विपक्षी नेताओं ने भी आदर्श छोड़े
इसके पश्चात सन 1989 ई. में वी.पी. सिंह ने इसी गठबंधन के पूर्व परीक्षित प्रयोग का पुन: परीक्षण किया। किंतु इसका परिणाम भी न केवल वही हुआ अपितु शीघ्र ही वीपीसिंह को पद त्याग करना पड़ा। महाराजा वी.पी. सिंह 2 दिसंबर सन 1989 ई. से 10 नवंबर सन 1990 ई. तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।
उनके अच्छे गुण अपनी जगह हैं, किंतु सत्ता प्राप्ति के लिए उन्होंने गठबंधन की जिस स्वार्थपूर्ण राजनीति और जोड़ तोड़ का सहारा लिया वह उचित नहीं था। होना यह चाहिए था कि नई राजनीतिक सोच और दिशा बनाने के लिए वी.पी. सिंह जैसे लोग अपना बलिदान करते। एक आंदोलन के सूत्रधार बनते। प्रधानमंत्री का पद उन्हें भले ही नहीं मिला होता और बिना पद के ही जीवन गुजार देते। यह भी उनका एक बलिदान होता, किंतु उन्होंने निकट का स्वार्थ देखा दूर का परमार्थ देखने से वह चूक गये।
परिणामस्वरूप विपक्ष में लंबे समय तक दूर की गोटियां का खेल खेलने में सिद्घहस्त रहे, अटल बिहारी वाजपेयी   भी निकट के स्वार्थ के दरिया के प्रवाह में बह गये। बलिदान नहीं दे सके। इसलिए स्वयं भी डूब गये और भाजपा को भी डुबो गये। जहां भिन्न-भिन्न विचारधाराओं के लोग एक राजनीतिक मंच पर मात्र इसलिए आ रहे हों कि उससे उनका न्यूनतम कार्यक्रम ‘सत्ता की प्राप्ति’ पूरा होता है, तो उनसे राष्ट्र के अधिक भले ही अपेक्षा करना नितांत असंभव है।
सुधाकर पांडेय जी  के शब्दों में आज जो परिदृश्य उपस्थित है उसका परिणाम यह हुआ कि पहले राजनेता ऋषिकल्प जनमानस में प्रतिष्ठित थे। उनका चरित्र जाना पहचाना और कठिन परीक्षाओं, परीक्षणों से तपकर निकला हुआ ऐसा सोना होता था जिसमें उनकी अपनी सुरभि और जनविश्वास बसा होता था। बिना जनविश्वास के नेतागीरी विदूषक जैसी प्रभा नेता को देती है और नारद को बंदर मुखी बना देती है।
आज भारत की नौका विभूति से पूर्ण है किंतु उसे खेने वाले (गठबंधन के सारे दल) इतने हैं कि न तो उतनी पतवार है ओर न एक दिशा में उसके खेवनहार हैं। कोई उसे आगे की ओर खे रहा है तो कोई उसके साथ ही बैठा हुआ दूसरा मांझी पीछे की ओर खे रहा है। इतनी सशक्त नौका जो विश्व का महोदधि का सहज संतरण कर सकती है, समस्याओं की लोल लहरियों में चकरघिन्नी खा रही है। समस्याओं की इन लोल लहरियों में स्वार्थपूर्ण चकरघिन्नी ने एच.डी. देवगोड़ा की बलि ली, उसके पश्चात इंद्र कुमार गुजराल की बलि ली। इस प्रकार के षडय़ंत्र पूर्व में भी कई प्रधानमंत्रियों के साथ हुए हैं।
सबके अपने-अपने स्वार्थ
भारत को संघ भी कहा जाता है। फिर भी इसे संविधान  एकात्मक रूप प्रदान करने का प्रयास किया गया है। यथा एक भाषा, एक नागरिकता, केन्द्र का राज्यों में सीधा हस्तक्षेप, राज्यपालों का केन्द्र के एजेंट के रूप में कार्य करना केन्द्र का विशेष परिस्थितियों में राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार रखना, केन्द्र द्वारा बिना राज्यों के परामर्श के कहीं भी किसी भी प्रांत में सेना भेजने का अधिकार रखना आदि।
जब सत्ता में भागीदारी इस आधार पर सुनिश्चित होने लगे कि मेरे साथ इतने सांसद हैं तो अमुक-अमुक मंत्रालय हमारे हवाले करो, वरना हम सरकार को गिरा देंगे, तो यह भागीदारी राष्ट्र के हितों के साथ खिलवाड़ है। क्योंकि इससे यह तथ्य स्पष्ट होता है कि सत्ता की भागीदारी मात्र स्वार्थों के आधार पर टिकी है। दूसरे, भविष्य में यदि राज्य अपने सांसदों की संख्या बल के आधार पर सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने लगें तो उसका क्या परिणाम होगा? यह प्रश्न बहुत महत्व रखता है। यह स्थिति हमारे हिन्दुस्थान के संतरे की हर फाड़ी को अलग-अलग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हम देखते हैं कि गठबंधनों की सरकारें न्यूनतम सांझा कार्यक्रम तैयार करती हैं। ये न्यूनतम शब्द यहां विशेष महत्व रखता है। इसका अर्थ है कि ‘सहमति न्यूनतम बिंदुओं पर है’ अधिकतम (राष्ट्रहित के) बिन्दु या तो अछूते हैं या उन्हें जानबूझकर छोड़ दिया गया है। ऐसे न्यूनतम सांझा कार्यक्रम में देश के जनमत के बहुमत की इच्छाओं और अभिलाषाओं की घोर उपेक्षा की जाती है। भाजपानीत राजग सरकार के कार्यकाल में हमने देख ही लिया कि उस समय ‘धारा 370’ राम मंदिर निर्माण और समान नागरिक संहिता जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों को भाजपा ने भुला दिया अथवा कहिए कि उसने ऐसा प्रदर्शन किया कि ये विषय उसने भुला दिये।
(लेखक की पुस्तक ‘वर्तमान भारत में भयानक राजनीतिक षडय़ंत्र : दोषी कौन?’ से)
पुस्तक प्राप्ति का स्थान-अमर स्वामी प्रकाशन 1058 विवेकानंद नगर गाजियाबाद मो. 9910336715

Comment:

kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti 2026
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
Kolaybet
Kolaybet Giriş
Kolaybet
Kolaybet Giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet Güncel Giriş
hititbet giriş
hititbet
Betorder
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betorder giriş
betnano
betnano
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
holiganbet
holiganbet
holiganet
bettilt giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
holiganbet
holiganbet giriş
holiganbet güncel
holiganbet
betgaranti giriş
Teknik Seo
hititbet
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
madridbet
madridbet
betnano güncel giriş
betnano giriş
betgaranti giriş