महिलाओं के संवैधानिक अधिकार

भारत में संवैधानिक रूप से महिलाओं के कई प्रकार के वैधानिक अधिकारों की घोषणा की गई है । संविधान प्रदत्त अधिकारों की इस व्यवस्था के उपरांत भी महिलाओं पर अत्याचार होना सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है । इसका अभिप्राय है कि या तो महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हैं या व्यवस्था ने संवैधानिक अधिकारों के होने के उपरांत भी उन्हें इस प्रकार लागू करने में प्रमाद का प्रदर्शन किया है कि वह महिलाओं के लिए व्यावहारिक रूप में एक सुरक्षा कवच बन सकें।

यदि हम भारतीय संविधान की पड़ताल करें तो पता चलता है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 व्यवस्था करता है कि ‘‘भारत राज्य क्षेत्र के किसी ब्यक्ति को विधि के समक्ष समता से अथवा विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जाएगा।”

इसका अभिप्राय है कि कानून के समक्ष स्त्री और पुरुष को न्याय पाने में किसी प्रकार के भेद का शिकार नहीं होना पड़ेगा अर्थात महिलाओं को बिना किसी लिंग भेद के न्याय प्राप्त होगा।

संविधान के अनुच्छेद15 के अनुसार ‘‘राज्य केवल धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर नागरिकों के बीच कोई विभेद नहीं करेगा । ‘‘

संविधान के इस अनुच्छेद में भी महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करते हुए उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है कि उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।

अनुच्छेद – 19 में महिलाओं को स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया गया है । अपनी इस स्वतंत्रता का उपभोग करते हुए भारत की प्रत्येक नारी संपूर्ण भारतवर्ष में कहीं भी स्वतंत्रता पूर्वक आ जा सकती है। उसे महिला होने के कारण उसके किसी भी मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।

वह अपनी आजीविका चलाने के लिए किसी भी प्रकार का अपना वैधानिक व्यवसाय चला सकती है।

अनुच्छेद 23-24 द्वारा महिलाओं के विरूद्ध होने वाले शोषण को नारी गरिमा के लिए उचित नहीं मानते हुए महिलाओं की खरीद-ब्रिकी या वेश्यावृत्ति के लिए जबरदस्ती करना, भीख मंगवाना आदि को दंडनीय माना गया है । इसके लिए सन् 1956 में ‘ सप्रेशन आॅफ इमोरस ट्राफिक इन विमेन इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट‘‘ भी भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया। इस अधिनियम के पारित करने का लक्ष्य ही ये था कि भारतवर्ष से महिलाओं के विरुद्ध होने वाले सभी प्रकार के शोषण और उत्पीड़न को समाप्त किया जा सके।

महिलाओं को आर्थिक न्याय प्रदान करने हेतु अनुच्छेद 39 (क) में स्त्री को जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार एवं संविधान के अनुच्छेद 39 (द) में समान कार्य के लिए समान वेतन का उपबंध है। इस व्यवस्था के चलते महिला को अपना आर्थिक सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ है । अब वह पुरुष से किसी भी प्रकार कम वेतन पाने की अधिकारी नहीं होगी।

भारतीय संविधान ने महिलाओं के मातृत्व का भी विशेष ध्यान रखा है । उनके बिना संसार की गति को आगे चलाना असंभव है । इसलिए प्रत्येक नारी को प्रसूति अवकाश विशेष रूप से दिया जाना भारतीय संविधान ने सुनिश्चित किया है । अनुच्छेद 42 के अनुसार महिला को विशेष प्रसूति अवकाश प्रदान करने की बात कही गई है।

देश में दुर्बल वर्ग की महिलाओं को उत्पीड़ित करने का क्रम पिछली कई शताब्दियों से जारी रहा है । इसका समूलोच्छेदन करने के दृष्टिकोण से संविधान ने अनुच्छेद 46 में व्यवस्था की है कि राज्य दुर्बल वर्गो के शिक्षा तथा अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा तथा सामाजिक अन्याय एवं सब प्रकार के शोषण से संरक्षा करेगा ।

भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में महिला का सम्मान करना अनिवार्य माना गया है । मनु महाराज ने व्यवस्था दी है कि जहां नारियों का सम्मान होता है , वहां देवताओं का वास होता है । यह हमारा सांस्कृतिक मूल्य है । अपने इस सांस्कृतिक मूल्य को बनाए रखने के लिए संविधान ने विशेष व्यवस्था की है। संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 51 (क) (डं.) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हमारा दायित्व है कि हम हमारी संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के महत्व को समझें तथा ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो कि स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हों ।

महिलाओं की बौद्धिक प्रतिभा को राजनीतिक क्षेत्र में भी प्रयोग करने के दृष्टिकोण से भारत के संविधान ने उन्हें पंचायतों में भी विशेष आरक्षण दिया है। इसका उद्देश्य यही है कि महिलाओं को अपना बौद्धिक नेतृत्व देने का भी अवसर प्राप्त हो ।अनुच्छेद 243 (द) (3) में प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरे गये स्थानों की कुल संख्या के 1/3 स्थान स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेगें और चक्रानुक्रम से पंचायत के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में आबंटित किये जाएगें । इसी प्रकार अनुच्छेद 325 के अनुसार निर्वाचक नामावली में महिला एवं पुरुष दोनों को ही समान रूप से सम्मिलित होने का अधिकार प्रदान किया गया है, अनुच्छेद 325 द्वारा संविधान निर्माताओं ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि भारत में पुरुष और स्त्री को समान मतदान के अधिकार दिये गये हैं ।

हमारे देश की सरकारों ने महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा दिलाने के उद्देश्य से विभिन्न अधिनियम अलग-अलग स्थानों पर पारित किए हैं । इनका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण की प्रक्रिया को बलवती करना है । इन अधिनियमों में प्रमुख रूप से उल्लेखित हैं :– राज्य कर्मचारी बीमा अधिनियम 1948 , दि प्लांटेशनस लेबर अधिनियम 1951,परिवार न्यायालय अधिनियम 1954 , विशेष विवाह अधिनियम 1954, हिन्दु विवाह अधिनियम 1955,

हिन्दू उत्तराधिकारी अधिनियम, 1956 (संशोधन 2005) ,अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 , प्रसूति प्रसूविधा अधिनियम 1961 (संशोधित 1995) , दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 , गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम 1971 , ठेका श्रमिक (रेग्युलेशन एण्ड एबोलिशन) अधिनियम 1976 ,दि इक्वल रियुनरेशन अधिनियम 1976 , बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 200 , आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम 1983 , कारखाना (संशोधन) अधिनियम 1986 ,इन्डिकेंट रिप्रेसेन्टेशन आॅफ वुमेन एक्ट 1986 , कमीशन आॅफ सती (प्रिवेन्शन) एक्ट, 1987 , घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005 ।

इन अधिनियम के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता में भी ऐसे कई प्रावधान हैं जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करते हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 292 से 694 के अंतर्गत ऐसे प्रावधान किए गए हैं , जिनसे महिलाओं की नंगी तस्वीरें प्रदर्शित करने या उनका किसी भी प्रकार का अशोभनीय या अभद्र चित्र प्रकाशित करने पर रोक लगाई गई है । इस धारा का उद्देश्य महिलाओं के प्रति सदाचार को स्थापित किए रखना है । इसी प्रकार धारा 312 से 318 के अंतर्गत अजन्मे शिशुओं को क्षति कारित करने , शिशुओं को अरक्षित छोड़ने और जन्म छिपाने के विषय में दंड दिए जाने का प्रावधान किया गया है ।

