स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत में सीएसआर की अहम् भूमिका

राजीव कुमार स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत में सीएसआर (कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) की अहम् भूमिका है। उपरोक्त बातें अल्पसंख्यक आयोग, संसदीय मामले के केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सीएसआर रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा आयोजित ‘‘सतत् विकास के लिये सीएसआर- एक उपकरण‘‘ के उद्घाटन समारोह में 22 नवंबर, 2014 को होटल ली मीरीडियन, जनपथ, नई दिल्ली में कही। राज्यमंत्री नकवी ने मोदी जी की प्रशंसा करते हुये कहा कि वे स्पष्ट रूप से कह चुके हैं ना खाउंगा और न खाने दूंगा, ना सोउंगा और ना सोने दूंगा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब तो मंत्रियों के दिन का चैन और रात की नींद उड़ गई है। जो मंत्री काम करके नही दिखायेगा उसे हटाया भी जा सकता है। आगे नकवी जी ने सीएसआर गतिविधियों के अंतर्गत औद्योगिक घरानों, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं से अपील की कि वह दूर दराज के इलाकों में सबसे नीचे पायदान पर जीवन बसर करने वाले लोगों की मदद करें क्योंकि उनके विकास की मुख्यधारा में शामिल होने से देश की जनता का विकास का पैमाना बढ़ जायेगा। वहीं समापन सत्र के मुख्य अतिथि व ग्रामीण विकास मंत्री चैधरी श्री वीरेंद्र सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत सामाजिक कार्य आसानी से किये जा सकते हैं। हरियाणा और पंजाब राज्य पर मनरेगा की राशि का पूरा उपयोग नहीं करने पर उन्होंने रोष व्यक्त किया और कहा कि कई राज्यों ...

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जिस कश्मीर को खून से सींचा वह कश्मीर किसका होगा?

 पुण्‍य प्रसून वाजपेयी जिस कश्मीर को खून से सींचा वह कश्मीर हमारा है। तो बैनर और पोस्टर से जगमगाता कश्मीर का यह आसमान किसका है। यह पैसे वालों का आसमान है । जो सत्ता चाहते हैं। तो फिर खश्मीर को खून से सिंचने वाले हाथ सत्ता बदल क्यों नहीं देते । सत्ता को क्या बदले सत्ता तो खुद ही सत्ता पाने के लिये हर चुनाव में बदल जाती है। जो कल तक नेशनल कान्फ्रेंस में था आज वह पीडीपी का हो चला है। कल तक जो बॉयकाट का नारा लगाता ता वह आज दिल्ली की गोद में खेलने को तैयार है। सिक्यूरिटी भी अब सड़क से नहीं अपने कैंपों से निशाना साधती है। वाजपेयी साहेब के दौर में एजेंसियों ने एनसी के खिलाफ पीडीपी को पैदा किया। अब एजेंसियां ही एनसी और बीजेपी को साथ खड़ा करने में लगी है। और कांग्रेस जो एनसी के साथ सत्ता में रही अब पीडीपी के साथ हो चली है, जिससे बीजेपी को रोका जा सके। इसमें हम क्या सत्ता बदल सकते हैं। लेकिन इस बार तो आजादी और बायकाट का नारा भी कोई नहीं लगा रहा है।  कश्मीरी तो चुनाव के रंग में है। तो वह क्या करें। घरों में कैद रहें। खामोश रहें। लेकिन हर रैली में हजारो हजार कश्मीरी की भीड़ बताने तो लगी है घाटी बदल रही है। और आप अब भी ...

