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उगता भारत न्यूज़

1857 क्रांति के महानायक धन सिंह कोतवाल गुर्जर को क्रांति की बरसी के अवसर पर किया गया याद

मैं अपनी निधि से 25 लाख रुपया धन सिंह कोतवाल चौक के सौंदर्य करने के लिए दूंगा : आशीष पटेल

मेरठ। यहां पर स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बृहस्पति सभागार में 1857 की क्रांति पर एक विशेष कार्यक्रम 1857 की क्रांति के महानायक धन सिंह कोतवाल गुर्जर शोध संस्थान के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक धनसिंह कोतवाल जी के प्रपोत्र तस्वीर सिंह चपराना नहीं बताया कि शोध संस्थान द्वारा विगत 11 वर्षों में 86 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और इस कार्यक्रम का उद्देश्य धनसिंह कोतवाल जी के संघर्ष गाथा और शहादत को नमन करना है, साथ ही सात सूत्री मांग सरकार के समक्ष रखना है । जैसे धनसिंह कोतवाल जी का चित्र भारतीय संसद, उत्तर प्रदेश के सभी थानों में लगाया जाए, पुलिस मुख्यालय सिग्नेचर भवन लखनऊ में धनसिंह कोतवाल जी की प्रतिमा लगाई जाए और विभिन्न पाठ्य पुस्तकों में धन सिंह कोतवाल जी को शामिल किया जाए आदि की मांग रखी।

कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व सांसद श्री विजयपाल सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की योजनाओं में धनसिंह कोतवाल के नाम पर हो इसका प्रयास करेंगे। मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि धनसिंह कोतवाल जी की प्रतिमा पुलिस मुख्यालय लखनऊ में लगाई जाए । इसमें मैं सहयोग करूंगा तथा अपनी निधि से 25 लाख रुपए किसी भी चौराहे जिसका नाम धनसिंह कोतवाल चौक हो उसके सौंदर्य करण के लिए दूंगा। राज्य सरकार के स्तर से जो भी मांग शोध संस्थान करेगा उसे पूरा करने का प्रयास करूंगा । उन्होंने कहा कि धनसिंह कोतवाल जी का बलिदान और सरदार वल्लभभाई पटेल जी का योगदान बेकार नहीं जाएगा।

कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि धनसिंह कोतवाल गुर्जर एक महान देशभक्त थे। जिन्होंने सरकारी सेवाओं में रहते हुए राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनकी स्मृति को बनाए रखना और उन्हें उचित सम्मान व इतिहास में स्थान देना हम सब का राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि शोध संस्थान की ओर से जो भी प्रस्ताव इस सभा के द्वारा पारित किए गए हैं,उन पर वह कार्य करने के लिए अपने स्तर पर सार्थक प्रयास करेंगे।धनसिंह कोतवाल जी ने बहुत बड़ा काम किया है। उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी है। इसलिए हम सभी को एक साथ मिलकर उन्हें नमन करना चाहिए । उन्होंने आगे कहा कि मेरठ से बाहर भी धन सिंह कोतवाल जी के नाम चौक या प्रतिमाएं लगाने का कार्य करेंगे।

राज्यसभा के पूर्व सांसद विजयपाल सिंह तोमर ने भी क्रांति नायक धनसिंह कोतवाल को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी स्मृति में आयोजित किए गए कार्यक्रम के लिए शोध संस्थान के सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद किया।
इस अवसर पर मेरठ के महापौर हरि कांत अहलूवालिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि इस क्रांति भूमि पर धनसिंह कोतवाल और उन जैसे अनेक देशभक्तों ने मिलकर अंग्रेजों को भगाने का काम कर क्रांति का शुभारंभ इसी क्रांति भूमि से किया। उन्होंने कहा कि कोतवाल साहब का जीवन आज की पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। आज जब हम ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्यवाही के गौरवशाली इतिहास को बनते हुए देख रहे हैं , तब 1857 की क्रांति के इस महानायक का जीवन और भी अधिक सार्थक हो जाता है।

