आर्य समाज वालो! सावधान. अपने विनाश को निमंत्रण मत दो।* *भाग 2*

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मंदिर आदि स्थान ईश्वर की पूजा करने के लिए नहीं बनाए जाते। ये तो संगठन करने के स्थान हैं। ईश्वर की पूजा तो व्यक्तिगत कार्य है। वह तो अपने घर में होता है। परंतु देश की रक्षा करने के लिए और समाज को संगठित करने के लिए जो स्थान बनाया जाता है, वह मंदिर कहलाता है। वहां सब बैठकर संगठित होकर देश की रक्षा के लिए सोच विचार चिंतन मनन करते हैं, योजनाएं बनाते हैं, और देश की रक्षा करते हैं।
“यदि श्री मोदी जी सत्ता में रहेंगे, तभी देश की रक्षा हो पाएगी।” यह तो आपने पिछले 8/9 वर्षों में देख ही लिया होगा। यदि श्री मोदी जी सत्ता में नहीं रहे, तो देश की रक्षा नहीं हो पाएगी। शायद इस बात को समझने की बुद्धि आपमें हो। यदि है, तो श्री मोदी जी के इस कार्य का विरोध न करें। “आप जो यह विरोध कर रहे हैं, यह केवल प्राण प्रतिष्ठा का विरोध नहीं है, यह श्री मोदी जी का विरोध है। देश के रक्षक प्रधानमंत्री जी का विरोध है।” मोदी जी सत्ता में तभी तो रहेंगे, जब उन्हें बहुमत से वोट मिलेगा। यह तो जनता को प्रसन्न करके वोट लेने की राजनीति है, जिससे कि वे सत्ता में बने रहें और देश की रक्षा करते रहें। यदि देश की रक्षा होगी, तो आपकी भी रक्षा होगी। यदि आपने इस कार्य का विरोध किया और हिंदू संगठन नहीं हो पाया, और बहुसंख्यक हिंदू का वोट मोदी जी को नहीं मिल पाया, और वे यदि सत्ता में नहीं रहे, तो भारत देश की रक्षा नहीं हो पाएगी। न हिंदू बचेगा, न आर्य समाज। और इन दोनों के विनाश का कारण “केवल आर्य समाज” होगा, क्योंकि उनके इस कार्य का विरोध केवल आर्य समाज कर रहा है। इसलिए सावधान हो जाइए। अपने सर्वनाश को निमंत्रण मत दीजिए।
थोड़े से आर्य समाजियों द्वारा विरोध करने के बावजूद भी यदि मोदी जी अपने कार्य में सफल हो गए। (जो कि वे सफल हो भी जाएंगे।) हिंदू संगठन हो गया, और मोदी जी सत्ता में बने रहे, तो क्या वे आर्य समाज का सम्मान करेंगे या विनाश करेंगे? आर्य समाज का विनाश तो तब भी वे अवश्य ही करेंगे। क्योंकि आप लोग ही उनके विरोधी हैं। इसलिए आप लोग बुद्धि से काम लें और अपने सर्वनाश को निमंत्रण न दें। इसी में बुद्धिमत्ता है। यह कार्यक्रम मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा का नहीं है, देश की रक्षा के लिए संगठन का कार्य है। इसमें सहयोग करें।
फोटो भी जड़ है, और मूर्ति भी जड़ है। दोनों ही जड़ पदार्थ हैं। क्या आप अपने घरों और आर्य समाजों में श्री राम जी का फोटो नहीं लगाते? यदि लगाते हैं, तो अयोध्या के मंदिर में मूर्ति की स्थापना करने में आपको क्यों जलन हो रही है? क्या यह मूर्खता नहीं है? इसलिए आप अयोध्या में मंदिर बनाने का समर्थन करें। उसमें यज्ञ करने और वेदों का पठन पाठन करने का समर्थन करें। मंदिर में मूर्ति स्थापित करने का समर्थन करें। “श्री राम जी चक्रवर्ती आर्य राजा थे। आप भी आर्य हैं। इस बात की आपको बहुत प्रसन्नता होनी चाहिए, कि आपके दादा परदादा श्री राम जी आर्य चक्रवर्ती राजा के विश्वदर्शनीय स्मारक की स्थापना हो रही है। और उनकी मूर्ति स्थापित हो रही है। आप मूर्ति की पूजा और प्राण प्रतिष्ठा का समर्थन न करें। परंतु इस विषय में विरोध भी न करें। इस विषय में आपका मौन रहना ही उचित है। जैसे आप अपने माता-पिता और बड़े बुजुर्गों के दोषों का समाज में विरोध नहीं करते, वहां मौन रहते हैं। ऐसे ही यहां भी आपको मौन रहना उचित है। यही आपके लिए और देश के लिए हितकर है।
आप आर्य समाज के लोग अपने बच्चों को गुरुकुल में नहीं पढ़ाते, ब्रह्मचर्य का पालन भी ठीक प्रकार से नहीं करते। अपने घरों में पंचमहायज्ञ नहीं करते। बड़ी आयु हो जाने पर भी वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश नहीं करते। संन्यास नहीं लेते। मोक्ष के लिए पुरुषार्थ नहीं करते। क्या आपके ये सब कार्य अवैदिक नहीं हैं? अपने बच्चों को विदेशी भोजन पिज्जा बर्गर आदि खिलाते हैं। जन्मदिन पर केक काटते हैं। आपके घरों में भी अभी मूर्ति पूजा पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई। क्या आपके ये सब कार्य अवैदिक नहीं हैं?
जब आप स्वयं अवैदिक कार्य कर रहे हैं, तो देश की रक्षा के लिए हिंदू संगठन के लिए, इस महोत्सव का विरोध करना क्या मूर्खता की बात नहीं है? और अपने विनाश को निमंत्रण देना नहीं है? इसलिए आप लोग सावधान हो जाएं। या तो इस महोत्सव कार्यक्रम तथा प्रधानमंत्री जी का विरोध तत्काल बंद करें, या फिर अपने सर्वनाश के दिवस की प्रतीक्षा करें।
आप आर्य समाजी होते हुए, अपने आप को वैदिक मानते हुए भी, जन्मदिन के अवसर पर आप अपने बच्चों की केक काटने की अवैदिक बात को भी मान लेते हैं या नहीं? क्यों मान लेते हैं? ताकि घर में शांति बनी रहे, घर का संगठन बना रहे। तब क्या आप अवैदिक नहीं हो जाते? तब क्या आप अपना या अपने परिवार वालों का विरोध करते हैं?
इसी प्रकार से यदि देश धर्म की रक्षा करने के लिए श्री प्रधानमंत्री जी भी देश के बहुसंख्यक नागरिकों हिंदुओं की इस अवैदिक बात को भी मान रहे हैं, ताकि देश में संगठन बना रहे, शांति बनी रहे, और देश की रक्षा हो पाए, तो आप उनका विरोध क्यों कर रहे हैं? आपको यह बात समझ में क्यों नहीं आती?
ईश्वर आपको सद्बुद्धि दे। आप मेरी बात को समझने का प्रयत्न करें। भारत देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का समर्थन करते हुए अपनी और भारत देश की रक्षा करें।
— आप सबका शुभचिंतक। एक देशभक्त भारतीय नागरिक।

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