वैदिक सृष्टि संवत के शुभ आगमन पर

आज प्रातः कालीन की बेला में आपको मेरा सादर नमस्कार व सुप्रभात । नव संवत्सर 2077 के शुभ अवसर पर आपके लिए आपके परिवार के लिए सभी इष्ट मित्र और बंधु बंधुओं के लिए बहुत-बहुत बधाइयां एवं शुभकामनाएं।

जिस प्रकार से देश में और विश्व में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ा है इसमें आप और आपका परिवार स्वस्थ रहे सुखी रहे और संपन्न रहे – ऐसी मेरी शुभकामनाएं। आज हम विचार करेंगे कि सृष्टि का निर्माण कितने वर्ष हो चुके हैं ? इसके अलावा चारों युगों की आयु क्या है ? कितना समय चारों युगों के योग का होता है ? आदि आदि बिंदुओं पर विचार करते हैं ।

प्रश्न_कलयुग का प्रारंभ कब हुआ ?

उत्तर_: कलयुग का प्रारंभ 20 फरवरी 3102 ईसा पूर्व को 2:27 :30 सेकंड पर हुआ था।कलयुग का अब तक जो समय गुजर चुका है यह 5122 वर्ष हो चुके हैं।

प्रश्न_: चारों युगों सतयुग , त्रेता, द्वापर , कलयुग का कुल समय अलग-अलग व योग क्या होता है ?

उत्तर_: सतयुग का 17 लाख 28 हजार वर्ष का समय होता है । त्रेता 12 लाख 96000 , द्वापर 8 लाख 64 हजार जबकि कलयुग का 432000 वर्ष का समय होता है ।

प्रश्न_: एक चतुर युगी का योग कितना होता है ?

उत्तर_ : 43,2000 वर्ष ।

प्रश्न_: महा युग किसे कहते हैं ?

उत्तर: चारों युगों को एक साथ जोड़कर जो समय बनता है उसको एक महा युग कहते हैं ?

प्रश्न : मन्वन्तर क्या होता है ?

उत्तर_एक कालगणना है।एक मन्वन्तर में 71 महा युग होते हैं ।

प्रश्न_,: 71 महायुग का कुल कितना समय होता है ?

उत्तर_30 करोड़ 67 लाख 20 हजार वर्ष होते हैं।

प्रश्न_प्रलय कब होती है ?

उत्तर_: 14 मन्वंतर गुजर जाने के बाद प्रलय होती है।

प्रश्न_: कल्प क्या होता है ?

उत्तर_: 14 मन्वन्तर का एक कल्प होता है।

प्रश्न_: अब तक इस सृष्टि के कितने कल्प बीत चुके हैं ?

उत्तर_: 6 कल्प बीत चुके हैं।

प्रश्न :_ब्रह्मा का दिन क्या होता है ?

उत्तर_ ब्रह्मा के 1 दिन को कल्प कहते हैं अथवा सृष्टि समय कहते हैं । जिसमें चार अरब 32 करोड वर्ष होते हैं।

प्रश्न_: 14 मन्वन्तर में कितनी चतुर युगी बीत जाती हैं ?

उत्तर_: एक सहस्त्र अर्थात 1000 चतुर युगी।

प्रश्न :_स्वायंभुव मनु किसे कहते हैं ?

उत्तर ,:_जिस समय नक्षत्रीक सृष्टि उत्पन्न होती है , उस काल को स्वायंभुव मनु कहते हैं । सरल भाषा में जिस समय केवल आकाश में नक्षत्र उत्पन्न होते हुए होते हैं , उस काल को कहा जाता है।

प्रश्न :_वैवस्तमनु क्या होता है ?

उत्तर_जब मानव सृष्टि उत्पन्न होती है , उसको वैवस्त मनु कहते हैं ?

प्रश्न :_वैवस्तमनु की कितनी चतुर युगी बीत चुकी हैं ? अर्थात वैवस्तमनु या मनुष्य की सृष्टि उत्पन्न हुए कितना समय हो चुका है

उत्तर_: – वैवस्त मनु की 27 चतुर युगी बीत चुकी हैं और यह 28 वा कलि है । इसके बाद अर्थात इस कलयुग के बाद 28 चतुर युगी संपन्न हो चुकी होंगी।

प्रश्न_: क्या यह सब कल्पित एवं गपोर हैं,?

उत्तर_यह सब वैज्ञानिक ज्योतिष गणना के आधार पर है अर्थात कल्पित नहीं है।

प्रश्न_: 27 चतुर्युगीयों का कितना वर्ष होते हैं ?

उत्तर_: 11,66,40,000 वर्ष प्रश्न_वैवस्त मनु सेआज तक का योग क्या होता है।

उत्तर_: 12,05,33,122 वर्ष।

प्रश्न : ये व्यवस्था क्या ज्योतिष के सिद्धांतों पर अवलंबित है ?

