कांग्रेस की ओर से पी.चिदंबरम् का नाम पीएम के लिए-राजनीतिक बिसातों में उलझी कांग्रेस

राकेश कुमार आर्य

बात 1965 की है। लंदन में प्रधानमंत्री सम्मेलन हो रहा था। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे। उन्हें भी उस सम्मेलन में जाना था। वहां के ठंडे मौसम के कारण शास्त्री जी के लिए कोटों की आवश्यकता थी। उन पर दो ही कोट थे, वह भी पुराने थे और एक तो फट भी गया था। इसलिए प्रधानमंत्री के सचिव ने उन्हें दूसरा कोट बनवाने के लिए कहा। लेकिन शास्त्री जी ने इन्कार कर दिया। तब सचिव महोदय कोट का कपड़ा भी ले आये और टेलर भी बुला लिया गया, लेकिन टेलर से शास्त्रीजी ने पुराने कोट को पलटने के लिए कहा कि पहले इसे पलटकर देख लो, यदि अच्छा लगा तो इसी को पहनकर चले जाऐंगे। टेलर ने कोट पलट दिया। शास्त्री जी ने पलटा हुआ कोट देखकर कहा कि-‘अरे! यह तो एक दम नया हो गया। जब हम ही इसे नही पहचान पा रहे कि ये नया है या पुराना तो दूसरे लोग क्या पहचानेंगे। अब इसी से यात्रा करेंगे’। शास्त्रीजी ने नये कोट का आया हुआ कपड़ा लौटा दिया और पुराने पलटे हुए कोट से ही सम्मेलन में भाग लेने चले गये।
क्या कमाल की सादगी थी?
अब दूसरा उदाहरण लीजिए। आाजादी से पूर्व की घटना है। कांग्रेस की बैठक हो रही थी। संयोग से बैठक का एजेंडा कहीं खो गया। तब गांधीजी ने डा. राजेन्द्र प्रसाद से कह दिया कि तुमने एजेंडा पढ़ तो लिया ही था उसी के अनुसार नया बना लो और कार्यवाही प्रारंभ करो। राजन बाबू ने ऐसा ही किया। उनके बनाये नये एजेंडा के अनुसार कार्यवाही आरंभ हो गयी।
तभी संयोग से खो गया एजेंडा भी मिल गया। नेहरू जी ने डा. राजेन्द्र प्रसाद के एजेंडा से उसका मिलान किया तो आश्चर्य चकित रह गये और कहने लगे-‘अरे! यह तो पहले वाले एजेंडा जैसा ही है। क्या दिमाग है?’ नेहरू मांसाहारी थे और डा. राजेन्द्र बाबू शुद्घ शाकाहारी थे। दोनों में मांसाहार और शाकाहार को लेकर बहस हो जाया करती थी। इसलिए राजन बाबू ने सही समय पर सही उत्तर दिया और कहा-‘नेहरूजी यह दिमाग दूध का है अंडे का नही।’
नेहरू जी, निरूत्तर और लज्जित होकर रह गये।
आज मैं सोचता हूं कि कांग्रेस इतने समय तक जिंदा क्यों रही? और आज मर क्यों रही हैं? तब इसका उत्तर यही आता है कि यह जिंदा थी शास्त्री जी जैसे सादगी पसंद, कत्र्तव्य निष्ठ और राष्ट्रनिष्ठ लोगों के कारण और राजन बाबू जैसे संस्कृतिनिष्ठ, सादगी पसंद और सिद्घांतनिष्ठ लोगों के कारण।…और आज मर रही है तो इन जैसे लोगों को भुला देने के कारण मर रही है, सारी कांग्रेस एक परिवार की जागीर बना दी गयी है। वृहन्नला वंदन गान कर रहे हैं और ‘देवी माता’ मंद मंद मुस्कुरा रही है।
आज शास्त्री जी की ईमानदारी के स्थान पर कांग्रेस भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबी है। अब एक साधारण से कार्यकर्ता के पास भी ढेरों कोट मिले जाएंगे। क्या एक पलटे हुए कोट से विदेश यात्रा करने वाला कोई कांग्रेसी आज आपको मिल सकता है? कदापि नही। ये है शास्त्री के स्थान पर नेहरू की उपासना का परिणाम। आप समझ गये होंगे कि आज का भ्रष्टाचार भी अपने अपने मंदिरों में देवता परिवर्तन का परिणाम है। देवताओं की चोरी लोकतंत्र के दीपक के तले हो गयी और देश को पता भी नही चला। इसीलिए गो भक्त और गो उपासक लोगों को संस्कृति निष्ठ लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और मंदिर की देवी पर गोमांस से भोग लगाया जा रहा है। लोकतंत्र के उजाले में देश लुट रहा है और हमसे लोकतंत्र जिंदाबाद कहलवाया जा रहा है। पीड़ा का अंत होता नही दिखता।
