महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणाम /मोदी ने दागा दूसरा गोल

  महाराष्ट्र और हरियाणा विधान सभा के लिये हुये चुनाव के परिणाम आ गये हैं । हरियाणा में तो भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया है लेकिन महाराष्ट्र में वह कुछ सीटों के अन्तराल से बहुमत से चूक गई है । यदि पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय महीना भर पहले कर लिया होता तो स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लेने में भी उसे शायद कोई दिक़्क़त न होती । इन दोनों प्रान्तों में भाजपा कभी भी पहले नम्बर की पार्टी नहीं रही । महाराष्ट्र में वह शिव सेना के साथ मिल कर दोयम दर्जे पर संतुष्ट रहती थी और हरियाणा में तो उसे शून्य से दस के बीच मिली सीटों से ही संतोष करना पड़ता था । ये सीटें भी तब मिलती थीं यदि पार्टी ओम प्रकाश चौटाला की इनेलो या फिर भजन लाल के बेटों की हरियाणा जनहित कांग्रेस से समझौता कर लेती थी । लेकिन लोगों ने इस बार देश में एक सशक्त और बिना वैसाखियों वाली सरकार स्थापित करने का जो जनादेश लोक सभा के चुनावों में दिया था उसके संकेतों को समझते हुये भाजपा ने इन चुनावों में अपने सहयोगी दलों के साथ ज़मीनी यथार्थ के आधार पर सीट आवंटन का प्रयास किया था । महाराष्ट्र में शिव सेना के उद्धव ठाकुर ने और हरियाणा में कुलदीप विश्नोई ने इस सच्चाई को ...

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न्यायिक शक्तियों के प्रयोग पर प्रश्न  चिन्ह ...

मनीराम शर्मा समय समय पर भारत की न्यायपालिका द्वारा शक्तियों के प्रयोग पर प्रश्न चिन्ह उठते रहे हैं | यद्यपि समय समय पर देश की न्यायपालिका और उसके पैरोकार न्यायिक गरिमा का दम भरते हैं किन्तु हाल ही में जयललिता को जमानत देने और निर्णय पर रोक लगाने का मामला एक ताज़ा और ज्वलंत उदाहरण है| सोनी सोरी के मामले में न्यायपालिका की रक्षक भूमिका को भी जनता भूली नहीं है| एक  साध्वी को हिरासत में दी गयी यातनाएं के जख्म और जमानत से इंकारी  भी ज्यादा पुराने नहीं हैं |  अहमदाबाद के मजिस्ट्रेट द्वारा मुख्य न्यायाधीश के वारंट जारी करने का मामला भी 7 दिन के भीतर रिपोर्ट प्राप्त होने के बावजूद 10 वर्ष से विचाराधीन है| गंभीर बीमारियों से पीड़ित संसारचन्द्र  को जमानत से इन्कारी और तत्पश्चात उसकी मृत्यु भी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह उपस्थित करते हैं जबकि संजय दत्त को उसकी बहन की प्रसव काल में मदद के लिए जमानत स्वीकार करना गले नहीं उतरता| तरुण तेजपाल के विरुद्ध बिना शिकायत के मामला दर्ज करना और जमानत से तब तक इंकार करना जब तक उसकी माँ की मृत्यु नहीं हो जाती और दूसरी ओर आम नागरिक की फ़रियाद पर भी रिपोर्ट दर्ज न होना किस प्रकार न्यायानुकूल कहा जा सकता है |   विकसित  देशों को छोड़ भी दिया जाए तो भी भारत की न्यायपालिका उसके पडौसी पाकिस्तान और ...

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दिल को लुभाये वागड़ की दीवाली

