अंधविश्वास : शिव की सवारी बैल

shiv ji nandi
  • डॉ डी के गर्ग

प्रचलित मान्यता: शिव हिमालय पर्वत पर रहते है और उनकी सवारी बैल है।
नंदी की उत्पत्ति के बारे में कई कथाएं है कौन सी कथा सत्य और प्रामाणिक हैं ये कथाकार और उनके अनुयायियों को मालूम होगा क्योंकि ये कथाएं वैज्ञानिक रूप से और ईश्वरीय नियमों के विरोध होने के कारण स्वीकार्य नहीं हैं।
एक कथा के अनुसार, नंदी भगवान शिव के अनुचर और वाहन हैं।
एक अन्य कथा के अनुसार, नंदी का जन्म शिलाद ऋषि के घर हुआ था। शिलाद ऋषि ने नंदी को भगवान शिव की तपस्या करके प्राप्त किया था। नंदी को एक अन्य कथा में मानव भी बता दिया कि नंदी भी भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते थे। उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की और उनकी कृपा प्राप्त की। भगवान शिव ने नंदी को अपना वाहन और सबसे बड़ा भक्त बनाया।

विश्लेषण ; ये हम भी मानते है कि नंदी जिसे स्थानीय भाषा में बैल कहते हैं शिव की सवारी है।यदि आप ध्यान दें तो शिव तीन प्रकार के है ।पहले ईश्वर का नाम शिव ,जो ईश्वर कल्याणकारी है ,सृष्टि का रचने वाला है ,निराकार है उसको शिव भी कहते है।
दूसरे हिमालय पर्वत के राजा शिव जिसके दो पुत्र गणेश और कार्तिकेयन है।
तीसरे तस्वीर में या मूर्तियों के रूप में प्रचलित शिव ,जिसके गले में सर्प लिपटे हुए है,बदन पर राख मल रखी है आदि।
इसमें हिमालय के राजा शिव का वर्णन है कि नंदी उनकी सवारी के रूप में प्रिय था।राजा शिव के कार्यकाल का कोई विवरण इतिहास में नहीं मिलता केवल उनके परिवार की जानकारी मिलती है कि दो पुत्र गणेश और कार्तिकेयन थे ,पत्नी उमा का नाम उमा था।

हिमालय पर दूध, कृषि कार्य तथा सवारी के लिए याक नामक पशु पर निर्भर रहना पड़ता है। क्योंकि भूमि पर रहने वाला जीव जैसे गाय,बैल वहां के वातावरण में जीवित नहीं रह सकते ।

याक बैल प्रजाति का ही है क्योंकि यह बोविडे परिवार से संबंधित है, जिसमें गाय, भैंस और बाइसन जैसे जानवर भी शामिल हैं। याक (वैज्ञानिक नाम: Bos grunniens) मवेशियों की एक प्रजाति है और इसे “टार्टरी बैल” या “घुरघुराने वाला बैल” भी कहा जाता है।

यद्यपि याक और बैल दोनों अलग-अलग पालतू मवेशी हैं,इनका एक अन्य नाम नंदी भी है ,इनकी उपयोगिता एक जैसी ही है।एक पर्वत पर बर्फीले और ठन्डे स्थान पर सवारी और दूध के काम आता है तो दूसरा समतल भूमि पर ,गर्म जगह पर्वत के नीचे ।
गाय और याक दोनों के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और मिनरल्स जैसे कई पोषक तत्व होते हैं। और दोनों के दूध को आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है।
आप जानते है कि कृष्ण को गायों से अत्यंत प्रेम था और गाएं भी कृष्ण के दुलार में उनके पास दौड़ी चली आती थी।
इसी आलोक में ये सत्य प्रतीत होता है कि राजा शिव की सवारी याक नंदी थी जो एक दूसरे को अत्यंत प्रेम करते थे।और शिव की सवारी नंदी यानी हिमालय का बेल याक ही थी।

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