केजरीवाल को जमानत और न्यायालय की निष्पक्षता

images (8)

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को न्यायालय के द्वारा ‘चुनावी मौसम का लाभ देकर’ जमानत दे दी गई है। न्यायालय के दृष्टिकोण से स्पष्ट होता है कि मी लॉर्ड केजरीवाल को एक अभियुक्त न मानकर एक प्रदेश का मुख्यमंत्री मानकर चल रहे थे। जब न्यायालय और कानून की दृष्टि में भी व्यक्ति व्यक्ति के बीच अंतर हो जाएगा तो भारतीय संविधान में कानून के समक्ष समानता की गारंटी का क्या होगा ? अरविंद केजरीवाल को मिली इस प्रकार की अंतरिम जमानत से यह प्रश्न बड़ी गंभीरता के साथ खड़ा हो गया है, जिसका निराकरण न्यायालय को ही करना होगा। जब से न्याय, न्यायालय और विधि की कल्पना भारत में की गई है, तब से लेकर आज तक कभी इस प्रकार का पक्षपातपूर्ण निर्णय न्यायालय द्वारा नहीं दिया गया। हां, मुगल काल या ब्रिटिश काल में ऐसे निर्णय अक्सर आते रहे। मुगलों और ब्रिटिशर्स के विरुद्ध भारत लड़ता रहा और मुगल और ब्रिटिश अधिकारी अप्रत्याशित अमानवीय अत्याचार भारतीयों पर करते रहे, पर न्यायालय ने किसी एक भी क्रूर और निर्दयी अधिकारी को सजा ए मौत की तो बात छोड़िए एक दिन के लिए भी जेल में नहीं रखा ? उन्होंने न्यायिक कार्यवाही करते समय भी यह नहीं माना कि यह आपराधिक कृत्य करने वाले अधिकारी मुलजिम भी हैं? लगता है स्वाधीनता के पश्चात जब देश अमृत महोत्सव मना रहा है, तब मी लॉर्ड इतिहास के अतीत में खो गए हैं, जो मुलजिम को मुलजिम न मानकर किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री मान रहे हैं ?
यह नहीं सोचा गया कि उनके द्वारा किए जा रहे इस तथाकथित न्याय का भविष्य में किस प्रकार दुरुपयोग किया जाएगा ? निश्चित रूप से लुटेरे, हत्यारे, डकैत और बलात्कारी भी भविष्य में न्यायालय की इस नजीर का लाभ उठाते देखे जाएंगे। तब उस अराजकता के लिए कौन जिम्मेदार होगा ?
भारत के न्यायालय ब्रिटिश काल में आदेश किया करते थे और वह आदेश बड़े तानाशाही पूर्ण ढंग से सुनाए जाते थे। यदि कोई फरियादी या न्याय की गुहार लगाने वाला व्यक्ति अपनी बात को समझाने का प्रयास भी करता था तो उसकी बात को सुना नहीं जाता था। मी लॉर्ड जब आदेश लिखने लगते थे तो ऐसे फरियादी को यह कहकर रोक दिया जाता था कि अब मी लॉर्ड लिख रहे हैं इसलिए किसी प्रकार का हस्तक्षेप मत कीजिए। मी लॉर्ड के आदेश के सामने भी सर झुकाकर उसे स्वीकार करना उस समय लोगों की मजबूरी होती थी। उन आदेशों को लोग ‘हुकुम’ मानकर स्वीकार कर लेते थे । याद रहे कि हुकुम हाकिम का चलता है और हाकिम कभी भी न्यायाधीश नहीं होता। वह तानाशाह होता है। यदि न्यायालय भी हाकिम की तरह हुकुम सुनाएंगे तो फिर न्यायालय किसको कहेंगे ?
यह दु:ख की बात है कि अरविंद केजरीवाल के प्रकरण में न्यायालय ने जिस प्रकार आदेश दिया है, उसे न्याय नहीं माना जा सकता। यह हाकिम का हुक्म है। हुकुम को सारे देश ने शिरोधार्य कर लिया है, पर मन में एक टीस लेकर। सबके मन में कई प्रकार के प्रश्न हैं। सबसे बड़ा प्रश्न है कि क्या न्यायालय राजनीति से लड़ने का मन बनाकर न्याय के लिए बैठने लगे हैं? और यदि ऐसा है तो संविधान और न्यायिक प्रक्रिया का क्या होगा?
