हम समुदाय व देश के लिए हैं मुट्ठी भर लोगों के लिए नहीं

हम समुदाय व देश के लिए हैं मुट्ठी भर लोगों के लिए नहीं

हम समुदाय व देश के लिए हैं मुट्ठी भर लोगों के लिए नहीं - डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com देश का प्रत्येक नागरिक समाज और देश के लिए है और उसे सुनागरिक के रूप में इनकी सेवा और उन्नति के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहना चाहिए। हमारी भारतीय जीवन पद्धति में व्यक्तिवाद की बजाय राष्ट्रवाद और समाजवाद का भाव गहरे तक समाया हुआ है और इसी का पालन करते हुए आगे बढ़ना हमारा धर्म भी है और फर्ज भी। सच्चा देशभक्त और समाजसेवी वही है जिसकी निष्ठाएं समुदाय के कल्याण और देश के उत्थान के प्रति हों। जो लोग वैयक्तिक हितों को सामने रखकर व्यक्तिवादी सोच के साथ कर्म करते हैं वे समाज और देश के लिए घातक हैं और ऎसे लोगों के भरोसे देश की अस्मिता को अक्षुण्ण बनाए रखने की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। व्यक्तिपूजक लोग आम तौर पर सिद्धान्तहीन होते हैं और अपनी लाभ-हानि को देखकर ...

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जम्मू कश्मीर में हिन्दुओं के अस्तित्व का यक्ष प्रश्न-7

जम्मू कश्मीर में हिन्दुओं के अस्तित्व का यक्ष प्रश्न-7

गतांक से आगे..... 28 मार्च 1965 को वह चीन गये और प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई से मिले। यह सर्वविदित है कि 1962 में चीन के भारत पर किये गये आक्रमण से दोनों देशों के संबंध कटु हो गये थे। इस समय शेख का पासपोर्ट रद्द कर दिया गया और चीन से वापिसी पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। श्रीलाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में निधन : 1965 में भारत पाकिस्तान युद्घ हुआ। भारत विजयी तो हुआ, परंतु ताशकंद समझौते के समय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जीती हुई सारी भूमि व क्षेत्र पाकिस्तान को सौंप दिया। नेहरू के देहावसान के बाद भी लौहपुरूष समझे जाने वाले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी उन्हीं की राह पर चले और ताशकंद में अपनी भी जीवन नैया गंवा बैठे। धूर्त शत्रु के साथ कैसा व्यवहार चाहिए यह चाणक्य के देश में अब नेताओं को पुन: स्मरण करना ...

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बिखरे मोती भाग-63

बिखरे मोती भाग-63

राही तू आनंद लोक का, जहां पुण्य से मिलै प्रवेश गतांक से आगे.... सुहृद पिछनै विपत में, भय के समय में वीर। सत्पुरूष पिछनै शील से, धन-संकट में धीर ।। 720 ।। अर्थात विपत्ति के आने पर व्यक्ति मित्र है अथवा शत्रु, इसकी पहचान होती है। भय के उत्पन्न होने पर व्यक्ति कायर है, अथवा वीर इस बात का पता चलता है। व्यक्ति दुष्ट है अथवा सत्पुरूष इसकी पहचान शील से अर्थात उत्तम स्वभाव से पता चलता है जबकि अर्थ संकट आने पर मनुष्य के धैर्य की पहचान होती है। वह ऐसे समय में अपने स्वाभिमान और मर्यादा की रक्षा किस प्रकार करता है? असुया नष्ट करै भक्ति को, रूप बुढ़ापा खाय। क्रोध नष्ट करै सम्पदा, और शील बिगड़ता जाए ।। 721 ।। असुया अर्थात-किसी के गुणों में भी दोष निकालना। शील अर्थात-उत्तम स्वभाव श्री मिलै किसी पुण्य से, चतुरता से बढ़ती जाए। रक्षक इसकी दक्षता संयम स्थिर बनाय ।। 722 ।। श्री धन-संपत्ति, दक्षता-निपुणता, संयम मद ...

