सनातन विरोधी बयान से इंडिया गठबंधन की चूलें हिल गई हैं

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योगेंद्र योगी

इंडिया गठबंधन के दल अन्य मुद्दों पर कोई एकराय कायम करते, इससे पहले उदयनिधि का बयान उनके लिए मुसीबत बन गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वे उदयनिधि के बयान से सहमत नहीं हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बेटे और मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म के खात्मे का बयान देकर पहले से ही आपसी आरोप-प्रत्यारोपों के झंझावातों से जूझ रही विपक्षी एकता के लिए नया संकट पैदा कर दिया है। हालत यह है कि विपक्षी दलों के लिए उदयनिधि का यह बयान उगलते बन रहा है न ही निगलते। विपक्षी दल इस मुद्दे पर साफ प्रतिक्रिया जाहिर करने के बजाए कन्नी काट रहे हैं। विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर हिन्दू वोट बैंक के नाराज होने का खतरा है, वहीं यह जगजाहिर है कि तमिलनाडु के राजनीतिक दलों के प्रमुख मुद्दे जाति, धर्म और भाषा के रहे हैं। मौजूदा सत्तारुढ़ दल डीएमके हो या प्रमुख विपक्षी दल एआईएडीएमके, इनकी राजनीतिक नींव ही धर्म और सम्प्रदाय के विरोध के आधार पर पड़ी है। उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना कोरोना वायरस, मलेरिया और डेंगू के बुखार से करते हुए कहा था कि ऐसी चीजों का विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि खत्म किया जाना चाहिए।

इंडिया गठबंधन के दल अन्य मुद्दों पर कोई एकराय कायम करते, इससे पहले उदयनिधि का बयान उनके लिए मुसीबत बन गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वे उदयनिधि के बयान से सहमत नहीं हैं। सीएम ममता ने उदयनिधि को इस तरह के बयान से बचने की सलाह देते हुए कहा कि मैं तमिलनाडु के लोगों का बहुत सम्मान करती हूं, लेकिन उनसे मेरा विनम्र अनुरोध है कि हर धर्म की अपनी अलग-अलग भावनाएं होती हैं। हमें ऐसे किसी भी मामले में शामिल नहीं होना चाहिए जिससे किसी भी वर्ग को ठेस पहुंचे। इस मुद्दे से सबसे ज्यादा फजीहत कांग्रेस की हो रही है। कांग्रेस की समझ में ही नहीं आ रहा है कि इस मामले से कैसे निपटा जाए। यदि कांग्रेस स्टालिन के बयान का विरोध करती है तो इससे विपक्षी एकता की दरार बढ़ने का खतरा है, विरोध नहीं करने की सूरत में भाजपा के तीखे हमलों से बचाव करना आसान नहीं है। जिसका असर सीधा वोट बैंक पर पड़ेगा। कांग्रेस में इस मुद्दे पर नेताओं ने अलग-अलग राय जाहिर की है। पार्टी सांसद कार्ति चिदंबरम ने डीएमके के मंत्री के बयान का पूरी तरह से समर्थन करते हुए कहा कि उदयनिधि स्टालिन ने अपने भाषण में बस इतना कहा कि जातिवादी समाज को खत्म किया जाना चाहिए। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि कोई भी धर्म जो समान अधिकार नहीं देता है या आपके साथ इंसानों जैसा व्यवहार नहीं करता है वह बीमारी के समान है। इसके विपरीत कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हमारा रुख स्पष्ट है। सर्वधर्म समभाव कांग्रेस की विचारधारा है, लेकिन आपको यह समझना होगा कि हर राजनीतिक दल को अपने विचार रखने की आजादी है। हम हर किसी की आस्था का सम्मान करते हैं। वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री करण सिंह ने स्टालिन के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि ये पूरी तरह से अस्वीकार्य बयान है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी भी उदयनिधि के बयान की आलोचना करती दिखीं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शाश्वत सत्य- जीवन जीने का तरीका- विवेक और अस्तित्व का प्रतीक है।

उधर, पहले से ही विपक्षी दलों पर घात लगाए बैठी भाजपा को मुद्दे ने विपक्षी एकता के विरोध की मशाल के लिए ईंधन मुहैया करा दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राजस्थान में एक जनसभा में इंडिया गठबंधन के दलों के खिलाफ जमकर प्रहार किया। एक अन्य बयान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इंडिया गठबंधन के दल डीएमके ने सनातन धर्म पर चोट पहुंचाई और कांग्रेस के लोगों ने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने सवाल दागते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे क्यों नहीं बोलते कि सनातन धर्म के बारे में उनकी सोच क्या है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरह मोदी को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान की तरह अब स्टालिन का यह बयान भी कानून के शिकंजे में आ गया है। उदयनिधि स्टालिन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे के खिलाफ उत्तर प्रदेश के रामपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। रामपुर की कोतवाली सिविल लाइंस में धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत की गयी है। इसके अलावा, भारत की 262 प्रतिष्ठित हस्तियों ने मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ को चिट्ठी लिखकर उदयनिधि मामले में स्वत संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। चिट्ठी में लिखा है कि उदयनिधि स्टालिन की ओर से दिए गए नफरत भरे भाषण का स्वत संज्ञान लिया जाए, जो सांप्रदायिक वैमनस्य और सांप्रदायिक हिंसा को भड़का सकता है। इन हस्तियों में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों और नौकरशाह शामिल हैं।

इन तमाम विरोधाभासी बयानों के बावजूद उदयनिधि स्टालिन अपने बयान पर अड़े हुए हैं। इससे देश में नया राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी गठबंधन इंडिया के घटक दलों के लिए स्टालिन का यह बयान किसी मुसीबत से कम साबित नहीं हो रहा है। विपक्षी दलों पर विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग राय के कारण वोट बैंक के ध्रुवीकरण का खतरा पहले से ही मंडरा रहा है। विपक्षी गठबंधन इंडिया कांग्रेस, टीएमसी, आप और वामदलों के आपसी आरोप-प्रत्यारोपों के बीच से जैसे-तैसे एकता की कवायद में जुटा हुआ है। स्टालिन के इस बयान से इस एकता के प्रयासों को झटका लगा है। निश्चित तौर देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं को प्रभावित करने वाले इस तरह के संवदेनशील बयानों से गठबंधन की मुसीबतें और बढ़ेंगी। इंडिया के घटक दलों ने यदि इस तरह के बयानों से क्षेत्रीय वोट बैंक को मजबूत करने के लिए के प्रयास नहीं छोड़े तो एकता में दिखाई दे रही दरारों को भरना मुश्किल होगा।

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