सुकून देता है दीवाली आणा - कल्पना डिण्डोर जीवन के हर पहलू को वासंती उल्लास देने में पर्व-त्योहारों का ख़ास महत्व है। हर उत्सव के साथ जुड़ी हुई लोक रस्म जन मन से लेकर परिवेश तक में आनंद का दरिया बहा देती है। दीपावली भी ऎसा ही त्योहार है जब पूरा परिवेश लोक लहरियों पर थिरक उठता है और मन मयूर नाचने लगता है। लोक जीवन की इन तमाम रस्मों में ‘दीवाली आणा’ और ‘मेरिया’ की परम्पराएं हर किसी को आह्लादित करती हैं। राजस्थान के ठेठ दक्षिणी हिस्से मे मालवा और गुजरात की लोक संस्कृतियों के साथ आदिवासी संस्कृति का संयोग सांस्कृतिक भगीरथी का दृश्य पैदा करता है। दीपावली पर वागड़ अंचल के नाम से मशहूर इस पूरे वनांचल में विभिन्न समुदायों में दीवाली आणा व मेरिया की पारंपरिक झलक पूरे यौवन पर देखने को मिलती है। इस अंचल में पीहर से बहू को लिवा लाने की परंपरा को आणा (गौना) कहते हैं। नवविवाहिता को दीवाली के दिनों में पीहर से लिवा लाने के लिए किसी भी प्रकार के मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है इसलिये इन दिनों दीवाली आणा होता है। वागड़ समुदाय के लिए दीवाली और दीवाली आणा का रिश्ता सदियों से चला आ रहा है। दीपावली के दिनों में दीवाली आणा 10-15 दिन में कभी भी हो सकता है। इसमें वर के साथ जाने वाले सगे-सम्बंधियों व परिवार वालों का वधू पक्ष द्वारा पूरी ...

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कैसे आए लक्ष्मी हमरे द्वार ....

- कल्पना डिण्डोर  लक्ष्मी पाने के फेर में हम सदियों से कुछ न कुछ करते ही आ रहे हैं। सदियों पहले उतना धूमधड़ाका नहीं था। पटाखों का शोर नहीं था, माईक दानवों का अस्तित्व तक भी नहीं।  श्रद्धालु आराम से लक्ष्मी मैया की पूजा-अर्चना करते, और लक्ष्मी मैया भी पूरी उदारता के साथ वह सब कुछ बाँट दिया करती थी जो इन्हें अभीप्सित होता था। लक्ष्मी मैया भी खुश थी, लोग भी खुश और श्रद्धालुओं से लेकर आमजन तक सभी में उत्साह पसरा रहता सो अलग।  अब सब कुछ बदल गया है। लक्ष्मी हमारे सामने आ भी जाए तो लोग नकार दें। जो कुछ लक्ष्मी पूजा और उपासना के नाम पर हम कर रहे हैं वह दीपावली पर फैशनी औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं रह गया है। इस दिन भी पूजा इसलिए करनी पड़  रही है कि इसका संबंध रुपए-पैसों और सोने-चांदी की इच्छाओं से है और सबकी इच्छा रहती ही है कि सुख-समृद्धि उनके अपने पाले में आए और हमेशा बनी रहें। इस पर्व का संबंध लक्ष्मी से न हो तो हम हाथी-घोड़े बेचकर चादर तान के सोये रहें, जैसे कि दूसरे उत्सवों और पर्वों में करते आ रहे हैं। चारों तरफ रोशनी का दरिया और चकाचौंध का मंजर, इतनी तेज रोशनी की आँखें चुंधियाने लगें, झिलमिल रंगीन रोशनी भी इतनी कि हर ब्लेक एण्ड व्हाईट शख्स भी रंग-बिरंगा नज़र आने लगे। लक्ष्मीजी के ...

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सभी प्रकार के वात रोगों में राबबाण है लहसुन

सभी प्रकार के वातरोगों में लहसुन का उपयोग करना चाहिए। इससे रोगी शीघ्र ही रोगमुक्त हो जाता है तथा उसके शरीर की वृद्धि होती है।' कश्यप ऋषि के अनुसार लहसुन सेवन का उत्तम समय पौष व माघ महीना (दिनांक 22 दिसम्बर से 18 फरवरी 2015 तक) है। प्रयोग विधिः 200 ग्राम लहसुन छीलकर पीस लें। 4 लीटर दूध में ये लहसुन व 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर दूध गाढ़ा होने तक उबालें। फिर इसमें 400 ग्राम मिश्री, 400 ग्राम गाय का घी तथा सोंठ, काली मिर्च, पीपर, दालचीनी, इलायची, तमालपात्र, नागकेशर, पीपरामूल, वायविडंग, अजवायन, लौंग, च्यवक, चित्रक, हल्दी, दारूहल्दी, पुष्करमूल, रास्ना, देवदार, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, शतावरी, विधारा, नीम, सोआ व कौंचा के बीज का चूर्ण प्रत्येक 3-3 ग्राम मिलाकर धीमी आँच पर हिलाते रहें। मिश्रण में से घी छूटने लग जाय, गाढ़ा मावा बन जाय तब ठंडा करके इसे काँच की बरनी में भरकर रखें। 10 से 20 ग्राम यह मिश्रण सुबह गाय के दूध के साथ लें (पाचनशक्ति उत्तम हो तो शाम को पुनः ले सकते हैं। भोजन में मूली, अधिक तेल व घी तथा खट्टे पदार्थों का सेवन न करें। स्नान व पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें। इससे 80 प्रकार के वात रोग जैसे – पक्षाघात (लकवा), अर्दित (मुँह का लकवा), गृध्रसी (सायटिका), जोड़ों का दर्द, हाथ पैरों में सुन्नता अथवा जकड़न, कम्पन, दर्द, गर्दन व कमर का दर्द, स्पांडिलोसिस आदि तथा दमा, पुरानी खाँसी, अस्थिच्युत (डिसलोकेशन), अस्थिभग्न (फ्रेक्चर) एवं अन्य अस्थिरोग दूर होते हैं। इसका सेवन माघ माह के अंत तक कर सकते हैं।