उत्तर : ज्योतिष के सिद्धांतों पर तो अबलंबित है ही परंतु वही तक परिमित नहीं है अपितु महाभारत और बाल्मीकि रामायण तक भी हैं , अतएव युगों के द्वारा ठहराया हुआ सृष्टि सम्वत आधुनिक वैज्ञानिक खोजों से कहीं अधिक विश्वसनीय है और ऐतिहासिक है। इसी साधन से हम कह सकते हैं कि सृष्टि उत्पन्न हुए 6 मन्वन्तर 27 चतुर युगी तीन युग और कलियुग के 5122 वर्ष बीत चुके हैं अर्थात कुछ कम 2 अरब वर्ष आज तक व्यतीत हो चुके हैं।

प्रश्न_: पृथ्वी कब बनी और मनुष्य सृष्टि कब हुई ?

उत्तर :_सृष्टि की वर्ष संख्या कुछ कम 2अरब वर्ष है। जिसका ऊपर हम उल्लेख कर चुके हैं परंतु यह समय मनुष्य की उत्पत्ति का नहीं है। यहां यह अंतर समझ लेना चाहिए यह समय सृष्टि की उत्पत्ति के आरंभ से आज तक का है । सृष्टि उत्पत्ति तब से मानी जाती है जब से सृष्टि का बनना आरंभ हुआ था। यह वह समय है जब प्रलय का समय पूरा होकर सृष्टि का बनना आरंभ होता है अर्थात उन्मुक्त प्रकृति का परस्पर संघात आरंभ होता है और परमाणु से अणु आदि आरंभ होते हैं । इस समय से लेकर सूर्य, ग्रह, नक्षत्र आदि बनने तक के समय को स्वायम्भुव मनु कहते हैं। स्वायम्भुव मनु के समय में उत्पन्न उत्तानपाद ध्रुव आदि नक्षत्र आकाश में विद्यमान हैं । जिस प्रकार स्वायम्भुव मनु के समय नक्षत्र जगत तैयार हुआ , उसी प्रकार दूसरे स्वारोचिष मनु के समय में पृथ्वी तैयार हुई । तीसरे मनु के समय में पृथ्वी से चंद्रमा तक हुआ। चौथे मनु में समुद्र से भूमि निकली । पांचवे में वनस्पति हुई । छठे में पशु और सातवें वैवस्तमनु में मनुष्यों का जन्म हुआ था । जिन का हिसाब ऊपर हम 27 चतुर युगी के बाद दे चुके हैं ।

प्रश्न :_सूर्य वंशऔर चंद्रवंश के राजाओं की प्रधान शाखाएं कब से प्रारंभ हुई?

उत्तर : हमारे आर्य कुलभूषण क्षत्रिय ही राजा थे और सूर्यवंश और चंद्रवंश राजाओं की दोनों प्रधान शाखा में वैवस्त मनु से ही आरंभ होती है । इसके पूर्व का कोई छत्रिय वंश नहीं जाना जाता । इससे प्रतीत होता है कि मनुष्य जाति का प्रादुर्भाव वैवस्त मनु के समय से हुआ।

परंतु हमारी सृष्टि की संख्या श्रृष्टि के आरंभ से है वह वैवस्त्मनू से नहीं है सृष्टि के आरंभ का अर्थ है छूटे हुए परमाणुओं का फिर से मिल जाना। जब से परमाणु मिलने लगते हैं तभी से सृष्टि का आरंभ माना जाता है । तभी से ब्रह्मा दिन शुरू होता है और तभी से कल्प का आरंभ होता है ।जब तक एक एक परमाणु अलग-अलग न हो जाए तब तक सृष्टि ही समझी जाती है , अर्थात परमाणुओं का बिल्कुल छूट जाना ही पूर्ण प्रलय है । यह स्मरण रखना चाहिए कि मनुष्य, प्राणी, सूर्य ,चंद्र ,पशु ,पक्षी , त्र न, पल्लव के बाद ही उत्पन्न हुआ है और इन सबके रहते ही मनुष्य का अंत हो जाएगा।

यद्यपि 12 करोड़ 5 लाख 33 हजार 122 वर्षों का जो विवरण हम ऊपर दे करके आए हैं यह अविश्वसनीय सी लगती है परंतु यह संख्या विज्ञान व ज्योतिष के आधार पर सही निकलती है । यही काल मनुष्य की उत्पत्ति का होता है।

प्रश्न_मनुष्य की उत्पत्ति सर्वप्रथम कहां पर हुई ?