आज कांग्रेस के बारे में सूचना मिल रही है कि ये आगामी चुनाव 125 सीटों को लक्ष्य बनाकर लडऩे जा रही है। यानि वर्तमान की 206 सीटों में से 81 सीटें खोने के लिए पार्टी तैयार है। मंदिरों में जब देवताओं की भी चोरी कर ली जाती है तो वैचारिक रूप से दुर्बल पुजारी मंदिरों पर कब्जा कर लेते हैं, जिससे वैचारिक पतन की अवस्था से संगठन गुजरते हैं। कांग्रेस की स्थिति आज यही है। पार्टी सत्ता के लिए और राष्ट्र की प्रभुसत्ता के लिए लड़ाई नही लड़ रही है बल्कि राष्ट्रनिष्ठ लोगों को सत्ता से दूर कैसे रखा जाए और भावी जनादेश को कैसे तोड़ा मरोड़ा जाए, इस तिकड़म के लिए चुनावी तैयारियों में जुटी है। इसे छोटी सोच के छोटे नेतृत्व की बात कहें या पार्टी के लिए दिनों का फेर कहें या किये का परिणाम कहें? तीनों स्थितियों में ही पार्टी का संकट स्पष्ट दीख रहा है। पार्टी चोरी (भ्रष्टाचार के कीर्तिमान) और सीनाजोरी (जनमत और जनादेश को पलटने की अभी से हो रही तैयारियों) की स्थिति में फंसती जा रही है। राष्ट्रीय दल होने के नाते कांग्रेस की इस दुरावस्था का परिणाम राष्ट्र को भी भुगतना पड़ सकता है।
इसी मानसिकता के बीच कांग्रेस पी चिदंबरम जैसे नेता को पीएम पद का प्रत्याशी बनाकर उतार रही है। यह वही पी. चिदंबरम हैं, जिन पर चुनाव में धांधली के आरोप लगे हैं और भ्रष्टाचार के विषय में भी जिनकी चादर उजली नही है। ऐसे व्यक्ति का नाम यदि कांग्रेस की ओर से पीएम पद के लिए चला है तो बात साफ है कि पार्टी में अब ईमानदारी की कोई कद्र नही है और ना ही शाकाहार (भारतीय संस्कृतिनिष्ठ राष्ट्र नीति-राजनीति) के लिए कोई स्थान है। पार्टी यद्यपि व्यक्तिनिष्ठ होकर राष्ट्रनिष्ठ तो कभी नही हो पायी लेकिन फिर भी इसके बहुत से महान व्यक्तित्वों के योगदान को भुलाना भी संभव नही है। इस पार्टी ने आत्महत्या का रास्ता चुना और दुर्भाग्य से उसी पर बढ़ती जा रही है। पार्टी राष्ट्रनिष्ठ से कंगाल हो गयी तो केवल इसलिए कि राष्ट्रनिष्ठ लोगों ने इस पार्टी की ओर जाना छोड़ दिया। सारे चाटुकार और चारण वृत्ति के ऐसे लोग धीरे धीरे बढते गये और पार्टी का स्तर घटता गया। इसलिए इतनी बड़ी राजनीतिक पार्टी को जिसने कि स्वतंत्रता के दशकों बाद तक देश को शासित किया है, आज एक व्यक्ति (नरेन्द्र मोदी) से डर लग रहा है। क्योंकि सारे राष्ट्रनिष्ठ और संस्कृति निष्ठ लोगों की निष्ठा और प्रेम इस व्यक्ति (नरेन्द्र मोदी) के साथ जुड़ता जा रहा है। बात साफ है कि कांग्रेस ने जिन चीजों के साथ छल किया था आज शीशे में (चुनावी जंग में) उसे अपना चेहरा दीख रहा है और वह खुद से ही डर रही है। यानि छल का परिणाम आज छलियों को छल रहा है, इसलिए कांग्रेस को अपना ही चेहरा खल रहा है। कहीं इसे बिच्छू दंश रहा है तो कहीं विष धर विष उगल रहा है, ये कहती है कि देश चल रहा है और हम कहते हैं कि देश नही तेरा काल (पाप) चक्र चल रहा है। पी. चिदंबरम् इस कालचक्र को ‘पुण्य’ में बदल पाएंगे इसमें संदेह है।
कांग्रेस ने उनके नाम का पर्दाफाश होते ही अपने पत्तों को छिपाने का प्रयास शुरू कर दिया है। देखते हैं कि षडयंत्रों, घात प्रतिघात और छल-छंदों की कौन-कौन सी और कैसी-कैसी परतें अभी उघडेंग़ी और राज दरबार में कैसी कैसी बिसातें बिछाईं जाएंगी। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस राजनैतिक बिसातों में उलझकर रह गयी है। वह ऊहापोह में है और मोदी का सामना करने के लिए उसे कुछ सूझ नही रहा है। पी. चिदंबरम में वह दम नही है कि वह कांग्रेस को पुरानी शक्ल में लौटा दें। कांग्रेस को डर है कि राहुल गांधी का वर्चस्व पार्टी के हारने के बाद भी कैसे कायम रहें। यह मानसिकता पार्टी को फिर एक परिवार से बांधने के लिए तैयार की जा रही है, और यही वो बिंदु है जिस पर आकर कांग्रेस आगे न बढऩे के लिए अभिशप्त है।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino
vaycasino giriş
gobahis giriş
gobahis giriş
vdcasino giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
meritking giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betasus giriş
betasus giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meritking giriş
nitrobahis
nitrobahis
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş