घरों में फ्रिज क्या आया, मटके गायब हो गए। मगर मिट्टी का मटका आज भी गरीबों का फ्रिज बना हुआ है। मटके के पानी को आयुर्वेद में भी महत्ता दी गई है। मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। मटके में कई छोटे-छोटे छेद होते हैं- जो पानी को ठंडा करने में मदद […]
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तू मौत का ढंग तो जानता है, पर जीवन की पहचान नही।हिंसा का बन व्याघ्र गया, जो कहता अपने को मानव यदि यही है उन्नत मानव, तो कैसा होगा दानव?करता अट्टाहास जीत पर, खून बहाकर भाई का। कितनी भक्ति की भगवान की, क्या किया काम भलाई का?शांत शुद्घ अंत:करण से, क्या कभी यह सोचकर देखा?निकट […]
क्या कभी यह सोचकर देखा? निकट है काल की रेखा।आओ मिलें अब उन लोगों से, जो आधुनिक उन्नत हैं। खून तलक पी जाएं बसर का, कहते हम गर्वोन्नत हैं।ईमान बेच दें टुकड़ों पर, और करते हैं हेरा फेरी। मानवता की हत्या करते, लगती नही इनको देरी।आज विश्व का देश द्रव्य को, व्यय कर रहा है […]
क्या कभी यह सोचकर देखा? निकट है काल की रेखा।आओ मिलें अब उन लोगों से, जो आधुनिक उन्नत हैं। खून तलक पी जाएं बसर का, कहते हम गर्वोन्नत हैं।ईमान बेच दें टुकड़ों पर, और करते हैं हेरा फेरी। मानवता की हत्या करते, लगती नही इनको देरी।आज विश्व का देश द्रव्य को, व्यय कर रहा है […]
तेरी कोमल काया के नही, चिन्ह दृष्टि कहीं आएंगे।पंचभूतों में पंचभूत, ये सारे ही मिल जाएंगे। पृथ्वी की उर्वरा शक्ति को, तेरे अवशेष बढ़ाएंगे।हरी-हरी फिर घास जमेगी, जिसे पशु चर जाएंगे। ध्यान कर उस हश्र का, जो अंतिम पल पर होवेगा।यदि सुरभि है तेरे अंदर, तभी जहां तुझे रोवेगा। बागबां है ये जहां, और कली […]
देख दशा यह बुढिय़ा की, अब अपनी तबियत घबराती।चलने की तैयारी कर ले, कहती मौत निकट आती। राजा, ऋषि, योगी ना छोड़े, तेरी तो क्या हस्ती है।सृजन को दूं बदल विनाश में, मेरी तो ये मस्ती है। हर बसर के कर्म का, रखती हूं मैं लेखा।निकट है काल की रेखा। देखा अगणित कलियों को, जो […]
तिल के तेल की मालिश बारिश के मौसम में सप्ताह में कम से कम दो बार तिल के तेल की मालिश करनी चाहिए। ये मालिश आपको स्वस्थ रखती है। कुछ लोगो को तिल का तेल गर्मी कर सकता है इसलिए वे लोग नारियल के तेल का उपयोग भी कर सकते हैं। तेल.मसाले से दूर रहें […]
आचार्य बालकृष्ण – यह 24 घंटे ऑक्सीजन देता है . – इसके पत्तों से जो दूध निकलता है उसे आँख में लगाने से आँख का दर्द ठीक हो जाता है . – पीपल की ताज़ी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी है . – पीपल के ताज़े पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर […]
इस व्याधि में बार बार मूत्र लगती है तथा मूत्र में चीनी आती है ! मूत्र क साथ अपर ओज निकलता है, इसलिए चरक ‘मधुमेह’ को ‘ओजोमह’ कहते हैं ! ओज मधुर स्वभाव का होता है, इसी कारण पेशाब में चीटियाँ लगती हैं ! मधु और छौद्र के सामान मूत्र होने के कारण इसे मधुमेह […]
/ उत्तम श्रेणी की चाय १० ग्राम लें , उसे आठ या दस उबाल एक कप पानी में उबाले और छानकर पिना है | नोट : – अगर रोग प्रथम चरण का हो तो २० ही दिन में पथरी निश्चितरुप से निकल जायेगी | +/ भुनी हुई फिटकरी १० ग्राम , पानी २०० ग्राम – […]