इस कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित रहे सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि धन सिंह कोतवाल गुर्जर जिस वंश परंपरा से आते हैं उस पर यदि निष्पक्षता से विचार किया जाए तो पता चलता है कि पिछली कई शताब्दियों का इतिहास इस वंश परंपरा के लोगों के गौरवशाली कृत्यों से भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि जब मोहम्मद बिन कासिम आया तो उस समय भी राष्ट्र संघ बनाकर नागभट्ट प्रथम और उनके सहयोगियों ने उस समय का ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। उसके बाद तैमूर लंग आया तो उस समय हरवीर सिंह गुलिया और रामप्यारी गुजरी ने अपनी वीरता का परिचय दिया था। 1857 की क्रांति में इसी परंपरा को जीवित और जीवंत बनाकर धन सिंह कोतवाल ने इतिहास रचा । आज हम उनकी वंश परंपरा को भी नमन करते हैं और उस शूरवीर को भी नमन करते हैं जिसने सरकारी सेवाओं में रहकर भी अपने जीवन की परवाह नहीं की और अपना बलिदान देकर यह साबित कर दिया कि उनके लिए राष्ट्र प्रथम है। उन्होंने श्री लक्ष्मीकांत वाजपेई और श्री विजयपाल सिंह तोमर से सदन की ओर से यह मांग भी की दिल्ली से मेरठ को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे का नाम धन सिंह कोतवाल के नाम पर रखा जाए। डॉ आर्य के इस प्रस्ताव का उपस्थित जन गण ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।

इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए शोध संस्थान के अध्यक्ष श्री तस्वीर सिंह चपराणा ने बताया कि कोतवाल जी के लिए समर्पित यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष इसी हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। जिसमें मातृशक्ति का विशेष योगदान रहता है। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करते हुए कोतवाल साहब जैसे अनेक क्रांतिकारियों को इतिहास से विलुप्त किया गया है। जिनको पुनर्स्थापित कर उन्हें उचित सम्मान दिलाना शोध संस्थान का विशेष उद्देश्य है। इसके प्रति समर्पित होकर शोध संस्थान कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोतवाल साहब की प्रतिमा दिल्ली की ओर से मेरठ के प्रवेश द्वार पर लगाने की मांग भी पिछले कई वर्ष की जा रही है। जिस पर अब कार्यवाही किए जाने की संभावनाएं बढ़ गई है।

राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने कहा कि कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने जी ने जो भी आश्वासन दिया है। उन सबको मेरा समर्थन है और उन्हें पूरा करने का प्रयास करूंगा। हापुड जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा नागर ने कहा कि मैं हापुड़ जनपद में किसी चौराहे का नामकरण धनसिंह कोतवाल जी के नाम पर रखकर एक बड़ा कार्यक्रम करूंगी। जिसमें सभी को आमंत्रित करके धनसिंह कोतवाल को नमन किया जाएगा।

पूर्व विधायक कमल मलिक, कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन विमल शर्मा, अरुण वशिष्ठ, डॉ उमेश कुमार पटेल आदि ने धनसिंह कोतवाल जी पर उद्बोधन किया।

आज शोध संस्थान द्वारा अशोक चौधरी स्वतंत्र लेखक, जिन्होंने धनसिंह कोतवाल जी पर पुस्तक लिखी है तथा प्रधानाचार्य देशपाल जी, समाजसेवी राजबल सिंह लोदीपुर छपका एवं जयचंद मुखिया, पंचशील नम्बरदार को धनसिंह कोतवाल जी के बारे में विशेष कार्य करने के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य संजीव नागर ने किया। कार्यक्रम के बाद माननीय कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल जी धनसिंह कोतवाल जी की जन्मस्थली पांचली खुर्द में स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण करने तथा तस्वीर सिंह चपराना के आवास पर परिवार जनों से मिलने के लिए पांचली खुर्द गांव दी गए।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से गुलबीर सिंह पार्षद, सतीश मावी, जगजीत सिंह, भोपाल सिंह गुमि, जगत सिंह दोसा, प्रोफेसर देवेश चंद शर्मा, डॉक्टर नवीन गुप्ता, मनीष पटेल, बृजपाल सिंह चौहान, कैप्टन सुभाष चंद, इंजीनियर सुरेंद्र वर्मा, डीएसपी बले सिंह, डॉक्टर मोमराज सिंह आदि उपस्थित रहे।

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