मिसाइलमैन कैसे अहिंसा के प्रति आकर्षित हुए?

मिसाइलमैन कैसे अहिंसा के प्रति आकर्षित हुए?

ललित गर्ग मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध एवं बच्चों के चेहते डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं रहे। एक सच्चा देशभक्त हमसे जुदा हो गया। देह से विदेह होने के क्षणों को भी इस महापुरुष ने कर्ममय रहते हुए बिताया। वे जन-जन के प्रेरणास्रोत थे, विजनरी थे। उन्होंने राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिये अस्त्र-शस्त्र की शक्ति को संगठित करने पर जोर दिया वही अमन एवं शांति के लिये अहिंसा को भी तेजस्वी बनाया। वे समय-समय पर अहिंसा को भी संगठित करने के लिये संतों एवं अध्यात्मपुरुषों से मिलते रहे। वे दुनिया को अणुबम से अणुव्रत ( अहिंसा ) की ओर ले जाने वाले विरल महामानव थे। अहिंसा की प्रेरणा उन्हें आचार्य श्री महाप्रज्ञ ने दी थी और उससे वे इतने अधिक प्रभावित थे कि अपना हर जन्म दिन आचार्य महाप्रज्ञ की सन्निधि में ही मनाते थे। जहां भी आचार्य महाप्रज्ञ होते वे वहां पहुंचा जाते थे। भारत को परमाणु ...

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‘कोऊ नृप होई हमें का हानि’ और राज्यसभा

पूर्व राष्ट्रपति कलाम चले गये, ‘मुंबई बम कांड’ के दोषी याकूब मेमन को भी फांसी हो गयी। बहुत सा पानी यमुना के पुल के नीचे से बह गया। पर हमारी संसद में राजनीतिक दलों की राजनीति हठ किये हुए वहीं खड़ी है, जहां सत्रारम्भ में 21 जुलाई को खड़ी थी। सचमुच ऐसी स्थिति पूरे देश के लिए और संसदीय लोकतंत्र के लिए चिंतन और चिंता का विषय है। ‘भूमि विधेयक’ को पास कराना जहां सरकार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है वहीं विपक्ष ने भी मान लिया है कि चाहे जो हो जाए पर सरकार को ‘भूमि विधेयक’ पारित नही करने देना है। विपक्ष राज्यसभा में मजबूत है और अपनी इसी मजबूती के दृष्टिगत वह सरकार को ‘नाकों चने चबाने’ के लिए विवश करना चाहता है। ऐसे में विचारणीय है कि ‘संसद’ में राज्यसभा की स्थिति पर विचार किया जाए। हमारे देश में राज्यसभा प्राचीनकाल से रही है। शतपथ ब्राह्मण ...

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भारतीय वाङ्मय में गुरु महिमा और गुरु पूर्णिमा

अशोक प्रवृद्ध भारतीय संस्कृति और दर्शन की परम्परा से गृहीत भारतीय वाङ्मय में गुरु को ब्रह्म से भी अधिक महत्व प्रदान किया गया है ।गुरु को प्रेरक, प्रथम आभास देने वाला, सच्ची लौ जगाने वाला और कुशल आखेटक कहा गया है, जो अपने शिष्य को उपदेश की वाणों से बिंध कर उसमें प्रेम की पीर संचरित कर देता है । लोकमान्यतानुसार प्रत्येक साधक के लिए गुरु की अनिवार्यता इसलिए भी है क्योंकि वह अपनी आध्यात्मिक साधना में कोई भी विघ्न उपस्थित होने पर गुरु से मार्ग निर्देश प्राप्त कर सके ।साधक एक यात्री की भांति होता है जो लक्ष्य की ओर बढऩे की लालसा तो रखता है, किन्तु चूँकि वह लक्ष्य को नहीं देखा होता है, इसलिए उसे ऐसे मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है, जो स्वयं न केवल मार्ग को देखे हो, वरन अच्छी तरह लक्ष्य को भी पहचानता हो ।गुरु की प्राप्ति द्वारा साधक के ह्रदय से संशय व आशंका ...

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विभाजन के सत्तर साल बाद भी भारत-पाक दुश्मनी कायम

कुलदीप नैयर क्या हम उन पर विश्वास कर सकते हैं? प्रधानमंत्रियों, नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात को भारत और पाकिस्तान में हो रही टीका-टिप्पणी में इसी को साबित करने की जिम्मेदारी रहती है। ऐसी प्रतिक्रिया में खामोशी तोडऩे के लिए हो रही कोशिशें की झलक नहीं मिलती है। लेकिन यह दिखाता है विभाजन के 70 साल बाद भी दोनों देशों के बीच दुश्मनी उतनी ही गहरी है जितनी पहले थी। दोनों देशों के बीच दूरी कम करने के किसी भी कदम को संदेह की नजर में देखा जाता है। दोनों देशों में ऐसे बहुत लोग हैं जो सीमा के अलावा इतने सालों के दौरान दोनों के बीच खींची जाने वाली रेखा को पार कर पाते हैं। आपस में एक दूसरे से खतरा, महसूस करने के कारण दोनों दुश्मनी के डर के साथ जीत हैं। लेकिन इस वास्तविकता से भागा नहीं जा सकता है कि जब तक दोनों देश आपस में ...