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आइये जाने की क्या हैं लाभ पंचमी

सौभाग्य (लाभ) पंचमी जीवन मं सुख और सौभाग्य की वृद्धि करती है इसलिए कार्तिक शुक्ल पक्ष कि पंचमी को सौभाग्य पंचमी के नाम से भी जाना जाता है.  इस वर्ष 28 अक्तूबर 2014 को (मंगलवार के दिन) लाभ/ सौभाग्य पंचमी का पर्व मनाया जाएगा  कार्तिक शुक्ल पंचमी, सौभाग्य पंचमी व लाभ पंचमी के रूप में भी मनाई जाती है। खासतौर

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 इंतजार कायम रहे

(कविता) अविनाश वाचस्‍पति नाउम्‍मीदी में खुशियों की ईद है जो कल गई है वापिस वो दीवाली है मन में मिलने की हरियाली है सबसे प्‍यारे हैं इंतजार के क्षण जल्‍दी भंग नहीं होते, भंगर नहीं होते इंतजार में होता है सुकून जब होता है सुकून तब और कुछ नहीं होता न होती है चिंता नहीं होता है तनाव मिलने की

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वह खून कहो किस मतलब का

वह खून कहो किस मतलब का जिसमें उबाल का नाम नहीं। वह खून कहो किस मतलब का आ सके देश के काम नहीं।   वह खून कहो किस मतलब का जिसमें जीवन, न रवानी है! जो परवश होकर बहता है, वह खून नहीं, पानी है!   उस दिन लोगों ने सही-सही खून की कीमत पहचानी थी। जिस दिन सुभाष ने

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महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणाम /मोदी ने दागा दूसरा गोल

  महाराष्ट्र और हरियाणा विधान सभा के लिये हुये चुनाव के परिणाम आ गये हैं । हरियाणा में तो भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया है लेकिन महाराष्ट्र में वह कुछ सीटों के अन्तराल से बहुमत से चूक गई है । यदि पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय महीना भर पहले कर लिया होता तो स्पष्ट

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न्यायिक शक्तियों के प्रयोग पर प्रश्न  चिन्ह …

मनीराम शर्मा समय समय पर भारत की न्यायपालिका द्वारा शक्तियों के प्रयोग पर प्रश्न चिन्ह उठते रहे हैं | यद्यपि समय समय पर देश की न्यायपालिका और उसके पैरोकार न्यायिक गरिमा का दम भरते हैं किन्तु हाल ही में जयललिता को जमानत देने और निर्णय पर रोक लगाने का मामला एक ताज़ा और ज्वलंत उदाहरण है| सोनी सोरी के मामले

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दिल को लुभाये वागड़ की दीवाली

सुकून देता है दीवाली आणा – कल्पना डिण्डोर जीवन के हर पहलू को वासंती उल्लास देने में पर्व-त्योहारों का ख़ास महत्व है। हर उत्सव के साथ जुड़ी हुई लोक रस्म जन मन से लेकर परिवेश तक में आनंद का दरिया बहा देती है। दीपावली भी ऎसा ही त्योहार है जब पूरा परिवेश लोक लहरियों पर थिरक उठता है और मन

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कैसे आए लक्ष्मी हमरे द्वार ….

- कल्पना डिण्डोर  लक्ष्मी पाने के फेर में हम सदियों से कुछ न कुछ करते ही आ रहे हैं। सदियों पहले उतना धूमधड़ाका नहीं था। पटाखों का शोर नहीं था, माईक दानवों का अस्तित्व तक भी नहीं।  श्रद्धालु आराम से लक्ष्मी मैया की पूजा-अर्चना करते, और लक्ष्मी मैया भी पूरी उदारता के साथ वह सब कुछ बाँट दिया करती थी

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