उन्हें राय न दें जो गंभीर न हों

उन्हें राय न दें जो गंभीर न हों

राय वही है जो वक्त जरूरत अत्यन्त आवश्यक समझकर दी जाए और मार्गदर्शन करते हुए सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बने। असल में यही ज्ञान का सदुपयोग है। आमतौर पर बिना मांगे जो दी जाती है वह राय न होकर बकवास ही है और इसका कोई उपयोग नहीं है। यही कारण है कि सदियों से यही कहा जाता रहा है कि राय उन्हीं को दी जानी चाहिए जो जरूरतमन्द हों तथा किसी भी प्रकार की राय अपेक्षित हो। ऎसे लोगों को कोई भी सलाह दी जाए तो वे उसका समय पर पालन भी करते हैं, और लाभ भी उठाते हैं। इसके विपरीत बात-बात में राय दिया जाना बकवास का ही एक आत्मप्रशंसित और परिष्कृत रूप है। ऎसा करने वाले लोगों की अपने यहाँ भरमार है और कहा भी जाता है कि गली-गली रायचंद बिराजमान हैं जो बिना कुछ लिए-दिए राय देते हैं, जिन्हें जरूरत नहीं उन्हें भी राय देते हैं और शेखी बघारते हैं। हम आम इंसानों का ज्यादातर समय राय देने में ही व्यतीत होता है। यह एक ऎसा काम है जिसके लिए किसी हुनर की जरूरत नहीं होती है। जो लोग ‘अधजल गगरी ...’ होते हैं उनके साथ ही मूर्खों और बातूनियों के लिए राय प्रदान करते रहना अपने अस्तित्व और ...

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इस्लामी जिहाद के दो नए रूप

जो लोग अज्ञानवश   इस्लाम  को  भी   धर्म  समझ   लेते  हैं  ,और  खुद को सबसे बड़ा सेकुलर    साबित  करने के लिए इस्लाम  और हिन्दू धर्म  की  समानता  की  वकालत   करते रहते हैं   ,उन्हें  पता  होना  चाहिए कि  इस्लाम  में  जिहाद के  नाम  पर ऐसे   कुकर्म   भी   जायज हैं   , जिन्हें  करने पर  शैतान   भी  मना   कर  देगा  ,जिस समय   भंडाफोडू   ब्लॉग  में  लव्  जिहाद   के  बारे में  लेख प्रकाशित   हुआ था  , तो  उसकी  टिप्पणी  पर   हमारे एक  जागरूक  पाठक "smmalusare     "  ने  दिनांक    8  फरवरी  2010  को इस्लाम   के  जिहाद  का  ऐसा  घिनावना   और  निंदनीय  रूप  प्रस्तुत  करते हुए  जो  जानकारी  दी  थी   ,  वह  उन्हीं  शब्दों   में  ज्यों  की  त्यों   दी   जा रही  है  , ताकि  लोगों  के दिमाग से इस्लाम   का रोग निकल जाये  , ध्यान  से पढ़िए  , इस्लामी जिहाद दो नयें रुपों में सामने आया है. पहला लव जिहाद ( अथवा लिंग जिहाद) और दुसरा गुदा जिहाद , (अश्लील शब्दों के लिए माफी चाहुंगा). इनमें से पहला लिंग जिहाद है, जिसमें मुस्लिम युवक हिंदू युवती से येनकेन प्रकारेण दोस्ती बनाकर उससे ...

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हिन्दुओं को मिटाने की जिहादी योजना !

जिहाद  इस्लाम का अनिवार्य  कर्तव्य   है  ,जिसका उद्देश्य  पूरे  विश्व  से गैर मुस्लिमों का  सफाया  करके   इस्लामी खिलाफत कायम   करना  है   , चूँकि मुसलमानों  की   नजर में इस समय  काफिरों  की  सरकार  है  , इसलिए मुसलमान     उसे  गिराने की  योजना   बना रहे हैं   , इसके लिए वह  हर तरह के  हथकंडे   अपना   रहे  हैं   , इसके बारे में  दिनांक 31  जुलाई  2014  को " जिहादियों के नए हथकंडे  "  शीर्षक   से एक  लेख भी  प्रकाशित  किया   गया  था  , यद्यपि जिहादी  भारत के विरुद्ध  आतंकी  योजना अफगानिस्तान  और  पाकिस्तान   में  बना रहे हैं   ,  लेकिन  इस बात  तय है  कि जब भी  भारत के खिलाफ  जिहाद   होगा तो  यहाँ के मुसलमान  उनके  साथ  हो  जायेंगे  . अभी  तो   यहाँ   के मुसलमान  विभिन्न   अपराध  करके  देश में अस्थिरता   का  माहौल   बना रहे   हैं  और  जब  पूरे देश में अफरा  तफरी   फ़ैल जाएगी  तो बाहरी जिहादी  देश में  घुस  जायेंगे  , मुसलमानों   की  इस  जिहादी  योजना  का पर्दाफाश  " अनिमेष  राउल " ने किया  है    जो  " Executive Director of Research at the New Delhi-based Society ...

