आओ प्रकृति के साथ मनाएँ सनातन नव वर्ष अपना – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com यों तो साल भर में अनेक नव वर्ष विभिन्न स्वरूपों में आते-जाते रहते हैं जिनका अपना-अपना वजूद है, परंपराएं हैं और मनाने के अंदाज हैं। एक वे नव वर्ष हैं जो इंसान अपनी सहूलियत से स्थापित करता है और उसे मनाकर आनंद […]
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वर्षा शर्मामूसासी परिवार का सदस्य केला बहुत प्राचीन फल है। 326 ईसा पूर्व में सिंधु घाटी में केले का उल्लेख मिलता है। इसका वनस्पति नाम मूसा पारादिसिआका लिनिअस है। हमारे देश में यह सर्वत्र तराई वाले स्थानों, मंदिरों, धार्मिक स्थानों में खूब मिलता है। मांगलिक कार्यों में इसकी बड़ी उपयोगिता है। यह धार्मिक कृत्यों तोरण, […]
आज का चिंतन-28/03/2014
न पालें किसी से शत्रुता प्रतिशोध देता है अंधकार – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com आमतौर पर लोग अपने भ्रमों और आशंकाओं में जीते हुए किसी न किसी को अपना शत्रु मान लिया करते हैं और फिर उसके साथ वैचारिक प्रदूषण तथा मानसिक ध्रुवीकरण को अंजाम देने के लिए जी तोड़ कोशिशों में लगे […]
राकेश कुमार आर्यभारत के पूर्व कृषि मंत्री रहे डा. बलराम जाखड़ ने कहा था कि ”गाय का गोबर मल नही खाद है, जिसका मूल्य भारतीय किसान भली प्रकार जानता है। कृषि वैज्ञानिकों ने अन्वेषण करने के उपरांत यह निष्कर्ष निकाला है कि गोबर के सेन्द्रिय खाद के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। […]
आज का चिंतन-27/03/2014
समाज और देश सर्वोपरि समय, धन या श्रम का दान करें – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com समाज सेवा से लेकर देश और दुनिया भर की बातें करने वालों की हमारे यहाँ भरमार है। उपदेशकों और निर्देशकों की बाढ़ आयी हुई है। सब अपने-अपने ढंग से समाज के नवनिर्माण और देश की बातें करते हैं। समाज के […]
मुजफ्फर हुसैनमांसाहार के दो रूप हैं-एक तो उसका भक्षण करना और दूसरा उसका व्यापार करना। अपने स्वाद अथवा उदरपूर्ति के लिए उसका उपयोग अत्यंत सीमित और निजी कारोबार में लग गये। नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क यानी स्कैंडेनिवयन देश दूध और मांस के धंधे में अग्रणी बने। बाद में ऑस्टे्रलिया और न्यूजीलैंड भी इस श्रेणी में आ […]
आज का चिंतन-26/03/2014
दशामाता को धंधा न बनाएं श्रद्धा-पर्व ही रहने दें – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com हमारे पर्वों, त्योहारों और उत्सवों से मौलिकता, आंचलिक परंपरा और श्रद्धा के भाव गायब होते जा रहे हैं और इन पर्व-उत्सवों का स्वरूप मनमाने तौर पर परिवर्तित होने लगा है। हर पर्व, उत्सव और त्योहार को अब धंधों से जोड़कर […]
आज का चिंतन-24/03/2014
कुछ न करो, कुछ न कहो बस गुणगान करते रहो – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com आदमियों की आजकल फितरत ही ऎसी होती जा रही है कि जो कुछ सोचो, जो कुछ कहो, जो कुछ करो, सिर्फ उन्हीं के लिए कहो-करो और सोचों। वे कैसे भी हों, उन्हें अपने काम करने दो, कुछ ही चर्चा न करो। उनके बारे में सब […]
आज का चिंतन-23/03/2014
हर अच्छे काम में आती हैं बाधाएँ – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com प्रकृति का कोई प्रवाह न सामान्य है न सहज। हर किसी काम की शुरूआत से लेकर पूर्णता का सफर प्राप्त करने तक किसी न किसी प्रकार की बाधाओं का आना स्वाभाविक ही है। हममंंें से हरेक व्यक्ति यह महसूस करता है कि […]
आज का चिंतन-20/03/2014
बच के रहें बेशर्म मुफ्तखोरों से – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com कुछ लोग ऎसे पैदा हो गए हैं जो खुद धेला भी खर्च नहीं करना चाहते लेकिन मुफ्त में औरों से काम निकलवाने में माहिर हैं। ऎसे खूब सारे लोग हमारे आस-पास भी हैं। ये लोग अपने लाभ के लिए दिन-रात वो सब […]