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बड़े नेताओं की छोटी बातें

शहीदे आजम भगतसिंह को फांसी दिए जाने पर अहिंसा केमहान पुजारी गांधी ने कहा था, ‘‘हमें ब्रिटेन के विनाश के बदलेअपनी आजादी नहीं चाहिए ।’’ और आगेकहा, ‘‘भगतसिंह की पूजा से देश को बहुत हानि हुई औरहो रही है । वहीं इसका परिणामगुंडागर्दी का पतन है । फांसी शीघ्र देदी जाए ताकि 30 मार्च से करांची में होने वाले कांग्रेसअधिवेशन में कोई बाधा न आवे ।”अर्थात् गांधी की परिभाषा मेंकिसी को फांसी देना हिंसा नहीं थी ।2 ] इसी प्रकार एक ओर महान् क्रान्तिकारी जतिनदासको जो आगरा में अंग्रेजों ने शहीद किया तो गांधी आगरा मेंही थे और जब गांधी को उनके पार्थिक शरीरपर माला चढ़ाने को कहा गया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया अर्थात् उस नौजवान द्वारा खुदको देश के लिए कुर्बान करने पर भी गांधी के दिल मेंकिसी प्रकार की दया औरसहानुभूति नहीं उपजी, ऐसे थे हमारेअहिंसावादी ...

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हम समुदाय व देश के लिए हैं मुट्ठी भर लोगों के लिए नहीं

हम समुदाय व देश के लिए हैं मुट्ठी भर लोगों के लिए नहीं - डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com देश का प्रत्येक नागरिक समाज और देश के लिए है और उसे सुनागरिक के रूप में इनकी सेवा और उन्नति के लिए…

जम्मू कश्मीर में हिन्दुओं के अस्तित्व का यक्ष प्रश्न-7

गतांक से आगे….. 28 मार्च 1965 को वह चीन गये और प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई से मिले। यह सर्वविदित है कि 1962 में चीन के भारत पर किये गये आक्रमण से दोनों देशों के संबंध कटु हो गये थे। इस…

बिखरे मोती भाग-63

राही तू आनंद लोक का, जहां पुण्य से मिलै प्रवेश गतांक से आगे…. सुहृद पिछनै विपत में, भय के समय में वीर। सत्पुरूष पिछनै शील से, धन-संकट में धीर ।। 720 ।। अर्थात विपत्ति के आने पर व्यक्ति मित्र है…

बड़े नेताओं की छोटी बातें

शहीदे आजम भगतसिंह को फांसी दिए जाने पर अहिंसा केमहान पुजारी गांधी ने कहा था, ‘‘हमें ब्रिटेन के विनाश के बदलेअपनी आजादी नहीं चाहिए ।’’ और आगेकहा, ‘‘भगतसिंह की पूजा से देश को बहुत हानि हुई औरहो रही है ।…

तवांग तीर्थ यात्रा का उद्देश्य और उसका प्रभाव

भारत तिब्बत सहयोग मंच ने २०१२ में तवांग तीर्थ यात्रा शुरु की थी । यह तीर्थ यात्रा प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास में  असम के गुवाहाटी से प्रारम्भ होती है । गुवाहाटी को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता…

उठो! स्वाभिमानी भारत के निर्माण के लिए

पाकिस्तान ने अपने जन्म के पहले दिन से ही भारत के लिए समस्याएं खड़ी करने का रास्ता अपनाया। पराजित मानसिकता के इतिहास बोध से ग्रसित भारत के शासक वर्ग ने पाकिस्तान द्वारा देश में और देश के बाहर बोयी गयी…

देश के लिए खतरा हैं ये गूंगे-बहरे बुद्धिजीवी

- डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 समाज और देश की  बुनियाद तभी तक मजबूत रह पाती है जब तक कि समझदार लोग सही और गलत के बारे में समाज का सटीक और स्पष्ट मार्गदर्शन करते रहें। यह काम बुद्धिजीवियों का है जो…

रजिया के शासन काल में भी जलती रही स्वतंत्रता की ज्योति

रजिया भारतवर्ष के तुर्क गुलाम वंश की नही अपितु पूरी सल्तनत काल में हुई एकमात्र मुस्लिम महिला सुल्तान है। कुछ लोगों ने हिंदू धर्म की अपेक्षा इस्लाम को अधिक प्रगतिशील माना है। परंतु इस कथित ‘प्रगतिशील धर्म’ ने अपनी इस…

चलो चांद पर

दुनिया के अंतरिक्ष इतिहास में, भारत का पहला कदम। बन गया मील का पत्थर, वैज्ञानिकों का सफल दमखम।। भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के, बुलंद-हौसलों का प्रतीक। चंद्रयान एक, बाइस अक्टूबर 2008 प्रक्षेपण एक दम सटीक ।। 1 ।। भारत का…