हसनपुर की प्राकृतिक झील

गाजियाबाद हापुड़ मार्ग पर गाजियाबाद से लगभग दस किलोमीटर दूर है डासना मसूरी। मसूरी औद्योगिक क्षेत्र में दादरी मार्ग पर गांव हसनपुर में है 35 हेक्टेयर की विशाल झील। झील के एक ओर है हसनपुर तो दूसरी ओर है गांव छिड़ौली। झील का लगभग 1/3 भाग पानी से परिपूर्ण है तो शेष भाग में ऊंची ऊंची घास एवं कुछ धान आदि की फसलें खड़ी हैं। झील में मछली पालन होता है और इससे जिला पंचायत को अच्छी आय हो जाती है।
यह झील पक्षियों की विभिन्न विदेशी प्रजातियों का प्रवास स्थल माना जाता है। वैसे तो वर्ष भर ही लेकिन जाड़ों में विशेषा रूप से यहां विदेशी पक्षी आते रहते हैं। उस समय यहां का नजारा देखने योग्य होता है। परंतु मांस से पेट भरने वाले गाजियाबाद डासना दादरी मार्ग पर स्थित नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) से लगभग पांच किलोमीटर है जारचा भारतीय गजेटियर उ.प्र. जिला गाजियाबाद वर्ष 1999 के अनुसार जारचा की स्थापना सैय्यद जैनुलब्दीन ने की थी। इसके वंशज सब्जवारी कहे जाते हैं क्योंकि उनकी मान्यता के अनुसार उनके बुजुर्ग तुर्किस्तान के सब्जवारी गोत्रीय थे। ये पूर्वज तुगलक वंशीय शासन काल (सन 1320-1413) के मध्य भारत आए थे। पूर्व में यहां पर मेवातियों का प्रभुत्व था परंतु सैय्यद बादशाह मुईजुद्दीन मुबारक शाह के कहने पर जैनुलब्दीन ने उन्हें यहां से बाहर निकाल दिया। इस पर प्रसन्न होकर बादशाह ने जैनुलब्दीन को 3500 बीघा जमीन दी। तब कुछ शिकारी दरिंदे इसे सीजन मानते हैं। वे यह भी नही सोचते कि यदि विदेश में गये उनके परिजनों काा शिकार किया जाए तो कितना दुखद होगा? ऐसे लोग वास्तव में मानवता के माथे पर कलंक हैं।
गांव को महाराजा (साधुओं) वाला हसनपुर के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कभी प्राचीन समय में यहां साधु तपस्या करते थे। जनसंख्या वृद्घि के साथ वनखण्ड समाप्त होने लगे तो तपस्थली एवं सच्चे साधु भी लुप्त होने लगे। जब यहां गृहस्थी परिवार बसने लगे तो साधु कहीं अन्यत्र चले गये और यह बन गया महाराजों वाला हसनपुर यहां पर अधिकांशत: एक गोत्रीय जाट परिवारों का निवास होना सिद्घ करता है कि कभी यह इनके बुजुर्गों ने आबाद किया होगा।
उसने जारचा की स्थापना की। इस प्रकार जारचा का स्थापना काल सन 1414 ईं से 1415 ई. के मध्य माना जा सकता है। कहा जाता है कि जैनुलब्दीन ने यहां चार कुएं बनवाए जिनके कारण यह चार चाह नाम से प्रसिद्घ हुआ। जो अपभ्रंश होकर जारचा बन गया। (स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण जैनुलब्दीन की संपत्ति जब्त कर ली गयी)
कुओं के अवशेष तो जारचा में आज भी देखे जा सकते हैं लेकिन उपरोक्त विवरण इतिहास की कसौटी पर खरा नही उतरता। क्यों?
1. जैनुलब्दीन को भूमि सैय्यद बादशाह ने दी। सैय्यद वंश का शासन 1414 से 1416 ई. तक रहा। स्वतंत्रता संग्राम सन 1857 में हुआ तब तक जैनुलब्दीन जीवित कैसे रहा?
2. जैनुलब्दीन से भी पूर्व यह समस्त क्षेत्र जारचा के नाम से ही जाना जाता था। फिर जैनुलब्दीन इसका संस्थापक कैसे हुआ?
3. गजेटियर के अनुसार जारचा शब्द की व्युत्पत्ति चार-चाह (चार कुएं) से हुई। चार शब्द का अर्थ प्रेम आदि होता है न कि कुंआ फिर जारचा नाम क्यों पड़ा?
