आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता होगा कि आप कार की चाबी कही रखकर भूल जाते हैं। अब आप बेफिक्र होकर कार की चाबी को कहीं भी रखकर भूल सकते हैं। चाबी नहीं मिलने पर आपकी मदद करेगा आपका स्मार्टफोन। स्मार्टफोन आपकी कार का दरवाजा खोल देगा! ये महज ख्याली पुलाव नहीं बल्कि हकीकत है। […]
Category: प्रमुख समाचार/संपादकीय
दिल्ली में हुई एक बस में युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना ने दिल्ली को दहला दिया है। देश की राजधानी में आजाद भारत के इतिहास में पहली बार देश के युवाओं ने ऐसी हुंकार भरी है कि उसका कोई सानी नही है। कोई दूसरा उदाहरण नही है। बिना नेता के और बिना राजनीति […]
दिल्ली में हुई एक बस में युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना ने दिल्ली को दहला दिया है। देश की राजधानी में आजाद भारत के इतिहास में पहली बार देश के युवाओं ने ऐसी हुंकार भरी है कि उसका कोई सानी नही है। कोई दूसरा उदाहरण नही है। बिना नेता के और बिना राजनीति […]
मैं गरीब हूं
मेरा परिवार बड़ा ही विचित्र है।मेरी मां दौलत और समय बाप है।। तो भी हम सभी हम बड़ा ही मेल मिलाप है।यही नही महंगाई मेरी बहिन।।और भाई है भ्रष्टाचार, ऐसा है मेरा परिवार।तो भी मैं गरीब हूं क्योंकि।। मेरी मां मर चुकी है, मेरा बाप खराब है।मेरी बहिन तेज मिजाज है।। और मेरा भाई मुझसे […]
मैं गरीब हूं
मेरा परिवार बड़ा ही विचित्र है।मेरी मां दौलत और समय बाप है।। तो भी हम सभी हम बड़ा ही मेल मिलाप है।यही नही महंगाई मेरी बहिन।।और भाई है भ्रष्टाचार, ऐसा है मेरा परिवार।तो भी मैं गरीब हूं क्योंकि।। मेरी मां मर चुकी है, मेरा बाप खराब है।मेरी बहिन तेज मिजाज है।। और मेरा भाई मुझसे […]
कानून की कठोरता बनाम निर्ममता सामान्यत: कानून की कठोरता और निर्ममता को एक ही माना जाता है। लेकिन यह भी आजकल के कथित बुद्घिजीवियों की कोरी कल्पना ही है। कठोरता और निर्ममता में भारी अंतर है। कानून कठोर तो होना चाहिए, परंतु निर्मम नही। हमारे देश में ही नही अपितु विश्व में भी कुछ बातों […]
कानून की कठोरता बनाम निर्ममता सामान्यत: कानून की कठोरता और निर्ममता को एक ही माना जाता है। लेकिन यह भी आजकल के कथित बुद्घिजीवियों की कोरी कल्पना ही है। कठोरता और निर्ममता में भारी अंतर है। कानून कठोर तो होना चाहिए, परंतु निर्मम नही। हमारे देश में ही नही अपितु विश्व में भी कुछ बातों […]
शांता कुमार1897 का वर्ष पूना निवासियों के लिए एक भयानक आपत्ति लेकर उपस्थित हुआ। उस वर्ष सारे नगर में प्लेग का रोग फैल गया। लोग घबरा उठे। यह रोग बंबई से होकर आया था। रोकथाम के प्रयत्न होने लगे। सारा शासन भविष्य की भयानकता का विचार करके चौकन्ना हो गया। चार फरवरी के कौंसिल ने […]
शांता कुमार1897 का वर्ष पूना निवासियों के लिए एक भयानक आपत्ति लेकर उपस्थित हुआ। उस वर्ष सारे नगर में प्लेग का रोग फैल गया। लोग घबरा उठे। यह रोग बंबई से होकर आया था। रोकथाम के प्रयत्न होने लगे। सारा शासन भविष्य की भयानकता का विचार करके चौकन्ना हो गया। चार फरवरी के कौंसिल ने […]
तभी आजाद होंगे
समझ में नही आता, राष्ट्रीय पर्वों का औचित्य।क्यों आते हैं बार बार, क्यों मनाए जाते हैं हर बार।।अनशन, हड़ताल, उग्रवाद, देश में हावी है आतंकवाद।भ्रष्टाचार, महंगाई, दंगे, फसाद, भुखमरी।।यही तो धरोहर है स्वाधीनता की।इसके अलावा मिला क्या है,देश की गरीब जनता को आजादी से।।हर पांच साल में कागज पर कलम से।सभाओं में जोश और इलम […]