हामिद अंसारी को राष्ट्रपति से कम कुछ मंजूर नहीं

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पुन: उपराष्ट्रपति बनने को कतई तैयार नहीं हैं। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस उन्हें पुन: उपराष्ट्रपति बनाना चाह रही थी, लेकिन अंसारी ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्यसभा की बोझिल कार्यवाही जैसे कार्य के संपादन के लिए अब उनकी उम्र और उनका स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा है। इसलिए वह पुन: इस दायित्व को संभालने की स्थिति में नहीं है। ममता बनर्जी और मुलायम सिंह यादव की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में उन दोनों नेताओं ने श्री अंसारी को राष्ट्रपति पद का सुयोग्य प्रत्याशी घोषित किया था और उनका नाम इस पद के लिए संप्रग को भी सुझाया था। उसके बाद अंसारी की पत्नी अजमेर की दरगाह पर चादर चढ़ाने के लिए कई बार गयीं। वह मन्नतें मांग रही थीं कि उनके पति राष्ट्रपति बनें, बाद में परिस्थितियों ने मोड़ लिया और मुलायम सिंह यादव भी अंसारी का साथ छोड़कर संप्रग के प्रत्याशी प्रणव के साथ हो लिये। फलस्वरूप अंसारी साहब का स्वास्थ्य बिगडऩे लगा और उन्होंने राष्ट्रपति पद की दौड़ में अपने आपको पिछड़ता देखकर मन बना लिया कि यदि राष्ट्रपति नहीं तो कुछ भी नहीं। अब अपनी खीझ को मिटाने के लिए वह कह रहे हैं कि उनका स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा है इसलिए पुन: उपराष्ट्रपति बनना उनके लिए संभव नहीं है। बात यहां पर यह विचारणीय है जो व्यक्ति राष्ट्रपति पद के दायित्वों के निर्वाह के लिए अब भी अपने आपको फिट और हिट समझता है, वह उपराष्ट्रपति के दायित्वों के निर्वाह के लिए हिट और फिट क्यों नही हो सकता?
इसका मतलब है कि अंसारी कहीं न कहीं असंतुष्ट और रूष्ट हैं। अब यदि उनका स्वास्थ्य सचमुच ही साथ नहीं दे रहा है और वह इसीलिए उपराष्ट्रपति नहीं बनना चाहते हैं तो उनकी यह सोच हमारे राजनीतिज्ञों के लिए एक आदर्श अवश्य हो सकती है। हमारे यहां राजनीतिज्ञों के रिटायरमेंट की कोई उम्र नहीं है, जब तक जनाब का मन न भर जाए या जनता घसीट कर सीट से उतार न फेंके या मौत ही आकर खींच कर न ले जाए तब तक कुर्सी से मन भरता नहीं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से स्वास्थ्य कारणों से ज्योति बसु ने इस्तीफा दिया और अपने उत्तराधिकारी को गद्दी सौंप कर राजनीति से दूर होने की घोषणा कर दी। लेकिन बाद में उन्ही बसु को जब प्रधानमंत्री बनाने की बात चली तो उन्होंने देश संभालने के लिए स्वयं को सहर्ष पेश कर दिया। यह बात अलग है कि वह प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गये। यहां पर यह बात विचारणीय है कि जो प्रदेश को नहीं चला सकता उसी नेता ने स्वयं को देश चलाने के लिए कैसे पेश कर दिया? यही बात हामिद अंसारी पर लागू होती है।

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