खोजी दृष्टि, तार्किक कसौटी एवं स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार जो दृष्टिगोचर हुआ उसका सारांश निम्न प्रकार है-
जारचा से लगभग 20 किलोमीटर दूर द्रोणाचार्य का आश्रम स्थल दनकौर नामक कस्बा है। द्रोणाचार्य कुरूवंश के आचार्य (शिक्षक) थे इसलिए कुरूवंश ने यह समस्त क्षेत्र द्रोणाचार्य को जागीर के रूप में दे रखा था। आचार्य आचरिया आचारजा आदि के रूप में विकृत होता हुआ विधर्मियों की जुबान में यह जारचा हो गया। यह क्षेत्र द्रोणाचार्य की गायों का चरागाह था जो अपभ्रंश होकर चार्य चार चाह (गाह) जैसा विकृत होते हुए जारचा बन गया। यह समस्त क्षेत्र उस समय विशाल बनखण्ड था। संभवत: मुगल काल में भी चरागाह रहा हो। मंदिर का प्राचीन शिवलिंग इसकी पुष्टि करता है। ग्रामवासियों के कथानुसार कुंओं का निर्माण जैनुलब्दीन ने नहीं परंतु बनजारों ने कराया था। ये कुएं विदेशी आक्रमणों से भी पूर्व के हैं।
जैनुलब्दीन ने जिस जारचा से मेवों को बाहर निकाला था वह स्थल अब उज्जड़ खेड़ा (उजड़ा गांव) के नाम से जाना जाता है जो कि वर्तमान जारचा से लगभग एक किलोमीटर दूर है। जारचा के चारों ओर कभी खाई एवं चारदीवारी थी। जारचा से कुछ ही दूरी पर मेवों का शिव मंदिर था जो अब ध्वस्त हो गया है। मुसलमानों ने इसे मस्जिद के रूप में अपना कहा तो हिंदुओं ने प्राचीन दस्तावेजों के आधार पर मंदिर सिद्घ किया।
जारचा का सर्वाधिक विस्मयकारी पोषती खाना का वह कुआं है जिसमें खारा और मीठा दो तरह का जल है। एक ओर खींचा तो मीठा दूसरी ओर खारा। है न विस्मयकारी अब तो सभी कुएं समाप्त हो गये हैं। जारचा का समीपस्थ ग्राम कलौंदा आल्हा ऊदल के समय का लोहागढ़ बताया जाता है।
जारचा के रघुवीर शरण जैन किसी समय कश्मीरी गेट दिल्ली के विशाल भू भाग के मालिक थे। अंग्रेजों द्वारा जारचा जागीर जब्त होने पर उन्होंने उसका आधा भाग खरीद लिया।
शेष आधा भाग खुरशैद अली व जमशेद अली ने खरीदा। कहा जाता है कि ये दोनों नबाव बागपत के पुत्र थे। खुरशैद अली ने खुरशैद पुरा एवं जमशेद अली ने जमशेदपुरा बसाया तो उन्मूलन में रघुवीर शरण के परिवार द्वारा स्कूल के नाम पर बचाई गई चालीस बीघा भूमि आज भी बंजर अवस्था में पड़ी है। रघुवीर शरण ने दिल्ली से कुछ मुस्लिमों को भी लाकर बसाया था। दिल्ली वालों में आज वे दिल वालों के नाम से जाने जाते हैं।
जारचा में जैन समाज भी प्रतिष्ठित रहा है। जैन संवत 1968 (सन 1441ई) का बना जैन मंदिर जारचा की शोभा माना जाता है। इसी परिवार के ज्ञान चंद जैन ने यहां एक धर्मार्थ हाईस्कूल भी चला रखा है। आवश्यकतानुसार वे इसकी आर्थिक ही कर देते हैं इससे लेते कुछ नही।
यहां के लाला बनारसी दास पुत्र खिच्चु मल, सरदारी मल, त्रिलोक चंद जैन ने विक्रमी संवत 2016 (सन 1960 ई.) में एक घंटाघर एवं गांधीजी की मूर्ति भी स्थापित की थी। किसी समय जारचा व्यापारिक केन्द्र था। गांव के मक्खन सिंह सिसौदिया एवं लाला कपिल कुमार बताते हैं कि दादरी धौलाना, दनकौर आदि तक के ग्रामीण सामान खरीदने यही आते थे।
खूब भीड़ रहती थी। कुओं के साथ साथ जारचा भी अधोमुख होता गया लेकिन उनकी धार्मिक आस्थाएं आज भी यथावत हैं। कांवडियों की सेवा करने यहां का दल सरूरपुर (सरधना) वर्ष में दो बार आज भी जाता है।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
casinolevant giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
holiganbet giriş