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भगवद्गीता को राष्ट्रिय ग्रन्थ घोषित करो !

बड़े दुःख   के साथ   कहना  पड़ता है कि हिन्दुओं    को  सेकुलरिज्म   के रोग   ने इस तरह   से   ग्रस्त   कर लिया है कि  भगवद्गीता   को   एक   हिन्दू  धर्मग्रन्थ  मानने की  भूल  करने   लगे  हैं  और  उसकी  तुलना  अन्य  धर्म ग्रंथों  से करने लगे   हैं  , जबकि वास्तविकता तो  यह है कि प्रतिपादित सभी  सिद्धांत ,  नियम   और उपदेश   किसी विशेष  देश  , जाति य समूह  के लिए  नहीं   मानव  मात्र के लिए  हैं   . गीता  मनुष्यों  में  नहीं  बल्कि  सभी    प्राणियों  में  ईश्वर   का  अंश  है   , ऐसी  शिक्षा  देती   है  , गीता  के उपदेशो   का   ठीक  से पालन  करने वाला  कभी  हिंसक   और  अपराधी   नहीं   बन सकता    है   . और  सपने में भी किसी  का अहित  नहीं  सोच  सकता  , चूँकि   सभी हिन्दू  गीता पर  श्रद्धा  रखते हैं  ,इस   लिए हिन्दुओं   ने  न तो  किसी  देश  पर आक्रमण  करके  उस  पर कब्ज़ा   करने का प्रयत्न  किया  ,  और न  ही किसी प्रकार की जिहाद करके  लोगों  को जबरन हिन्दू   बनाया  है  , जैसा  कुरान  पढ़   कर ...

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उन्हें राय न दें जो गंभीर न हों

राय वही है जो वक्त जरूरत अत्यन्त आवश्यक समझकर दी जाए और मार्गदर्शन करते हुए सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बने। असल में यही ज्ञान का सदुपयोग है। आमतौर पर बिना मांगे जो दी जाती है वह राय न होकर बकवास ही है और इसका कोई उपयोग नहीं है। यही कारण है कि सदियों से यही कहा जाता रहा है

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इस्लामी जिहाद के दो नए रूप

जो लोग अज्ञानवश   इस्लाम  को  भी   धर्म  समझ   लेते  हैं  ,और  खुद को सबसे बड़ा सेकुलर    साबित  करने के लिए इस्लाम  और हिन्दू धर्म  की  समानता  की  वकालत   करते रहते हैं   ,उन्हें  पता  होना  चाहिए कि  इस्लाम  में  जिहाद के  नाम  पर ऐसे   कुकर्म   भी   जायज हैं   , जिन्हें  करने

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हिन्दुओं को मिटाने की जिहादी योजना !

जिहाद  इस्लाम का अनिवार्य  कर्तव्य   है  ,जिसका उद्देश्य  पूरे  विश्व  से गैर मुस्लिमों का  सफाया  करके   इस्लामी खिलाफत कायम   करना  है   , चूँकि मुसलमानों  की   नजर में इस समय  काफिरों  की  सरकार  है  , इसलिए मुसलमान     उसे  गिराने की  योजना   बना रहे हैं   , इसके लिए वह  हर तरह के  हथकंडे

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भगवद्गीता को राष्ट्रिय ग्रन्थ घोषित करो !

बड़े दुःख   के साथ   कहना  पड़ता है कि हिन्दुओं    को  सेकुलरिज्म   के रोग   ने इस तरह   से   ग्रस्त   कर लिया है कि  भगवद्गीता   को   एक   हिन्दू  धर्मग्रन्थ  मानने की  भूल  करने   लगे  हैं  और  उसकी  तुलना  अन्य  धर्म ग्रंथों  से करने लगे   हैं  , जबकि वास्तविकता तो

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पिछले जन्मों के भिखारी ही हैं आज के ये रिश्वतखोर

पूर्वजन्म के संस्कारों का इंसान पर खूब प्रभाव रहता ही है। चित्त के संस्कारों में से काफी कुछ संस्कार अपने पिछले जन्मों से जुड़े हुए होते हैं और इनका प्रभाव अपने वर्तमान जन्म पर भी पड़ता है। कुछ लोगों का स्वभाव, व्यवहार और सोच आदि पूर्वजन्मों से न्यूनाधिक रूप से मेल खाती है चाहे वे पहले के जन्मों में मनुष्य

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