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ग्रामीण विकास की भयावह तस्वीर

डॉ. अश्विनी महाजन भारत सरकार द्वारा वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आर्थिक, सामाजिक और जाति की गणना के आंकड़े हाल ही में प्रकाशित किए गए हैं। ये आंकड़े भारत में गरीबों की वर्तमान दुर्दशा की कहानी बयान कर रहे हैं। चिंता का विषय केवल यह नहीं है कि गरीबों की हालत खराब है, बल्कि वह पहले से तेज गति से बदतर होती जा रही है। गौरतलब है कि अभी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ही ये आंकड़े प्रकाशित हुए हैं। जनगणना के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार परिवार में अभावों के 7 प्रकार बताए गए हैं- कच्चा घर; परिवार में कार्यशील आयु में वयस्क का न होना; बिना वयस्क पुरुष सदस्य के महिला का परिवार का मुखिया होना; बिना समर्थ वयस्क के अपाहिज सदस्य का होना; 25 वर्ष से ऊपर आयु में बिना साक्षर वयस्क के परिवार; अनुसूचित जाति/जनजाति और शारीरिक श्रम में लगे भूमिहीन परिवार। जनगणना में पाया गया है कि 48.5 प्रतिशत ...

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अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डाल कर संस्कारित करें : डा. सोमदेव शास्त्री’

मनमोहन आर्य देहरादून स्थित श्रीमद्दयानन्द ज्योतिर्मठ आर्ष गुरुकुल, पौंधा के सोलहवें वार्षिकोत्सव के अवसर अन्य अनेक आयोजनों सहित एक ‘‘संस्कार सम्मेलन का भी आयोजन किया जिसके अनेक विद्वान वक्ताओं में प्रथम वक्ता थे आर्य जगत के वेदों के प्रसिद्ध विद्वान डा. सोमदेव शास्त्री, मुम्बई। अपने  सम्बोधन में उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार किसी पदार्थ के अवगुणों को निकाल कर

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मिसाइलमैन कैसे अहिंसा के प्रति आकर्षित हुए?

ललित गर्ग मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध एवं बच्चों के चेहते डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं रहे। एक सच्चा देशभक्त हमसे जुदा हो गया। देह से विदेह होने के क्षणों को भी इस महापुरुष ने कर्ममय रहते हुए बिताया। वे जन-जन के प्रेरणास्रोत थे, विजनरी थे। उन्होंने राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिये अस्त्र-शस्त्र की शक्ति को

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विपक्ष का असंसदीय आचरण

अरविंद जयतिलक पिछले एक सप्ताह से जिस तरह विपक्ष गैर लोकतांत्रिक तरीके का प्रदर्शन कर संसद न चलने देने की जिद पर अड़ा हुआ है यह उसके असंसदीय आचरण का ही बोध कराता है। समझना कठिन है कि जब सरकार संसद में हर मसले पर चर्चा को तैयार है तो विपक्ष देशहित में संजीदगी न दिखाकर किस्म-किस्म के कुतर्क क्यों

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‘कोऊ नृप होई हमें का हानि’ और राज्यसभा

पूर्व राष्ट्रपति कलाम चले गये, ‘मुंबई बम कांड’ के दोषी याकूब मेमन को भी फांसी हो गयी। बहुत सा पानी यमुना के पुल के नीचे से बह गया। पर हमारी संसद में राजनीतिक दलों की राजनीति हठ किये हुए वहीं खड़ी है, जहां सत्रारम्भ में 21 जुलाई को खड़ी थी। सचमुच ऐसी स्थिति पूरे देश के लिए और संसदीय लोकतंत्र

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यह सरगम किसके सांसों की?

लगता है सरिता ढूंढ़ती है, सागर भी उन्हें पुकारता है। ये समीर में सरगम सांसों की, जिन्हें क्रूर काल डकारता है। वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं, जलवाष्प से शबनम बनती है। किंतु है संदेह मुझे, प्रकृति कहीं सिर धुनती है। लूट लिया श्रंगार काल ने, जिस पर उसको रोष। मैं कहता हूं प्रकृति के आंसू, तुम कहते हो ओस। कौतूहल से

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