अरविंद केजरीवाल को दी गई जमानत के लिए अनेक विद्वानों ने अपनी स्वतंत्र टिप्पणी देते हुए कहा है कि यह जमानत भारत के इतिहास में न्यायपालिका द्वारा किए गए पक्षपात पूर्ण और अन्यायपूर्ण निर्णय का एक ज्वलंत उदाहरण है। यह निराशाजनक और विकृत फैसला है। जिसे देने से पहले न्यायालय को कई बार सोचना चाहिए था। इस प्रकार के निर्णय ने हमारे गंभीर और जिम्मेदार न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता के बारे में गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं। इस आदेश ने स्पष्ट किया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था को ध्वस्त के लिए मजबूर करने हेतु विदेशी शक्तियां कहीं ना कहीं हमारे न्यायिक विवेक को भी बाधित कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी का विरोध किया सकता है, पर भारतीयता और राष्ट्र का विरोध हो और वह भी न्यायिक प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाकर किया जाए, यह कैसा मोदी विरोध ? इससे निश्चित रूप से हमारे संविधान की आत्मा पर कुठाराघात होता है।
इस आदेश को अपने लिए नजीर मानकर जब भविष्य में आतंकवादी भी लाभ लेंगे तो क्या होगा? विद्वानों की टिप्पणी रही है कि मी लॉर्ड केजरीवाल के लिए अटूट क्षमादान, जिसे पश्चिमी देशों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है, निश्चित रूप से हमारे लिए भयावह है। इस तरह के न्याय के सामने निष्पक्षता को महत्व देने वाले प्रत्येक भारतीय के लिए अपनी असहमति व्यक्त करना अनिवार्य है। यदि सही समय पर चुप रहा गया तो भविष्य अनेक प्रकार के बड़े-बड़े प्रश्नचिह्नों से घिर जाएगा। याद है ना… जब द्रोपदी का चीर हरण हो रहा था तो उस समय के न्यायाधीश भी पक्षपाती हो गए थे। जिसके सामने बड़े-बड़े बुद्धिमान नीची देकर बैठ गए थे ।परिणाम क्या हुआ था? 18 अक्षौहिणी सेना का अंत….. विद्वानों का अंत…… देश की सांस्कृतिक परंपराओं का अंत…. देश की समृद्ध विरासत का अंत….. क्या हम उसी अंत की ओर बढ़ना चाहते हैं? यदि नहीं, तो मौन तोड़ना पड़ेगा।
अपनी आवाज की ताकत को कम करके आंकना अपने आप को मृत्यु के हवाले करना होता है । आवाज उठनी चाहिए और इतनी जोर से उठनी चाहिए कि जो देश बाहर से भारत के भीतरी मामलों में हस्तक्षेप कर हमारी व्यवस्था को हिलाने की साजिशों में सम्मिलित हैं, उन्हें लगे कि सारा भारत एक है और वह किसी भी प्रकार के अन्याय अत्याचार को सहन करने वाला नहीं है। मत भूलो कि हम महाराणा प्रताप, शिवाजी, छत्रसाल की संताने हैं, हमको विदेशियों के विरुद्ध लड़ना आता है।
जब तक केजरीवाल अपने विरुद्ध लगे आरोपों से न्याय पूर्ण और निष्पक्ष ढंग से बरी नहीं हो जाते हैं तब तक वह एक मुलजिम हैं (अपराधी नहीं) और उन्हें मुलजिम के दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए। आरोप लगते ही व्यक्ति मुलजिम है।आरोप से मुक्त होते ही वह एक सामान्य व्यक्ति है और आरोप सिद्ध होने पर वह एक अपराधी है।
मुलजिम पर कुछ न्यायिक बंदिशें होती हैं। जिन्हें भुलाया या उपेक्षित नहीं किया जा सकता। यदि उन्हें केजरीवाल के प्रकरण में उपेक्षित किया गया है तो मी लॉर्ड ! जनता तो सवाल पूछेगी ही?

डॉ राकेश कुमार आर्य

(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है।)

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
supertotobet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
supertotobet giriş
Bettilt Giriş
Supertotobet Giriş
Vdcasino Giriş
supertotobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
betmatik
betkom
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betmatik giriş
betpark giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
kralbet giriş
kralbet giriş
betorder giriş
betine giriş
xslot giriş
timebet giriş
roketbet giriş
timebet
timebet
roketbet
roketbet
vaycasino giriş
bettilt giriş
betine giriş
betine giriş
xslot giriş
xslot giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
Hititbet Giriş
timebet
meritking giriş
meritking
betpark giriş
norabahis
norabahis
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş