उपलब्ध होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से प्रभावित लोगों, अर्थव्यवस्था, रोजगार, कृषि एवं उद्योगों के लिए 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये के एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करके आत्मनिर्भर भारत के अभ्युदय का सूरज उगाया है। उन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान अपने पांचवें राष्ट्रीय सम्बोधन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प का रोडमैप प्रस्तुत किया है। उनके द्वारा घोषित यह पैकेज और पहले सरकार की ओर से दिए गए आर्थिक पैकेज एवं रिजर्व बैंक के फैसलों के जरिए दी गई राहत का कुल जोड़ है। मोदी ने इस आर्थिक पैकेज की घोषणा से न केवल चौंकाया बल्कि एक सकारात्मक सन्देश दिया है कि इस भारी भरकम पैकेज के द्वारा उन्होंने आपदा को अवसर में बदलने की ठान ली है। उन्होंने इसके माध्यम से न केवल सुदृढ़ नये भारत बल्कि आत्मनिर्भर भारत का संकल्प व्यक्त किया है। इसके माध्यम से भारत के भाल के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहरा भविष्य लिखा जायेगा। इस लिखावट का हार्द है कि हमारा भारत न केवल एक आर्थिक महाशक्ति होगा बल्कि जीवनगत विलक्षणता एवं विशेषताओं का समवाय होगा।

भारत एक ऐसे राष्ट्र बनने की ओर डग भर रहा है जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। सबके लिए शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा और उन्नति के समान और सही अवसर उपलब्ध होंगे। कोरोना महासंकट के दौर में दुनिया में भारत ही ऐसा राष्ट्र है, जिसने इतने बड़े पैकेज की घोषणा की है। लम्बे समय से भारत को लेकर की जा रही भविष्यवाणियां एवं हमारी जागती आंखों से देखा गया स्वप्न अब साकार होता हुआ दिखाई दे रहा है। अब अहसास हो रहा है प्रभावी नेतृत्व क्षमता का, सुशासन व्यवस्था का एवं स्वतंत्र राष्ट्रीय चेतना की अस्मिता का। अब बन रहा है नया भारत- आत्मनिर्भर भारत। मोदी के इस आत्मनिर्भर भारत का सीधा अर्थ है कि वे इस आर्थिक पैकेज के जरिये केवल धराशायी हो गये कारोबार, पस्त पड़ी अर्थ-व्यवस्था एवं निस्तेज हो गये रोजगार क्षितिजों को संकट से उबारने ही नहीं जा रहे हैं बल्कि सम्पूर्ण देश के मनोबल एवं आत्म-विश्वास को नयी उड़ान दे रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए इस पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉज सभी पर बल दिया गया है।

कोरोना महासंकट के बीच भी हमने देखा है कि नरेन्द्र मोदी जिस आत्मविश्वास से इस महामारी से लड़े, उससे अधिक आश्चर्य की बात यह देखने को मिली कि उन्होंने देश का मनोबल गिरने नहीं दिया। उनसे यह संकेत बार-बार मिलता रहा है कि हम अन्य विकसित देशों की तुलना में कोरोना से अधिक प्रभावी एवं सक्षम तरीके से लड़े हैं और उसके प्रकोप को बांधे रखा है। जिससे ऐसा बार-बार प्रतीत हुआ कि हम दुनिया का नेतृत्व करने की पात्रता प्राप्त कर रहे हैं। हम महसूस कर रहे हैं कि निराशाओं के बीच आशाओं के दीप जलने लगे हैं, यह शुभ संकेत हैं। निश्चित ही जीडीपी के 10 प्रतिशत के बराबर के इस पैकेज से एक नई आर्थिक सभ्यता और एक नई जीवन संस्कृति करवट लेगी। इससे न केवल आम आदमी में आशाओं का संचार होगा बल्कि नये औद्योगिक परिवेश, नये अर्थतंत्र, नये व्यापार, नये राजनीतिक मूल्यों, नये विचारों, नये इंसानी रिश्तों, नये सामाजिक संगठनों, नये रीति-रिवाजों और नयी जिंदगी की हवायें लिए हुए आत्मनिर्भर भारत की एक ऐसी गाथा लिखी जाएंगी, जिसमें राष्ट्रीय चरित्र बनेगा, राष्ट्र सशक्त होगा, न केवल भीतरी परिवेश में बल्कि दुनिया की नजरों में भारत अपनी एक स्वतंत्र हस्ती और पहचान लेकर उपस्थित होगा। यह पैकेज मनोवैज्ञानिक ढंग से चीन की दादागिरी और पाकिस्तान की दकियानूसी हरकतों को मुंहतोड़ जवाब देगा। चीन ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि भारत पर निर्भर उसकी अर्थव्यवस्था एवं बाजार को इस तरह नेस्तनाबूद किया जायेगा। किसी भी राष्ट्र की ऊंचाई वहां की इमारतों की ऊंचाई से नहीं मापी जाती बल्कि वहां के राष्ट्रनायक के चरित्र एवं हौसलों से मापी जाती है। उनके काम करने के तरीके से मापी जाती है। इस मायने में नरेन्द्र मोदी एक प्रभावी विश्व नेतृत्व बनकर उभरे हैं।

यह पैकेज एक ब्रह्मास्त्र की तरह है जिससे हम आर्थिक महाशक्ति बनेंगे, दुनिया के बड़े राष्ट्र हमसे व्यापार करने को उत्सुक होंगे, महानगरों की रौनक बढ़ेंगी, गांवों का विकास होगा, कृषि उन्नत होगी, स्मार्ट सिटी, कस्बों, बाजारों का विस्तार अबाध गति से होगा। भारत नई टेक्नोलॉजी का एक बड़ा उपभोक्ता एवं बाजार बनकर उभरेगा। प्रधानमंत्री के संबोधन से इसका आभास तो हो ही गया कि इस पैकेज में व्यापार-उद्योग के साथ-साथ किसानों, रोज कमाने-खाने वालों, छोटे-मझोले कारोबारियों का खास ध्यान रखा जायेगा। इसके साथ सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने, उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर करने, स्वदेशी उत्पादों की खपत बढ़ाने और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा। स्पष्ट है कि यह एक साहस भरा एवं चुनौती भरा काम है, इसके लिये भारत के हर नागरिक को लोकल के लिये वोकल बनना होगा। स्वदेशी उत्पाद, स्वदेशी उपभोक्ता और स्वदेशी बाजार की व्यवस्था को तीव्रता से लागू करते हुए छोटे-बड़े कारोबारियों को इसे स्वीकार करना होगा। सरकार आवश्यक आर्थिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त करेगी, लेकिन कारोबार जगत को अपने हिस्से की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाना एवं सरकार के साथ-साथ आम-जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही होगा।

भारत का सौभाग्य है कि उसे नरेन्द्र मोदी जैसे दूरदर्शी एवं इन्द्रधनुषी बहुआयामी व्यक्तित्व का नेतृत्व प्राप्त है। इस बात को उन्होंने न केवल अपने शासन में बल्कि कोरोना महासंकट के दौर में बार-बार दर्शाया है। नरेन्द्र मोदी इसलिये भी विलक्षण एवं चमत्कारी शासक हैं कि उन्होंने अपने शासन में कभी स्कूलों में शौचालय की बात की है तो कभी गांधी जयन्ती के अवसर पर स्वयं झाड़ू लेकर स्वच्छता अभियान का शुभारंभ किया। कभी योग की तो कभी कसरत की, कभी आयुर्वेद की तो कभी अहिंसा-संयम संस्कृति की वकालत की। कभी विदेश की धरती पर हिन्दी में भाषण देकर राष्ट्रभाषा को गौरवान्वित किया तो कभी “मेक इन इंडिया” का शंखनाद कर देश को न केवल शक्तिशाली बल्कि आत्म-निर्भर बनाने की ओर अग्रसर किया हैं। नई खोजों, दक्षता, कौशल विकास, बौद्धिक संपदा की रक्षा, रक्षा क्षेत्र में उत्पादन, श्रेष्ठ का निर्माण और ऐसे अनेकों सपनों को आकार देकर सचमुच मोदी ने नये भारत और आत्म-निर्भर भारत को सार्थक अर्थ दिया है। कोरोना से लड़ते हुए भी वे आज दुनिया में भारत का परचम फहरा रहे हैं। उनकी नजर में मुल्क की एकता एवं तरक्की सर्वोपरि है। उनके निर्णय उनके इतिहास, भूगोल, संस्कृति की पूर्ण जानकारी के आधार पर होते हैं।

मोदी एक उजाले का प्रतीक हैं और इस उजाले को छीनने के कितने ही प्रयास हुए, हो रहे हैं और होते रहेंगे। उजाला भला किसे अच्छा नहीं लगता। आज देश के कुछ लोग बाहर से बड़े और भीतर से बौने बने हुए हैं। आज राष्ट्र के सामने बाहरी खतरों से ज्यादा भीतरी खतरे हैं। लोग समाधान मांगते हैं, पर गलत प्रश्न पर कभी भी सही उतर नहीं होता। हमें आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये दृढ़ संकल्प और तड़प के साथ उसकी क्रियान्विति के परिदृश्य पैदा करने होंगे। 130 करोड़ लोगों के राष्ट्र का जीवन सभी ओर से सुन्दर होगा। लेकिन आशाओं के बीच घने अंधेरे भी कायम हैं। इन घने अंधेरों के बीच अच्छे दिन की कल्पना करते हुए यह भी माना जाने लगा था कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। चूंकि अपेक्षाओं की कोई सीमा नहीं होती और कई बार सक्षम सरकारों के लिए भी जन आकांक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरना मुश्किल हो जाता है इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचना कठिन है कि भारत की जनता आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिये कितनी उत्साहित है और कितनी नाउम्मीद ? लेकिन इतना तो तय है ही कि अधूरी उम्मीदों और बेचैनी के भाव के बाद भी लोगों का भरोसा कायम दिख रहा है। यह भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत है।

Comment:

kuponbet giriş
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano
ikimisli giriş
istanbulbahis giriş
betnano
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
meritbet
galabet giriş
galabet giriş
pashagaming giriş
grandpashabet giriş
betnano
ultrabet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bahislion giriş
betkolik giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano
almanbahis giriş
betmarino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano
betnano
grandpashabet giriş
casibom
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
betgar giriş
bahislion giriş
meritbet giriş
betplay giriş
meritbet giriş