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राजनीति

कुंभ में राजनाथ की डुबकी के अर्थ

इलाहाबाद। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कुंभ नगरी पहुंचकर कुंभ स्नान करते हुए पार्टी को हिंदुत्व के मुद्दे पर फिर से लाने का स्पष्ट संकेत दिया है। अयोध्या में राममंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया है। 2014 के चुनावों के दृष्टिगत भाजपा अध्यक्ष का राममंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया जाना कुछ न कुछ अर्थ तो रखता ही है। इसका एक अर्थ तो यह है कि भाजपा ने हिंदुत्व के मुद्दे से भटकने की अपनी गलती को स्वीकार किया है और दूसरा अर्थ यह है कि भाजपा अपनीगलती का प्रायश्चित श्रीराम के चरणों में बैठकर करने में ही अपना लाभ देख रही है।
भाजपा ने अपने राजपथ पर जिन झाडिय़ों को उगने का अवसर दिया। सचमुच उनके लिए पार्टी की दोषी है। पार्टी को सत्ता के लिए जुगाड़ करने की गठबंधन की राजनीति से परहेज करना चाहिए। गठबंधन देश के लिए जरूरी नही है बल्कि उसे मजबूरी में जरूरी बनाकर पेश किया गया है। ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ जैसे बकवास भरे जुमले भी कुछद नेताओं की देन है। जिससे देश में यथा स्थिति वाद की निराशाजनक परिस्थितियों का निर्माण हुआ और राजनीति भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। न्यूनतम साझा कार्यक्रम के स्थान पर गठबंधन की राजनीति में जितना बड़ा राजनीतिक दल अथवा जितनी जिस राजनीतिक दल की राजनीति में भागीदारी उतनी ही उस राजनीतिक दल की चुनावी घोषणाओं को साझा कार्यक्रम में शामिल करने की सोच होनी चाहिए थी। जबकि हमारे देश में सत्ता में सबसे बड़ी भागीदार को सबसे छोटे भागीदार ने ब्लैकमेल करना प्रारंभ किया और इस ब्लैकमेलिंग का भरपूर लाभ उठाया हर गठबंधन ने गठबंधन की मजबूरियों को ही ‘गठबंधन धर्म के रूप में अपनाने और भुनाने का प्रयास किया। अब भाजपा के पास अटल जैसा नेता तो नही है लेकिन विकास पुरूष के नाम के रूप में जाने माने वाले नरेन्द्र मोदी उसके पास अवश्य हैं। पार्टी और संघ की ओर से मिलने बलिशुभ संकेतों के अनुसार नरेन्द्र मोदी पार्टी की ओर से पीएम पद के सशक्त दावेदार बनते जी रहे हैं। ऐसे समय में जब पार्टी नेतृत्व के संकट से जूझ रही थी और पार्टी कहीं अपने मूल मुद्दों से भटकी हुई भी लग रही थी तब भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह द्वारा राम मंदिर निर्माण के प्रति भाजपा की आस्था व्यक्त करना अच्छा संकेत है। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक अशोक सिंघल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा के घोषणा पत्र में राम मंदिर है। पिछली बार यदि राम मंदिर निर्माण का यह काम पूरा नही हो पाया था तो इसका यह अर्थ भी नही कि यह आगे भी नही होगा। विहिप के अशोक सिंघल की इस टिप्पणी से और विहिप के भाजपा के प्रति आ रहे बदलाव से स्पष्टï हो जाता है कि संघ, भाजपा और विहिप मिलकर एक अच्छी समझ स्थापित कर चुके हैं। जिसके शुभ संकेत कुंभ नगरी ने दिये हैं। देखते हैं कि तीनों राष्ट्रवादी शाकियों की यह तिकड़ी किस प्रकार सत्ता पर अपना कब्जा जमाती है और परिवर्तन की बाट जोहते देश को किस प्रकार आगे बढ़ाकर ले जाती है।

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