अग्निकांड की घटनाएं और बचाव

गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर और ग्रामीण इलाकों में अग्निकांड की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। जरा सी चूक से आग भड़क सकती है। अगर, कुछ सावधानी बरती जाए तो अग्निकांड की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। 14 अप्रैल को अग्नि शमन सेवा स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। अग्नि शमन केन्द्र पर अग्नि शमन सेवा स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। 14 अप्रैल 1944 को मुम्बई बन्दरगाह पर घटित भीषण अग्निकाण्ड में अग्नि शमन विभाग के 66 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, तबसे 14 अप्रैल को अग्नि शमन सेवा स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। अग्नि शमन विभाग की सेवा किसी भी आपदा-विपदा हाने पर इस्तेमाल किया जाता है, चाहे कोई त्यौहार हो धरना प्रदर्शन ...

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आग से जलते इन पहाड़ों के लिए दोषी कौन?

देश के पहाड़ जल रह हैं, चाहे वह उत्तराखंड हो या फिर शिमला या फिर जम्मू काश्मीर के। पहाड़ों में लगी  आग ने काफी विकराल रूप धारणकर लिया है। आज पूरे भारत में पहाड़ों में लगी भयंकर आग चर्चा का विषय बन गयी है। लोगों को विश्वास ही नहीं हो पारहा है कि आखिरकार पहाड़ के जंगलों में इतनी भयंकर आग आखिर लग कैसे गयी है। यह आग प्राकृतिक रूप से इतना विकराल आकार कैसे ले सकती है। ंजितने मुंह उतनी बाते ंहो रही हैं। राजनैतिक गलियारे में उत्तराखंड के पहाडों की आग को सियासत की साजिश कहा जा रहा है तो स्थानीय लोगों का तो यहां तक कहना है कि इस भयानक आग में लकड़ी व वनस्पतियों की तस्करी करने वाले बड़े गिरोहों का हाथ हो सकता है या ...

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (file photo)

अन्त्योदयवादी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

मगध का राजा घनानंद लोभी, अहंकारी और अत्याचारी था। चाणक्य के संसर्ग में आने के बाद घनानंद ने प्रजाजनों का उत्पीडऩ बंद कर दिया। वह गरीबों और अपाहिजों को दान भी देने लगा। एक दिन राजा घनानंद ने दरबार में चाणक्य से कह दिया जितनी तुम्हारी प्रतिभा है, यदि रूप भी उतना ही सुंदर होता तो कुछ अलग ही बात होती। चाणक्य महान नीतिज्ञ थे, वह विद्वान होने के साथ-साथ परम तपस्वी एवं विरक्त भी थे। एक विद्वान का स्वाभिमानी होना तो स्वाभाविक ही है। इसलिए राजा घनानंद के कठोर वचनों को सुनकर स्वाभिमानी चाणक्य बहुत आहत हुए। तब उन्होंने कह दिया-‘राजन! मैं अपने इस अपमान का प्रतिशोध लेकर भी चैन से बैठूंगा।’ अचानक एक दिन चाणक्य की चंद्रगुप्त से भेंट हो गयी। वे उनके साहस एवं गुणों से प्रभाभित हुए। उन्होंने ...

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तिब्बत और चीन

उइगर नेता डोल्कन ईसा के बाद भारत ने दो और असंतुष्ट चीनी नेताओं का वीजा रद्द कर दिया। चीन में लोकतंत्र के समर्थन में हुए थ्येनमान चौक आंदोलन की नेता लू जिंघुआ को न्यूयॉर्क में एयर इंडिया की फ्लाइट पकड़ने से ठीक पहले इसकी जानकारी मिली। हांगकांग निवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता रे वोंग का वीजा भी खारिज हो गया। चीन से निष्कासित जानी-मानी थियानमेन स्क्वेयर एक्टिविस्ट लू जिंघुआ को भी 28 अप्रैल को धर्मशाला में हो रही उसी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेना था, जिसमें डोल्कन ईसा आने वाले थे। मोदी सरकार ने चीन के दबाव के बाद ईसा का वीजा रद्द कर दिया था। इन सभी नेताओं को धर्मशाला में लोकतंत्र के मुद्दे पर हो रहे सम्मेलन में हिस्सा लेना था। यहां वे चीन में लोकतंत्र लाने के प्रयास के संबंध ...

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उगता भारत समाचार