केजरीवाल की अहंकारी राजनीति और दिल्ली का जनमानस

Arvind_Kejriwal_smiling_(cropped) (1)

ललित गर्ग

आखिरकार केजरीवाल सरकार के अधिकार सीमित करने वाला दिल्ली सर्विस बिल राज्यसभा में भी पास हो गया। सोमवार को राज्यसभा में बिल के समर्थन में 131 व विरोध में 102 वोट पड़े। बहरहाल, अब संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद बिल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के उपरांत कानून का रूप ले लेगा। केंद्र सरकार ने केजरीवाल सरकार की मनमानी, भ्रष्टाचार एवं अनियमिताओं पर नियंत्रण लगाने के लिये इस बिल को सफलतापूर्वक पारित कर लिया है, इससे विपक्ष और विशेषकर कांग्रेस की भी हार एवं किरकिरी हुई है। आम आदमी पार्टी की जिद, अहंकार एवं राजनीतिक महत्वाकांक्षा लोकतंत्र के मंदिर ‘संसद’ में संविधान के सामने परास्त हो गई। क्योंकि संविधान केवल अधिकार नहीं देता, शुद्ध आचरण की अपेक्षा भी करता है। निःसन्देह यह भाजपा सरकार की ऐतिहासिक जीत इसलिये है क्योंकि पहले कयास लगाये जा रहे थे कि राजग के सभी सहयोगियों के वोट मिलने के बावजूद केंद्र सरकार राज्यसभा में बिल को पारित नहीं करवा पायेगी। वह भी तब जब एक-दूसरे पर लगातार हमलावर रहने वाले आप व कांग्रेस समेत इंडियन नेशनल डिवेलपमेंटल इन्क्लुसिव अलायंस ‘इंडिया’ के सभी घटक दल बिल के खिलाफ एकजुट हो चुके थे।

दरअसल, लोकसभा में बहुमत होने के चलते राजग सरकार ने बिल आसानी से पास करा लिया था, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने ने उसकी चिंता बढ़ा दी। ऐसे वक्त में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बीजू जनता दल तथा जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी ने राजग की नैया पार लगा दी। निश्चित रूप से यह ‘इंडिया’ गठबंधन की बड़ी नाकामी है। भ्रष्टाचार एवं अन्य लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन के कारण इस तरह की पराजय नये भारत के लिये जरूरी भी है, दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी होने के बावजूद आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविन्द केजरीवाल ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिये दिल्ली की जनता के प्रति निरन्तर संवेदनहीनता का प्रदर्शन किया है, जिसका खामियाजा उनको प्राप्त अधिकारों के पर कतरने के रूप में सामने आया है, और इन्हीं कारणों के चलते यह संशोधन लाना पड़ा है।

केंद्र सरकार के ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023’ पर आम आदमी पार्टी और उसके साथ खड़े सभी राजनीतिक दलों को मुंह की खानी पड़ी। याद रखें कि आम आदमी पार्टी ने इस विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया था। आप के सर्वेसर्वा एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी गैर-भाजपा सरकारों के मुख्यमंत्रियों एवं भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों से बिल पर समर्थन जुटाने के लिए ‘भारत भ्रमण’ तक कर लिया था। दिल्ली कांग्रेस के विरोध के बाद भी कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को मजबूर कर दिया कि वह लोकसभा और राज्यसभा में इस विधेयक के खिलाफ आम आदमी पार्टी का साथ दे। इसके बाद भी आप पार्टी के हाथ जब कुछ नहीं आया, तो उसके नेताओं ने अन्य अनैतिक एवं अलोकतांत्रिक रास्ते भी अपनाने का प्रयास किया। राज्यसभा में आप के सांसद राघव चड्ढा ने इस बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने का प्रस्ताव रखा। सत्ता पक्ष के पांच सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी सहमति के बिना प्रस्ताव में उनके नाम डाले गए, जिसे हद दर्जे की मनमानी, फर्जीवाड़ा और अपराध मानते हुए इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजे जाने की मांग की गयी, उपसभापति हरिवंश ने इसकी जांच की बात कही है। संभव है इस पर आप के सांसद राघव चड्ढा को सजा हो। दिल्ली सरकार में तरह-तरह के भ्रष्टाचार एवं जालसाजी के किस्से आम बात हो गयी थी, विडम्बना है कि देश की भोलीभाली जनता को इन भ्रष्टाचारों को भाजपा की चाल करार देकर सहानुभूति जुटाने में माहिर आप सरकार ने संसद को भी नहीं बख्शा। संसद के भीतर जालसाजी के आरोपों में फंसी आप पार्टी ने खेद प्रकट करने की जगह कार्रवाई के डर से, अभी से शोर मचाना शुरू कर दिया है कि भाजपा अब उसके सांसद राघव चड्ढ़ा के पीछे पड़ गई है। यह तो वही बात हुई कि ‘एक तो चोरी और ऊपर से सीनाजोरी’। यदि राघव चड्ढ़ा सही हैं, उन्होंने कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है, तब उन्हें और उनकी पार्टी के नेताओं को डरने की जरूरत क्यों होनी चाहिए?

