कलम उठाया जब लिखने को आंसू टपके, लहू भी टपका।हाथों में अखबार जो आया जख्म मिले और दर्द भी टपका।।इलाहाबाद जंक्शन पर मचा भगदड़ का तूफान।वहां पर मौजूद थे मेरे अनुज एडवोकेट शेखर और विरेन्द्रटे्रनों में बैठने की जल्दबाजी में अनेकों मारे गये इंसानदुख भरे हालात में परिजन कर रहे थे अपनों की पहचानजब मुझे […]
Category: प्रमुख समाचार/संपादकीय
‘छ’ छकार को हमारे भाषाविदों ने छाया, आच्छादान, छत्र, परिच्छेद, अखण्ड, छेद आदि का समानार्थक माना है। छत, छाता, छवि, छत्वर: (इसी छत्वर से छप्पर शब्द बना है क्योंकि छत्वर: का एक अर्थ पर्णशाला भी है) छिपना, छिपाना, इत्यादि शब्द छ को छाया आदि का समानार्थक सिद्घ करते हैं। इसकी आकृति में बाहरी ओर से […]
वीरेन्द्र सेंगरनई दिल्ली। भाजपा के तीन दिवसीय अधिवेश के दौरान, नरेंद्र मोदी की चर्चा ने और जोर पकड़ लिया है। भले औपचारिक रूप से ‘पीएम इन वेटिंग’ के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी के नाम का ऐलान न हुआ हो, लेकिन पार्टी के अंदर इसका साफ संदेश चला गया है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में […]
आजाद की काव्य झलकियां
मां हम विदा हो जाते हैं, हम विजय केतु फहराने आज। तेरी बलिवेदी पर चढ़ कर मां निज शीश कटाने आज॥ मलिन वेश ये आंसू कैसे, कंपित होता है क्यों गात? वीर प्रसूति क्यों रोती है, जब लग खंग हमारे हाथ॥ धरा शीघ्र ही धसक जाएगी, टूट जाएंगे न झुके तार। विश्व कांपता रह जाएगा, […]
हाथी जी के रुपए
हाथी जी से हो गई चूक।खुली छोड़कर गए संदूक।। बीस रुपए ले गई बिल्ली।रेल में बैठ, पहुंची दिल्ली।। सोलह रुपए ले गया भालू।खरीद लिए दो किलो आलू।। पन्द्रह रुपए ले गया बंदर।खरीदे दौ सौ ग्राम चुकंदर।। चुपके-चुपके आया सियार।वह भी ले गया रुपए चार।। होटल देखा मन ललचाया।उसने तुरंत समोसा खाया।। संदूक में रुपए थे […]
गतांक से आगे…..शांता कुमारजीवन की गाड़ी का कांटा ही मानो बदल गया। बिलासिता प्रिय मदन पर अब देश भक्ति का रंग चढऩे लगा। उन्हीं दिनों खुफिया पुलिस ने रिपोर्ट दी थी कि मदनलाल घंटों अकेले फूलों को देखता रहता है। पुलिस का अनुमान था कि वह या तो कोई कवि हो सकता है या फिर […]
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में : राजधर्म और भारतीय संविधानमहाभारत को नीति और राजनीति के दृष्टिकोण से विद्वानों ने पांचवां वेद माना है। महाभारत आदि पर्व में कहा गया है-धर्मे चार्थे च कामे च मोक्षे च भरतर्षभ।यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत क्वचित।।हे भरत श्रेष्ठ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संबंध में जो बात इस ग्रंथ में […]
गतांक से आगे….‘ध’धकार को दकार का विपरीतार्थक माना गया है। दकार में यदि देना ही देना है तो इसमें लेना ही लेना है अर्थात धारण करना। धारण करके धारणा स्थापित कराना बुद्घि का कार्य है, इसलिए बुद्घि को संस्कृत में धी: कहा गया है। गायत्री मंत्र में हम कहते हैं-धियो योन: प्रचोदयात अर्थात हे जगदीश्वर! […]
राकेश कुमार आर्यबात 1947 की है। देश का बंटवारा हो चुका था, देश के सामने देशी रियासतों को भारत के साथ मिलाने की सबसे बड़ी चुनौती थी। क्योंकि अंग्रेजों ने सभी रियासतों को खुली छूट दे दी थी कि वे चाहें तो भारत के साथ अपना मिलाप कर लें, चाहें तो पाकिस्तान के साथ चली […]
उदारीकरण से देश में सूचना क्रांति, संचार , परिवहन, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में सुधार अवश्य हुआ है किन्तु फिर भी आम आदमी की समस्याओं में बढ़ोतरी ही हुई है| आज भारत में आम नागरिक की जान-माल-सम्मान तीनों ही सुरक्षित नहीं हैं| ऊँचे लोक पद धारियों को जनता के पैसे सरकार सुरक्षा उपलब्ध करवा देती है […]