लालकिले की प्राचीर से हमारे अब तक के प्रधानमंत्री

भारत अपना 68वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। यह दिवस हमारे हजारों, लाखों शहीदों और क्रांतिकारियों की बलिदानी गाथा की पावन स्मृतियों को संजोकर लाता है। हर देशवासी इस दिन अपने उन नाम अनाम असंख्य बलिदानियों का पावन स्मरण कर उन्हें अपने श्रद्घासुमन अर्पित करता है। पूरे देश की ओर से देश का प्रधानमंत्री लालकिले की प्राचीर पर झण्डा रोहण कर अपने शहीदों को श्रद्घांजलि देकर देश के लिए और देश के युवाओं के लिए उनके आदर्शों पर चलकर नये भारत के निर्माण में अपना सहयोग देने का आवाह्न करता है। अब तक हमारे देश के कुल 16 प्रधानमंत्री हुए ...

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समय की पुकार यही है

मौलाना अबूल कलाम आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण नेता रहे। वह नेहरू, गांधी और पटेल की तिक्कड़ी में से नेहरू के अधिक निकट थे, गांधीजी को पसंद करते थे, और पटेल को समझने का प्रयास करते थे। उन्होंने भारत के स्वाधीनता संग्राम को लेकर एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम था-‘आजादी की कहानी’। आजादी केदस वर्ष पश्चात उन्होंने यह पुस्तक लिखी थी, जो उनकी मृत्यु के तीस वर्ष पश्चात प्रकाशित की गयी। इस पुस्तक में उन्होंने कई बातों को अच्छे ढंग से रखने का प्रयास किया है। आजाद साहब भारतीय उपमहाद्वीप के बंटवारे के ‘विरोधी’ थे। इसलिए नेहरू ...

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बिखरे मोती भाग-62

बिखरे मोती भाग-62

अनीति नीति सी लगै, जब होता निकट विनाश गतांक से आगे.... वाणी का संयम कठिन, परिमित ही तू बोल। वाणी तप के कारनै, बढ़ै मनुज का मोल ।। 708 ।। अच्छी वाणी मनुज का, करती विविध कल्याण। वाणी गर होवै बुरी, तो ले लेती है प्राण ।। 709 ।। कुल्हाड़े से काटन वृक्ष तो, पुन: हरा हो जाए। बुरे वचन के घाव तै, हृदय उभर नही पाए ।। 710 ।। हृदय में चुभे बाण को, सहज निकाला जाए। कटुवाणी का बाण तो, सर्जन को भी न पाय ।। 711 ।। ‘सर्जन को भी न पाय’ से अभिप्राय है कि कटु वचन हृदय में ही बैठ जाता है। जो न तो ‘एक्सरे’ में दिखाई देता है और न ही ...

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प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘उगता भारत’ ·े चेयरमैन श्री देवेन्द्र सिंह आर्य ·ो अपना विशेष शोध·ार्य दिखाते हुए। साथ में हैं पत्र ·े संरक्ष· सूबेदार मेजर, वीर सिंह आर्य। 	छाया : अजय आर्य

इतिहास सकारात्मक लोगों के रचनात्मक कृत्यों का प्रचारक है

इतिहास सकारात्मक लोगों के रचनात्मक कृत्यों का प्रचारक है:प्रो. राजेन्द्र सिंह जब उन लोगों पर नजर दौड़ाई जाती है जो आजाद भारत में भी किसी कठोर हृदयी तानाशाह की सी गुलामी का अनुभव कर रहे हैं, और उस तानाशाह के क्रूर कारावास में देश के धर्म, संस्कृति और इतिहास को असीम यातनाओं के बीच कैद पड़ा देख रहे हैं, तो उन मेधासंपन्न लोगों में प्रो. राजेन्द्र सिंह का नाम भी सम्मान के साथ लिया जाएगा। श्री प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘उगता भारत’ के चेयरमैन श्री देवेन्द्र सिंह आर्य को अपना विशेष शोधकार्य दिखाते हुए। साथ में हैं पत्र के संरक्षक सूबेदार मेजर, वीर ...

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लालकिले की प्राचीर से हमारे अब तक के प्रधानमंत्री

भारत अपना 68वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। यह दिवस हमारे हजारों, लाखों शहीदों और क्रांतिकारियों की बलिदानी गाथा की पावन स्मृतियों को संजोकर लाता है। हर देशवासी इस दिन अपने उन नाम अनाम असंख्य बलिदानियों का पावन स्मरण कर…

समय की पुकार यही है

मौलाना अबूल कलाम आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण नेता रहे। वह नेहरू, गांधी और पटेल की तिक्कड़ी में से नेहरू के अधिक निकट थे, गांधीजी को पसंद करते थे, और पटेल को समझने का प्रयास करते…

बिखरे मोती भाग-62

अनीति नीति सी लगै, जब होता निकट विनाश गतांक से आगे…. वाणी का संयम कठिन, परिमित ही तू बोल। वाणी तप के कारनै, बढ़ै मनुज का मोल ।। 708 ।। अच्छी वाणी मनुज का, करती विविध कल्याण। वाणी गर होवै…

इतिहास सकारात्मक लोगों के रचनात्मक कृत्यों का प्रचारक है

इतिहास सकारात्मक लोगों के रचनात्मक कृत्यों का प्रचारक है:प्रो. राजेन्द्र सिंह जब उन लोगों पर नजर दौड़ाई जाती है जो आजाद भारत में भी किसी कठोर हृदयी तानाशाह की सी गुलामी का अनुभव कर रहे हैं, और उस तानाशाह के…

अल्तमश के काल में धधकती रही सर्वत्र क्रांति की ज्वाला

क्या कहते हैं विदेशी विद्वान हमारे विषय में भारतीयों के विषय में प्रो. मैक्समूलर ने लिखा है:-‘‘मुस्लिम शासन के अत्याचार और वीभत्सता के वर्णन पढक़र मैं यही कह सकता हूं कि मुझे आश्चर्य है कि इतना सब होने पर भी…

‘बेड़ी और वीणा’ के सुर फिर से एक बना दो

बहादुरशाह जफर का शेर है :- जिसे देखा हाकिमे वक्त ने, कहा ये तो काबिलेदार है। कहीं ये सितम भी सुने भला दिये फांसी लाखों को बेगुनाह।। दार का अर्थ फांसी होता है। सचमुच परतंत्रता के उस काल में हमारे…