हम क्यों हो गए हैं इतने अधीर और आतुर – डॉ.दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com हम सारे के सारे इन दिनों जबर्दस्त अशांत, उद्विग्न और अधीर हैं। जो लोग समरांगण में हैं उनके लिए ऎसा होना वाजिब है लेकिन जो तमाशबीन हैं या जिन्हें इस रण से कोई सीधा सरोकार नहीं है अथवा परिणामों से रूबरू […]
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(प्रात:काल उठकर मैं नित्य प्रति की भांति अध्ययन कर रहा था तो मैंने वैदिक विद्वान पं. रघुनंदन शर्मा की पुस्तक ‘वैदिक संपत्ति’ को पढ़ना आरंभ किया। इस पुस्तक के संस्करण की भूमिका 13 सितंबर 1931 को लिखी गयी थी। यह महज संयोग ही है कि 13 सितंबर ही पूज्य पिता महाशय राजेन्द्र आर्य जी की […]
आज का चिंतन-30/11/2013
बहुत कुछ कहता है ये सन्नाटा हमारे लिए – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com इतने दिनों के शोरगुल और आवाजाही के दौर-दर-दौर चलने के बाद इस समय ऊपर से सब तरफ लग रहा है कि कितना सन्नाटा पसरा हुआ है हर कहीं। सन्नाटे के पीछे छिपी आवाजों पर चर्चा को छोड़ कर हम इस गहन […]
आज का चिंतन-29/11/2013
हर प्रतिस्पर्धा स्वस्थ हो, हर प्रतिस्पर्धी मस्त हो – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 व्यक्ति की जिन्दगी से लेकर परिवेशीय और सम सामयिक परिस्थितियों के बीच अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने और समाज के लिए जीने-मरने की भावनाएँ आदि काल से रही हैं और आगे भी बनी रहेंगी। व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं और उच्चाकांक्षाओं का यह खेल […]
आज का चिंतन-27/11/2013
औरों को दुःखी न करें यह हिंसा से भी बढ़कर है – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com हिंसा का यही मतलब नहीं है कि किसी की हत्या कर देना या हिंसक प्रवृत्तियों में लगे रहना। हिंसा का संबंध हिंसक मानसिकता और क्रूर व्यवहार से आरंभ होता है यही सूक्ष्म मानसिकता जब व्यवहार रूप में […]
आज का चिंतन-26/11/2013
नई किस्म आ गई है ये मोबाइल वाले पागल – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com सनकियों और पागलों की मौजूदगी हमारे यहाँ हमेशा रही है। छोटे से लेकर बड़े कहे जाने वाले हों या दुनिया का कोई सा कोना हो, इन लोगों का वजूद हर युग में अपने आपको सिद्ध करता रहा है। युग के […]
आज का चिंतन-24/11/2013
लोकतंत्र की बुनियाद है चुनाव भागीदारी ही जगाती है भाग्य – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com निर्वाचन भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद है जिसके जरिये आम आदमी के हाथों में सरकार बनाने की वो ताकत है जिसका कोई मुकाबला नहीं। तंत्र को संचालित करने वाले नेतृत्व से लेकर व्यवस्था तक की सँरचना को सुगठित और सुव्यवस्थित […]
आज का चिंतन-23/11/2013
चिंता हमें क्यों? उसे है जिसने बसाया यह संसार है – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com वर्तमान के संसाधनों और आनंद को गौण मानकर आजकल लोग भविष्य की आशंकाओं और चिंताओं में खोये हुए हैं। इस वजह से उनका मन-मस्तिष्क हमेशा उद्विग्न, अशांत और अधीर रहने लगा है और इसका प्रभाव शरीर पर भाँति-भाँति की […]
आज का चिंतन(21/11/2013)
उन्मादी और सनकी होते हैं बेवक्त-बेवजह तंग करने वाले – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com कुछ लोगों की आदत में ही यह शुमार हो चला है कि वे पूरी जिन्दगी बिना किसी कारण के और बेवक्त औरों को परेशान करते रहते हैं। खुद की अशांति, उद्विग्नता, फालतू के तनावों और असंतोष को हलका करने के […]
आज का चिंतन-20/11/2013
जो ईश्वर से दूर करे वह शत्रु चाहे गुरु हो या और कोई – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 ईश्वरीय सत्ता हम सभी के लिए सर्वोपरि है फिर चाहे उसका रंग-रूप कुछ भी हो, साकार हो या निराकार या फिर और कुछ। ईश्वरीय सत्ता का सान्निध्य ही हमें शाश्वत सुख-समृद्घि और आनंद से भर सकता है। […]