उत्तर : त्रिविष्टप पर्वत जिसे हम तिब्बत कहते हैं, पर मनुष्य की उत्पत्ति हुई और यहीं से भारत की प्राचीन सभ्यता । जैसे-जैसे भारत के आर्य लोग बाहर जाते रहे उन देशों में किसी न किसी घटना के आरंभ होने से अपना संवत , साका या कालगणना चला रही हैं। उन सब संवत के कालगणना ओं के आधार पर भी मनुष्य करोड़ों वर्ष से अपनी ऐतिहासिक वर्ष संख्या चला रहा है । यह ऐतिहासिक घटनाएं हैं जो झूठी नहीं हो सकती । ऊपर दिए हुए आर्यों के मौलिक संवत से चीनियों का संवत कुछ ही कम है । उसकी वर्ष संख्या 9 करोड़ 60 लाख 2429 है । खताई लोगों का संवत 8 करोड़ 88 लाख 40 हजार 301 वर्ष का है।

इन संवतों की लंबी संख्याओं को असत्य न समझना चाहिए ।

चल्डिया वाले पृथ्वी की उत्पत्ति को 215 मिरियाद वर्ष बतलाते हैं । 1 मिरियद 10000 वर्ष का होता है इसलिए उनका संवत दो करोड़ 1500000 वर्ष तक जाता है परंतु यह पृथ्वी की उत्पत्ति का समय नहीं है। किंतु उनके किसी संवत का समय है।

आदि सृष्टि से संकल्प संवत एक अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 हजार 122 वर्ष।

परंतु वैवस्वत मनु से आर्य संवत क्या है ?

12 करोड़ 5लाख 33 हजार 152 वर्ष।

चीन के प्रथम राजा से चीनी संवत क्या है ?

9 करोड़ 60 लाख 2 हज़ार 429 वर्ष।

खता की प्रथम पुरुष से खताई संवत क्या है ?

8 करोड़ 88 लाख 40 हजार 301 वर्ष।

पृथ्वी की उत्पत्ति का चाल्डियन संवत क्या है ?

2 करोड़ 1500000 वर्ष।

ईरान के प्रथम राजा से ईरानियन संवत क्या है ?

1लाख 89हजार 908 वर्ष है।

आर्यों के फिनिशिया जाने का समय क्या है ? उनका संवत क्या है-?

30000 वर्ष ।

आर्यों के इजिप्ट जाने के समय से इजिप्शियन संवत क्या है ?

28, हजार 582 वर्ष ।

मूसा के धर्म प्रचार से मूसाई संवत क्या है ?

३४९६ वर्ष ।

ईशा के जन्मदिन से ईसाई संवत क्या है ?

हम सभी जानते हैं इसको 2020 ।

उपरोक्त सभी संवत को देखने से यह निष्कर्ष निकलता है कि मनुष्य की उत्पत्ति का समय बहुत अच्छी प्रकार से मिल जाता है। चीन और खता के संवतों से हमारा संवत कुछ ही अधिक है । इसका कारण यही है कि यह मूल से संबंध रखता है और वे बाकी शाखाओं से संबंध रखते हैं । इनमें से कुछ को लेकर संसार के इतिहास विभाग बनाए जाते हैं।

ऊपर जो संवत और सृष्टि के उत्पत्ति के अंक दिए गए हैं उनमें से कुछ वह समय सूचित करते हैं। जब जातियां आर्यों से पृथक होकर भारत से विदेश को गई। मनुष्यों को उत्पन्न हुए 12 करोड वर्ष हुए । ज्ञात होता है की उत्पत्ति के तीन करोड़ वर्ष बाद सबसे पहले चीन वाले पृथक हुए । उनको गए 9 करोड़ वर्ष बीते हैं । यह वह समय है जब तिब्बत से हिमालय पर ऊंचाई की तरफ सृष्टि का प्रारंभ होता है।

इनके बाद खताई लोगों को गए आठ करोड़ वर्ष बीत गए ।

इनके बाद चाल्डिया वालों को पृथक हुए 2 करोड वर्ष हो गए ।

इसके पश्चात यहां ज्योतिष ग्रंथों के लिखने का समय आता है , सूर्य सिद्धांत को लिखे 21,65000 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं।

बाल्मीकि रामायण में रामचंद्र को हुए 12 लाख 69 हजार वर्ष हो गए। फिनिशिया वाले यहां से दोबारा गए उस समय को 30000 वर्ष हो गए ।मिश्र वालों को 28000 वर्ष से अधिक हो गए ।22000 वर्ष के ब्राह्मण ग्रंथ विद्यमान है। मेगास्थनीज के समय की वंशावली भी आज तक 9000 वर्ष की होती है।

और 4000 वर्ष से अधिक की अनु पूर्वी भारतीय वंशावली उपस्थित है। इस प्रकार इतिहास के मुख्य खंड बनाए जा सकते हैं।

इस प्रकार भारत वर्ष के इतिहास से संसार भर का पूरे आर्यवर्त का संबंध है । यह सब यहां से गए हैं और बहुतों के जाने का समय उपयुक्त संवतों से ज्ञात होता है ।विश्व के इतिहास की यही सामग्री है और भारत के करोड़ों वर्ष का चुंबक इतिहास है।संसार भर के प्राचीन संवत और इतिहास से स्पष्ट हो जाता है कि आर्यों का सृष्टि संवत और मनुष्य उत्पत्ति काल कितना प्रमाणिक है।

एक लेख में सारी बातें नहीं आ सकती हैं ।इसलिए पुनः नव सृष्टि संवत का आगमन होने पर आपको बहुत-बहुत बधाई।

देवेंद्र सिंह आर्य

चेयरमैन : उगता भारत

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