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शिक्षा का हक मांगा कक्षा दो के गरीब छात्र ने

दिल्ली हाईकोर्ट ने कक्षा दो के एक गरीब छात्र की याचिका पर दिल्ली सरकार और एक निजी स्कूल से जवाब तलब किया है। छात्र की अदालत से मांग है कि वह संस्थान के खिलाफ निर्देश जारी करे क्योंकि उसे पढाई जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अदालत ने शिक्षा निदेशक, दिल्ली सरकार और उत्तरी दिल्ली के रोहिणी स्थित युवा शक्ति मॉडल स्कूल से नौ जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के छात्र सात वर्षीय कैलाश गोयल की ओर से दायर की गई है। जस्टिस हिमा कोहली ने कैलाश के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए १ जून को दिल्ली सरकार और स्कूल को नोटिस जारी किया। छात्र की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि कैलाश वर्ष २००९ से ही आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के छात्र के रूप में पढाई कर रहा था। स्कूल ने मनमाने ढंग से उसे इस वर्ष अप्रैल से कक्षा में जाने से मना कर दिया। स्कूल ने उसके माता-पिता से पूरा शुल्क अदा करने को कहा है। वकील ने कहा, स्कूल का रवैया मनमानी भरा, गैरकानूनी, असंवैधानिक और बच्चों को प्रदत्त मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम-२००९ का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, स्कूल दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा रियायती दर पर आवंटित सरकारी जमीन पर बना है। भूमि इस शर्त पर आवंटित की गई थी कि स्कूल दाखिले की २५ फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित रखेगा।
भारतीय छात्रों पर हमलों के सिलसिले में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सफाई दी
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हो रहे हमलों के सिलसिले में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी सफाई दी है। सरकार ने कहा है कि नस्ली हिंसा से जुड़े मामलों में सजा को और कठोर बनाए जाने के बाबत ऑस्ट्रेलिया सरकार मौजूदा कानून में संशोधन की संभावना तलाश रही है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था कि भारतीय छात्रों की सुरक्षा के लिए वह क्या कदम उठा रही है।

अपनी दलील में विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार स्थिति की गंभीरता को समझती है। ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपने मौजूदा कानून में प्रस्तावित संशोधन के परिणामस्वरूप नस्ली हिंसा के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को और बल मिलेगा। इसके अलावा नस्ली भेदभाव से जुड़े अपराधों के लिए सजा को और कठोर बनाए जाने के लिए भी कानून में संशोधन का प्रस्ताव है। मंत्रालय ने इन आरोपों का खंडन किया कि सरकार ऑस्ट्रेलिया में हो रही नस्ली घटनाओं पर मूक दर्शक बनी हुई है। मंत्रालय का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर केंद्र बहुत चिंतित है। सरकार ने इन छात्रों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद इस मुद्दे को अपने ऑस्ट्रेलिया समकक्ष केविन रुड के सामने उठाया है। विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है।

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