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ढोंगी संत धराशायी हो गया

हरियाणा सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय बधाई के पात्र हैं। यदि उन्होंने धीरज और संयम से काम नहीं लिया होता तो बरवाला के सतलोक आश्रम की मुठभेड़ में सैकड़ों लोग मारे जाते। रामपाल के आश्रम में  तैयारी उतनी घातक तो नहीं पर उसी तर्ज पर थी, जो 1984 में भिंडरावाला ने स्वर्ण मंदिर में कर रखी थी। महीनों तक चलने वाली रसद, रिवाॅल्वर, बंदूकें, बम-गोले और तेजाब की बोतलें क्या-क्या नहीं मिला है, रामपाल के आश्रम से! रामपाल ने पुलिस पर हमला बोलने के लिए सेवानिवृत्त फौजियों की सेना भी खड़ी कर रखी थी। घायलों के इलाज के लिए पूरे अस्पताल जैसी तैयारी थी। 16 एकड़ के इस किलेनुमा आश्रम को रामपाल ने छोटे-मोटे राज्य में बदल दिया था। इस लघु-राज्य के महान राजा की तरह वह शासन और अदालत दोनों को खुली चुनौती देता था। उसके अनुयायी उसे ‘परमात्मा’ कहकर पुकारते थे। अदालत के कठोर आदेश के बावजूद वह 17-18 दिन तक राज्य सरकार को ब्लैकमेल करता रहा। वकीलों ने कहना शुरू कर दिया था कि रामपाल को कोर्ट के सामने पेश करना अब असंभव हो गया है। कोर्ट में उसकी पेशी के पहले उसके हजारों समर्थक अदालत और जजों को घेर लेते थे, लेकिन अब खट्‌टर सरकार की चतुराई के आगे रामपाल को भीगी बिल्ली बनना पड़ा। वह दुम दबाए अदालत पहुंच गया और सिर झुकाए कठघरे में ...

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ढोंगी संत का आत्म-समर्पण

हिसार के बरवाला में स्थित सतलोक आश्रम ऐसा बन गया था, जैसा 1984 में अमृतसर का स्वर्ण-मंदिर! लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार बधाई की पात्र है कि उसने बिना किसी विशेष रक्तपात किए ही रामपाल को गिरफ्तार कर लिया। भिंडरावाले से कहीं ज्यादा जोश-खरोश का प्रदर्शन करने वाले रामपाल ने जैसे भीगी बिल्ली की तरह आत्म-समर्पण किया, उससे क्या जाहिर होता है? यही कि ये साधु-संत और बाबा लोग हमारे नेताओं से भी ज्यादा गए-गुजरे होते हैं। इनमें नैतिक बल का सर्वथा अभाव होता है। विपरीत परिस्थितियों में चारों खाने चित हो जाना इनके स्वभाव में होता है। ये लोग अपने चेले-चेलियां के दम पर माल मलाई सूंतते रहते हैं और यदि कभी मुठभेड़ का मौका आता है तो ये उन्हें ही आगे कर देते हैं। रामपाल ने भी यही किया। उसके आश्रम से भागने वाले उसके भक्तों की भी यही कहानी है। अपने बचाव के लिए इस कापुरुष ने इन चेले-चेलियों की जान दांव पर लगा दी। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को बधाई कि उन्होंने पर्याप्त धैर्य का परिचय दिया, जल्दबाजी नहीं की और बड़ी तरकीब से रामपाल को धर दबोचा। रामपाल पर हत्या का मुकदमा तो चल ही रहा है, अब वह राजद्रोह के अपराध में जेल में बैठा-बैठा माला फेरता रहेगा। कितने शर्म की बात है कि वह अपने आप को संत कबीर का अवतार बताता है। कबीर के सिद्धांतों ...

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आत्म आंनद के लिए यह जरूरी है....

छोड़ते चलें एक-एक कर  आत्म आंनद के लिए यह जरूरी है कि हम उन विषयों, वस्तुओं, संसाधनों, व्यक्तियों और विचारों में न उलझे रहें, जिन्हें वर्षों से एकत्र करते आ रहे हैं और संग्रही स्वभाव की वजह से हमारे पास इनका इतना अधिक भण्डार जमा हो चला है कि न हमारे काम आ पा रहा है,न हम किसी और को इसका उपयोग करने देने के लिए राजी हैं। महा-परिग्रही की भूमिका में बरसों से हम निरन्तर संग्रह ही संग्रह करते जा रहे हैं और इस फेर में इतना अधिक कबाड़ जमा कर लिया है कि हमें ही सूझ नहीं पड़ रही है कि किसका क्या और कब उपयोग करें। कई सारे लोग तो ऎसे हो गए हैं कि जिनके लिए यह सब कुछ किसी काम नहीं रहा है। आज हममें से अधिकांश लोग थोड़ी गंभीरता से विचार करें तो पाएंगे कि हमारे पास जितना जो कुछ है उसमें से काफी कुछ हमारे काम का है ही नहीं। फिर भी हमें यह समझ नहीं आ रहा है कि हम इस कबाड़ का करेंगे क्या। क्योंकि हमारे जाने के बाद हमारे बाद के लोगों के लिए इसका कोई मूल्य नहीं है। वे ऎसे ही इन सबको रद्दी और कबाड़ के भाव बेच देने वाले हैं या कहीं फेंक देने वाले हैं जैसे कि दीवाली की साफ-सफाई के दिनों में होता रहा है। प्रायःतर हर इंसान यह सभी प्रकार ...

