अपने विनाश को मौन होकर देखता हिंदू समाज

hindu-rashtra3

अब से लगभग १०० वर्ष पूर्व महात्मा गांधी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे थे। उनकी विचारधारा के अनुकूल कार्य करने वाले लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। कांग्रेस पर उनका लगभग एकाधिकार हो चुका था । उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने १९३७ में वर्धा में अपनी बैठक आयोजित की। जिसमें भारत के स्वाधीन होने के उपरांत के शैक्षणिक पाठ्यक्रम पर विचार – विमर्श किया गया । उस समय तक लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को चलते हुए १०२ वर्ष हो चुके थे। १०० वर्ष पश्चात कांग्रेस ने शैक्षणिक पाठ्यक्रम की समीक्षा की । इस समीक्षा के उपरांत भी कांग्रेस यह पहचानने में अक्षम और असफल रही कि स्कूली पाठ्यक्रम ने किस प्रकार हमें अपने गौरवपूर्ण अतीत से काट कर रख दिया है ? बिना भारत को समझे और बिना भारत की आवश्यकताओं को समझे कांग्रेस ने अपनी वर्धा योजना के अंतर्गत नए पाठ्यक्रम को मान्यता प्रदान की। स्वाधीन होने के उपरांत कांग्रेस ने अपने इसी नए पाठ्यक्रम को लागू करने का काम आरंभ किया। इसके लिए भारतीयता के घोर विरोधी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को देश का शिक्षा मंत्री बनाकर इस कार्य का दायित्व उन्हीं को सौंपा गया।

हमारे देश में कई लोग हैं जो अभी तक भी लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को लेकर अपशब्द बोलते रहते हैं। उन्हें नहीं पता कि लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति तो कब की विदा हो चुकी। उसकी शिक्षा पद्धति की उत्तराधिकारी के रूप में भारत के काले अंग्रेजों की शिक्षा पद्धति इस देश का बेड़ा गर्क कर रही है।

इसके उपरांत भी भारत का हिंदू समाज अपने होते हुए विनाश को देखकर भी जागरूक होने का नाम नहीं ले रहा है। इसके वेद ,उपनिषद , रामायण, गीता, महाभारत सभी को एक ओर रख दिया गया है। नैतिकता के नाम पर अनैतिकता को प्रोत्साहित करने वाले पाठ्यक्रम में न जाने क्या-क्या कूड़ा करकट भरकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है ? बच्चों के अभिभावक सब कुछ जानकर भी आधुनिकता और प्रगतिशीलता के नाम पर सब कुछ होने दे रहे हैं। हमारी बेटियां गैर हिंदुओं के साथ इसलिए विवाह कर लेती हैं कि उन्हें अपने वैदिक धर्म के बारे में कुछ नहीं बताया जाता। अपनी संस्कृति और अपने संस्कारों के बारे में कुछ नहीं बताया जाता। फिर पहले दिन से स्कूल में भारत के देवी – देवताओं के अपमानजनक चित्र और उनके बारे में वे आपत्तिजनक टिप्पणियों को पढ़ती – सुनती हैं। जिससे उनके भीतर एक हीन भावना उत्पन्न होती है और वह सोचती हैं कि हमारा हिंदू समाज और उसका वैदिक धर्म तो बहुत ही जड़तावादी और पिछड़े हुए विचारों के हैं। इसलिए इनको छोड़कर ऊंची और लंबी उड़ान भरने के लिए पश्चिमी संस्कृति को अपनाकर गैर हिंदुओं के साथ विवाह करना उचित है।

जब हमारी कोई बहन बेटी किसी गैर हिंदू से विवाह कर लेती है तब अभिभावकों को चिंता होती है। तब वह अपने निर्णय पर पश्चाताप करते हैं, परंतु उस समय कुछ नहीं हो सकता।