आप पार्टी एवं उसके नेता केजरीवाल की राजनीति एवं सोच विकृत है, उनका व्यवहार झूठा है, चेहरों से ज्यादा नकाबें उन्होंने ओढ़ रखे हैं, उन्होंने सारे लोकतांत्रिक एवं राजनीतिक मूल्यों को धराशायी कर दिया है। ऐसी मूल्यहीन राजनीति के चलते देश के भविष्य को लेकर करोड़ों लोग चिन्ता एवं ऊहापोह में हैं। वक्त आ गया है कि देश की राजनीतिक संस्कृति की गौरवशाली विरासत को सुरक्षित रखने के लिये सतर्क एवं सावधान होना होगा। दिशाशून्य हुए नेतृत्व के सामने नये मानदण्ड रखने होंगे। जो राजनीतिक दल फर्जीवाड़े एवं भ्रष्टाचार को सामान्य मानते हैं, उन्हें आइना दिखाना होगा। हर कहीं जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए कुछ भी कह दो, कुछ भी कर लो और उजागर होने पर माफी मांगकर आगे बढ़ जाओ की विकृत सोच, चालाकी एवं अवसरवादी राजनीति पर नियंत्रण करना होगा। संभवतः दिल्ली सर्विस बिल का संसद में सफलतापूर्वक पारित होना, इस दिशा में एक सार्थक पहल है, एक सबक है, एक सन्देश है कि सावधान हो जाओ देश को गुमराह करने वालो, लूटने वालों।

राजनैतिक वितंडावाद को ही राजनीति समझने वाले आप के नेताओं को समझना चाहिए कि संसद जैसा मंच इस प्रकार की ओछी, संकीर्ण एवं स्वार्थी हरकतों के लिए नहीं है। संसद के किसी भी पटल पर, कोई भी बात गंभीरता से, जांच-पड़ताल करने के उपरांत ही रखनी चाहिए। परंतु जिन्होंने दिल्ली की विधानसभा को ही अपनी राजनीतिक जागीर मानकर अपनी खुन्नस निकालने एवं मनमानी करने का अखाड़ा बना लिया हो, उनसे संसद की गरिमा की अपेक्षा करना कितना उचित होगा? भले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस विधेयक को दिल्ली के लोगों को गुलाम बनाने वाला बताया तो या कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने कहा हो कि केंद्र सरकार के पास इस विधेयक को लाने का नैतिक अधिकार नहीं है, यह संघीय संरचना पर कुठाराघात है, वगैरह-वगैरह। आप पार्टी एवं उनके सहयोगी बने दलों के प्रश्नों एवं आरोपों का अमित शाह ने इस विधेयक पर सरकार का पक्ष रखते हुए बहुत ही तार्किक एवं तथ्यपरक ढंग से उत्तर दिया। शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस तरह से दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने अधिकारियों के तबादले शुरू किए थे, जांच की फाइलों को रातोंरात गायब किया, उसको देखते हुए विधेयक लाना जरूरी हो गया था। दिल्ली सरकार के विरुद्ध कई मामलों की जांच कर रही विजिलेंस को अपने अधीन रखने के लिए आप सरकार बेचैन थी ताकि भ्रष्टाचार न उजागर हो।

निश्चित ही आप सरकार की केंद्र सरकार के साथ अनावश्यक टकराव की परिणति यह हुई कि दिल्ली को अब शायद ही कभी पूर्ण राज्य का दर्जा मिल पाएगा। इस बिल के पारित होने से दिल्ली की जनता का अधिक नुकसान हुआ। केन्द्र सरकार ने देश की राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संविधान सभा में दिल्ली के अधिकार और कार्यों के बारे में चर्चा के साथ सीमित अधिकारों वाली विधानसभा के साथ 1993 में इसे राज्य का दर्जा दिए जाने का पूरा ब्यौरा दिया। जाहिर है दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है और केंद्र सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दिल्ली के किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार है। दक्ष, अनुभवी एवं परिपक्व मुख्यमंत्री इन बातों के आलोक में ही केंद्र के साथ रचनात्मक सहयोग करके अपना शासन चलाता है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय कभी भी केंद्र के साथ टकराव नहीं हुआ और उन्हें हमेशा केंद्र सरकार का सहयोग और समर्थन मिलता रहा। अपने आपको राजनीति का चाणक्य मानने वाले केजरीवाल अपने अल्प राजनीतिक जीवन में इस बात को समझ नहीं पाए।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
meritking giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
meybet
meybet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
vdcasino
meritbet giriş
meritbet giriş
vaycasino giriş
piabellacasino giriş
piabellacasino giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
pokerklas
pokerklas
norabahis giriş
vdcasino
vdcasino
pokerklas
pokerklas
hititbet giriş
Pokerklas giriş
pokerklas
pokerklas
hititbet
hititbet
betnano giriş
betasus giriş
pokerklas
pokerklas giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betorder
betorder
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
hititbet
timebet
timebet
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
norabahis giriş
norabahis
norabahis giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
betpark
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
meybet
meybet
vdcasino
vdcasino
extrabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
meybet
meybet
betcio giriş
betcio giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
timebet
norabahis giriş
norabahis giriş
meybet
meybet
harbiwin giriş
harbiwin giriş
betnano giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
norabahis giriş
norabahis
favorisen giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
meybet