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स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत में सीएसआर की अहम् भूमिका

राजीव कुमार स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत में सीएसआर (कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) की अहम् भूमिका है। उपरोक्त बातें अल्पसंख्यक आयोग, संसदीय मामले के केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सीएसआर रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा आयोजित ‘‘सतत् विकास के लिये सीएसआर- एक उपकरण‘‘ के उद्घाटन समारोह में 22 नवंबर, 2014 को होटल ली मीरीडियन, जनपथ, नई दिल्ली में कही। राज्यमंत्री नकवी ने

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जिस कश्मीर को खून से सींचा वह कश्मीर किसका होगा?

 पुण्‍य प्रसून वाजपेयी जिस कश्मीर को खून से सींचा वह कश्मीर हमारा है। तो बैनर और पोस्टर से जगमगाता कश्मीर का यह आसमान किसका है। यह पैसे वालों का आसमान है । जो सत्ता चाहते हैं। तो फिर खश्मीर को खून से सिंचने वाले हाथ सत्ता बदल क्यों नहीं देते । सत्ता को क्या बदले सत्ता तो खुद ही सत्ता

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ढोंगी संत धराशायी हो गया

हरियाणा सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय बधाई के पात्र हैं। यदि उन्होंने धीरज और संयम से काम नहीं लिया होता तो बरवाला के सतलोक आश्रम की मुठभेड़ में सैकड़ों लोग मारे जाते। रामपाल के आश्रम में  तैयारी उतनी घातक तो नहीं पर उसी तर्ज पर थी, जो 1984 में भिंडरावाला ने स्वर्ण मंदिर में कर रखी थी। महीनों तक चलने

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ढोंगी संत का आत्म-समर्पण

हिसार के बरवाला में स्थित सतलोक आश्रम ऐसा बन गया था, जैसा 1984 में अमृतसर का स्वर्ण-मंदिर! लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार बधाई की पात्र है कि उसने बिना किसी विशेष रक्तपात किए ही रामपाल को गिरफ्तार कर लिया। भिंडरावाले से कहीं ज्यादा जोश-खरोश का प्रदर्शन करने वाले रामपाल ने जैसे भीगी बिल्ली की तरह आत्म-समर्पण किया, उससे क्या जाहिर

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आत्म आंनद के लिए यह जरूरी है….

छोड़ते चलें एक-एक कर  आत्म आंनद के लिए यह जरूरी है कि हम उन विषयों, वस्तुओं, संसाधनों, व्यक्तियों और विचारों में न उलझे रहें, जिन्हें वर्षों से एकत्र करते आ रहे हैं और संग्रही स्वभाव की वजह से हमारे पास इनका इतना अधिक भण्डार जमा हो चला है कि न हमारे काम आ पा रहा है,न हम किसी और को इसका

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बुरा कहै संसार ये, जिसको हो अभिमान

बिखरे मोती-74 गतांक से आगे…. दक्ष कृतज्ञ मतिमान हो, ऋजुता से भरपूर। भृत्य-मित्र को प्राप्त हो, बेशक धन से दूर ।। 806 ।। अर्थात जो व्यक्ति चतुर है, उपकार को मानने वाला है, बुद्घिमान है और उसका कुटिलता रहित उत्तम स्वभाव है। ऐसा व्यक्ति धन रहित होने पर भी भृत्यों (सेवकों) और मित्रों के समूह को प्राप्त होता है। बुरा

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