जब सही निर्णय लेने का समय था, उस समय तो निर्णय लेने से चूक गए। अब जैसा निर्णय लिया था, उसका परिणाम देखकर पश्चाताप के आंसू बहाते हैं। इसी प्रकार कुछ अभिभावक ऐसे भी हैं, जिनके बच्चे उन्हें अकेला छोड़कर विदेश भाग जाते हैं तो कई ऐसे भी हैं जिनके बच्चे उन्हें वृद्ध आश्रम में जबरन डालकर चले जाते हैं। पता है, ऐसा क्यों होता है ? इसका कारण यह है कि जब बच्चे को सही संस्कार देने का समय होता है , तब आप अपनी व्यस्तताओं और मौज मस्ती की जीवन शैली में व्यस्त होते हैं। आपके बच्चे का लालन-पालन भी कोई उधारी माता करती है और आप अपनी सुंदरता पर ध्यान देती हैं। इससे आपके बच्चे के भीतर आपके प्रति विद्रोह का भाव पनपता है। जिसे सही समय आने पर वह चुकता कर देता है। आपने उसको उधारी माता दी थी तो उसने सही समय आने पर आपको उधारा बेटा अर्थात नौकर दे दिया । हिसाब पूरा हो गया। इन सारी परिस्थितियों पर यदि हम विचार करें तो भारत का बचपन जहां उपेक्षा का शिकार है , वहीं बचपन से विद्रोही भाव लेकर आगे बढ़ा यौवन उच्छृंखलता का शिकार है। जबकि बुढ़ापा उत्पीड़न का शिकार है। कुल मिलाकर परिवार रूपी राष्ट्र में अराजकता फैल चुकी है। स्मरण रहे कि यही अराजकता समाज में भयंकर अशांति को प्रकट कर रही है। राष्ट्रीय परिवेश में घुल मिलकर यही अराजकता कई प्रकार की कुंठाओं को जन्म दे रही है।

हम जिसको विकास समझ रहे हैं, वही हमारे लिए विनाश का कारण बन चुका है। जिस कथित विकास की ओर हम बेतहाशा होकर भागे थे, वही हमारे गले की हड्डी बन चुका है। पैरों की बेड़ी बनकर इसने हमको जकड़ लिया है। इसके उपरांत भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सामने खड़े भयंकर विनाश को भी देख नहीं पा रहे हैं। उन्हें आज भी रुई के बोरे में भी खांड भरी दिखाई दे रही है। स्थिति इतनी भयंकर हो चुकी है कि यदि रुई के बोरे को खांड मानने वाले लोगों को आप यह बताएं कि खंड का कटोरा तो वेदों में है या उपनिषदों की शिक्षाओं में है तो वह मूर्ख उल्टा आपको मूर्ख बताने की धृष्टता करते देखे जाते हैं। जो स्वयं रोग ग्रस्त हैं और जिनके उपचार की इस समय नितांत आवश्यकता है , वही अपने आप को तो निरोगी घोषित कर रहे हैं और उपचार करने वाले चिकित्सक को रोगी घोषित करने की मूर्खता कर रहे हैं।

इस्लाम को मानने वाले लोग हिंदू समाज के भीतर चल रही इस दुष्ट प्रक्रियत का पूरा लाभ उठा रहे हैं। वे दलितों, शोषितों और उपेक्षितों को उकसा रहे हैं और अपने लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाते जा रहे हैं। यही मानसिकता ईसाई मत को मानने वाले लोगों की है। उन्हें भारत के भीतर एक लंबा चौड़ा खेत उजाड़ने को मिल गया है । जिसे वह भारत के हिंदू समाज में चल रही विकास बनाम विनाश की अघोषित लड़ाई के चलते उजाड़ते जा रहे हैं। आप इस घटना चक्र के कब तक मूकदर्शक बने रहेंगे ? यदि कुछ करना है तो उठ खड़ा होना समय की आवश्यकता है ? जो समाज आत्मविनाश की प्रक्रिया को देखता रह जाता है वह मर जाता है और जो उसके विरुद्ध उठ खड़ा होता है, वह अपना अस्तित्व बनाए रखने में सफल होता है।

– डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है)

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
onwin giriş
onwin giriş
kolaybet
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
marsbahis giriş
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betkanyon
betkanyon
sahabet giriş
betkanyon giriş
betkanyon giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
onwin
onwin
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betkanyon
Betgaranti Giriş
holiganbet
holiganbet
sahabet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet giriş
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
onwin giriş
onwin giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
onwin giriş
sahabet giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
bettilt giriş