लालकृष्ण आडवाणी के तेवर लाल

निरंजन परिहार
बीजेपी में हड़कंप है। लालकृष्ण आडवाणी अड़ गए हैं। नितिन गड़करी नहीं चलेंगे। संघ परिवार बहुत कोशिश कर रहा है। कोशिश यह कि कैसे भी करके गड़करी को एक बार फिर चला लिया जाए। लेकिन बूढ़ा शेर बिदक गया है। संघ परिवार बहुत सालों से बीजेपी के सिर पर सवार है। पर, गड़करी के मामले में इस बार आडवाणी संघ के सिर पर सवार हो रहे हैं। वे किसी भी हालात में गड़करी को रिपीट करने के लिए कहीं से भी तैयार नहीं लग रहे हैं। संघ परिवार अकसर ऐसे मौकों पर बहुत सारे खेल खेलता है। संघ परिवार को लग रहा था कि राम रथ पर सवार होकर देश भर को राम नाम की लहर लाने वाले आडवाणी को राम के जरिए साधा जा सकता है। सो, इस बार रामलाल तो भेजा। बेचारे रामलाल, गए तो थे संघ परिवार के दूत बनकर। सोचा होगा कि आडवाणी फिल्मों के शौकीन रहे हैं। सो, हसीना मान जाएगी फिल्म की तर्ज पर वे भी मान ही जाएंगे। लेकिन राम के नाम से देश की सत्ता से कांग्रेस को पानी पिलाने की हालत में लानेवाले आडवाणी ने राम लाल को पानी पिलाकर बैरंग वापस भेज दिया। रामलाल बीजेपी के संगठन महासचिव हैं। संगठन महासचिव का पद बीजेपी में कद और पद दोनों के हिसाब से बड़ा माना जाचा है। इस पद पर बैठनेवाले का मनोनयन संघ परिवार अपने भीतर से करता है। ठीक वैसे ही, जैसे अपने प्रदेश में कभी ओमप्रकाश माथुर संगठन महासचिव हुआ करते थे। माथुर तो खैर, पहले से ही किसान संघ के जमाने से वैसे भी ताकतवर थे और इस पद पर आकर और मजबूत हो गए। लेकिन बीजेपी की अंदरूनी राजनीति में यह बहुत ताकतवर पद हुआ करता है। सो, जो भी इस पद पर आता है, वो ताकतवर हो ही जाता है। अपने प्रकाशजी भाईसाहब को ही देख लीजिए। बहुत सम्मानित और मनुष्य होने के तौर पर बेहद अच्छे हैं। इतने अच्छे कि अपन भी उनके पैर छूते हैं। लेकिन पद पर थे, तो बहुत चर्चा में थे। अब कहां हैं, बहुत कम लोग जानते हैं। परंपरा के हिसाब से संघ परिवार अपने एक पुत्र को बीजेपी में ठेके पर भेजता है। भेजने से पहले उसको राजनीति के गुर सिखाता है। फइर वहां उससे राजनीति को नियंत्रित करवाता है। लेकिन जब वह खुद राजनीति करने लगता है, तो उसको वापस भी बुला लेता है। पर, आप तो जानते ही है कि राजनीति पीछा नहीं छोड़ती। एक बार भी जिस किसी ने उसको जी लिया, उसके साथ वह सदा के लिए चिपकी ही रहती है। सो, संघ का कोई ठेके पर गया पुत्र जब राजनीति नहीं छोड़ता है, तो संघ कहने को भले ही उससे किनारा कर लेता है। पर, वास्तव में उसे सताता है, बहुत परेशान करता है। वैसे, संघ परिवार की संतानें बहुत मजबूत होती हैं। सो, अपने ओमजीभाई साहब न तो थके, और नहीं हारे। जमे रहे, तो पद और कद दोनों पा गए। खैर, अपन बात संघ परिवार के बीजेपी में ठेके पर आए रामलाल की कर रहे थे। तोज्, संघ परिवार की सांसों की क्षमता से भरे ताकतवर रामलाल आज के लौहपुरुष रहे आडवाणी के साथ शुक्रवार को ताकत आजमाने गए। रामलाल क्या बात करने गये थे, यह बिना जाने ही आडवाणी ने तबियत का बहाना बनाकर उनसे कोई बात नहीं की। पल भर के लिए इस बात को सच भी मान लिया जाए कि रामलाल तबियत का हाल पूछने ही गए थे, तो फिर तबियत कोई इतनी भी खराब नहीं थी कि आडवाणी उनसे मिलें भी नहीं। पर, पर वे नहीं मिले।और अगले दिन आडवाणी की तरफ से संघ परिवार और बीजेपी में यह संदेश पहुंचा दिया गया कि नितिन गडकरी नहीं चलेंगे। आमतौर पर शांत रहनेवाले आडवाणी ने आखिरकार शनिवार को अपनी आवाज बुलंद कर दी। और गडकरी को गद्दी छोडऩे का संदेश भिजवा दिया। बीजेपी में एक बार फिर हड़कंप मचा हुआ है।

Comment:

betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis
vaycasino
vaycasino