कब तक दाँतों को पीसेंगे, कब तक मुट्ठी भींचेंगे कब तक आँखों के पानी से हम पीड़ा को सींचेंगे रोज यहाँ गाली मिलती है देशभक्त परवानों को आजादी के योद्धाओं को भारत के दीवानों को जिनके ओछे कद हैं वे ही अम्बर के मेहमान बने जो अँधियारों के चारण थे सूरज के प्रतिमान बने […]
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