धारा 354 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री की लज्जा भंग करता है अथवा करने के उद्देश्य से आपराधिक बल प्रयोग करता है तो उसे 2 वर्ष की सजा अथवा जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किये जानो का प्रावधान है । धारा 361 के अनुसार यदि किसी महिला की आयु 18 वर्ष से कम है और उसे कोई व्यक्ति उसके विधिपूर्व संरक्षक की संरक्षकता से बिना सम्मति के या बहला अथवा फुसलाकर ले जाता है तो वह व्यक्ति व्यपहरण का दोषी होगा तथा धारा 363 से 366 में दंड का प्रावधान किया गया है ।

धारा 372 के अंतर्गत यदि किसी 18 वर्ष से कम आयु की महिला को किसी वेश्यावृत्ति के प्रयोजन के लिए बेचा जाने पर दोषी व्यक्ति को 10 वर्ष तक की सजा व जुर्माना अथवा दोनों की सजा दी जा सकेगी ।

धारा 375 में बलात्कार को परिभाषित किया गया है एवं धारा 376 में बलात्कार के लिए दंड का प्रावधान है ।

धारा 498 (अ) में प्रावधानित किया गया है कि यदि कोई पति अथवा उसका कोई संबंधी विवाहित पत्नी के साथ निर्दयतापूर्वक दुर्व्यवहार करता है अथवा दहेज को लेकर यातना देता है तो न्यायालय उसे 2 वर्ष तक की सजा दे सकता है ।धारा 509 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहता है कोई ध्वनि या कोई अंग विक्षेप करता है या कोई वस्तु प्रदर्शित करता है अथवा कोई ऐसा कार्य करता है जिससे किसी स्त्री की एकान्तता पर अतिक्रमण होता है तो ऐसा व्यक्ति एक वर्ष तक की सजा एवं जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जायेगा ।

महिलाओं की दशा सुधारने हेतु भारत सरकार द्वारा सन् 1985 में महिला एवं बाल विकास विभाग की स्थापना की गई थी । 1992 में राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना की गई तथा देश में अतंर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा । भारत सरकार द्वारा वर्ष 2001 को महिला सशक्तीकरण वर्ष भी घोषित किया गया ।

इसी प्रकार विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन भी देश की सरकार द्वारा समय-समय पर किया गया है । जिनमें प्रमुख हैं – बालिका समृद्धि योजना, किशोरी शक्ति योजना, बालिका बचाओं योजना, इंदिरा महिला योजना, सरस्वती साईकिल योजना, स्वयंसिद्धा योजना, महिला समाख्या योजना इत्यादि ।

यह सारे संवैधानिक और वैधानिक रक्षोपाय आज भारत में महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं । यह एक कटु सत्य है कि भारत की अधिकांश महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हैं । अशिक्षा इसके लिए महत्वपूर्ण कारण है । दूसरे भूख से जूझना मनुष्य का सबसे पहला कार्य होता है । यदि पेट की भूख मिट जाए तो उसके पश्चात कुछ दूसरी बातों पर व्यक्ति सोच पाता है । जिस देश की लगभग 20 करोड़ आबादी आज भी भुखमरी की शिकार हो और लगभग आधी से अधिक आबादी अभी भी गरीबी , बेरोजगारी और लाचारी का जीवन यापन कर रही हो – उसमें चाहे कितने ही वैधानिक और संवैधानिक रक्षोपाय किसी की सामाजिक , आर्थिक और राजनीतिक दशा सुधारने के लिए क्यों न कर लिए जाएं ? – उनका कोई लाभ नहीं हो पाता।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
nesinecasino giriş
bahislion giriş
betebet giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
romabet giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
betpas giriş
betpas giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betgaranti yeni adres
betgaranti giriş güncel
betgaranti giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
romabet giriş
pumabet giriş
romabet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
pumabet giriş
pumabet giriş
romabet giriş
romabet giriş
milanobet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
ikimisli giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
vegabet giriş
vegabet giriş