दिल्ली की नीतियों तले कलम छोड़ फिर बंदूक न उठा लें कश्मीरी ?

दिल्ली-कश्मीर के बीच तालीम की कड़ी टूटने से बचाएं मोदी-मुफ्ती  पुण्‍य प्रसून वाजपेयी घाटी संगीनों के साये से मुक्त कैसे हो सकती है। कैसे उन हाथों में दुबारा कलम थमा दी जाये जो बंदूक और पत्थर से अपनी तकदीर बदलने निकले थे। कैसे युवा पीढी रश्क करें कि पहली बार पीडीपी-बीजेपी की सरकार घाटी में विकास की नयी बहार बहा देगी। यह सवाल घाटी में हर सियासी मुलाकात में गूंजे और दिल्ली में भी सत्ता गढने के दौर में शिकन इन्हीं सवालों को लेकर था। क्योंकि कश्मीर की सत्ता में जो रहे लेकिन रास्ता तो उन्ही बच्चों के जरीये निकलेगा जिनके हाथो में बंदूक रहे या कलम। जिनके जहन में हिन्दुस्तान बसे या सिर्फ कश्मीर। यह सारे हालात अब नयी सत्ता को तय करने होंगे। और सबसे बड़ा इम्तिहान तो नयी सरकार का यही होगा कि कश्मीरी बच्चे बेखौफ होकर देश को समझ सके। पढ़ने के लिये कश्मीर से बाहर निकल सके। ...

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भूमि−कानून : लचीला रवैया जरुरी

भूमि−अधिग्रहण कानून को लेकर देश में जबर्दस्त हलचल मची हुई है। अपने आपको किसानों का प्रतिनिधि बतानेवाले कई संगठनों ने काफी प्रभावशाली प्रदर्शन कर दिए हैं। कांग्रेस ने, अपना लचर−पचर ही सही, विरोध तो जाहिर किया है। प्रदर्शनों और संसद में चाहे मां−बेटा कुछ न बोलें लेकिन कई हारे−थके कांग्रेसी नेता जतंर−मंतर पहुंच गए। भाजपा−गठबंधन के भी कई घटक बगावत की आवाजें उठा रहे हैं। शिव सेना, पासवान लि. कंपनी, अकाली दल ने भी भूमि−अधिग्रहण अध्यादेश में संशोधन की मांग की है। राज्यसभा में बहुमत धारण किए हुए लगभग सारे विरोधी दल एक हो गए हैं। इस अध्यादेश को अब यदि सरकार कानून बनवाने पर आमादा हुई तो इसे अब लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त अधिवेशन में ही पारित करवाना पड़ेगा। सरकार भी नरम पड़ी है। उसने नए सुझावों पर विचार करने के लिए एक कमेटी बना दी है। इस सारी बहस में कुछ ऐसे मुद्दे उभरते हैं, जिससे हमारे नेताओं ...

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कश्मीर से उभरा बड़ा संदेश

जम्मू−कश्मीर राज्य में पीडीपी और भाजपा की संयुक्त सरकार बनेगी, यह खुश खबर है। यह खुश खबर कश्मीर के लिए है, पूरे भारत के लिए है और सारे दक्षिण एशिया के लिए भी है। अब तक देश के कई राज्यों में और केंद्र में भी कई गठबंधन सरकारें बनी हैं लेकिन जम्मू−कश्मीर में बनने वाली यह गठबंधन सरकार अपने आप में अनूठी है। यदि यह सरकार अगले छह साल तक ठीक−ठाक काम करती रही तो मुझे लगता है कि यह 21 वीं सदी के महान भारत के उदय में बड़ा योगदान करेगी। पीडीपी और भाजपा का साथ आना किस बात का प्रतीक है? क्या इसका नहीं कि भारत का लोकतंत्र काफी परिपक्व हो गया है? जिस भाजपा को अब भी कई लोग मुस्लिम−विरोधी पार्टी समझते हैं, वह भाजपा अब एक मूलत: मुस्लिम पार्टी के साथ गठबंधन सरकार बना रही है। यह बड़ा कठिन काम है, लगभग असंभव! इसीलिए इस पर राजी ...

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सूफीवाद धर्मान्तरण की बुनियाद

किसी भी दैनिक अख़बार को उठा कर देखिये आपको पढ़ने को मिलेगा की आज हिंदी फिल्मों का कोई प्रसिद्द अभिनेता या अभिनेत्री अजमेर में गरीब नवाज़ अथवा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर चादर चढ़ा कर अपनी फिल्म के हिट होने की मन्नत मांगने के लिए गया। भारतीय समाज में भी एक विशेष आदत हैं, वह हैं अँधा अनुसरण करने की। क्रिकेट स्टार, फिल्म अभिनेता, बड़े उद्योगपति जो कुछ भी करे भी उसका अँधा अनुसरण करना चाहिए चाहे बुद्धि उसकी अनुमति दे चाहे न दे.अज्ञानवश  लोग दरगाहों  पर  जाने को  हिन्दू  मुस्लिम  एकता   और  आपसी  भाईचारे का  प्रतिक  मान   लेते हैं  , लेकिन  उनको पता नहीं   कि  सूफीवाद भी  कट्टर  सुन्नी  इस्लाम  एक  ऐसा  संप्रदाय   है  ,जो  बिना  युद्ध  और  जिहाद के  हिन्दुओं  को  मुसलमान  बनाने में  लगा   रहता है  , भारत -पाक   में  सूफियों   के  चार  फिरके   हैं   , पूरे भारत में इनकी दरगाहें  फैली  हुई हैं ,जहां  अपनी  मन्नत  ...

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अल्लाह की सूरत कैसी है ?

अल्लाह  सर्वशक्तिमान है ,सब कुछ  कर सकता  है ,निराकार  है उसका  जिस्म या शारीरिक  अंग  नहीं है ,अल्लाह अतुलनीय  है ,उसके   जैसा  कोई मनुष्य ,प्राणी या वस्तू   नहीं  है .और न अल्लाह की कोई  तस्वीर  ही बनाई  जा सकती है .और न कोई इस जीवन में अल्लाह  को देख सकता  है .  केवल  मरने के बाद  जो मुसलमान  जन्नत  में जायेंगे वही अल्लाह का साक्षात्  दर्शन  कर सकेंगे .कुरान और हदीसों में अल्लाह  के बारे में ऐसी ही  बातें   बतायी  गयी हैं . लेकिन   कुरान  हदीसों  में अल्लाह के बारे में कुछ  ऐसे  संकेत(Clues)  दिए  गए हैं , जिनके  सहारे हम  आसानी  से पता  कर  सकते हैं कि अल्लाह  साकार है , उसके हाथ और चेहरा  भी है . यही नहीं   की लम्बाई (Hight )  कितनी  है .यही  नहीं  अल्लाह की सूरत  कैसी  है .अल्लाह के बारे में यह  जानकारी  हासिल  करने  के लिए  हमें  वही  विधि  अपनानी होगी ,जो गुप्तचर ...

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दिल्ली की नीतियों तले कलम छोड़ फिर बंदूक न उठा लें कश्मीरी ?

दिल्ली-कश्मीर के बीच तालीम की कड़ी टूटने से बचाएं मोदी-मुफ्ती  पुण्‍य प्रसून वाजपेयी घाटी संगीनों के साये से मुक्त कैसे हो सकती है। कैसे उन हाथों में दुबारा कलम थमा दी जाये जो बंदूक और पत्थर से अपनी तकदीर बदलने निकले थे। कैसे युवा पीढी रश्क करें कि पहली बार पीडीपी-बीजेपी की सरकार घाटी में विकास की नयी बहार बहा

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भूमि−कानून : लचीला रवैया जरुरी

भूमि−अधिग्रहण कानून को लेकर देश में जबर्दस्त हलचल मची हुई है। अपने आपको किसानों का प्रतिनिधि बतानेवाले कई संगठनों ने काफी प्रभावशाली प्रदर्शन कर दिए हैं। कांग्रेस ने, अपना लचर−पचर ही सही, विरोध तो जाहिर किया है। प्रदर्शनों और संसद में चाहे मां−बेटा कुछ न बोलें लेकिन कई हारे−थके कांग्रेसी नेता जतंर−मंतर पहुंच गए। भाजपा−गठबंधन के भी कई घटक बगावत

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कश्मीर से उभरा बड़ा संदेश

जम्मू−कश्मीर राज्य में पीडीपी और भाजपा की संयुक्त सरकार बनेगी, यह खुश खबर है। यह खुश खबर कश्मीर के लिए है, पूरे भारत के लिए है और सारे दक्षिण एशिया के लिए भी है। अब तक देश के कई राज्यों में और केंद्र में भी कई गठबंधन सरकारें बनी हैं लेकिन जम्मू−कश्मीर में बनने वाली यह गठबंधन सरकार अपने आप

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सूफीवाद धर्मान्तरण की बुनियाद

किसी भी दैनिक अख़बार को उठा कर देखिये आपको पढ़ने को मिलेगा की आज हिंदी फिल्मों का कोई प्रसिद्द अभिनेता या अभिनेत्री अजमेर में गरीब नवाज़ अथवा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर चादर चढ़ा कर अपनी फिल्म के हिट होने की मन्नत मांगने के लिए गया। भारतीय समाज में भी एक विशेष आदत हैं, वह हैं अँधा अनुसरण करने की।

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अल्लाह की सूरत कैसी है ?

अल्लाह  सर्वशक्तिमान है ,सब कुछ  कर सकता  है ,निराकार  है उसका  जिस्म या शारीरिक  अंग  नहीं है ,अल्लाह अतुलनीय  है ,उसके   जैसा  कोई मनुष्य ,प्राणी या वस्तू   नहीं  है .और न अल्लाह की कोई  तस्वीर  ही बनाई  जा सकती है .और न कोई इस जीवन में अल्लाह  को देख सकता  है .  केवल  मरने के बाद  जो मुसलमान  जन्नत  में

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विकास के लिए है आम बजटः- सी.पी. जोशी

  नई दिल्ली, 01 मार्च, 2015। चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने कहा है कि केन्द्रीय आम बजट को जनता के हितो को ध्यान में रखकर बनाया गया है।      सांसद श्री जोशी ने कहा सरकार कि पिछले नौ माह में भारतीय अर्थव्यवस्था की साख बढ़ी है भारतीय अर्थव्यवस्था तीव्र विकास के पथ पर प्रशस्त है। भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रतिकूल माहौल

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